Sep १८, २०१८ १८:०१ Asia/Kolkata
  • सीरिया के पटल पर इस्राईल ने रूस से ले लिया बड़ा पंगा, महंगी पड़ सकती है इस्राईल को यह छेड़ख़ानी

सीरिया संकट के पटल पर रूस और इस्राईल के बीच एक नया गंभीर संकट पैदा हो गया है।

यह संकट इसलिए पैदा हुआ कि रूस का एक एल-20 सैनिक विमान अचानक राडार से ग़ायब हो गया जिसके बारे में बाद में यह पता चला कि इस्राईल और फ़्रांस ने सीरिया के लटाकिया इलाक़े में सीरियाई सेना के प्रतिष्ठानों पर मिसाइल हमला किया और इन मिसाइलों को हवा में ध्वस्त करने के लिए सीरियाई सेना ने अपने एयर डिफ़ेन्स सिस्टम एस-200 से मिसाइल फ़ायर किए। इन्हीं मिसाइलों में से एक मिसाइल हवा में उड़ रहे रूसी विमान पर लगा और विमान ध्वस्त हो गया जिसमें 14 सैनिक सवार थे।

रूस का कहना है कि इस्राईल ने सीरियाई प्रतिष्ठान पर एफ़-16 युद्धक विमानों से हमला शुरू करने से एक मिनट पहले हाट लाइन पर रूसी अधिकारियों को इस हमले की सूचना दी जिसके कारण रूसी अधिकारी अपने सैनिक विमान को ख़तरे वाले दायरे से बाहर नहीं निकाल पाए और विमान सीरियाई सेना के एयर डिफ़ेन्स सिस्टम के मिसाइल का निशाना बन गया।

रूसी रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है इस्राईली विमानों ने रूसी विमान को ढाल बनाकर सीरियाई प्रतिष्ठान पर मिसाइल फ़ायर किए और यही वजह है कि रूसी विमान सीरियाई एयर डिफ़ेन्स सिस्टम के मिसाइल की चपेट में आ गया। रूसी रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि इस्राईल की यह हरतक शत्रुतापूर्ण हैं और हम इसका उचित जवाब देने का अपना अधिकार सुरक्षित रखते हैं। रूस का कहना है कि जिस समय हमला हुआ उस समय फ़्रांस के समुद्री बेड़े ने भी मिसाइल फ़ायर किए।

इस्राईली सेना ने इस बारे में कोई भी जवाब देने से इंकार किया है। इस्राईली सेना के प्रवक्ता ने कहा कि हम किसी भी विदेशी रिपोर्ट पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। फ़्रांस का कहना है कि उसकी सेना ने कोई मिसाइल फ़ायर नहीं किया और अमरीका ने भी कहा है कि इस हमले से उसका कोई संबंध नहीं है।

इस्राईल ने यह हमला उस समय किया जब इदलिब के बारे में रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतीन और तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान के बीच सहमति हो जाने की घोषणा की गई।

इस घटना पर रूस के विदेश मंत्रालय ने मास्को में इस्राईली राजदूत को तलब किया है।

फ़्रांस ने इस पूरे प्रकरण में अपनी किसी भी भूमिका से इंकारा किया है लेकिन टीकाकार यह मानते हैं कि जब से रूस और चीन ने व्यापक सैन्य अभ्यास शुरू किया है उसी समय से भूमध्य सागर में सीरियाई तट के सामने आधुनिक फ़्रांसीसी युद्धपोत पहुंच गया है। फ़्रांस के बारे में कहा जाता है कि वह सीरिया के विरुद्ध इसलिए ज़रूरत से ज़्यादा सक्रिय है कि उसकी कोशिश है कि सीरियाई बैलेस्टिक मिसाइलों की अपनी शक्ति बढ़ाने न पाए क्योंकि एसी स्थिति में उसके लिए भविष्य में सीरिया पर कोई हमला करना कठिन हो जाएगा और दूसरी ओर इस्राईल के लिए भी सीरिया की मिसाइल ताक़त में वृद्धि गंभीर चिंता का विषय है।

इस प्रकरण में रूस की यह घोषणा भी महत्वपूर्ण है कि विमान गिरने की घटना की पुतीन और अर्दोग़ान के बीच इदलिब के बारे में हुए समझौते पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि यह समझौता सीरिया के भविष्य के संबंध में बहुत निर्णायक है। रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता डिमित्री पेसकोफ़ ने कहा कि इस घटना का रूस तुर्की समझौते पर कोई असर नहीं होगा।

रूस के इस बयान से इस्राईल और उसके समर्थकों का रुजहान समझने में मदद मिल सकती है। इस्राईल को इस बात से गहरी चिंता है कि सीरिया का संकट समाप्त हो रहा है। इसलिए कि सीरिया संकट को इस्राईल अपने ग़ैर क़ानूनी अस्तित्व के लिए संजीवनी बूटी की तरह देख रहा था और सीरिया संकट समाप्त हो रहा है तो उसे यह अच्छी तरह से समझ में आ रहा है कि इस्राईली अतिग्रहण के ख़िलाफ़ पश्चिमी एशिया के क्षेत्र में मौजूद प्रतिरोधक मोर्चा मज़बूत स्थिति में आ रहा है और इस स्थिति में इस्राईल के लिए अपने ग़ैर क़ानूनी अस्तित्व को जारी रख पाना कठिन हो जाएगा। इस्लामी गणतंत्र ईरान के सुप्रीम लीडर अपने बयान में यह बात कह चुके हैं कि इस्राईल के लिए भविष्य के 25 साल देख पाना संभव नहीं होगा। इतना ही नहीं ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई इस्राईल का अस्तित्व समाप्त करने का रोडमैप भी बयान कर दिया कि जिस तरह इस्राईल ने चरणबद्ध रूप से फ़िलिस्तीनी ज़मीनों पर क़ब्जा करके अपना अस्तित्व फैलाया है उसी तरह चरणबंद्ध रूप से उसे समेटते हुए ख़म्त कर दिया जाना चाहिए।

यह तो ज़मीनी हक़ीक़त है कि मध्यपूर्व के इलाक़े में समीकरण बुनियादी रूप से बदल गए हैं और यह बदले हुए समीकरण इस्राईल और उसके संरक्षकों और शुभचिंतकों के हित में कदापि नहीं हैं। सीरिया पर इस्राईल के बार बार वायु हमले को तेल अबीब की बौखलाहट का चिन्ह समझना चाहिए।

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