27 अगस्त सन 1999 ईसवी को भारत ने करगिल संघर्ष के दौरान अपने यहाँ बंदी बनाये गये पाकिस्तानी युद्धबंदियों को रिहा किया।

  • 27 अगस्त सन 1870 ईसवी को भारत के पहले मज़दूर संगठन के रूप में श्रमजीवी संघ की स्थापना की गई।
  • 27 अगस्त सन 1604 ईसवी को अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में आदि गुरु ग्रंथ साहिब की प्रतिस्थापना की गई।
  • 27 अगस्त सन 1781 ईसवी को टीपू सुल्तान के पिता  हैदर अली ने ब्रिटिश सेना के विरुद्ध पल्लीलोर का युद्ध लड़ा।
  • 27 अगस्त सन 1939 ईसवी को को जेट इंधन वाले विश्व के पहले विमान ने जर्मनी से पहली उड़ान भरी।
  • 27 अगस्त सन 1976 ईसवी को भारतीय सशस्त्र सेना की प्रथम महिला जनरल मेजर जनरल जी अली राम मिलिट्री नर्सिंग सेवा की निदेशक नियुक्त हुईं।
  • 27 अगस्त सन 1979 ईसवी को  आयरलैंड के समीप एक नौका विस्फोटित हुई।
  • 27 अगस्त सन 1985 ईसवी को नाइजीरिया में सैनिक क्रान्ति में मेजर जनरल मुहम्मद बुहारी की सरकार का तख्ता पलटा गया तथा जनरल इब्राहिम बाबनगिदा नये सैन्स शासक बने।
  • 27 अगस्त सन 1990 ईसवी को अमरीका ने वाशिंगटन स्थित इराक़ी दूतावास के 55 में से 36 कर्मचारियों को देश से निकाल दिया।
  • 27 अगस्त सन 1991 ईसवी को मालदोवा ने सोवियत संघ से स्वतंत्रता की घोषणा की।
  • 27 अगस्त सन 2003 ईसवी को 60 हजार वर्षों के अंतराल के बाद मंगलग्रह पृथ्वी के सबसे निकट पहुंचा।

27 अगस्त सन 1999 ईसवी को भारत ने करगिल संघर्ष के दौरान अपने यहाँ बंदी बनाये गये पाकिस्तानी युद्धबंदियों को रिहा किया। करगिल युद्ध, भारत और पाकिस्तान के बीच मई और जुलाई 1999 के बीच कश्मीर के करगिल ज़िले में हुए सशस्त्र संघर्ष का नाम है। कश्मीर के अलगावादी छापामारों ने भारत और पाकिस्तान के बीच की नियंत्रण रेखा पार करके कुछ क्षेत्रों पर नियंत्रण करने का प्रयास किया। भारत ने दावा किया था कि घुसपैठ करने वालों में पाकिस्तानी सैनिक भी हैं जबकि पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा था कि घुसपैठ करने वाले अलगावादी छापामार हैं और पाकिस्तानी सेना उनकी केवल सहायता कर रही है। यह युद्ध 30,000 भारतीय सैनिकों और 5,000 अलगावादी छापामारों के बीच लड़ा गया। भारत की थल और वायुसेना ने भी इस युद्ध में भाग लिया। यह युद्ध ऊँचाई वाले क्षेत्र पर हुआ जिसके कारण दोनों पक्षों को काफ़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा। परमाणु बम बनाने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ यह पहला सशस्त्र संघर्ष था।

27 अगस्त सन 326 ईसवी को रोम सम्राज्य के नव स्थापित नगर कुसतुनतुनिया को इस सम्राज्य के पूर्वी क्षेत्र की राजधानी चुना गया।

यह नगर तत्कालीन शासक कैन्सटैन्टीन के आदेश पर बनाया गया इस लिए इसका नाम भी कैन्सटैन्टीन पूल पड़ा किंतु बाद में बदलकर कुसतुनतुनिया हो गया। वर्ष 1453 ईसवी में यह नगर उसमानी शासक सुलतान मोहम्मद के अधिकार में चला गया और उसका नाम इस्तांबूल रख दिया गया। इस्तानबूल इस समय तुर्की का भारी जनसंख्या वाला महत्वपूर्ण नगर है।

