ईरान बहुत विशाल भूभाग पर फैले होने, घुमावदार पत्थर की चट्टानों, ऊंची नीची ज़मीनों व विशेष जलवायु परिस्थिति से संपन्नता के कारण मूल्यवान प्राकृतिक चीज़ों का उत्पत्तिस्थान है।

ईरान की भूमि नाना प्रकार के जंगली जानवरों व वनस्पतियों से समृद्ध है। इस विशेष जलवायु परिस्थिति के नतीजे में ईरान में लगभग 8000 प्रकार की वनस्पतियां, 517 प्रकार के पक्षी, 234 प्रकार के रेंगने वाले कीड़े-मकोड़े,174 प्रकार की मछलियां, 194 प्रकार के स्तनधारी और 22 प्रकार के जल-थल में रहने वाले जीव, और उल्लेखनीय संख्या में इनवर्टब्रेट अर्थात बिना रीढ़ की हड्डी वाले जीव पाए जाते हैं। इन वनस्पतियों व जीव जन्तुओं में बहुत सी प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं।

ईरान का प्रकृति व वन्य जीवन का म्यूज़ियम तेहरान में अलबुर्ज़ पर्वत श्रंख्ला के पूर्वोत्तर में दाराबाद नामक इलाक़े में स्थित है। इस इलाक़े का मौसम बड़ा सुहाना रहता है। इस म्यूज़ियम में, प्राकृतिक इतिहास के म्यूज़ियमों में मौजूद चीज़ों, दुनिया के वन्य जीवन के पार्कों और क्षेत्रीय स्तर पर दुर्लभ चीज़ों के म्यूज़ियमों के नमूने मौजूद हैं। 1993 में तेहरान की नगरपालिका ने इस म्यूज़ियम का उद्घाटन किया ताकि लोग सांस्कृतिक व प्राकृतिक धरोहरों से परिचित हों और पर्यावरण व वन्य जीवन की रक्षा की अहमियत को समझें।

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प्रकृति व वन्य जीवन म्यूज़ियम की इमारत 2 मंज़िला है। यह म्यूज़ियम 12000 वर्ग मीटर के क्षेत्रफल पर फैला हुआ है। इस म्यूज़ियम के पास से तेहरान का बहुत बड़ा भाग दिखाई देता है।

प्रकृति व वन्य जीवन म्यूज़ियम को 1997 में म्यूज़ियमों की अंतर्राष्ट्रीय परिषद की सदस्यता मिली और इसी साल यह इंटरनेट से जुड़ा। इस म्यूज़ियम में बहुत से हॉल व विभाग हैं। कुछ हॉल ऐसे हैं जिसमें टैक्सडर्मी किए हुए पशु सामूहिक रूप में या अकेले रखे गए हैं। टैक्सडर्मी उस कला को कहते हैं जिसमें मृत जानवरों की खाल में मसाला लगाकर व भूंसा भरके उन्हें रखा जाता है जो दिखने में जीवित लगते हैं। कुछ भाग में जीवित पशु भी रखे गए हैं। इस म्यूज़ियम में पांच विभाग ऐसे हैं जहां जीवित पशु रखे हुए हैं। इनमें विभिन्न प्रकार के स्तनधारी, पक्षी, जलचर, रेंगने वाले और कीड़े मकोड़े रखे हुए हैं। म्यूज़ियम की इमारत के पहले मंज़िले पर अनेक हॉल हैं कि जिनके बीचो बीच में गोलाकार स्थान बनाया है जिनमें नाना प्रकार के सुदंर पक्षी रखे हुए हैं। ज़्यादातर पक्षियों को उनके जीवन के प्राकृतिक माहौल में रखा गया है।

म्यूज़ियम में एक के बाद एक हॉल में पशुओं को बहुत ही सुंदर ढंग से रखा गया है। एक हॉल में चीता हिरण के झुंड पर हमला करता दिखाई दे रहा है जबकि दूसरी ओर फ़्लैमिन्गों का समूह इस तरह पर फैलाए हुए है कि मानो उड़ना चाह रहा है। इसी प्रकार हॉल के एक कोने में एक भेड़िया हमला करने की तय्यारी करता दिखाई दे रहा है जबकि दूसरी ओर बहुत बड़ा भालू खड़ा हुआ दिखाई देता है। 

हॉल नंबर एक को एशिया, यूरोप और उत्तरी अमरीका से विशेष किया गया है। इस हॉल में अजगर, भारत और श्रीलंका के मोर के जोड़े, बंगाल का टाइगर और एशिया के दूसरे महत्वपूर्ण पशु दिखाई देते हैं।

