29 अगस्त 1541, तुर्की के उस्मानी शासन ने हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट पर क़ब्ज़ा कर लिया।

29 अगस्त 1831, माइकल फ़ैराडे ने इलैक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन की खोज की।

29 अगस्त 1943, जर्मनी ने डेनमार्क पर क़ब्ज़ा कर लिया।

29 अगस्त 1966, मिस्र के प्रसिद्ध विद्वान सैय्यद क़ुतुब को तत्कालीन राष्ट्रपति जमाल अब्दुल नासिर की हत्या की साज़िश रचने के आरोप में फांसी दे दी गई।

29 अगस्त 2003, इराक़ के धर्मगुरु आयतुल्लाह सैय्यद मोहम्मद बाक़िर अल-हकीम को नजफ़ में हज़रत अली (अ) के रौज़े के निकट एक आतंकवादी बम धमाके में उस समय शहीद कर दिया गया, जब वे नमाज़ के बाद रौज़े से निकल रहे थे, उनके साथ 100 अन्य नमाज़ी भी इस हमले में शहीद हो गए।

 

29 अगस्त सन 1949 ईसवी को सोवियत संघ ने अपने पहले परमाणु बम का गुप्त परीक्षण किया।

इस प्रकार परमाणु हथियारों के मैदान में अमरीका के साथ एक अन्य देश ने प्रवेश किया और दोनो देशों के मध्य शक्ति संतुलन स्थापित हुआ। इसके बाद अमरीका और रुस के मध्य शीत युद्ध आरंभ हुआ जो सोवियत संघ के विघटन तक जारी रहा।

 

29 अगस्त, सन् 1947 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत भारत में शिक्षा को समर्पित 'शिक्षा विभाग' को पुर्नस्थापित किया गया। हालांकि इस विभाग के नाम में उसकी कार्यप्रणाली और जिम्मेदारियों में स्वतंत्रता के बाद भी समय-समय पर कई बदलाव किए जाते रहे हैं। वर्तमान  समय में मंत्रालय के पास शिक्षा के दो विभाग हैं:

   1- उच्च शिक्षा विभाग

    2-स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग

भारत की केंद्र सरकार ने अपनी अगुवाई में शैक्षिक नीतियॉं एवं कार्यक्रम बनाने और उनके क्रियान्‍वयन पर नज़र रखने के कार्य को जारी रखा है। इन नीतियों में सन् 1986 की राष्‍ट्रीय एजुकेशन पालेसी (एनपीई) तथा कार्यक्रम (पीओए) शामिल है।

29 अगस्त सन 1976 को प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय बांग्ला कवि नज़रूल इस्लाम का देहांत हुआ। क़ाज़ी नज़रूल इस्लाम बांग्ला के प्रतिरोधक एवं साहसी कवि थे। रबीन्द्रनाथ टैगोर ने कवि नज़रूल इस्लाम की प्रतिभा का उच्च मूल्यांकन किया था और उनकी वीरता की प्रशंसा करते हुए अंग्रेज़ सरकार द्वारा नज़रूल इस्लाम को पीछा करने का कड़ा विरोध किया था। नज़रूल इसलाम की रचनाओं का विश्व की अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ। कोलकाता के छोरवर्ती इलाके में उनका निवास स्थान था। नज़रूल इस्लाम की रचनाओं ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी और क्रांतिकारियों में जोश भर दिया। अंग्रेज़ सरकार ने उनकी कई कविताओं पर प्रतिबंध लगा दिया था। वे एक महान कवि होने के साथ साथ एक दक्ष संगीतकार भी थे।

उनके द्वारा बनाए गये  सुरों को नज़रूल गीती कहा जाता है। आज भी बांग्ला भाषा के वे सबसे लोकप्रिय व महान कवि हैं जिनकी कविताओं ने जन समुदाय के हृदय को स्पर्ष किया।

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7 शहरीवर वर्ष 1369 हिजरी शमसी को ईरान और दुनिया के शिया मुसलमानों के वरिष्ठ धर्मगुरू आयतुल्लाहिल उज़माः सैयद शहाबुद्दीन मरअशी नजफ़ी का 96 वर्ष की आयु में क़ुम नगर में निधन हुआ। उन्हें उनकी वसीयत के अनुसार इस नगर में उनके भव्य पुस्तकालय में दफ़्न किया गया। आयतुल्लाह मरअशी नजफ़ी ने काज़ेमैन और नजफ़ जैसे इराक़ी नगरों में धर्मशास्त्र, हदीस, तफ़सीर और तैतिक शास्त्र जैसे इस्लामी विज्ञान विभिन्न धर्मगरुओं से प्राप्त किए और फिर ईरान के क़ुम नगर में शिक्षा दीक्षा में व्यस्त हो गए। वे शिक्षा दीक्षा के साथ ही ईरान की अत्याचारी शाही सरकार के विरुद्ध जनता और धर्मगुरुओं के संघर्ष में भी शामिल रहे। आयतुल्लाह मरअशी नजफ़ी ने हमेशा इमाम ख़ुमैनी का साथ दिया। उन्होंने विभिन्न इस्लामी ज्ञानों में अनेक किताबें लिखी हैं। उनकी सबसे बड़ी यादगार, उनकी भव्य लाइब्रेरी है जो क़ुम नगर में स्थित है। इस पुस्तकालय में दसियों लाख किताबें मौजूद हैं जिनमें तीन लाख से अधिक हस्त लिखित हैं।

 

 

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17 ज़िलहिज्जा सन 790 ईसवी को मिस्र के विख्यात मुसलमान धर्मगुरु व कुरआन के विवरणकर्ता मोहिबुद्दीन सराई का काहेरा में जन्म हुआ। इस विद्वान ने अपना पूरा जीवन लिखने पढ़ने और लोगों के प्रशिक्षण में बिताया। उन्हें इस्लामी विषयों का पूरा ज्ञान था। अरबी साहित्य, तफसीर अर्थात कुरआन का विवरण तर्कशास्त्र हदीस और उसूल में उन्हें विशेष रुप से दक्षता प्राप्त थी।

वे काहेरा की पाठशालओं में पढ़ाने के अपने विशेष अंदाज़ के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी क्लास में बहुत से वरिष्ठ शिक्षक, बुद्धिजीवी और प्रतिष्ठित लोग भाग लेते थे। उनकी पुस्तकों में अन्नेहाया का नाम बहुत जाना पहचाना है।

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Aug २७, २०१६ १०:४० Asia/Kolkata
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