 

27 अगस्त सन 1991 ईसवी को योरोप के पूरब में स्थित मॉलडोवा देश ने स्वतंत्रता प्राप्त की। यह देश विभिन्न समयों में विभिन्न जातियों और देशों के नियंत्रण में रहा। इनमें यूक्रेन, उसमानी शासन, रुस और रोमानिया का नाम लिया जा सकता है। रुस में वर्ष 1917 में आने वाली क्रान्ति के बाद मॉलडोवा रोमानिया से जुड़ गया। और द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम समय में जर्मनी और रोमानिया के अपने अतिग्रहित क्षेत्रों से पीछे हटने के बाद मालडोवा सोवियत संघ का एक सदस्य गणराज्य बन गया। 1980 के दशक के अंतिम दिनों में सोवियत संघ के विघटन की प्रक्रिया के आरंभ हो जाने के बाद मालडोवा को रोमानिया का भाग बनाने के कुछ आंदोलन चले किंतु लोगों में इस विषय को लेकर भारी मतभेद उत्यन्न हो गया और यह देश विभजन की कगार पर पहुँच गया। यहॉ तक कि इस देश में जनमत संग्रह कराया गया। जिससे पता चला कि अधिकांश लोग मालडोवा के रोमानिया में विलय के विरोधी और इस देश की पूर्ण स्वतंत्रता के पक्षधर हैं। उसके बाद यह देश स्वतंत्रता की ओर बढ़ा।

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5 शहरीवर वर्ष 1369 हिजरी शम्सी को ईरान में सुलेखन के वरिष्ट गुरु अली अक्बर कावे का निधन हुआ। वर्ष 1271 हिजरी शमसी में ईरान के दक्षिण क दक्षिण पूर्वी नगर शीराज़ में इस महान कलाकार का जन्म हुआ। वे बाल्यावस्था में वरिष्ठ सुलेखकों के नस्तालीक़ लीपी के नमूनों से परिचित हुए। और धीरे धीरे उन में सुलेखन कला की ओर रुचि उत्पन्न होने लगी। उस के बाद उस्ताद कावे ने मीरज़ा ताहिर कातेब होमायुन हमदानी और इमादुल कुत्ताब सैफ़ी क़ज़वीनी जैसे वरिष्ठ गुरुओं से शिक्षा प्राप्त की और अन्तत: वे सुलेखन कला के उस्ताद बन गए।

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15 ज़िलहिज्जा सन 214 हिजरी क़मरी को पैग़म्बरे इस्लाम स के पौत्र इमाम अली नकी अ का मदीना नगर में जन्म हुआ। अपने पिता इमाम मोहम्मद तक़ी अ की शहादत के बाद इमाम नक़ी अ ने मानव समाज के मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण ईश्वरीय दायित्व संभाला और मदीना नगर में जनता का मार्गदर्शन आरंभ कर दिया। उस समय अब्बासी शासकों का राज था। सरकार में भी बड़ी उहापोह मची हुई थी एक के बाद दूसरा शासक सत्ता संभाल रहा था। इन्हीं शासकों में मुतवक्किल नामक अत्यंत अत्याचारी शासक भी था। उसे इमाम अली नक़ी अ और उनके श्रद्धालुओं की ओर से सदा ख़तरे का आभास रहता। इसी कारण उसने इमाम अली नक़ी अ को मदीना नगर से इराक़ के सामर्रा नगर जाने पर विवश किया और उन पर कड़ी नजर रखी। उनके शिष्यों ने इस्लामी इतिहास में अपना स्थान बनाया। इन्हीं शिष्यों में एक हज़रत अब्दुल अज़ीम हसनी थे जो बाद में इस्लामी शिक्षाओं और संस्कृति के प्रचारक एवं संरक्षक बने।  

 

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Aug २४, २०१६ १२:४१ Asia/Kolkata
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