दमावंद पर्वत की चोटी, अलबुर्ज़ पर्वत श्रंखला के पवर्तों की सबसे ऊंची और भव्य चोटी है।

  दमावंद पर्वत, राजधानी तेहरान से 75 किलोमीटर पूर्वोत्तर में स्थित है।  दमावंद पर्वत पर प्राकृतिक झीलें, ख़ुश्बूदार वनस्पतियां, जंगली फल और फूल तथा सुन्दर झरने पाए जाते हैं।  यहां पर पाए जाने वाले शांतिपूर्ण वातावरण ने इसकी सुन्दरता में चार चांद लगा दिये हैं।  हालांकि दमावंद पर्वत की चोटी, उत्तरी ईरान के माज़ंदरान प्रांत में स्थित है किंतु इस पर्वत तक पहुंचने के अधिकांश मार्ग, तेहरान प्रांत से ही होकर गुज़रते हैं।

अलबुर्ज़ पर्वत श्रंखला, उत्तरी ईरान में स्थित हैं।  यह पर्वत श्रंखला, सफेद रूद धाटी के समानांतर, कैस्पियन सागर के दक्षिणी तटवर्ती क्षेत्र से गुरगान घाटी तक फैली हुई है।  अलबुर्ज़ पर्वत श्रंखला, एक बहुत बड़े धनुष के आकार में माजंदरान के मैदानी क्षेत्र से ईरान के केन्द्रीय पठार के बीच में स्थित है।  हम जितना भी कैस्पियन सागर से दक्षिण की ओर बढ़ते हैं, अलबुर्ज़ पर्वत श्रंखला की ऊंचाई बढ़ती जाती है।  इस पर्वत श्रंखला के उत्तरी भाग में उसकी ऊंचाई के अनुपात में नाना प्रकार की वनस्पतियां पाई जाती हैं।

भौगोलिक दृष्टि से अलबुर्ज़ पर्वत श्रंखला को तीन भागों में बांटा गया है।  उत्तरी पर्वत श्रंखला, दक्षिणी पर्वत श्रंखला और केन्द्रीय पर्वत श्रंखला।  अलबुर्ज़ की केन्द्रीय पर्वत श्रंखला में कंदवान पर्वत, लार और फ़ीरूज़कूह आते हैं।  यह पर्वत नूर नदी के माध्यम से उत्तरी पर्वत श्रंखला से अलग हो जाते हैं और दमावंद पर्वत की चोटी तक फैले हुए हैं।  अलबुर्ज़ पर्वत श्रंखला का यह भाग, इस पर्वत श्रंखला का सबसे ऊंचा भाग है।  इस चोटी की ऊंचाई 4000 मीटर है।  दमावंद पर्वत की चोटी, समुद्र की सतह से 5671 मीटर ऊंची है जो, अलबुर्ज़ पर्वत श्रंखला की सबसे ऊंची चोटी है।

ईरान की पौराणिक गाथाओं में दमावंद पर्वत और उसकी चोटी के बारे में बहुत कुछ कहा गया है।  ईरान के विश्वविख्यात कवि फ़िरदौसी ने भी दमावंद के बारे में कविताएं कही हैं।  ईरान आने वाले बहुत से पर्यटकों ने भी अपने यात्रा वृतांतों में दमावंद पर्वत और उसकी चोटी के बारे में बहुत कुछ लिखा है।  इसका मुख्य कारण यह है कि दमावंद पर्वत की चोटी, अपनी ओर देखने वालों को विशेष रूप से आकर्षित करती है।

लारीजान का गर्म पानी

 

लगभग डेढ सौ साल पहले जर्मनी के एक डाक्टर एवं कूटनयिक हैनरिश ने यूरोपीय देशों, मिस्र, तुर्की और क़फ़क़ाज़ की यात्रा के बाद ईरान की यात्रा की।  अपने यात्रा वृतांत में उन्होंने दमावंद पर्वत पर चढ़ने के अपने अनुभवों का उल्लेख किया है।  वे लिखते हैं कि मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूं कि ईरान के पहाड़, यूरोपीय देशों के पहाड़ों से अधिक ख़ूबसूरत हैं।

