हमने मां-बाप के अधिकारों के विषय की चर्चा शुरू करते हुए कहा था कि जिस प्रकार मानवीय समाज और धर्म, मां-बाप को अपनी संतान के प्रति जवाबदेह बनाते हैं और उनके लिए कुछ ज़िम्मेदारियों का निर्धारण करते हैं, उसी तरह संतान को भी अपने मां-बाप के प्रति उत्तरदायी और ज़िम्मेदार ठहराते हैं।

विभिन्न धर्मों में मां-बाप, विशेष रूप से मां के विशिष्ट स्थान और विशेष सम्मान की चर्चा के तहत हमने ईश्वरीय दूत हज़रत मूसा (अ) की शिक्षाओं में मां-बाप का सम्मान और संतान के लिए उसके प्रतिफल पर बल दिए जाने का उल्लेख किया था।

इस संदर्भ में हमने ईश्वरीय दूत हज़रत मूसा (अ) के काल में बनी इस्राईल समुदाय के एक सभ्य और सुशील लड़के के साथ घटने वाली शिक्षाप्रद घटना का उल्लेख करते हुए कहा था कि अनाज का व्यापार करने वाले एक लड़के के पास एक व्यक्ति आया और उसने बड़ी मात्रा में उससे गेंहू ख़रीदने का सौदा किया। वह युवा जब उस व्यक्ति को गेंहू देने के लिए भंडार पर पहुंचा तो देखा कि भंडार का द्वार बंद है और उसके पिता किवाड़ों से टेक लगाकर सो रहे हैं। उसने ग्राहक से कहा, तुम्हें थेड़ी प्रतीक्षा करनी होगी और इसके बदले मैं तुम्हें कुछ छूट भी दे सकता हूं। 

इसके उत्तर में ग्राहक ने कहा, मुझे तुरंत अपना माल चाहिए और इसके लिए मैं अधिक मूल्य अदा कर सकता हूं। ग्राहक के आग्रह के बावजूद युवा ने अपने पिता को नींद से जगाने से इनकार कर दिया।

बाप को जब इस घटना की जानकारी हुई तो वह बेटे की इस विनम्रता और सदाचार से बहुत प्रभावित हुआ और बेटे के दिल में अपना यह सम्मान देखकर बहुत ख़ुश हुआ। ईश्वर का शुक्र अदा करते हुए उसने आसमान की ओर हाथ उठाकर कहा, हे ईश्वर मैं तेरा आभारी हूं जो तूने मुझे ऐसा सदाचारी बेटा दिया है। पिता ने अपने बेटे से कहा, तुमने अपने बूढ़े बाप के आराम की ख़ातिर प्राप्त होने वाले लाभ को ठुकरा दिया, इसलिए मैं उस लाभ के बदले एक गाय तुम्हें उपहार में देता हूं। मुझे आशा है कि ईश्वर इसके द्वारा तुम्हें इतना लाभ पहुंचाएगा कि यह हर उस युवा के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा जो अपने मां-बाप का सम्मान करता है।

दूसरी ओर एक दूसरे इलाक़े में बनी इस्राईल समुदाय के एक परिवार में एक सुन्दर और सुशील लड़की थी। उसकी, सुन्दरता और सुशीलता के कारण काफ़ी लोग उसे अपना जीवन साथी बनाना चाहते थे। लड़की के दो चचेरे भाई भी उससे शादी के इच्छुक थे। उन दोनों में से एक उदार और सभ्य था, लेकिन उसके पास धन नहीं था। इसके विपरीत उसके चचेरे भाई के पास काफ़ी दौलत थी, लेकिन वह अभद्र, असभ्य और अशिष्ट था। वह ईश्वरीय दूत हज़रत मूसा का मित्र और अनुयाई होने का दिखावा करता था। लड़की ने विवाह के समस्त संदेशों को ठुकराते हुए इन दोनों में से किसी एक से शादी का निर्णय लिया और एक सप्ताह का समय मांगा ताकि इन दोनों में से किसी एक को अपने जीवन साथी के रूप में चुन सके।

