Apr २४, २०१९ २०:३९ Asia/Kolkata
  • अधिकारियों के टकराव ने श्रीलंका को विनाश की कगार पर पहुंचा दिया?

श्रीलंका के इतिहास में 30 साल विनाशकारी गृह युद्ध के गुज़रे मगर हालिया दस साल में आम तौर पर सुकून रहा।

लेकिन फिर ईस्टर के दिन बड़े पैमाने पर कुनियोजित श्रंखलाबद्ध धमाकों ने श्रीलंका ही नहीं पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया। श्रीलंका की सरकार ने इस आतंकवाद का ज़िम्मेदार स्थानीय गुट नेशनल तौहीद जमाअत को ठहराया लेकिन साथ ही यह भी कहा गया है कि इसके तार अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े हैं। हमले की ज़िम्मेदारी दाइश ने स्वीकार की।

सरकार ने अपनी इंटेलीजेन्स चूक मानी है। यह सवाल उठ रहा है कि जब पहले से चेतावनी मौजूद थी तो श्रीलंका की सरकार ने सावधानी के तहत ठोस क़दम क्यों नहीं उठाए? इसका जवाब है सरकार के भीतर आंतरिक मतभेद।

श्रीलंका के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच मतभेद दुशमनी की हद तक पहुंच गया है। श्रीलंका के एक मंत्री ने माना है कि इस घटना की योजना और आत्मघाती हमलावरों के मौजूद होने की सूचना 4 अप्रैल को मिल गई थी लेकिन इस सूचना को उच्चाधिकारियों तक सीमित रखा गया। श्रीलंका के मंत्री का यह बयान राष्ट्रपति मिथ्रीपाला सरीसेना के ख़िलाफ़ चार्ज शीट है जो पुलिस, सेना और इंटेलीजेन्स के प्रभारी हैं।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच मतभेद पिछले साल फ़रवरी में उस समय शुरू हुआ जब सत्ताधारी एलायंस को चुनावों में पराजय का सामना करना पड़ा और राष्ट्रपति ने इसका ज़िम्मेदार प्रधानमंत्री रानील विक्रमासिंहे को ठहराया। मार्च में राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री से सेंट्रल बैंक और कई विभागों का चार्ज वापस ले लिया।

मतभेद का असली कारण चीन और भारत बने हुए हैं। श्रीलंका में इस बात की जंग हो रही है कि श्रीलंका किसके साथ जाए। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच विवाद श्रीलंका और भारत के बीच विकास योजनाओं के बारे में होने वाले समझौते को लेकर हुआ। विक्रमासिंघे भारतीय योजनाओं पर अमल करना चाहते थे जबकि राष्ट्रपति इसके पक्ष में नहीं थे।

सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के बीच विवाद की कहानी तो सब को मालूम है लेकिन स्थानीय गुट नेशनल तौहीद जमाअत अचानक कैसे इतने बड़े हमलों में सक्षम हो गई? यह वह सवाल है जो इस भयानक घटना के बाद जियो पोलिटिकल लाभ उठाने वालों को फ़ायदा पहुंचा रहा है।

कोलंबो धमाकों पर अमरीका और भारत की ओर से पूर्व सूचना देने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन क्य राष्ट्रपति इससे अवगत थे या फिर यह सूचना ब्योरोक्रेसी ने उनसे भी छिपाई? इसका जवाब अभी स्पष्ट नहीं है।

बहरहाल हालात इशारा कर रहे हैं कि इन हमलों का जियो पोलिटिकल मामलों से संबंध ज़रूर है। इसमें बड़ी शक्तियों का हाथ जो सकता है।

 

आसिफ़ शाहिद

पाकिस्तान के वरिष्ठ टीकाकार

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