• पत्रकार के मामले में सऊदी अरब किसी को भी संतुष्ट नहीं कर पाया, ट्रम्प ने भी शुरू कर दीं धमकियां, तुर्की ने पूरी कर ली फंसाने की तैयारी

वरिष्ठ पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी के ग़ायब या क़त्ल हो जाने के मामले में सऊदी अरब की गर्दन धीरे धीरे फंसती जा रही है।

सऊदी मीडिया अकेले अलग अलग राग अलाप रहा है। कभी वह कहता है कि जमाल ख़ाशुक़जी तुर्की की साज़िश की भेंट चढ़ गए, कभी कहता है कि अमरीका ने उन्हें अपनी साज़िश में फंसाया है, कभी कहता है कि इस मामले में ईरान का हाथ है कभी कहना है कि मुस्लिम ब्रदरहुड ने यह पूरी चाल चली है। इसी संदर्भ में सऊदी अरब के गृह मंत्री अब्दुल अज़ीज़ बिन सऊद बिन नाएफ़ का बयान सऊदी समाचार एजेंसी वास में आया है कि ख़ाशुक़जी की हत्या के बारे में जो कुछ ही कहा जा रहा है वह सब झूठ है। सऊदी सरकार हमेशा अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और नियमों का सम्मान करती रही है उस पर पत्रकार की हत्या का आरोप लगाना बिल्कुल ग़लत है।

सऊदी अरब के नेताओं को इस प्रकरण में कम से कम यह संतुष्टि तो थी कि अमरीकी सरकार उत्तेजित नहीं हुई है। सऊदी सरकार के समर्थक टीकाकार कहने लगे थे कि अमरीका की ओर से इस मामले में कोई गंभीर क़दम नहीं उठाया जाएगा क्योंकि ट्रम्प को सऊदी अरब के साथ हुए हथियारों के सौदों की फ़िक्र है। इन टीकाकारों का कहना है कि सऊदी अरब क्षेत्र में विशेष स्थान रखता है और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में भी उसकी काफ़ी पैठ है। मगर इन टीकाकारों के अनुमान तब धरे के धरे रह गए जब अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने सऊदी नरेश सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ को फ़ोन करके कहा है कि यदि ख़ाशुक़जी की हत्या की ख़बर सही साबित हुई तो सऊदी अरब को कठोर दंड के लिए तैयार हो जाना चाहिए। ट्रम्प ने यह भी कह दिया कि जो कुछ हुआ है बहुत जल्द उन्हें पता चल जाएगा।

एसा लगता है कि ट्रम्प अमरीका के भीतर से पड़ने वाले दबाव की गंभीरता को समझ गए हैं और उन्होंने सऊदी अरब के बारे में अपना स्वर बदल लिया है। ट्रम्प ने शुरू में ख़ाशुक़जी के मामले को नज़रअंदाज़ करने की कोशिश की थी।

सऊदी अरब के भीतर इस समय चिंता पैदा हो गई है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जिस तरह यह मामला चर्चा का केन्द्र बना हुआ है और अलग अलग सरकारें तथा संस्थाएं इस मामले में जिस प्रकार का कठोर रुख़ अपना रही हैं उससे सऊदी अरब के लिए समस्याएं बढ़ सकती हैं। ट्रम्प की धमकी के साथ ही सऊदी अरब के शेयर बाज़ार में गिरावट दर्ज की गई।

तुर्की के टीकाकार और मीडिया का कहना है कि आने वाले 48 घंटों के भीतर तुर्क प्रशासन इस प्रकार के वीडियो और आडियो सार्वजनिक कर सकता है जिसमें यह साबित हो जाएगा कि सऊदी पत्रकार को इस्तांबूल में सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास के भीतर मारा पीटा गया, उनकी हत्या की गई और फिर उनके शरीर के टुकड़े कर दिए गए। यह सब कुछ उन 15 सऊदी अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ जो अलग अलग जगहों से इसी काम के लिए इस्तांबूल पहुंचे थे। इनमें पोस्ट मार्टम करने वाला एक सऊदी डाक्टर भी था जो सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के लिए काम करता है।

