Mar २५, २०१९ २०:०८ Asia/Kolkata
  • चार बड़े जनान्दोलन जो मध्यपूर्व और उत्तरी अफ्रीक़ा की तसवीर और भविष्य बदल सकते हैं

हालिया कुछ महीनों के भीतर अफ़्रीक़ा के अलजीरिया और सूडान में जबकि मध्यपूर्व के जार्डन और ग़ज़्ज़ा पट्टी में नए जनान्दोलन देखने को मिले।

इनके बारे में कुछ टीकाकारों का कहना है कि अरब बसंत के नाम से शुरू होने वाले जनान्दोलन को सही डगर पर वापस लाने में इन नए आंदोलनों की प्रभावी भूमिका होगी।

यह चारों आंदोलन एक प्रकार के नहीं हैं अतः उन्हें किसी एक फ़्रेम में फ़िट नहीं किया जा सकता क्योंकि चारों जगहों पर मुद्दे अलग अलग हैं। कुछ बातों से इनकी भिन्नता का अनुमान लगाया जा सकता है।

पहली चीज़ तो यह है कि अरब स्प्रिंग में जो आंदोलन शुरू हुए थे उनके बढ़ावा देने में अलजज़ीरा जैसे टीवी चैनलों की गहरी भूमिका रही मगर इस बात यह चैनल काफ़ी सीमित रूप से इन आंदोलनों को कवरेज दे रहा है।

दूसरी बात यह है कि अरब बसंत कहे जाने वाले आंदोलनों में इस्लामी विचारधारा वाले संगठनों की व्यापक भूमिका रही मगर हालिया चारों आंदोलनों में इस्लामी संगठनों ने अपने आप को अलग रखा है।

तीसरी बात यह है कि यह चारों आंदोलन शांतिपूर्ण रहे कहीं भी हथियार का कोई प्रयोग नहीं किया गया। चौथी बात यह है कि इस बार इन आंदोलनों को अरब और पश्चिमी देशों का समर्थन हासिल नहीं है वैसे आंदोलनकारियों ने विशेष रूप से अलजीरिया और सूडान में कह भी दिया है कि उन्हें किसी भी बाहरी देश के समर्थन की कोई ज़रूरत नहीं है।

यहां यह पता चलता है कि अरब और इस्लामी देशों में आम जनमानस को भलीभांति अंदाज़ा हो चुका है कि बाहरी देशों का समर्थन देश की तबाही का रास्ता खोल देता है क्योंकि यह देश केवल अपने स्वार्थ के लिए जनान्दोलनों का समर्थन करते हैं।

अरबों और मुसलमानों के ख़िलाफ़ अमरीकी और इस्राईल के भीषण हमले, इराक़ और सीरिया में दाइश की पराजय, अमरीका और तुर्की के बीच एस-400 मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम की वजह से बढ़ता तनाव, तुर्की की करेन्सी पर अमरीका का हमला, मध्यपूर्व के इलाक़े को सांप्रदायिक आधार पर बांटने की साज़िश की नाकामी, सीरिया और इराक़ का अपने हितों की रक्षा में डटे रहने और साज़िशों को नाकाम बनाना, इलाक़े में इस्लामी प्रतिरोधक मोर्चे का लगातार मज़बूत होना, ट्रम्प का गोलान हाइट्स, पश्चिमी तट, गज़्ज़ा पट्टी और अन्य इलाक़ों को इस्राईल की भूमि बताना यह सारे एसे कारण हैं जिनको देखते हुए चारों जनान्दोलनों में यह बात साफ़ नज़र आ रही है कि वह केवल आर्थिक और सुधार के पहलुओं पर केन्द्रित हैं और देश तथा भूमि की रक्षा को सबसे अधिक महत्व दे रहे हैं। बहुत से प्रदर्शनकारियों ने अलजीरिया में अपने अदेश का राष्ट्रीय ध्वज उठाने के साथ ही फ़िलिस्तीन का झंडा भी फहराया जो इस बात का साफ़ संदेश है कि जनता पूरे इलाक़े के भविष्य के बारे में सोचती है।

इस समय जो कुछ हो रहा है वह लोकतांत्रिक उसूलों के दायरे में रहकर प्रबल और शक्तिशाली विरोध प्रदर्शन है। यह इलाक़े को बदलने की शांतिपूर्ण और आदर्श शैली है। इसकी शुरूआत अलजीरिया से हुई है जो बहुत तेज़ी से अन्य इलाक़ों में फैल रहा है। यह इन देशों और इस पूरे इलाक़े की नई तसवीर और नई दिशा है।

 

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार

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