हाल के यूरोप व उत्तरी अमरीकी भाग में स्तनधारी पशु रखे गए हैं। इस भाग में दुनिया का सबसे बड़ा हिरण, यूरोप का पीले रंग का हिरण, उत्तरी अमरीका का ग्रिज़्ली भालू और साइबेरिया के टाइगर रखे गए हैं। इसी प्रकार एशिया और यूरोप के पक्षियों को एक साथ रखा गया है।

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हॉल नंबर 2 उत्तरी ईरान से विशेष है। जिसमें अर्मनी मेढ़ा, हिरण, नरहिरण, यूरेसियन किंग आउल, मनाल, फ़्लैमिन्गो और पश्चमोत्तरी ईरान में पाए जाने वाले पशु रखे गए हैं। हॉल के उत्तरी छोर में 4 मीटर लंबी कैस्पियन सी में पायी जाने वाली बलूग मछली और कैस्पियन हिरकानी जंगल में पायी जाने वाली प्रजातियां रखी गयी हैं।

रेड डियर, जंगली सूअर, फ़ेलिफॉर्मिक बिल्ली, जंगली बिल्ली, जंगली छोटी बिल्ली, स्याहगोश, लोमड़ी और भेड़िया भी इस म्यूज़ियम में रखे गए हैं। इसी प्रकार इस हाल में पूर्वोत्तरी ईरान के छोटे आकार की जंगली भेड़ और पश्चिमोत्ती ईरान के बाइबेक्स भी रखे गए हैं। इसी प्रकार इस हॉल में ईरान में पाए जाने वाले और पलायनकर्ता पक्षी टैक्सडर्मी किए हुए रखे हुए हैं।

हॉल नंबर 3 दक्षिणी व केन्द्रीय ईरान से विशेष है। इस हॉल में दाख़िल होते ही ईरान व दुनिया के 2 दुर्लभ स्तनधारी पुश दिखाई देते हैं। एक ईरानी ज़ेब्रा और दूसरा ईरानी चीता है। ये दोनों पशु विलुप्त होने की कगार पर हैं जिन्हें बचाने के लिए विशेष प्रयास किया जा रहा है। इस हॉल में ऊपर की तरफ़ निगाह उठाने पर गिद्ध की एक प्रजाति का नमूना दिखाई देता है। इस हॉल में रखे गए नमूने से पता चलता है कि ईरान के दक्षिणी व केन्द्रीय भाग में विभिन्न प्रकार के पशु बिखरे हुए रूप में मौजूद हैं न यह कि एक जंगल के समान कि जहां विभिन्न प्रकार के पशु एक साथ दिखाई देते हैं। जैसा कि इस हाल में स्याहगोश, सियार, लोमड़ी, लकड़बग्घा जैसे स्तनधारी और विभिन्न प्रकार के सांप और छिपकलियों की मौजूदगी से इसका पता चलता है।

हॉल नंबर तीन में ईरानी और पलायनकर्ता पक्षी टैक्सडर्मी किए हुए रखे गए हैं।                 

हॉल नंबर 4 में अफ़्रीक़ा के कुछ स्तनधारी और पलायनकर्ता पक्षी रखे हुए हैं। इसी प्रकार इस हॉल में ईरान की कुछ स्तनधारियों की प्रजाति और पक्षी भी रखे गए हैं। इस हॉल के प्रवेश द्वार पर अफ़्रीक़ा के जंगली भैंसे का खोपड़ा सींग के साथ, इसी प्रकार अफ़्रीक़ी हाथी का दांत, काला गैंडा, जंगली कुत्ता, तेंदुआ और अफ़्रीक़ी सूअर टैक्सडर्मी रूप में रखे गए हैं। इस हॉल के सीधे छोर पर अफ़्रीक़ा महाद्वीप के ३ और जुगाली करने वाले पशु जैसे हिरण, गाय, भैंस, बैल, भेड़-बकरियां रखी गयी हैं।

इस म्यूज़ियम का एक और दर्शनीय भाग एक्वेरियम विभाग है जिसमें नाना प्रकार की मछलियां और रेंगनेवाले जलचर दिखाई देते हैं। इस हॉल में जीवित मछलियां और रेंगनेवाले प्राणी हैं। जलचर विभाग में मीठे पानी में रहने वाली मछलियां एशिया, अफ़्रीक़ा और दक्षिणी अमरीका से लायी गयी हैं। इसी प्रकार खारे पानी की मछलियां फ़ार्स खाड़ी के जलक्षेत्र से लायी गयी हैं। एक्वेरियम में कुछ ऐसी मछलियों की प्रजातियां हैं जो दुनिया में दुर्लभ समझी जाती हैं।

