1914, फ्रांस एवं जर्मनी के बीच मार्ने का युद्ध शुरू।

1819, थॉमस ब्लैंचार्ड ने खराद मशीन पेटेंट कराई।

1965, भारत-पाकिस्तान युद्ध से संबंधित ताशक़ंद समझौता हुआ।

1983, सोवियत संघ ने कोरिया एयरलाइंस के विमान 007 को मार गिराने की बात स्वीकार की।

1997, वेल्ज़ की राजकुमारी डायना की अतिंम यात्रा में लगभग 10 लाख लोगों ने भाग लिया।

1991, रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर का नाम पुनः सेंट पीटर्सबर्ग रखा गया, 1924 में इसका नाम बदलकर लेनिंनग्राड रख दिया गया था।

2000, संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान द्वारा संयुक्त राष्ट्र सहस्त्राब्दि शिखर सम्मेलन का शुभारम्भ।

2006, मैक्सिको के सत्तारूढ़ कंजरवेटिव पार्टी के फ़ेलिप काल्देरोन नए राष्ट्रपति मनोनीत किये गए।

2007, ब्रिटेन की द ह्यूमन फ़र्टिलाइजेशन एंड एम्ब्रियोलॉजी अथॉरिटी ने मानव पशु संकर भ्रूण पर शोध करने के लिए सिद्धान्त रूप से अनुमति दी।

2008, डी.सुब्बाराव ने भारतीय रिज़र्व बैंक के गर्वनर का कार्यभार संभाला।

2009, चीनी सेना ने लद्दाख़ में ढेड़ किलोमीटर तक घुसपैठ की।

2009, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री हरचरण सिंह बरार का निधन हो गया।

2011, नाइजीरिया के मध्यवर्ती प्रांत प्लेटो में सप्ताह भर से जारी सांप्रदायिक दंगों में 40 से अधिक लोगों की हत्या कर दी गई।

2011, नासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक़, भारत-पाकिस्तान सीमा और लाईन ऑफ़ कंट्रोल की निगरानी के लिए लगाई गईं फ्लड लाइटों ने इस सीमा रेखा को अंतरिक्ष से दिखाई देने वाली विश्व की सर्वाधिक जगमग सीमा रेखा बना दिया है।

***6 सितम्बर सन 48 ईसा पूर्व को रोम साम्राज्य त्रिकोणीय गठजोड़ के दो महत्वपूर्ण सदस्यों जूल सिज़र और पोम्पस के बीच फ़ारसाल नामक ऐतिहासिक युद्ध हुआ। इस युद्ध में सिज़र को विजय हुई और पोम्पस मारा गया। इस सफलता के बाद सिज़र रोम के सम्राट बने। वे युवावस्था में सेना में भर्ती हो गये और धीरे धीरे रोम की सेना के प्रभावशाली कमांडर बन गये। पोम्पस को पराजित करने के बावजूद रोम में एक अत्याचारी शासन की स्थापना के अपने प्रयास के दौरान सिज़र एक राजनैतिक षडयंत्र का शिकार हुए उन्हें रोम की सेनेट के प्रांगड़ में मार दिया गया।

6 सितम्बर सन 1965 ईसवी को भारत और पाकिस्तान की संयुक्त सीमा पर एक महीने से अधिक समय तक अशांति के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान पर व्यापक आक्रमण आरंभ किया। दोनों पड़ोसी देशों के बीच कश्मीर मामले को लेकर यह दूसरी लड़ाई थी यह युद्ध लगभग 3 सप्ताहों तक चलता रहा। अंतत: यह युद्ध सोवियत संघ की मध्यस्थता से थमा। दोनों ने 10 जनवरी सन 1966 से ताजिकिस्तान की राजधानी ताशकंद में सोवियत संघ के तत्कालीन प्रधान मंत्री की मध्यस्थता से वार्ता आरंभ की। वार्ता के समापन पर एक संयुक्त घोषण पत्र जारी हुआ जिसमें कश्मीर समस्या के समाधान और भारत पाक संबंधों के बेहतर बनाने के मार्गों का उल्लेख किया गया था। हालॉकि विश्व के अनेक देशों ने इस घोषणा पत्र का स्वागत किया किंतु यह कश्मीर समस्या का समाधान न कर सका। इस समस्या को लेकर दोनों देशों के बीच अब भी तनाव जारी है।

