• फ़ारसी सीखें-36वां पाठ

मोहम्मद और उसका मित्र सईद, आज बहारिस्तान चौक पर मिलने वाले हैं।

मोहम्मद और उसका मित्र सईद, आज बहारिस्तान चौक पर मिलने वाले हैं। मोहम्मद मैट्रो द्वारा इस चौक पर पहुंचता है। बहारिस्तान तेहरान का पुराना चौक है यहीं पर मजलिस अर्थात संसद भवन स्थित है। संसद की नई इमारत पुरानी इमारत के निकट स्थित है एक दृष्टि में आधुनिक एवं पुरानी वास्तु – कला को देखा जा सकता है। चौक के केंद्र में आयतुल्लाह सैय्यद हसन मुदर्रिस की प्रतिमा लगी हुई है। लगभग 100 वर्ष पूर्व 1909 में महान धर्मगुरु एवं राजनीतिज्ञ आयतुल्लाह मुदर्रिस ईरान की राष्ट्रीय संसद के सदस्य चुने गए। वे और कुछ अन्य धर्मगुरु कि जो संसद सदस्य थे देश के संविधान को इस्लामी सिद्धांतो के अनुरूप पारित कराने हेतु पर्यवेक्षक का कर्तव्य निभा रहे थे। मोहम्मद इस महान ईरानी हस्ती की प्रतिमा देखने में व्यस्त है। सईद उसे देखता है और सलाम करता है तथा हाल चाल पूछता है। पहले इस पाठ में प्रयोग किए गए शब्दों पर ध्यान दीजिए, उसके बाद मोहम्मद और सईद की बातचीत सुनेंगे।

अनुवाद- दो बार दोहराएं


 

दृष्टि

نگاه

 

 प्रतिमा

 

 تندیس

 निश्चित

 

 حتما ً

 हस्ती

 

شخصیت

 महत्वपूर्ण

 

 مهم

 गणमान्य व्यक्ति

 

 رجال

 राजनीतिक

 

 سیاسی

 धर्मगुरु

 

 روحانی

 विद्वान

 

 عالم

 धार्मक

 

 دینی

 राजनीतिज्ञ

 

 سیاستمدار

 महान

 

 بزرگ

 वर्षों

 

 سالها

 प्रतिनिधि

 

 نماینده

 संसद

 

 مجلس

 आकर्षक

 

 جالب

 लोग

 

 مردم

 माननीय

 

 محترم

 लगभग

 

 حدود

 100 साल पहले

 

 صد سال پیش

 1909

 

 ( 1909 م.)

 धर्मशास्त्री

 

 فقیه

  इस्लामी जगत

 

 عالم اسلامی

 दौर

 

 دوران

 सदस्यता

 

 نمایندگی

 महत्वपूर्ण कार्य

 

 کار مهمی

 रोकना

 

 جلوگیری از

 पारित

 

 تصویب

 समझौता

 

 قرارداد

 वर्ष 1919

 

 سال 1919

 भूमिका

 

 نقش

 आधार पर

 

 برمبنا

 सलाहकारों

 

 مستشاران

 अंग्रेज़ी

 

 انگلیسی

 मामला

 

 امور

वित्तीय

 

 مالی

 सैन्य

 

 نظامی

 प्रतिरोधी

 

 مبارز

 जानकार

 

 آگاه

 आधुनिक विचारक

 

 

 روشن بین

 ठीक है

 

 درست است

 राजनीति

 

 سیاست

 इस्लाम विरोधी

 

 اسلام ستیزانه

 रज़ा ख़ान

 

 رضا خان

 प्रस्ताव

 

 طرح

 महाभियोग

 

 استیضاح

 विद्वान

 

 عالم

 विद्वानों

 

 عالمان

 स्वाधीन

 

 استقلال

 स्वाभिमान

 

 سربلندی

 

 

 अब आप मोहम्मद और सईद की बातचीत पर ध्यान दीजिएः

दो बार अनुवाद (सड़क पर गाड़ियों की आवाज़)

सईद- सलामुन अलैकुम, क्या देख रहे हो

سعید - سلام محمد . به چه نگاه می کنی

 

मोहम्मद- अलैकुम सलाम, इस प्रतिमा को देख रहा हूं

محمد - سلام . به این تندیس می نگرم

 

सईद- जानते हो वह कौन हैं

سعید - می دانی او کیست

 

मोहम्मद- नहीं, निश्चित ही कोई महत्वपूर्ण हस्ती है

محمد - نه . حتما ً شخصیت مهمی است

 

सईद- हां, वह ईरान के गणमान्य व्यक्तियों में से एक सैय्यद हसन मुदर्रिस हैं

سعید - بله . او سید حسن مدرس ، از رجال سیاسی ایران است

 

 

मोहम्मद- किन्तु यह प्रतिमा एख धर्मगुरु की है

 محمد - اما این تندیس یک روحانی است

 

सईद- हां, वह एक धर्मगुरु और महान राजनीतिज्ञ थे, वह वर्षों ईरानी संसद के सदस्य रहे

سعید - بله . او هم یک عالم دینی و هم سیاستمداری بزرگ بود . او سالها نماینده مجلس ایران بوده است

 

 

मोहम्मद- दिलचस्प बात है कि ईरानी लोग अपनी बड़ी हस्तियों का सम्मान करते हैं

محمد - جالب است که مردم ایران ، شخصیت های بزرگ خود را محترم می شمرند

 

सईद- लगभग 100 वर्ष पूर्व वर्ष 1909 में आयतुल्लाह मुदर्रिस एक इस्लामी विद्वान और धर्मशास्त्री के रूप में संसद सदस्य चुने गए