रेंगने वाले विभाग में ज़हरीले और अर्ध ज़हरीले सांप रखे गए हैं। इसी प्रकार इस विभाग में टैक्सडर्मी किए हुए जलचर व रेंगने वाले प्राणियों के नमूने रखे हुए हैं। 

हॉल नंबर सात भूविज्ञान से विशेष है। इसमें भूविज्ञान के विभिन्न चरणों को स्कीमैटिक और डाइअरैम के रूप में दर्शाया गया है। हर एक डाइअरैम जानवर और वनस्पति के वजूद की विशेषताओं का वर्णन करता है। इस हॉल में ऐसे बहुत से खनिज पदार्थ और पत्थर रेख हुए हैं जिनकी दवाओं, उद्योग और निर्माण के क्षेत्र में बहुत उपयोगिता है।

कीड़े-मकोड़े का हॉल, म्यूज़ियम के उत्तरी छोर पर स्थित है। इस हॉल की स्थापना का उद्देश्य स्थानीय व ग़ैर स्थानीय कीड़े मकोड़ों के बारे में परिचित कराना है। इस हॉल में इसी तरह नाना प्रकार के झींगुर, बिच्छु और रेंगने वाले जीव दिखाई देते हैं।   

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इस म्यूज़ियम में टैक्सडर्मी और चर्मशोधन का कारख़ाना भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस कारख़ाने में जीव-जन्तुओं को दुनिया के ताज़ा वैज्ञानिक शोध के अनुसार, टैक्सडर्मी किया जाता है। टैक्सडर्मी का कारख़ाना ऐसी जगह बनाया गया है कि पर्यटक बड़ी आसानी से यह दृष्य देख सकते हैं कि किस तरह जीव-जन्तु की टैस्कडर्मी की जाती है। उल्लेखनीय है कि इस म्यूज़ियम में टैक्सडर्मी शुदा आधे से ज़्यादा पशु इस म्यूज़ियम को शिकारियों या प्रकृति में रूचि रखने वालों की ओर से भेंट किए गए हैं। भेंट किए हुए जीव-जन्तु पर भेंट करने वाले का नाम भी लिखा गया है।

म्यूज़ियम में लाइब्रेरी भी है जिसमें 15000 से ज़्यादा किताबें हैं। ये किताबें तेहरान में पर्यावरण, वनस्पति, जीव-जन्तु और भूगर्थविज्ञान के विषय पर बहुत ही मूल्यवान किताबें समझी जाती हैं।

म्यूज़ियम के प्रवेश द्वार पर यह लाइब्रेरी है ताकि पर्यटकों की उस तक पहुंच आसानी से हो सके। यह ईरान की पहली लाइब्रेरी है जिसे 1997 में इंटरनेट के ज़रिए लोगों के इस्तेमाल के योग्य बनाया गया। इसी प्रकार इस म्यूज़ियम में एम्फ़ीथेटर भी है जिसमें 70 लोगों के बैठने की जगह है। इसमें प्राकृतिक वातावरण से संबंधित फ़िल्में दिखाई जाती हैं। इसी प्रकार इस थेटर में विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के लिए क्लासें भी चलती हैं और प्राकृतिक वातावरण के विषय पर सेमिनार भी आयोजित होते हैं।

म्यूज़ियम के बग़ल में पशु चिकित्सा क्लिनिक भी है जहां विभिन्न प्रकार के घरेलू जानवरों का उपचार होता है। इसी प्रकार इस क्लिनिक के अधीन एक सुपरमार्केट भी है जहां विभिन्न प्रकार के पक्षी, गिलहरियां, ख़रगोश, कुत्ते, बिल्लियां, कछुए इत्यादि बिकते हैं।

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म्यूज़ियम में पारंपरिक चाय की दुकान उत्तरी तेहरान के लुभावने मौसम में आराम करने के लिए बहुत अच्छी जगह है। म्यूज़ियम के हरियाली भरे कम्पाउंड से पूरे तेहरान का नज़ारा भी म्यूज़ियम देखने वालों को बहुत शांति प्रदान करता है। वास्तव में यह म्यूज़ियम ईरान के प्राकृतिक इतिहास का न सिर्फ़ यह कि सबसे समृद्ध म्यूज़ियम है बल्कि एक संपूर्ण शिक्षा केन्द्र भी है। कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि म्यूज़ियम के अधिकारियों ने कला और प्रौद्योगिकी के संगम का ऐसा नज़ारा पेश किया है कि पर्यटक घंटों मनोरंजन कर सकते हैं और साथ ही अनंत सृष्टि के एक आयाम से परिचित हो सकते हैं।

 

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Nov १३, २०१६ १७:१८ Asia/Kolkata
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