• वरिष्ठ नेता ने एक बार फिर फिलिस्तीनी राष्ट्र के समर्थन पर बल दिया

फिलिस्तीन के जेहादे इस्लामी आंदोलन के महासचिव रमज़ान अब्दुल्लाह और उनके साथ तेहरान की यात्रा पर आये प्रतिनिधिमंडल ने ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता से भेंट की।


इस भेंट में वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने कहा कि अमेरिका की अगुवाई में पश्चिमी मार्चे का लक्ष्य इस्लामी मोर्चे के विरुद्ध विस्तृत पैमाने पर युद्ध के माध्यम से क्षेत्र पर वर्चस्व जमाना है।

वरिष्ठ नेता ने पहली मई को तेहरान में होने वाली भेंट में बल देकर कहा कि आज विस्तृत पैमाने पर क्षेत्र में जो युद्ध हो रहा है वह उस युद्ध का क्रम है जो 37 वर्ष पूर्व इस्लामी गणतंत्र ईरान के विरुद्ध आरंभ हुआ था। वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस युद्ध में फिलिस्तीन समस्या मुख्य समस्या है और इस्लामी गणतंत्र ईरान जिस तरह फिलिस्तीन के समर्थन को अपना दायित्व समझता है उसी तरह भविष्य में भी इस दायित्व पर अमल करेगा। फिलिस्तीन के समर्थन में तेहरान का दृष्टिकोण बदला नहीं है और इस संबंध में वरिष्ठ नेता का बल दिया जाना ईरान की इस्लामी क्रांति की सफलता के 37 वर्षों बाद एक गूढ़ बिन्दु है।

इस्लामी जगत की मुख्य समस्या के रूप में फिलिस्तीनी राष्ट्र का समर्थन ईरान की विदेशनीति में सर्वोपरि है।

ईरानी संविधान समस्त मानव समाज की भलाई व कल्याण को अपनी आकांक्षा समझता है और स्वतंत्रता, स्वाधीनता, आज़ादी और न्याय को विश्व के समस्त लोगों का अधिकार मानता है। इसी आधार पर वह किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किये बिना विश्व साम्राज्यवादियों के मुकाबले में अत्याचारग्रस्त राष्ट्रों का समर्थन करता है।

ईरान की इस्लामी क्रांति की सफलता से वर्चस्ववादी व्यवस्था के विरुद्ध संघर्ष का नया दौर आरंभ हो गया और अत्याचारग्रस्त राष्ट्रों के अधिकारों का समर्थन ईरान की इस्लामी व्यवस्था के संस्थापक स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी के संघर्ष का नारा बन गया। इस आधार पर ईरान की इस्लामी व्यवस्था सदैव और हर परिस्थिति में अत्याचारग्रस्त राष्ट्रों विशेषकर फिलिस्तीनी राष्ट्र के समर्थन को अपना दायित्व समझती है और जब तक आवश्यक होगा वह फिलिस्तीनी राष्ट्र का समर्थन जारी रखेगी।

मई १५, २०१६ १५:३० Asia/Kolkata
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