Sep ०५, २०१८ १८:११ Asia/Kolkata
  • दूसरे देशों पर प्रतिबंध लगाने की अमरीका की सनक पागलनपन तक पहुंच गई है

अमरीका की विदेश नीति के इतिहास पर अगर नज़र डालते हैं तो स्पष्ट होता है कि किसी भी देश की तुलना में वाशिंगटन ने अन्य देशों के ख़िलाफ़ विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध लगाए हैं।

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के शासनकाल में वाशिंगटन द्वारा विश्व भर के विभिन्न देशों के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों में अभूतपूर्व से वृद्धि हो गई है। ट्रम्प को यह भ्रम है कि प्रतिबंधों द्वारा दूसरे देशों पर दबाव डालकर अमरीका अपने उद्देश्य प्राप्त कर सकता है।

ट्रम्प ने दूसरे देशों के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों को अपनी विदेश नीति में प्रमुख स्थान दिया है, यहां तक कि वह अमरीका के मित्र देशों को भी नहीं छोड़ रहे हैं। अमरीकी राष्ट्रपति ने अपने हितों को साधने के लिए विश्व के कई महत्वपूर्ण देशों के ख़िलाफ़ आर्थिक युद्ध छेड़ रखा है।

ईरान भी उन देशों में से एक है, जिनके ख़िलाफ़ पिछले कुछ दशकों के दौरान अमरीका ने कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। इस संबंध में ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ का कहना है कि अमरीका को प्रतिबंध लगाने का नशा सा है। अमरीका की विदेश नीति का इतिहास गवाह है कि उसने विश्व में किसी भी देश की तुलना में दूसरे देशों के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाए हैं।

अमरीका मई में ईरान के साथ हुए अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते से बाहर निकल गया, जिसके बाद उसने ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों के नए चरण का एलान कर दिया। तेहरान के ख़िलाफ़ वाशिंगटन के प्रतिबंधों का पहला चरण 7 अगस्त से शुरू हो गया है, जबकि नवम्बर के पहले हफ़्ते में शुरू होने वाले दूसरे चरण के प्रतिबंधों में ईरान के तेल को निशाना बनाया जाएगा। यह व्यापक प्रतिबंध हैं और इनमें उन देशों या कंपनियों को भी निशाना बनाया गया है जो ईरान के साथ व्यापारिक लेनदेन जारी रखेंगी।

हालांकि अमरीका के इस क़दम का परमाणु समझौते में शामिल अन्य विश्व शक्तियों ने विरोध किया है। इसके अलावा, इन इन प्रतिबंधों में अन्य देशों, कंपनियों और संस्थाओं को निशाना बनाने की यूरोपीय संघ ने कड़ी आलोचना की है।

फ़्रांस के विदेश मंत्री ने एक बयान जारी करके अमरीका के इन व्यापक प्रतिबंधों को ग़ैर क़ानूनी बताया है और कहा है कि यूरोपी संघ ईरान के साथ व्यापारिक लेन-देन जारी रखने के लिए आर्थिक उपाय तलाश कर रहा है। अमरीका इन प्रतिबंधों द्वारा उन ग़ैर अमरीकी कंपनियों को निशाना बनाना चाहता है, जो ईरान में सक्रिय हैं या ईरान के साथ व्यापारिक लेन-देन कर रही हैं। अगर यह कंपनियां किसी भी तरह से अमरीका से जुड़ी हुई हैं या अमरीका में सक्रिय हैं तो उन्हें भी प्रतिबंधों में शामिल किया जाएगा।

यूरोपीय देशों ने अमरीका की इस चाल की काट के लिए एक पुराने क़ानून को अपडेट कर दिया है।

हालांकि अमरीका यह ज़ाहिर करने का प्रयास कर रहा है कि उसे ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों को प्रभावी बनाने के लिए यूरोपीय संघ के समर्थन की ज़रूरत नहीं है। यही कारण है कि यूरोपीय संघ भी अमरीका के इन प्रतिबंधों को प्रभावहीन बनाने में जुट गया है।

 

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