• 9 सितम्बर 1945 ईसवी को ग्रीस हूपर कम्प्युटर का पहला बग चिन्हित किया। • 9 सितम्बर 2012 को इंडियन स्पेस एजेंसी ने सबसे भारी विदेशी सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित किया। • 9 सितम्बर सन 1791 ईसवी को संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज वाशिंग्टन के नाम पर इस देश की राजधानी का नाम वाशिंग्टन डीसी रखा गया।


9 सितम्बर 1945 इसवी को जापानी सैनिकों के हथियार डालने के समझौते पर हस्ताक्षर हुए इन सैनिकों ने चीन पर अतिग्रहण कर लिया था। जापान के तत्कालीन नरेश हीरुहीतू के आदेश पर 10 लाख जापानी सैनिकों ने हथियार डाले और चीन तथा जापान का ऐतिहासिक युद्ध समाप्त हुआ। चीन की यह सफलता सशस्त्र कम्यूनिस्ट सैनिकों और चीन की सरकारी सेना के बीच एकता का परिणाम थी। किंतु जापान को पराजित करने के बाद चीन में दोनों पक्षों के बीच आंतरिक युद्ध आरंभ हो गया जिसमें कम्युनिस्ट सैनिकों की जीत हुई और चीन में कम्युनिश्ट शासन व्यवस्था स्थापित हुई।

 

 

9 सितम्बर सन 1948 ईसवी के द्वितीय विश्व युद्ध और कोरिया प्रायद्वीप के विभाजन के बाद उत्तरी कोरिया ने अपनी स्वाधीनता की घोषणा की। कोरिया का इतिहास विदेशी आक्रमणों से भरा पड़ा है। वर्ष 1905 में जापान ने चीन और रुस को पराजित करके कोरिया पर क़ब्ज़ा किया और द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति तक इसे अपने नियंत्रण में रखा। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान चीन और कोरिया के स्वतंत्रता संग्रामियों ने जापान से संघर्ष किया। किंतु इस इलाक़े की स्वतंत्रता के बजाए वर्ष 1945 में उत्तरी कोरिया पर रुस और दक्षिणी कोरिया पर अमरीका का अधिकार हो गया बाद में दक्षिणी कोरिया ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की जिसके एक महीने बाद आज के दिन उत्तरी कोरिया ने भी अपनी स्वाधीनता की घोषणा की। अब इस क्षेत्र का महत्वपूर्ण मामला दोनो कोरियाओं का एक देश में परिवर्तित होना है जिसके लिए भी वार्ताएं जारी हैं।

 

9 सितम्बर सन 1976 ईसवी को चीन के विश्व विख्यात नेता माओ त्से तोंग का निधन हुआ। उनका जन्म 1893 ईसवी को हुआ था। वर्ष 1921 में उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर कम्युनिष्ट पार्टी की आधार शिला रखी। माओ, कम्युनिष्ट आंदोलन द्वारा कृष्कों के समर्थन पर बल देते थे। इसी कारण ग्रामीण क्षेत्रो में उनक बहुत से समर्थक पैदा हो गये। वर्ष 1934 में 1 लाख कम्यूनिष्ट सैनिकों ने माओ के नेतृत्व में चीन के उत्तर से दक्षिण तक मार्च किया। इसमे एक वर्ष का समय लगा। माओ के नेतृत्व में कम्युनिष्टों ने वर्ष 1949 में सरकार बनायी जो चीन की एक शक्तिशाली सरकार में परिवर्तित हो गयी। कम्युनिज़्म के बार में माओ का विचार मार्क्स तथा लेनिन विचारधाराओं से कुछ अलग है इसे माओइज़्म कहा जाता है।

 

9 सितम्बर सन 1991 ईसवी को ताजेकिस्तान ने सोवियत संघ से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की। रुस के ज़ार शासकों ने 19वीं शताब्दी से इस देश पर अपना नियंत्रण जमाया किंतु 1980 के दशक मे सोवियत संघ में होने वाले राजनैतिक परिवर्तनों के बाद ताजेकिस्तान ने भी अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की।  

