8 सितम्बर सन 1763 ईसवी को वर्षों के संघर्ष के बाद अंतत: कैनेडा, पेरिस समझौते के आधार पर फ़्रांस के अधिकार से स्वतंत्र हुआ।

इस प्रकार औपचारिक रुप से इसे ब्रिटेन का समर्थन प्राप्त हुआ किंतु फ़्रान्सीसी मूल के केनेडाइयों और कैनेडा में रह रहे ब्रिटेन वासियों के बीच लम्बे समय तक विवाद जारी रहा। वर्ष 1867 ईसवी को कैनेडा की स्वाधीनता के बावजूद यह देश राजनैतिक व्यवस्था की दृष्टि से ब्रिटेन का अनुयायी है।

 

 

8 सितम्बर सन 1941 ईसवी को नाजी जर्मनी के सैनिकों ने सोवियत संघ पर आक्रमण के तीन महीने बाद लेनिन्ग्राड का परिवेष्टन कर लिया किंतु हिटलर और उसके सेनाकमांडरों के अनुमान के विपरीत इस नगर पर नाज़ी सेना का अधिकार न हो सका बल्कि जनवरी सन 1944 तक इस नगर की जनता ने संघर्ष किया और यह परिवेष्टन तोड़ दिया। परिवेष्टन के काल में इस नगर के लोगों को अजीविका बहुत कठिनाई से प्राप्त होती थी। इसी कारण लगभग 10 लाख लोग मारे गये किंतु सोवियत संघ की सेना के निरंतर आक्रमण और हिटलर पर कुछ अन्य मोर्चों से भी प्रहार होने तथा सोवियत संघ की कड़ाके की सर्दी के कारण जर्मनी की सेना पीछे हटने पर विवश हो गयी।

 

 

8 सितम्बर सन 1948 ईसवी को जर्मनी के संगीतकार रिचर्ड एश्ट्रोविस का निधन हुआ। उनका जन्म सन 1864 में हुआ। उन्हें 19वीं और 20वीं शताब्दी में आधुनिक संगीत की एक विशेष शैली का जनक समझा जाता है।

 

8 सितम्बर सन 1954 ईसवी को फ़िलीपीन की राजधानी मनीला में दक्षिण पूर्वी एशिया के संयुक्त सुरक्षा समझौते सीटो पर हस्ताक्षर हुए। यह समझौता अमरीका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, फ़्रांस, पाकिस्तान, थाइलैंड, न्यूज़ीलैंड और फ़िलीपीन के बीच हुआ। समझौते के सदस्य देश वचनबद्ध हुए कि यदि इनमें से किसी देश पर भी बाहरी आक्रमण हो या आंतरिक विद्रोह उभरे तो दूसरे सदस्य देश शत्रु पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने या उसके विरुद्ध सैनिक कार्रवाई जैसी प्रतिक्रिया दिखाएंगे।

वियतनाम युद्ध में अमरीका की पराजय के बाद सन 1975 में यह समझौता निरस्त हो गया।

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17 शहरीवर सन 1357 हिजरी शम्सी को ईरान के अत्याचारी शासक के सैनिकों ने तेहरान में जनता के व्यापक प्रदर्शन पर भयानक आक्रमण किया। कई दिनों से लोग शाह के अत्याचारों के विरुद्ध भोर से ही प्रदर्शन कर रहे थे। इस बीच तेहरान में सैनिक शासन की घोषणा कर दी गयी थी किंतु लोगों ने इसकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया और सड़कों पर सैनिकों तथा सैन्य उपकरणों की परवाह किए बिना शाह के अत्याचारों के विरुद्ध नारे लगाए।
अचानक शाह के सुरक्षा बलों ने फ़ायरिंग आरंभ कर दी और थोड़ी ही देर में 4 हज़ार नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया और कई हज़ार लोगों को घायल कर दिया। वो दिन शुक्रवार का था उस दिन को रक्तरंजित शुक्रवार या शहीद दिवस कहा गया। 
इस आक्रमण का लक्ष्य लोगों को डराकर उनके विद्रोह को कुचलना था किंतु लोगों ने और भी उत्साह के साथ अपने प्रदर्शन जारी रखे। रक्तरंजित शुक्रवार के बारे में इमाम ख़ुमैनी ने अपने एक संदेश में लिखा था ईरान का चेहरा आज पुष्पित है, हर जगह उत्साह और साहस का दृष्य दिखाई पड़ रहा है। हॉ यही है अमीरुल मोमनीन अलैहिस्सलाम का मार्ग और शहीदों के सरदार इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का मार्ग। काश ख़ुमैनी भी तुम्हारे बीच होता और ईश्वर के मार्ग में शहीद होता। ईरानी राष्ट्र को आश्वस्त रहना चाहिए कि जल्दी या देरी से सफलता उसे मिलनी ही है।

 

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27 ज़िलहिज्जा सन 691 हिजरी क़मरी को फ़ार्सी के विश्व विख्यात कवि साहित्यकार और विद्वान शैख़ मुसलेहुद्दीन सादी शीराज़ी का निधन हुआ। उन्होंने अपनी मातृभूमि शीराज़ में आरंभिक शिक्षा की प्राप्ति के बाद उच्चस्तरीय शिक्षा के लिए इराक़ के बग़दाद नगर का रुख़ किया। उन्होंने अपनी शिक्षा और ज्ञान को अंतिम चरण तक पहुँचाने के लिए विश्व के अनेक देशों विशेष रुप से इस्लामी देशों की यात्रा की। इन यात्राओं के दौरान शैख़ सादी ने विभिन्न समाजों और उनके रीति रिवाजों इसी प्रकार विभिन्न ऐतिहासिक धार्मिक एवं सामाजिक स्थलों के दर्शन किया। यात्रा पूरी करने के बाद उन्होंने अंत्यंत मूहत्वपूर्ण व लाभदायक पुस्तकें लिखीं।

उनकी पुस्तकों में गुलिस्तान और बूस्तान नामक पुस्तकें बहुत विख्यात हैं।

 

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Sep ०५, २०१६ ११:०३ Asia/Kolkata
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