 

سعید - مدرس حدود صد سال پیش ( 1909 م . ) به عنوان فقیه و عالم اسلامی ، به مجلس راه یافت

मोहम्मद- क्या उन्होंने अपनी संसद सदस्यता के काल में महत्वपूर्ण कार्य किए थे

 

محمد - آیا او در دوران نمایندگی مجلس ، کار مهمی هم انجام داد

सईद- बिल्कुल, वर्ष 1919 का समझौता न होने देने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, इस समझौते के आधार पर अंग्रेज़ सलाहकार ईरान के सैन्य एवं वित्तीय मामलों पर नियंत्रण कर लेते

 

سعید - البته . وی در جلوگیری از تصویب قرارداد سال 1919 نقش مهمی داشت . برمبنای این قرارداد ، مستشاران انگلیسی بر امور مالی و نظامی ایران مسلط می شدند

मोहम्मद- तो यह राजनीतिज्ञ धर्मगुरु आधुनिक विचारक एवं जानकार प्रतिरोधी थे

 

محمد - پس این روحانی سیاستمدار ، مبارزی آگاه و روشن بین بود

 

सईद- सही है, आयतुल्लाह मुदर्रिस  रज़ा ख़ान की इस्लाम विरोधी नीतियों का रहस्योदघाटन करते थे और उन्होंने उसके महाभियोग का प्रस्ताव संसद में पेश किया

 

سعید - درست است . مدرس سیاستهای اسلام ستیزانه رضاخان را افشا می کرد و طرح استیضاح او را به مجلس برد

मोहम्मद- फिर तो आयतुल्लाह मुदर्रिस  उन विद्वानों में से हैं कि जिन्होंने ईरान का स्वाभिमान बढ़ाने और स्वाधीनता में भूमिका निभाई है

 

محمد - پس مدرس نیز از عالمانی است که در استقلال و سربلندی ایران ، نقش داشته اند

 

पुनः मोहम्मद और सईद की बात पर ध्यान दीजिए। बग़ैर अनुवाद के।

سعید - سلام محمد . به چه نگاه می کنی ؟


محمد - سلام . به این تندیس می نگرم .


سعید - می دانی او کیست ؟


محمد - نه . حتما ً شخصیت مهمی است .


سعید - بله . او سید حسن مدرس ، از رجال سیاسی ایران است .


محمد - اما این تندیس یک روحانی است !


سعید - بله . او هم یک عالم دینی و هم سیاستمداری بزرگ بود . او سالها نماینده مجلس ایران بوده است .


محمد - جالب است که مردم ایران ، شخصیت های بزرگ خود را محترم می شمرند .


سعید - مدرس حدود صد سال پیش ( 1909 م . ) به عنوان فقیه و عالم اسلامی ، به مجلس راه یافت .


محمد - آیا او در دوران نمایندگی مجلس ، کار مهمی هم انجام داد ؟


سعید - البته . وی در جلوگیری از تصویب قرارداد سال 1919 نقش مهمی داشت . برمبنای این قرارداد ، مستشاران انگلیسی بر امور مالی و نظامی ایران مسلط می شدند .


محمد - پس این روحانی سیاستمدار ، مبارزی آگاه و روشن بین بود .


سعید - درست است . مدرس سیاستهای اسلام ستیزانه رضاخان را افشا می کرد و طرح استیضاح او را به مجلس برد .


محمد - پس مدرس نیز از عالمانی است که در استقلال و سربلندی ایران ، نقش داشته اند .

 

प्रस्तोता- आयतुल्लाह सैय्यद हसन मुदर्रिस का जन्म वर्ष 1860 में इस्फ़हान प्रांत के एक नगर में हुआ। उन्होंने इस्फ़हान, क़ुम और सामर्रा एवं नजफ़ के धार्मिक शिक्षा केंद्रो में शिक्षा प्राप्त की और अपनी आयु के अंत तक धार्मिक शिक्षा देने तथा मूल्यवान इस्लामी पुस्तकों के लेखन में व्यस्त रहे। इसी प्रकार, वर्ष 1909 में वे संसद सदस्य चुने गए और पांचवे चरण की समाप्ति तक अधिक प्रभावी सांसदों में रहे। उस काल के राजनीतिक घटनाक्रमों में उनकी भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। आयतुल्लाह मुदर्रिस सदैव ईरान की स्वतंत्रता एवं स्वाधीनता के बारे में सोचते थे और इस विषय पर बल देते थे कि धर्म राजनीति से पृथक नहीं है। ईरान के तत्कालीन नरेश रज़ा ख़ान कि जो विदेशी देशों पर आश्रित था उसका मुक़ाबला करते थे। वह अपने भाषणों द्वारा जनता को जागरुक एवं सावधान करने का प्रयास करते रहते थे। रज़ा ख़ान के तत्वों ने अनेक बार आयतुल्लाह मुदर्रिस की हत्या का प्रयास किया किन्तु हर बार उनकी जान बच गई। अंततः रज़ा ख़ान ने उनका निर्वासन कर दिया और उन्हें ख़ुरासान के काश्मर नगर भेज दिया। कुछ समय बाद रज़ा ख़ान ने उनकी हत्या का आदेश दे दिया। इस प्रकार, वर्ष 1937 में इस सक्रिय प्रतिरोधी धर्मगुरु को शहीद कर दिया गया। आयतुल्लाह मुदर्रिस ने ईरान के राजनीतिक क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण कार्य अंजाम दिए कि जिनके चिन्ह अभी तक शेष हैं।


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Nov १६, २०१५ १५:२२ Asia/Kolkata
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