• 11 सितम्बर सन 1976 ईसवी को अपहरित भारतीय बोइंग जहाज़ लाहौर एयरपोर्ट पर उतरा और यात्रियों को रिहा किया गया। • 11 सितम्बर सन 1939 को इराक़ और सऊदी अरब ने नाज़ी जर्मनी के विरुद्ध जंग का एलान किया।

11 सितम्बर वर्ष 1895 को भारत के प्रसिद्ध समाज सेवी आचार्य विनोबा भावे का जन्म महाराष्ट्र के कोंकड़ क्षेत्र के गागोदा नाम गांव में हुआ। उनका पूरा नाम विनायक नरहरि भावे था। उन्हें भारत का राष्ट्रीय अध्यापक और महात्मा गांधी का आध्यात्मिक अतराधिकारी समझा जाता था। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्ष महाराष्ट्र के पुनार क्षेत्र के आश्रम में व्यतीत किए। इंदिरा गांधी द्वारा घोषित आपातकाल को अनुशासन पर्व कहने के कारण वे वि्वाद मे भी रहे। विनोबा भावे की अध्यात्म-चेतना असाधारण थी। दर्शनशास्त्र उनका प्रिय विषय था. आश्रम में प्रवेश होने के कुछ महीने के भीतर ही दर्शनशास्त्र की आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने एक वर्ष का अध्ययन अवकाश लिया था। 15 नवम्बर वर्ष 1982 को उनका निधन हो गया।

 

11 सितम्बर वर्ष 1987 को भारत की प्रसिद्ध व प्रतिभावान कवित्री महादेवी वर्मा का निधन हुआ। उनका जन्म 26 मार्च वर्ष 1907 को हुआ था। वे हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभो में से एक मानी जाती हैं। आधुनिक हिन्दी की सबसे सशक्त कवित्रियों में से एक होने के कारण उन्हें आधुनिक मीरा के नाम से भी जाना जाता है।  महादेवी ने स्वतंत्रता के पहले का भारत भी देखा और उसके बाद का भी। उन्होंने खड़ी बोली हिन्दी की कविता में उस कोमल शब्दावली का विकास किया जो अभी तक केवल बृजभाषा में ही संभव मानी जाती थी। इसके लिए उन्होंने अपने समय के अनुकूल संस्कृत और बांग्ला के कोमल शब्दों को चुनकर हिन्दी का रूप दिया। उन्होंने अध्यापन से अपने कार्यजीवन का आरंभ किया और अंतिम समय तक वे प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रधानाचार्या बनी रहीं। उनका बाल-विवाह हुआ परंतु उन्होंने अविवाहित की भांति जीवन-यापन किया। प्रतिभावान कवयित्री और गद्य लेखिका महादेवी वर्मा साहित्य और संगीत में निपुण होने के साथ साथ कुशल चित्रकार और सृजनात्मक अनुवादक भी थीं। उन्हें हिन्दी साहित्य के सभी महत्त्वपूर्ण पुरस्कार जीतने का गौरव प्राप्त है।

 

11 सितम्बर सन 1948 ईसवी को पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जेनाह का निधन हुआ। उनका जन्म सन 1876 ईसवी में कराची नगर में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1906 ईसवी में मुस्लिम लीग की स्थापना की। यह दल आरंभ में सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों में व्यस्त रहा। किंतु बाद में राजनीति में उतर गया। मुहम्मद अली जेनाह द्वारा उठाए गये क़दमों के कारण बहुत से मुसलमान मुस्लिम लीग के सदस्य बन गये। और यह दल बहुत शक्तिशाली हो गया। इस प्रकार से द्वितीय विश्व युद्ध के बाद होने वाले चुनावों में भारतीय उप महाद्वीप के समस्त मुसलिम बाहुल्य क्षेत्रों में मुस्लिम लीग को सफलता मिली। और इस दल ने भारत के विभाजन और पाकिस्तान नाम से अलग देश की स्थापना मे सफलता प्राप्त की।

 