इस दौरान लड़की के मन में तरह तरह के विचार आए। उसने सोचा कि अगर मैं सदाचारी लेकिन निर्धन व्यक्ति से विवाह करती हूं तो निश्चित रूप से निर्धनता में जीवन व्यतीत करना पड़ेगा, लेकिन इसी के साथ मुझे एक अच्छा, सुशील और सदाचारी जीवन साथी मिल जाएगा, जिसके साथ जीवन की हर कठिनाई को ख़ुशी ख़ुशी सहन किया जा सकता है। इसके विपरीत अगर धनी और भ्रष्ट व्यक्ति को अपना जीवन साथी बनाऊंगी तो संभव है कुछ दिन सुख-सुविधा में गुज़रें, लेकिन इस प्रकार मैं भी नैतिक एवं आध्यात्मिक गुणों से वंचित हो जाऊंगी और भ्रष्ट एवं अधर्मी पति की संगत के कारण क्लायण एवं भलाई के मार्ग से भटक कर विनाश के रास्ते पर चलने लगूं।

उस सुन्दर लड़की ने काफ़ी सोच-विचार और मां-बाप से सलाह के बाद सुशील और सदाचारी व्यक्ति को अपना जीवन साथी बनाने का निर्णय लिया। उधर जब उसके धनी चचेरे भाई को लड़की के इस निर्णय का पता चला तो उसने अपने साथियों के बीच स्वयं को बहुत अपमानित महसूस किया और उसके मन में ईर्ष्या की चिंगारी भड़क उठी। उसने एक बहुत ही ख़तरनाक साज़िश रचना शुरू कर दी।

पूर्व योजना के अनुसार, एक रात उस व्यक्ति ने अपने चचेरे भाई को घर पर आमंत्रित किया और ख़ूब आवभगत के बाद उससे रात को वहीं ठहरने का आग्रह किया। आधी रात बीत जाने के बाद, जब उसका भाई गहरी नींद में था, उसने बहुत ही क्रूरता से उसकी हत्या कर दी और उसका शव बनी इस्राईल समुदाय के ऐसे मोहल्ले में डाल दिया, जहां धनी लोग रहते थे। उसने सोचा कि इस प्रकार उसने एक तीर से दो निशाने लगाए हैं। पहला यह कि मेरे प्रतिद्वंद्वी के रास्ते से हट जाने के बाद, वह सुन्दर लड़की मेरा ही चयन करेगी, दूसरा यह कि मेरे इस चचेरे भाई का मेरे अलावा कोई और सगा संबंधी नहीं है, इसलिए बनी इस्राईल के नियम के अनुसार, मोहल्ले वालों को मुझे मुआवड़ा अदा करना पड़ेगा, जिससे मैं विवाह का भव्य समारोह आयोजित करूंगा।

सुबह सवेरे जब लोग अपने घरों से बाहर निकले तो उन्होंने वहां ख़ून में लतपत एक लाश देखी। लोगों ने उस शव को पहचानने का बहुत प्रयास किया, लेकिन वे उसे पहचान नहीं सके। धीरे धीरे यह ख़बर हज़रत मूसा (अ) तक पहुंची। हज़रत मूसा ने आदेश दिया कि कोई भी व्यक्ति उस समय तक अपने काम पर नहीं जाएगा, जबतक मृत व्यक्ति और हत्यारे की पहचान नहीं हो जाती।

उल्लेखनीय है कि बनी इस्राईल में किसी व्यक्ति की हत्या का मुद्दा समाज के सबसे गंभीर मुद्दों में से एक माना जाता था। ईश्वरीय दूत हज़रत मूसा के आदेशानुसार, लोग मरने वाले की पहचान और हत्यारे की खोज में लग गए, लेकिन काफ़ी प्रयासों के बावजूद उन्हें कोई सफलता हाथ नहीं लगी।

दूसरी ओर युवा हत्यारा जब दोपहर को अपने घर से बाहर निकला तो उसने देखा पूरा शहर उथल पुथल है। युवक ने अनजान बनते हुए लोगों से इसका कारण पूछा, लोगों ने बताया कि एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई है। हज़रत मूसा ने मरने वाले की पहचान करने और हत्यारे को खोज निकालने का आदेश दिया है, ताकि मृत के परिवार को उसका मुआवज़ा दिया जा सके। वह तेज़ी से शव की ओर गया, उसके चेहरे से कपड़ा हटाया और चेहरे की ओर देखकर ज़ोर ज़ोर से चीख़ना और चिल्लाना शुरू कर दिया। रोते हुए और छाती पीटते हुए वह कह रहा था कि यह तो मेरा चचेरा भाई है, यह तो बहुत ही भला इंसान था, इसकी किसी से कोई रंजिश नहीं थी, फिर क्यों इसकी हत्या कर दी गई। इसके हत्यारे को मेरे पास लाओ ताकि मैं इसके ख़ून का बदला ले सकूं या उसकी जान का मुआवज़ा प्राप्त करूं।

