हमने बताया था कि ख़लीफ़ा हारून रशीद अपने मंत्री जाफ़र बरमकी के साथ बदले हुए भेष में बग़दाद शहर में टहल रहा था कि उसे बूढ़ा मछुआरा नज़र आया जिसे उस दिन कोई मछली नहीं मिल पायी थी।

हारून रशीद ने उससे कहा कि तुम चलो और चलकर दजला नदी में जाल डालो जो चीज़ भी जाल में आएगी मैं उसे 100 दीनार में ख़रीद लूंगा। मछुआरे ने दजला नदी में जाल डाला तो उसमें एक संदूक़ आ गया जिसमें ताला लगा हुआ था।

 ख़लीफ़ा ने मछुआरे को 100 दीनार दिए और संदूक़ को महल में ले जाने का आदेश दिया। उस संदूक़ से एक लड़की की लाश मिली ख़लीफ़ा को बड़ा ग़ुस्सा आया और उसने अपने मंत्री को आदेश दिया कि तीन दिन के भीतर क़ातिल का पता लगाए वरना वह अपने चचेरे भाइयों के साथ फांसी पर लटकने के लिए तैयार हो जाए।

तीन दिन बीत गए और जाफ़र बरमकी क़ातिल का पता नहीं लगा पाया वह ख़लीफ़ा के पास पहुंचा और ख़लीफ़ा ने बरमकी को उसके चालीस चचेरे भाइयों के साथ फांसी पर चढ़ा देने का आदेश दिया। लोग जमा हो गए थे। सब हैरान थे कि यह क्या हो रहा है। इसी बीच एक युवा और उसके बाद एक बूढ़ा व्यक्ति जाफ़र बरमकी के पास गए और दोनों में से हर एक यही दावा कर रहा था कि लड़की का क़ातिल वह है। मंत्री उन दोनों को लेकर ख़लीफ़ा के पास पहुंचा। वहां भी दोनों ने यही दावा दोहराया। ख़लीफ़ा पहले से ही क्रोध में था।

 उसने कहा कि दोनों को फांसी पर चढ़ा दिया जाए। जाफ़र बरमकी ने इसका विरोध किया और कहा कि जब हत्यारा एक ही व्यक्ति है तो दो लोगों को फांसी देना अत्याचार है। युवा ने कहा कि मैं धरती और आसमान की रचना करने वाले ईश्वर की क़सम खाता हूं कि लड़की की हत्या मैंने की और इसके साथ ही युवा ने कुछ एसी निशानियां गिनवाईं जो ख़लीफ़ा संदूक़ के भीतर देख चुका था अतः उसे यक़ीन हो गया कि लड़की की हत्या इसी जवान ने की है।

 ख़लीफ़ा को बड़ी हैरानी हुई उसने पूछा कि इतनी सुदंर कन्या की हत्या क्यों कि और अब अपने इस अपराध को स्वीकार क्यों कर रहे हो। युवा ने कहा कि हे ख़लीफ़ा वह लड़की मेरी पत्नी और मेरे चाचा की बेटी थी और यह बूढ़ा व्यक्ति मेरा चाचा है। मैंने इस लड़की से शादी और उससे मेरे तीन बेटे हुए। मेरी पत्नी मुझे बहुत चाहती थी और मेरे लिए बलिदान करती थी। इसी महीने के शुरू मे वह बीमार हो गई। मैंने हकीम को बुलाया जिसने उसका इलाज कर दिया।

 स्वस्थ होने के बाद जब वह स्नान करने जा रही थी तो उसने कहा कि मेरा दिल चाहता है कि सेब मिल जाए तो उसकी ख़ुशबू सूंघूं और उसे खाऊं। मैंने पूरा शहर छान मारा कि कहीं से एक सेब मिल जाए जिसे लाकर मैं अपनी पत्नी को दे दूं चाहे वह कितना ही महंगा क्यों न हो लेकिन मुझे कहीं सेब नहीं मिला। उस रात मैं इतना परेशान हुआ कि सुबह तक नींद नहीं आई। सुबह हुई तो मैं घर से निकला और फलों के बाग़ो की ओर निकल पड़ा।

