ईरान ने अमेरिका के बिना परमाणु समझौते की रक्षा के लिए यूरोपीय संघ को अवसर दिया है कि वह इस समझौते को बाकी रहने की दिशा में प्रयास करे।

यूरोपीय संघ की विदेश नीति आयुक्त फेड्रीका मोगरीनी ने एक बार फिर ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते की सुरक्षा पर बल दिया है।

उन्होंने कहा कि यूरोप ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते की रक्षा करेगा और यह कार्य वह बड़े हितों और व्यापारिक मामलों के कारण नहीं कर रहा है बल्कि सुरक्षा कारणों से वह ऐसा कर रहा है।

यूरोपीय संघ ने ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते के बारे में अमेरिकी रवइये की भर्त्सना की है और साथ ही उसने तेहरान के खिलाफ अमेरिका के एकपक्षीय प्रतिबंधों को दोबारा लगाये जाने की निंदा की है।

ईरान ने अमेरिका के बिना परमाणु समझौते की रक्षा के लिए यूरोपीय संघ को अवसर दिया है कि वह इस समझौते को बाकी रहने की दिशा में प्रयास करे।

परमाणु समझौते के उल्लंघन के संबंध में अमेरिका ने ईरान पर जो निराधार आरोप लगाया है उसे यूरोपीय संघ नहीं मानता और उसका कहना है कि परमाणु ऊर्जा की अंतरराष्ट्रीय एजेन्सी IAEA अपनी 12 बार की रिपोर्टों में ईरान की परमाणु गतिविधियों के शांतिपूर्ण होने की पुष्टि कर चुकी है।

साथ ही एजेन्सी ने इस बात की भी पुष्टि की है कि तेहरान ने पूरी तरह परमाणु समझौते का पालन किया है।

यूरोपीय संघ के अनुसार परमाणु समझौते के निरस्त किये जाने से विश्व की शांति व सुरक्षा पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ेगा और साथ ही इससे यूरोप की डिप्लोमैसी प्रभावित होगी और उस पर प्रश्न चिन्ह लग जायेगा।

इसी प्रकार यूरोप का मानना है कि शांति के लिए परमाणु समझौते का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। इसीलिए अमेरिका के भारी दबाव के बावजूद यूरोपीय संघ ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते को बाकी रखने पर बल दे रहा है।

परमाणु समझौते को बाकी रखने की दिशा में यूरोपीय संघ ने अब तक काफी प्रयास किया है परंतु ट्रंप सरकार यह दिखाने का प्रयास कर रही है कि उसके लिए इन प्रयासों का कोई महत्व नहीं है और वह ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों पर आग्रह करती रहेगी यद्यपि इस संबंध में उसे विफलता का सामना है और तेल के मूल्यों को बढ़ने से रोकने के बहाने उसने आठ देशों को माफ करने की घोषणा की है।

बहरहाल टीकाकारों का मानना है कि ईरानी तेल के प्रमुख आठ खरीदारों को माफी देने पर आधारित ट्रंप सरकार का फैसला ईरान के मुकाबले में उसकी मजबूरी का चिन्ह है क्योंकि अमेरिकी अधिकारियों ने इससे पहले बारमबार कहा था कि वे ईरानी तेल के निर्यात को शून्य तक पहुंचा देंगे और जब वे ऐसा नहीं कर पाये तो अपनी विफलता को छिपाने के लिए उन्होंने 8 देशों को माफी देने की बात कर रहे हैं। MM

 

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Nov १५, २०१८ २१:०२ Asia/Kolkata
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