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18 शहरीवर सन 1348 हिजरी शम्सी को ईरान के प्रसिद्ध लेखक जलाल आले अहमद का निधन हुआ। वे सन 1302 हिजरी शम्सी को तेहरान मे जन्मे। वर्ष 1325 हिजरी शम्सी को उन्होंने विश्व विद्यालय में साहित्य के विषय की शिक्षा पूरी की। द्वितीय विश्व युद्ध की ज्वलंत परिस्थितियों के दौरान वे राजनीति में उतरे। और समाचार पत्रों तथा प्रत्रिकाओं में उनके लेख छपने लगे। और वर्ष 1332 से वे गमभीरता के साथ शिक्षा देने अध्ययन और लिखने में व्यस्त हो गये। वे छोटी कहानियां लिखने में व्यस्त हो गये। लिखने की उनकी एक विशेष शैली थी। वे कहानियों के रुप में सामाजिक तथा राजनैतिक समस्याओं की उल्लेख करते। ईरानी समाज में पश्चिमी संस्कृति के प्रचलन को देखकर आले अहमद को बहुत दुखा हुआ। इसी विषय में उन्होंने वर्ष 1341 में पश्चिम के मारे हुए लोग नामक एक पुस्तक लिखी। जिसमें उन्होने पश्चिमी संस्कृति की बुराइयों का उल्लेख करते हुए इससे बचने के मार्ग बताए थे। उन्होंने इसके अतिरिक्त भी कई पुस्तकें लिखी हैं।

 

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28 ज़िलहिज्जा सन 63 हिजरी क़मरी को इमाम हुसैन अ के आंदोलन के बाद हर्रा नामक घटना घटी। इस वर्ष जो उमवी शासक मुआविया के पुत्र यज़ीद के अत्याचार से ऊब चुके मदीने के लोगों ने थे मरवान को मदीने से निकाल बाहर किया जिसे यज़ीद ने इस नगर का अधिकारी बनाया था। इस घटना के बाद यज़ीद ने अत्यंत ख़ूंख़ार सेनापति मुस्लिम बिन अक़बा के नेतृत्व में एक बड़ी सेना मदीना भेजी। और मदीनावासियों का बुरी तरह से जनंसहार करवाया तथा उनकी धन सम्पत्ति को लूट लिया। इसलाम धर्म के उदय के बाद से उस समय तक यह जनसंहार अनुदाहरणीय था। कुछ इतिहासकारों के अनुसार इस जनसंहार में 10 हज़ार से अधिक लोग मौत के घाट उतार दिए गये।

उल्लेखनीय है कि यज़ीद का शासन काल साढ़े तीन वर्ष था और इस अवधि में उसने जनता पर हर वो अत्याचार किया जो एक शासक जनता पर कर सकता है। यज़ीद ने अपने शासन काल के पहले वर्ष में पैग़म्बरे इस्लाम स के नानी हज़रत इमाम हुसैन अ और उनके 72 साथियों को शहीद किया दूसरे वर्ष में मदीना वासियों का जनसंहार किया और तीसरे वर्ष में उसने मक्के पर आक्रमण किया।

 

28 ज़िल्हिज्जा सन 1289 हिजरी क़मरी को तेहरवीं शताब्दी हिजरी क़मरी के प्रख्यात दर्शनशास्त्री और धर्मगुरू मुल्ला हादी सबज़वारी का निधन हुआ। उनका जन्म 1212 हिजरी क़मरी में हुआ था। उनकी पूरी आयु ईश्वरीय भय और ईश्वर की उपासना में व्यतीत हुई। उनके द्वारा लिखी गयी पुस्तकें इस बात की सूचक है कि यह विख्यात धर्म गुरू एक दर्शनशास्त्री होने के साथ साथ धर्मशास्त्र, उसूले फ़िक्ह, क़ुरआन की व्याख्या, तर्क शास्त्र, गणित, साहित्य और चिकित्सा के क्षेत्र में भी निपुण थे। वे अपने काल के प्रसिद्ध शायरों में से एक थे। उनके द्वारा कहे गये शेरो में दर्शनशास्त्र, अंतर्ज्ञान के सूक्ष्म एवं सुन्दर अर्थ निहित हैं। उनकी महत्त्वपूर्ण पुस्तकों में असरारुल हेकम और अलजब्र व अलअख़्तियार का नाम लिया जा सकता है।

Sep ०६, २०१६ ११:१८ Asia/Kolkata
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