 

6 सितम्बर सन 1968 ईसवी को दक्षिणी अफ़्रीक़ा में स्वाज़ीलैंड नामक देश ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ। आज के दिन को इस देश का राष्ट्रीय दिवस घोषित किया गया।

दक्षिणी अफ़्रीक़ा में योरोपीय साम्राज्य का प्रभाव बढ़ने के साथ ही सवीज़ेर्लैंड योरोप के नियंत्रण मे आ गया बहुत समय तक यह देश ब्रिटेन और द्रान्सवाल द्वारा जो वर्तमान दक्षिणी अफ़्रीक़ा का भाग है। संचालित होता रहा। दक्षिणी अफ़्रीक़ा की स्वतंत्रता के बाद स्वज़ीलैंड पर ब्रिटेन का एकाधिकार हो गया और अंतत: 1968 ईसवी में यह देश ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ इस देश में अतीत की भॉति अब भी राजशाही शासन व्यवस्था है। यह अफ़्रीक़ा महाद्वीप के दक्षिण में स्थित है मोज़ाम्बीक और दक्षिणी अफ़्रीक़ा इसके पड़ोसी देश हैं।

 

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15 शहरीवर सन 1357 हिजरी शम्सी को ईरान में अत्याचारी शासक शाह के विरुद्ध जनता के विरोध में तेज़ी आने के साथ ही देश के विभिन्न भागों में  विरोध प्रदर्शन हुए जिसके बाद शाह की सरकार ने जो भयभीत हो चुकी थी हर प्रकार के प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया किंतु इसी बीच इराक़ के नजफ़ नगर से इमाम ख़ुमैनी का बयान आया जिसमें जनता से अपना संघर्ष जारी रखने की अपील की गयी थी। इस बयान में इमाम ख़ुमैनी ने इस्लामी लक्ष्यों की पूर्ति के लिए प्रदर्शनों को उपासना बताया था।

इमाम ख़ुमैनी ने कहा था। मैं ईश्वर से अत्याचार के ठिकानों के मिट जाने तक जनता के अभियान के तेज़ होने और प्रभावी प्रदर्शनों के अधिक से अधिक आयोजन की प्रार्थना करता हूँ।

 

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25 ज़िलहिज्जा सन 35 हिजरी को हज़रत अली अ ने अपने 4 वर्ष 9 महीने के शासन काल का आरंभ किया। 18 ज़िलहिज्जा सन 35 हिजरी क़मरी को जनता के विद्रोह में तीसरे ख़लीफ़ा हज़रत उसमान की हत्या के बाद लोगों ने हज़रत अली अ के पास जाकर सत्ता संभालने का अनुरोध किया। हज़रत अली अ पहले तो सत्ता संभालने से इंकार करते रहे किंतु जब लोगों का आग्रह बहुत बढ़ गया तो उन्होंने शासन संभालना स्वीकार किया। हज़रत अली अ ने अपने शासन काल में न्याय और बराबरी स्थापित करने का भरसक प्रयास किया जिसके कारण कुछ स्वर्थी पूँजीपति उनके विरोधी हो गये। इसी के चलते हज़रत अली अ को जमल और सिफ़फ़ीन नामक दो लड़ाइयां लड़नी पड़ीं। इसी प्रकार सिफ़फ़ीन की लड़ाई में दिगभ्रमित हो जाने वाले मुसलमानों ने हज़रत अली अ पर नहरवान नामक युद्ध थोप दिया। अंतत: इन्हीं दिगभ्रमित लोगों में से एक इब्ने मुल्जिम नामक एक व्यक्ति ने हज़रत अली अ को सन 40 हिजरी में कूफ़े की मस्जिद में उस समय शहीद कर दिया जब वे नमाज़ पढ़ने में लीन थे।

Sep ०४, २०१६ १०:२४ Asia/Kolkata
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