4 सितम्बर सन  1888 में महात्मा गांधी ने इंग्लैंड के लिए समुद्री यात्रा शुरु की।

4 सितम्बर सन 1665 में  मुग़लों और छत्रपति शिवाजी  के बीच राजा जय सिंह संधि पर हस्ताक्षर हुए। 

4 सितम्बर सन 1944  द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सैनिकों ने में बेल्जियम के एंटवर्प शहर में प्रवेश किया।

4 सितम्बर सन 1946 में  भारत में  अंतरिम सरकार का गठन किया गया।

4 सितम्बर सन  1967  में 6.5 तीव्रता वाले भूकंप की चपेट में अाया महाराष्ट्र का काेयना बांध, 200 से ज्यादा लोगाें की मौत।

4 सितम्बर सन 1969 में उत्तरी वियतनाम के राष्ट्रपति एवं राष्ट्रपिता हो ची मिन्ह का देहावसान हुआ ।

4 सितम्बर सन 1985 में   73 सालों के बाद समुद्र में  डूबे जहाज टाइटेनिक की तस्वीरें सामने आई थीं। टाइटेनिक दुर्घटना में इस जहाज पर सवार 1,500 लोग मारे गए थे।

4 सितम्बर सन   1999  में ईस्ट तिमोर में  सम्पन्न हुए जनमत संग्रह में 78.5 प्रतिशत जनता ने इंडोनेशिया से स्वतंत्रता के पक्ष में अपना मत प्रकट किया।

4 सितम्बर सन&C\Gp;2001 में  अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति को अफगानिस्तान पर सैनिक कार्यवाही की मंजूरी दी।

4 सितम्बर सन 2001 में श्रीलंका ने मुशर्रफ़ से सैन्य मदद मांगने का फैसला किया।

गुजरात उच्च न्यायालय ने 2009 में असवंत सिंह की मुहम्मद अली जिन्ना पर लिखी गई किताब पर गुजरात में लगे प्रतिबंध को हटाया।

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4 सितम्बर सन 1514 ईसवी को फ़्रांस के प्रख्यात शिल्पकार जॉन गोजून का जन्म हुआ। वे फ़्रांस में पुनर्जागराण आंदोलन के अग्रिणी लोगों में से थे। उन्होंने कई गिरिजाघरों का निर्माण किया। गोजून ने पेरिस के लोवेर संग्रहालय के निर्माण में भी योगदान दिया। 1567 ईसवी में उनका निधन हुआ।

4 सितम्बर सन 1797 ईसवी को फ़्रांस की सेना ने राजशाही शासन व्यवस्था के समर्थकों के विरुद्ध विद्रोह करके उनका दमन किया। फ़्रांस की क्रान्ति के आठ साल बाद सरकार और क्रान्ति के नेताओं के अनुचित क्रिया कलापों तथा योरोपीय देशों के साथ युद्ध में कई मोर्चों पर फ्रांस की सेना की पराजय के बाद होने वाले चुनावों में लोगों ने राजशाही शासन व्यवस्था के पक्ष में वोट डाले किंतु क्रान्तिकारी नेताओं के कहने पर सैनिक अधिकारियों ने विद्रोह कर दिया विद्रोहियों में नेपोलियन बोनापार्ट भी शामिल था। सेना ने 177 अधिकारियों को अपदस्थ और 65 को देश निकाले का दंड दिया। इसी प्रकार राजशाही शासन व्यस्था के समर्थकों को भी सेना ने देशनिकाला दिया और 42 समाचार पत्रों को बंद करवा दिया। इस प्रकार नेपोलियन बोनापार्ट के लिए सत्ता हथियाने का अवसर उपलब्ध हुआ।

 