तुर्क राष्ट्रपति अर्दोग़ान पहले कह चुके हैं कि इस मामले में जो भी सच्चाई है वह पूरी तरह सामने लाई जाएगी। इस मामले में सऊदी सरकार की ओर से जो भी बयान आ रहा है वह सऊदी अरब के घटकों यहां तक कि फ्रांस और ब्रिटेन को भी संतुष्ट नहीं कर पा रहा है। सऊदी अरब ने कहा है कि 15 सऊदी अधिकारी इस्तांबूल तो गए थे लेकिन वह पर्यटन टूर पर गए थे। इनमें सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान का बाडी गार्ड भी शामिल है और उसकी पहिचान कर ली गई है। तुर्क मीडिया में उसकी फ़ोट छप चुकी है जो अकसर सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ दिखाई देता है।

सऊदी अरब के राजनैतिक गलियारों में इस समय इस बात पर मंथन चल रहा है कि यदि तुर्की ने ख़ाशुक़जी की हत्या और प्रताड़ना की वीडियो और आडियो पेश कर दी तो उस समय रियाज़ सरकार की ओर से क्या संतोषजनक उत्तर दिया जाना चाहिए। एक जवाब यह हो सकता है कि तुर्क इंटेलीजेन्स पर आरोप लगा दिया जाए कि उसने यह नक़ली वीडिया और आडिया तैयार किया है इसका कोई आधार नहीं है। तुर्क प्रशासन के बारे में कहा जाता है कि वह अपनी जांच बहुत तेज़ी से पूरी कर रहा है और सऊदी कांउसलेट की तफ़तीश की भी कोशिश में है ताकि जो रिपोर्ट उसकी ओर से जारी की जाए वह इतनी संपूर्ण और विश्वसनीय है कि सऊदी अरब के लिए उस पर नक़ली और जाली होने का आरोप लगा पाना संभव न रहे। यही कारण है कि वीडिया और आडिया जारी करने में तुर्की कोई जल्दबाज़ी नहीं कर रहा है।

यह भी अटकलें लगई जाने लगी हैं कि जिन 15 सुरक्षाकर्मियों की मदद से सऊदी अरब ने ख़ाशुक़जी की हत्या का कांड अंजाम दिया है उनसे कई मामलों में चूक हो गई। लंदन के एक सुरक्षा विशेषज्ञ ने एक टीवी चैनल को इंटरव्यू देते हुए कहा कि जल्दबाज़ी में काम अंजाम देने के चक्कर में इस टीम से निश्चित रूप से अनेक ग़लतियां हुई हैं और अपराध के निशान तथा साक्ष्य खोजे जा सकते हैं। शायद यही कारण है कि मुहम्मद बिन सलमान के वादा करने के बाद भी सऊदी प्रशासन तुर्की को सऊदी वाणिज्य दूतावास की तलाशी लेने की अनुमति नहीं दे रहा है ताकि इस बीच अपराध के जो भी साक्ष्य और निशान हैं उन्हें पूरी तरह मिटा दिया जाए। इसी लिए सऊदी काउंसिल जनरल ने रायटर्ज़ को बड़ी जल्दबाज़ी में एक कमरा दिखा दिया कि ख़ाशुक़जी यहीं पर आए थे जबकि यह कमरा उससे अलग था जहां ख़ाशुक़जी को संभावित रूप से क़त्ल किया गया।

एक सऊदी पत्रकार का कहना है कि रियाज़ सरकार ख़ाशुक़जी को बड़ी ख़ामोशी से रास्ते से हटाना चाहती थी लेकिन उनकी मंगेतर की वजह से सारा खेल बिगड़ गया जो काउंसलेट के बाहर उनकी प्रतीक्षा में खड़ी थी और मंगेतर ने ही यह हंगामा मचा दिया कि ख़ाशुक़जी काउंसलेट में दाख़िल होने के बाद बाहर नहीं निकले।

ख़ाशुक़जी ने अपने देश की सरकार पर कुछ ज़्यादा ही भरोसा कर लिया। उनको यह आशा नहीं थी कि उनकी क़लम की आवाज़ की यह भारी क़ीमत उन्हें चुकानी पड़ेगी  क्योंकि वह विरोधी नहीं बल्कि नसीहत करने वाले पत्रकार थे इसी लिए उन्होंने अपने मित्र का यह सुझाव नहीं माना कि सऊदी अरब के दूतावास या वाणिज्य दूतावास से दूर रहें।

ख़ालिद जयूसी

वरिष्ठ फ़िलिस्तीनी पत्रकार

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Oct १४, २०१८ १७:२९ Asia/Kolkata
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