• धर्मगुरुओं के दायित्वों के बारे में वरिष्ठ नेता का महत्वपूर्ण बयान

तेहरान प्रांत के धार्मिक छात्रों, शिक्षकों, धर्मगुरुओं व अधिकारियों के एक समूह ने शनिवार को वरिष्ठ नेता से मुलाक़ात की।

इस अवसर पर आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई ने वैचारिक, धार्मिक व राजनैतिक मार्गदर्शन, जागरूकता में वृद्धि और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में सक्रियता व मार्गदर्शन को धर्मगुरुओं की तीन मुख्य ज़िम्मेदारियां बताया। वरिष्ठ नेता ने बल दिया कि धार्मिक छात्रों को क्षमता व ज़रूरी मालूमात हासिल करना चाहिए ताकि आज की अलग दुनिया में समाज में निर्णायक योगदान देने के लिए ख़ुद को तय्यार कर सकें। उन्होंने धार्मिक छात्रों के कांधे पर मौजूद ज़िम्मेदरी और सांस्कृतिक मूल्यों की अहमियत पर बल देते हुए कहा कि अगर कोई समाज सभी ज़रूरी महारतों से संपन्न हो किन्तु वह धार्मिक न हो तो ऐसे समाज को लोक-परलोक दोनों जगह वास्तविक समस्या का सामना होगा। समाज को धार्मिक बनाना धर्मगुरुओं व धार्मिक छात्रों की बड़ी ज़िम्मेदारी है। 

वरिष्ठ नेता ने रूढ़ीवादी, धार्मांधी, आध्यात्मिक सच्चाई से दूर और संकीर्णता से ग्रस्त इस्लाम को भ्रष्ट विचारों का प्रतीक बताते हुए कहा कि क़ैंची के दूसरे फल में अमरीकी इस्लाम है जो शुद्ध इस्लाम के ख़िलाफ़ खड़ा है। उन्होंने पवित्र क़ुरआन और पैग़म्बरे इस्लाम के आचरण पर आधारित शुद्ध इस्लाम की समझ को धर्मगुरुओं का महत्वपूर्ण कर्तव्य बताते हुए कहा कि ईश्वरीय पैग़म्बर इसी शुद्ध विचार को फैलाने के लिए आए थे और धर्मगुरु इसी की अगली कड़ी हैं अर्थात उन पर जनता के धार्मिक मार्गदर्शन की ज़िम्मेदारी है। आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई ने जनता के व्यवाहरिक मार्गदर्शन को उनके वैचारिक मार्गदर्शन का पूरक बताया। उन्होंने धार्मिक छात्रों पर ख़ूब पढ़ाई करने और आत्म निर्माण पर बल दिया। 

मई १५, २०१६ १६:४२ Asia/Kolkata
कमेंट्स