4 सितंबर वर्ष 1825 को भारत के स्वतंत्रता सेनानी दादा भाई नौरोज़ी का जन्म हुआ था।  चार सितम्बर 1825 को गुजरात के नवसारी में नौरोजी का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था लेकिन समस्त समस्याओं पर विजय प्राप्त करके उन्होंने शिक्षा ग्रहण की और मात्र 25 वर्ष की आयु में एलफिनस्टोन इंस्टीट्यूट में लीडिंग प्रोफेसर के तौर पर नियुक्त होने वाले पहले भारतीय बने।  दादा भाई नौरोज़ी को भारतीय राजनीति का ग्रैंड ओल्डमैन कहा जाता है। वे पहले भारतीय थे जिन्हें एलफिंस्टन कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति मिली। उन्होंने शिक्षा के विकास, सामाजिक उत्थान और परोपकार के लिए बहुत सी - संस्थाओं को प्रोत्साहित करने में अपना योगदान दिया।  दादा भाई नौरोजी प्रसिद्ध साप्ताहिक  पत्रिका रास्त गुफ़तार के संपादक भी रहे। उन्होंने 1906 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन की अध्यक्षता की और इस अधिवेशन में उन्होंने ब्रिटेन से भारत की पूर्ण स्वतंत्रता की मांग की।  दादा भाई नौरोजी गोपाल कृष्ण गोखले और महात्मा गांधी के सलाहकार भी थे।  नौरोजी का 30 जून 1917 को 92 वर्ष की उम्र में मुम्बई में निधन हो गया।

 

4 सितम्बर सन 1828 ईसवी को फ़्रांस के लेखक और इतिहासकार हीपोलीटन का जन्म हुआ। इतिहासकार के रुप में विख्यात होने से पूर्व उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में परिश्रम किया था। 1893 ईसवी में उनका निधन हो गया।

 

4 सितम्बर सन 1882 ईसवी को अमरीकी आविष्कारक एडीसन ने बिजली का पहला मोटर बनाया। यह तीन सौ हार्स पावर का था। एडिसन ने इस मोटर के सहारे न्यूयार्क नगर में एक कारख़ाना स्थापित किया जो नगर के आधे भाग की विद्युत आपूर्ति करता था। एडिसन ने 1869 में बल्ब का भी आविष्कार किया।

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13 शहरीवर सन 1357 हिजरी शम्सी को ईरान में अत्याचारी शासक शाह के विरुद्ध जनता का पहला अत्यंत व्यापक प्रदर्शन हुआ। ईद की नमाज़ के बाद यह प्रदर्शन तेहरान के चार भागों से आरंभ हुआ और थोड़ी देर में लोग सड़कों पर निकल कर एक साथ हो गये। प्रदर्शनकारी इमाम ख़ुमैनी का बड़ा सा चित्र उठाए हुए थे और स्वाधीनता, स्वतंत्रता, इस्लामी गणतन्त्र व्यवस्था का नारा लगा रहे थे।

 

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23 ज़िलहिज्जा सन 1359 हिजरी क़मरी को प्रख्यात मुस्लिम धर्मगुरू शैख़ अब्बास क़ुम्मी का निधन हुआ। वे वर्ष 1294 हिजरी क़मरी में ईरान के पवित्र नगर क़ुम में जन्मे। शैख़ अब्बास क़ुम्मी ने पहले तो क़ुम नगर में और फिर इराक़ के पवित्र नगर  नजफ़ जाकर गहन प्रयास किए और धार्मिक ज्ञान अर्जित किए। कुछ समय बाद वे स्वदेश लौट आए और फिर अपना समय शिक्षा दीक्षा व लेखन में व्यतीत किया। उन्होंने विभिन्न विषयों पर बड़ी मूल्यवान पुस्तकें लिखी हैं। मफ़ातीहुल जेनान उनकी प्रख्यात पुस्तक है। इसके अलावा मुन्तहल आमाल, सफ़ीनतुल बेहार और अलफ़वाएदुर्रज़वीया उनकी महत्वपूर्ण पुस्तकें हैं।

 

Sep ०३, २०१६ १०:३७ Asia/Kolkata
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