11 सितम्बर सन 1973 ईसवी को चिली के तत्कालीन नौसेना कमांडर जनरल आगोस्टो पीनूशे ने अमरीका के समर्थन में सिल्वाडोर आलन्दे का तख्ता उलट दिया। आलन्दे वर्ष 1970 ईसवी में चिली के राष्ट्रपति बने। और इस देश के बैंकों खदानों और उद्योगों का राष्ट्रीयकरण आरंभ कर दिया। इस प्रकार चिली में अमरीका की बड़ी बड़ी कम्पनियों के हित समाप्त होने लगे। इसी कारण चिली में अमरीका की धांधलिया और गड़बड़ियॉ आरंभ हो गयीं। चिली के सेनाधिकारियों को अमरीका ने अपने जाल में फॅसाया। और आज के दिन पीनूशे ने अमरीकी गुप्तचर सेवा सी आई ए के समर्थन से चिली की निवाचित सरकार का अंत कर दिया। जिसके बाद सत्ता पीनूशे के हाथ में आ गयी। पीनूशे आंतरिक और बाहरी दबावों के कारण वर्ष 1990 में राष्ट्रपति चुनाव आयोजित कराने पर विवश हुए जिसके परिणाम स्वरुप असैनिक सरकार सत्ता में आयी। लेकिन सेना का नैतृत्व पीनूशे के पास ही रहा अत: उनके पास पूरी शक्ति मौजूद थी वर्ष 1998 में वे अपने पद से हटे। उनके शासन काल में मारे जाने वालों के परिजनों की ओर से उन पर मुक़द्दमा चलाए जाने की मांग की जाती रही है।

 

11 सितम्बर सन 2001  ईसवी को अमरीका में चार अपचालित विमानों में से दो न्यूयार्क में विश्व व्यापार केंद्र की गगनचुंबी जुड़वों इमारतों से और एक विमान रक्षा मंत्रालय पेंटागोन की इमारत से टकाराया। जबकि चौथे विमान को आसमान में तबाह कर दिया गया। इस बड़े आतंकवादी आक्रमण में वर्ल्ड ट्रेड सेंन्टर की जुड़वा इमारतें पूरी तरह ढह गयीं। जबकि पेंटागोन के कुछ भाग को क्षति पहृँची। कुल मिलाकर 3 हज़ार 200 लोग मारे गये। अमरीका ने इस आक्रमण के लिए आतंकवादी गुट अलक़ायदा को ख़त्म करने के बहाने एक महीने के अंदर अफ़ग़ानिस्तान पर आक्रमण किया। जिसमें सैकड़ों निर्दोष लोग मारे गये। जबकि बिन लादेन और अलक़ायदा के बहुत से सदस्य भागने मे सफल हो गये। बाद में अमरीका ने एबटाबाद आप्रेशन करके ओसामा बिन लादेन मार डाला। अमरीका ने इराक़ पर भी हमला किया।

 

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1 मोहर्रम को कुछ इतिहासकारों के कथनानुसार पैग़म्बरे इसलाम स और उनके साथियों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने के लिए कुरैश कबीले के बीच समझौता हुआ। क़ुरैश कबीले के अनेकेश्वरवादी जो इसलाम के दिन प्रतिदिन बढ़ते प्रभाव से चिंतित थे और इस धर्म के प्रचार और प्रसार को रोकने के उनके प्रयास असफल हो चुके थे पैग़म्बरे इस्लाम स की शत्रुता पर उतर आए और उन्होंने पैग़म्बरे इस्लाम तथा उनके साथियों का जीना कठिन कर दिया। इन सरदारों ने मुसलमानों के विरुद्ध एक संधि की। इस संधि के अनुसार कोई भी व्यक्ति मुसलमानों के साथ कोई व्यापार या क्रय विक्रय नहीं कर सकता था। पैग़म्बरे इस्लाम और उनके साथियों ने कठिनाई के यह तीन वर्ष शेअबे अबू तालिब नामक एक दर्रे में बिताए। शअब अबू तालिब का परिवेषटन समाप्त होने के पश्चात पैग़म्बरे इसलाम स की पत्नी हज़रत ख़दीजा और उनके चाचा हज़रत अबू तालिब का निधन हो गया। इन सारी कठिनाइयों के बावजूद मुसलमान विचलित न हुए और वे सत्य के मार्ग पर बढ़ते रहे। अंतत: क़ुरैश के सरदारों ने स्वयं ही लज्जित होकर अपने निर्णय को बदल दिया। इस बीच एक आशचर्यजनक घटना यह हुई कि समझौते का  मसौदा जिस खाल पर लिखा गया था  दीमक उसे खा गयी इसका केवल वही भाग सुरक्षित रह गया जिस पर ईश्वर और पैगम्बरे इस्लाम का नाम लिखा हुआ था। अंतत: 3 वर्ष हिजरी पूर्व रजब के महीने में मुसलमानों पर लगाया गया आर्थिक प्रतिबंध उठा लिया गया।

 

Sep १०, २०१६ १०:२६ Asia/Kolkata
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