लोग उसे हज़रत मूसा (अ) के पास ले गए, हज़रत मूसा ने उस युवक से मृत व्यक्ति के संबंध के बारे में सवाल किया और आदेश दिया कि उस मोहल्ले के लोग हत्यारे का पता लगाएं या 50 लोग सौगंध खाकर कहें कि हत्यारे के बारे में कोई जानकारी नहीं है और उसके भाई को मुआवज़ा अदा करें।

उन लोगों ने कहा, हे ईश्वरीय दूत जब हमारा कोई दोष नहीं है तो हम क्यों मुआवज़ा अदा करें। आप ही ईश्वर से हत्यारे के बारे में प्रश्न कीजिए। इस दौरान ईश्वर ने हज़रत मूसा पर वह्यी नाज़िल की और फ़रमाया, हे मूसा इन लोगों को आदेश दो कि एक गाय ज़िब्ह करें और उसके अंगों को मृत के शरीर से स्पर्श करें, ताकि मैं उसे ज़िंदा कर दूं और वह ख़ुद हत्यारे के बारे में जानकारी दे।

लोगों को हज़रत मूसा की इस बात पर बहुत आश्चर्य हुआ। लेकिन जब हज़रत मूसा ने बल देकर कहा कि यह ईश्वर का आदेश है तो लोगों ने कहा कि हे ईश्वरीय दूत अपने ईश्वर से उस गाय के बारे में विस्तार से पूछो कि उसमें कौन सी विशेषताएं होनी चाहिएं। हज़रत मूसा ने जब उन्हें उस गाय की विशेषताएं बतायीं तो काफ़ी खोज बीन और प्रयास के बाद, उन्हें ऐसी गाय उस गेंहू का व्यापार करने वाले युवक के पास मिली। 

लोगों ने उस युवा व्यापारी से गाय ख़रीदने का आग्रह किया, तो उसने कहा कि इसके लिए मुझे अपनी मां से अनुमति लेनी होगी। जब उसने मां से पूछा तो मां ने कहा कि दोगुनी क़ीमत पर अगर यह लोग ख़रीद सकते हैं तो बेच दो। उसकी क़ीमत सुनकर लोग आश्चर्यचकित हुए और हज़रत मूसा के पास वापस लौट गए। हज़रत मूसा ने कहा, उस गाय को हर हालत में ख़रीदो, इसलिए कि यह ईश्वर का आदेश है। जब वे लोग पुनः उस युवक के पास गए और गाय को दोगुनी क़ीमत में ख़रीदने पर सहमति जताई तो उसने फिर कहा कि मैं अपनी मां से अनुमति ले लूं। मां ने बेटा उनसे कह दो कि जो दाम पहले बताए थे अब उसके भी दोगुना अदा करें। वे लोग यह सुनकर क्रोधित हो गए और फिर हज़रत मूसा के पाल लौट गए। हज़रत मूसा ने उनसे कहा कि ईश्वर के आदेशानुसार तुम्हें वह गाय ख़रीदनी ही होगी, लेकिन जब पुनः वे युवा व्यापारी के पास गए उसने उसके दाम पहले से दोगुना बताए। कई बार की टालमटोल के बाद अंततः उसके मूल्य इतने बढ़ गए कि गाय को ज़िब्ह करने के बाद उन्हें उसकी खाल में सोने के सिक्के भरकर उसके मालिक को भुगतान करना पड़ा।  

हज़रत मूसा ने जब उस गाय के एक अंग को मृत के शव से स्पर्श किया तो वह ज़िंदा हो गया और उसने अपनी हत्या की घटना के बारे में विस्तार से बताया। इस चमत्कार के बाद, समुदाय के लोग कह रहे थे कि हम नहीं समझ सके कि ईश्वर के लिए इस युवा को जीवित करना अधिक महत्वपूर्ण था या उस युवा व्यापारी को धनी बनाना, जो हमेशा अपने मां-बाप का सम्मान करता है और उनकी दुआएं लेता है। 

 

 

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Sep १८, २०१६ १५:५२ Asia/Kolkata
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