मैंने बाग़बानों से बहुत पूछा लेकिन कहीं सेब नहीं मिला। एक बाग़बान ने मुझे बताया कि जैसा सेब तुम खोज रहे हो वह बग़दाद में पैदा नहीं होता बल्कि बसरा शहर में ख़लीफ़ा के बाग़ में होता है। मैं अपनी पत्नी के पास गया लेकिन कुछ कहे बिना मैंने सफ़र का फ़ैसला कर लिया। मैंने पंद्रह दिन तक लगातार सफ़र किया और नतीजे में बाग़बान से तीन दीनार के तीन सेब ख़रीदकर लौटा। घर जाकर मैंने यह सेब अपनी पत्नी को दे दिए।

उसे कोई ख़ुशी नहीं हुई और उसने वह सेब एक कोने में डाल दिए। वह दोबारा बीमार हो गई। उसे बहुत तेज़ बुख़ार था और बहुत दुखी थी। फिर वह ठीक हो गई तो मैंने बाज़ार में जाकर अपनी दूकान खोली और कामधाम में लग गया। एक दिन दोपहर को मैं दूकान में बैठा हुआ था कि मैंने देखा कि एक काला हब्शी ग़ुलाम अपने हाथ में सेब लिए हुए है और उसे बार बार उछालता और पकड़ता है। मैंने उससे पूछा कि यह सेब तुम्हें कहां से मिला तो उसने उत्तर दिया कि मैंने एसी महिला से लिया है जो मुझे बहुत चाहती है अपने पती से नफ़रत करती है। कुछ दिनों से मेरी उससे मुलाक़ात नहीं हो पायी थी।

 आज मैं उसके घर गया तो देखा कि वह बीमार है और उसके बिस्तर के पास तीन सेब रखे हुए हैं। उसने बताया कि मेरा पति बसरा जाकर तीन दीनार के यह तीन सेब लाया है।

हे ख़लीफ़ा जब मैंने यह सुना तो मेरे तन बदन में आग लग गई और आखों से अंगारे निकलने लगे। मुझ पर ग़ुस्सा सवार था और दिमाग़ काम नहीं कर रहा था। मैंने फ़ौरन दूकान बंद कर दी और घर की ओर भागा। घर जाकर मैंने देखा कि एक सेब कम है। मैंने अपनी पत्नी से पूछा कि तीसरा सेब क्या हुआ तो उसने उत्तर दिया कि मुझे नहीं मालूम। मुझे ग़ुलाम की बात पर यक़ीन हो गया मैंने एक बड़ा चाक़ू उठाया और उससे अपनी पत्नी के कई टुकड़े कर दिए। मैंने शव को चादर में लपेटा और टोकरी में रखकर संदूक़ के भीतर डाल दिया और संदूक़ पर ताला लगा दिया और वह संदूक़ लाकर दजला नदी में बहा दिया।

 हे ख़लीफ़ा आप मुझे दंडित कीजिए क्योंक मुझे क़यामत के दिन के हिसाब से डर लग रहा है। मैं लाश दजला में डालकर जब घर लौटा तो देखा कि मेरा बेटा रो रहा है। मैंने पूछा कि क्यों रो रहे हो तो उसने बताया कि मैंने मां के पास रखे सेबों में से एक सेब उठाया और जाकर गली में खेलने लगा कि इसी बीच एक काले ग़ुलाम ने वह सेब मुझसे छीन लिया। उसने पूछा यह सेब तुम्हें कहां से मिला तो मैंने उसे पूरा बात बता दी कि मेरे पिता ने मेरी मां के बीमार पड़ने और फिर इलाज हो जाने के बाद मां की इच्छा पर बसरे से लाकर दिया है।

 ग़ुलाम ने मेरा सेब नहीं लौटाया और तेज़ी से भाग गया अब मुझे यह डर लगा रहा है कि मेरी मां मेरी पिटाई न करें। जब मैंने अपने बेटे की यह बात सुनी तो मैं पागल हो गया और मुझे अंदाज़ा हुआ कि ग़ुलाम ने झूठ बोला था और मैं अपनी पत्नी का हत्यारा बन गया हूं।


टैग्स

मई ०३, २०१६ १५:१० Asia/Kolkata
कमेंट्स