हैनरिश के अतिरिक्त मैरिस ब्राउड और क्रिस्टल पूकिये ने भी दमावंद पर्वत का सफर किया है।  उनका कहना है कि ईरानियों में पर्वतारोहण के बारे में विशेष रूचि पाई जाती है।  वे लिखते हैं कि पश्चिम से पूरब के रास्त में दमावंद पर्वत की चोटी, सबसे ऊंची पहाड़ी चोटी है।  वे कहते हैं कि इसका महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह, हिमालय पर्वत श्रंखला का प्रेवश द्वार है।  दमावंद, विदेशी पर्वतारोहियों के लिए बहुत ही आकर्षक है।

दमावंद की चोटी, अलबुर्ज़ पर्वत श्रंखला की सबसे ऊंची चोटी है और एशिया की ज्वालामुखीं चोटियों में सबसे ऊंची है।  दमावंद की चोटी, दमावंद नगर से 35 किलोमीटर उत्तर तथा पड़ोसी नगर लारीजान के निकट स्थित है।  यह चोटी शंकुआकार है जो स्वंय में अद्वितीय है।  विश्व के ऊंचे पर्वतों जापान के 3770 मीटर ऊंचे फूजीयामा पर्वत और आर्मीनिया के 5000 मीटर ऊंचे आरारात पर्वतों की चोटियां भी शंकुआकार हैं किंतु इन दोनो पहाड़ों की ऊंचाई दमावंद पर्वत से कम है।

कहा जाता है कि लगभग एक लाख वर्ष पहले दमावंद का ज्वालामुखी शांत हुआ था।  इस ज्वालामुखी का अग्र भाग पर गंधक की मोटी परत है।  दमावंद पर्वत की 4000 मीटर की ऊंचाई पर गंधक के बड़े-बड़े टुकड़े पाए जाते हैं।  इन टुकड़ों का रेडियस लगभग 100 मीटर है जबकि इनकी ऊंचाई 30 मीटर तक है।  इनपर सामान्यतः बर्फ़ जमी हुई है।  गर्मियों के दौरान दमावंद पर्वत की चोटी का तापमान, दोपहर से शाम 4 बजे के बीच लगभग माइनस चार डिग्री सेंटीग्रेट होता है।

दमावंद की चोटी तक पहुंचने के लिए कई रास्ते हैं।  इन रास्तों में सबसे उचित और मश्हूर रास्ता, पोलोर गांव से होकर गुज़रता है जो उत्तरी ईरान के हेराज़ मार्ग पर स्थित है।  इसके अतिरिक्त वहां तक पहुंचने के लिए 16 अन्य मार्ग भी हैं।  इनमें से 4 रास्ते एसे हैं जिनसे लोग अधिकतर वहां जाते हैं।

उत्तरी अलबुर्ज़ पर्वत के हरेभरे क्षेत्र के विपरीत, दमावंद गर्मियों में शुष्क रहता है।  यही कारण है कि पर्वतारोही सामान्यतः पानी के लिए हिमनद का प्रयोग करते हैं।  दमावंद पर्वत के उत्तरी और पूर्वोत्तरी भाग में जिसपर सीधे रूप में सूर्य का प्रकाश नहीं पड़ता, विभिन्न हिमनद पाए जाते हैं।

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बर्फ की छत के नाम से मश्हूर दमावंद पर्वत के पूर्वोत्तरी ठंडे क्षेत्रों में पर्वतारोहण कोई सरल काम नहीं है बल्कि बहुत कठिन है।  इस क्षेत्र में केवल दक्ष और अनुभवी पर्वतारोही ही पहाड़ पर चढ सकते हैं।  इसके विपरीत दक्षिणी क्षेत्र से दमावंद पर चढ़ने के मार्ग में धूप खिली हुई होती है जिसके कारण यह मार्ग पर्वतारोहियों के लिए अधिक उपयुक्त है।  इस मार्ग में पर्वतारोहियों के रास्ते में बर्फ भी बहुत कम होती है।  इस ओर से दमावंद पर्वत पर चढ़ने के लिए पर्वतारोहियों को 4100 मीटर ऊंचाई पर स्थित बेसकैंप से आधी रात में निकलना पड़ता है ताकि सुबह सूरज निकलने से पहले वे अपने गंतव्य पर पहुंच चुके हों।  इसका एक कारण यह भी है कि इस क्षेत्र में सूरज निकलने के बाद गंधक की बू हर ओर फैली होती है जिसके कारण पर्वतारोहियों को सांस लेने में परेशानी होती है।

