1398 तैमूर लंग सिंधु नदी के तट पर पहुंचा।

1857 एसएस सैन्ट्रल अमेरिका नामक जहाज़ उत्तरी केरोलिना में केप हैटरास से 160 मील पूरब में डूब गया, इस जहाज़ पर सवार कैप्टन विलियम लेविस समेत 426 यात्री और कर्मचारी डूबकर मर गए। इस जहाज़ पर 13 से 15 टन सोना लदा हुआ था।

1919 एडोल्फ़ हिट्लर ने जर्मन वर्कर्स पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

1948 पाकिस्तान के नेता मोहम्मद अली जिन्ना के निधन के एक दिन बाद भारतीय सेना ने हैदराबाद राज्य के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया।

1990 पूर्व और पश्चिम जर्मनी को एकीकृत करने के लिए अमेरिका, इंग्लैण्ड, फ्रांस, सोवियत संघ, पूर्व और पश्चिम जर्मनी ने समझौते पर हस्ताक्षर किये।

2000 न्यूयार्क में अंतर्राष्ट्रीय आयुर्वेद सम्मेलन प्रारम, उत्तर-पश्चिम अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्ग से लिए एक महत्त्वपूर्ण समझौते पर भारत, ईरान एवं रूस के बीच समझौता।

1912 भारत के जाने-माने नेता और पत्रकार फिरोज गांधी का जन्म हुआ.

1948 स्विट्ज़रलैंड ने अपना पहला संविधान पारित किया, जिसके बाद इस देश में फ़ेडरल व्यवस्था की स्थापना हुई।

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12 सितम्बर सन 1683 ईसवी को उसमानी सेना के योरोप की ओर अग्रसर होने के कारण ऑस्ट्रिया तथा पौलैंड की संयुक्त सेना और उस्मानी सेना के मध्य एक रक्त रंजित युद्ध आरंभ हुआ। 

इस युद्ध में उस्मानी सेना ने ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना का लगभग दो महीनें तक परिवेष्टन जारी रखा और यदि इस नगर पर उसका अधिकार हो जाता तो उसमानी शासन को योरोप महाद्वीप में अपनी सीमाएं विस्तृत करने के मार्ग में एक बड़ी सफलता प्राप्त होती किंतु ऑस्ट्रिया और पोलैंड की सेना ने कड़ा प्रतिरोध किया और उसमानी सेना को पीछे हटना पड़ा।

12 सितमबर सन 1897 ईसवी को विश्व विख्यात फ़्रांसीसी भौतिक एवं रासायनशास्त्री एरेन क्यूरी का पेरिस में जन्म हुआ। उनकी मॉ प्रख्यात अविष्कारक मैडम क्यूरी और पिता पेयर क्यूरी थे जिन्होंने कई रेडियो ऐक्टिव तत्वों की खोज की। एरेन क्यूरी ने अपनी मॉ के सहकारियों के साथ मिलकर शोधकार्य किया और भौतिक शास्त्र के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां अर्जित कीं। उन्हें उनकी भारी सफलताओ के लिए नोबेल पुरूस्कार से सम्मानित किया गया।

 

 

 

12 सितम्बर सन 1944 ईसवी को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान लंदन में अमरीका, रूस, तथा इंगलैंड के प्रतिनिधियों द्वारा जर्मनी पर अधिकार के संबंध में एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए जिसके बाद संयुक्त सेनाओं ने अपने निरंतर आक्रमण से 1945 में जर्मनी पर पूर्ण अधिकार स्थापित किया। वर्ष 1949 में जर्मनी दो अलग देशों पूर्वी जर्मनी और पश्चिमी जर्मनी में विभाजित हो गया।

 

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21 शहरीवर सन 1299 हिजरी शमसी को ईरान की संविधान क्रान्ति के सेनानी शैख मोहम्मद ख़ियाबानी शहीद कर दिये गये। इस प्रकार से उत्तर पश्चिमी ईरान के तबरेज़ नगर में उनका और उनके साथियों  का विद्रोह कुचल दिया गया। शिक्षा प्राप्ति के बाद शैख़ मोहम्मद ख़ियबानी ने तत्कालीन क़ाजार शासन श्रृंखला के अत्याचारी शासक के विरुद्ध संधर्ष आरंभ किया। वे अज्ञानता और निरक्षरता तथा विदेशियों के हस्तक्षेप का अन्त करने को अपना कर्तव्य समझते थे। वर्ष 1287 हिजरी शम्सी में अत्याचारी शासक मोहम्मद अली शाह क़ाजार के फ़रार होने के बाद वे तबरेज़ से सांसद चुने गये। बाद में उन्होंने ईरानी शासक वोसूक़ुददौला के विरुद्ध संघर्ष आरंभ किया जिसने वर्ष 1919 में ब्रिटेन के साथ एक लज्जाजनक समझौते पर हस्ताक्षर किये थे। इसी संघर्ष के दौरान उन्हे गिरफतार करके फॉसी दे दी गयी।

 

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2 मोहर्रम सन 61 हिजरी क़मरी को पैगम्बरे इस्लाम के पौत्र हज़रत इमाम हुसैन अ अपने परिवार जनों और साथियों के साथ इराक़ के कर्बला क्षेत्र पहुचे। उन्होंने इससे कुछ महीने पूर्व भ्रष्ट व अत्याचारी उमवी शासक यज़ीद की बैअत अर्थात आझापालन का वचन देने से इंकार कर दिया था। जिसके बाद उन्हे मदीना नगर छोड़ना पड़ा इमाम हुसैन अ मदीना से मक्का गये और फिर  इराक़ के कूफ़ा नगर की ओर रवाना हुए। कूफ़ा वासियों ने इमाम हुसैन के उक्त क़दम का समर्थन करते हुए उन्हें कूफ़ा आने के लिए आमत्रित किया था किंतु यज़ीद की सरकार से भयभीत होकर उन्होंने पैग़म्बरे इस्लाम के पौत्र हज़रत इमाम हुसैन अ की ओर से मुंह मोड़ लिया।

इमाम हुसैन (अ) कूफ़े की ओर बढ़ रहे थे कि हुर बिन यज़ीद रेयाही नामक सेनापति के नेतृत्व में यज़ीद की सेना ने इमाम हुसैन अ का रास्ता रोक दिया। अब इमाम हुसैन अ कर्बला की ओर गये और वही पर उन्होंने ख़ैमे लगाए। उल्लेखनीय है कि हुर को कर्बला की घटना के दौरान अपने किये पर बहुत पछतावा हुआ। उन्होंने प्रायाश्चित किया और यज़ीद की सेना को छोड़कर इमाम हुसैन के साथियों में शामिल हो गये। उन्होंने दस मोहर्रम को इमाम हुसैन अ की ओर से युद्ध किया और अंतत: शहीद हुए।

 

Sep १०, २०१६ १०:५१ Asia/Kolkata
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