Dec १८, २०१८ २०:४५ Asia/Kolkata

पश्चिमी एशिया के इलाक़े में और विशेष रूप से यमन युद्ध में सऊदी अरब की विनाशकारी नीतियों को देखते हुए कुछ यूरोपीय देशों ने सऊदी अरब के साथ हुए रक्षा सौदों पर पुनरविचार शुरू कर दिया है।

जर्मन सरकार के प्रवक्ता स्टीफ़न ज़ीबर्ट ने कहा है कि सऊदी अरब को अब कोई भी हथियार सप्लाई नहीं किया जाएगा बल्कि इससे पहसे सऊदी अरब को हथियारों की सप्लाई के लिए जो लाइसेंस जारी किए गए थे वह भी रद्द कर दिए गए हैं। सऊदी अरब भारी मात्रा में हथियार ख़रीदकर वर्ष 2017 में सबसे अधिक हथियार ख़रीदने वाले दुनिया के दस देशों में शामिल हो गया।

सऊदी अरब ने बड़े पैमाने पर हथियारों की ख़रीदारी के साथ ही इलाक़े में तनाव बढ़ाने के लिए हस्तक्षेपपूर्ण हरकतें कीं। सऊदी अरब की इन नीतियों के कारण इराक़ और सीरिया को भारी नुक़सान पहुंचा जबकि यमन भी युद्ध से तबाह होकर रहा गया है। सऊदी अरब के हमलों के चलते यमन में 14 हज़ार से अधिक बेगुनाह मारे जा चुके हैं। और पूरे देश का मूल ढांचा ध्वस्त होकर रह गया है।

सऊदी अरब अपनी नीतियों के कारण इस समय सारी दुनिया यहां तक कि अपने घटक देशों के भीतर भी आलोचनाओं के निशाने पर है। यूरोप और अमरीका की सरकारों ने सऊदी अरब को हथियार बेचने और आर्थिक लाभ हासिल करने के लिए कई साल तक समस्त सिद्धांतों और मानवाधिकारों को नज़रअंदाज़ किया मगर अब स्थिति यह है कि इन सरकारों पर भी अपने देश के भीतर भारी दबाव पड़ रहा है। दूसरी बात यह है कि सऊदी अरब हथियार सौदों को इन सरकारों के ही ख़िलाफ़ प्रेशर टूल के रूप में प्रयोग करने लगा। कैनेडा और सऊदी अरब के संबंधों में आने वाले तनाव को इस संदर्भ में देखा जा सकता है।

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