दमावंद पर्वत पर 2000 मीटर से 3500 मीटर की ऊंचाई पर बहुत बड़ी संख्या में विशेष प्रकार के फूल पाए जाते हैं जिन्हें, “शक़ाएक़” कहा जाता है।  यह फूल, वसंत में खिलते हैं जिनके कारण चारों ओर सुन्दरता दिखाई देती है।  दमावंद पर्तव में विभिन्न स्थानों पर अति मूल्यवान वनस्पतियां पाई जाती हैं जिनकी सुगंद वातावरण में फैली रहती है।  दमावंद पर्वत के आकर्षक स्थानों में से तीन गुफाएं भी मश्हूर हैं कबूतरली, अस्क, गुले ज़र्द।  निःसन्देह, गुले ज़र्द नामक गुफा, ईरान की प्राकृतिक सुन्दरता में से एक है। गुफा के भीतर Stalagmite पाए जाते हैं।  यह गुफा के भीतर इस प्रकार हैं जैसे गुफा की छत मे क़ंदील लटक रही हो।  गुफा के भीतर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर ठंडे पानी के कुछ हौज़ भी हैं।  ग़ारे गुले ज़र्द, और लार तक फैला हुआ उसका क्षेत्र, प्राकृतिक दृष्टि वे विशेष महत्व का स्वामी है।  यह न केवल पर्वतारोहियों के लिए बल्कि प्राकृति के प्रेमियों के लिए भी आकर्षक स्थल है।

यहां का एक अन्य दर्शनीय स्थल, लारीजान है जहां पर प्राकृतिक गर्म पानी पाया जाता है।  यहां पर दो मश्हूर झरने हैं।  एक गंधक के पानी का है जो समुद्र की सतह से 2380 मीटर की ऊंचाई से बहता है जबकि दूसरा लौह युक्त पानी का है जिसका पानी 2450 मीटर की ऊंचाई से नीचे आता है।  यहां पर कुछ स्वीमिंग पूल और हमाम बनाए गए हैं जहां पर त्वचा रोगी, गठिया के बीमार, सांस लेने में तकलीफ वाले और मानसिक बीमारी का शिकार लोग पहुंचकर यहां के पानी से लाभ उठाकर अपना उपचार करते हैं।

सफेद रूद धाटी

 

माज़ंदरान प्रांत के आमुल नगर से 80 किलोमीटर की दूरी पर आबअली के निकट अस्क नामक झरना है।  खनिज पदार्थों की विशेषताओं वाले इसके पानी से लाभ उठाने दूर-दूर से लोग आते हैं।  इस झरने में जो पानी मौजूद है वह बहुत सी बीमारियों के उपचार में लाभदायक होता है।  इसके अतिरिक्त लार क्षेत्र में भी दमावंद पर्वत के कुछ दर्शनीय स्थल पाए जाते हैं जिनमें से एक ऐसा स्थान है जहां पर जाड़ों में आठ मीटर तक बर्फ आती है।  गर्मियों में बहुत से लोग यहां पर छुटटियां बिताने आते हैं।

दमावंद पर्वत के दक्षिणी छोर पर एक ऐसा झरना है जिसका पानी जम चुका है अर्थात बर्फ़ हो चुका है।  इसकी ऊंचाई 7 मीटर है जबकि जमी हुई वर्फ की चौड़ाई 3 मीटर है।  इसकी बर्फ़ पिघलती नहीं है।  बर्फ के इस झरने की विशेषता यह है कि सूरज की गर्मी में इसका बर्फ थोड़ा पिघलता है किंतु शाम के बाद फिर वह जमने लगता है।  इस झरने के ठीक ऊपर एक बड़ा तालाब है जिसका पानी पूरे साल बर्फ के रूप में जमा रहता है।  बर्फ के इस झरने की समुद्र तल से ऊंचाई 5100 मीटर है।  मध्यपूर्व में यह झरना अद्वतीय है।

 

Oct २६, २०१६ १६:१५ Asia/Kolkata
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