कई मिलियन की आबादी वाला तेहरान शहर अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण अनेक अद्वितीय प्राकृतिक आकर्षणों से संपन्न है।

इसके साथ साथ इस शहर के अधिकारियों ने शहर के भीतर प्राकृतिक वातावरण को उपयोग करते हुए नाना प्रकार के पार्क बनाए हैं।

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तेहरान के पूर्वोत्तर में लवीज़ान जंगलों के बीच में पक्षियों की देखभाल का सबसे बड़ा पार्क बनाया गया है जिसे पार्के परंदगान कहते हैं। हालांकि यह ईरान में पक्षियों की देखभाल का पहला पार्क नहीं है लेकिन अन्य पार्कों की तुलना में इसे अधिक बड़ा व संपूर्ण माना जाता है। तेहरान का पक्षियों का पार्क 23 हेक्टर पर फैला हुआ है। यह पार्क स्वच्छ प्राकृतिक वातावरण में बनाया गया है और नाना प्रकार के पक्षियों की देखभाल के लिए उचित स्थल है। इस समय इस पार्क में 55 प्रकार के 6500 से ज़्यादा पक्षी हैं। पार्क के पहले हिस्से में ऐसे पक्षियों को रखा गया है जो मौजूदा वातावरण में फ़िट बैठते हैं। इस पार्क की एक विशेषता यह है कि इस पार्क में पक्षी आज़ाद हैं इस अर्थ में कि इस कॉम्पलेक्स में लगभग 90 फ़ीसद पक्षी पिंजड़े में नहीं बल्कि खुले स्थान में रहते हैं। अगर आपने अब तक सुंदर सफ़ेद हंस, पेलिकन को मछलियों का शिकार करते हुए, एक पैर पर खड़े फ़्लैमिंगो, कलहंस और रंग बिरंगी बत्तखों को चूज़ों के साथ पानी में तैरते हुए सिर्फ़ डॉक्यूमेंट्री फ़िल्मों में देखा है तो आप इन पक्षियों को अपनी आंखों से इस पार्क में क़रीब से देख सकते हैं।

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पक्षियों के पार्क की एक विशेषता इसे बनाने की सुंदर डिज़ाइन है। इस पार्क में पक्षियों के विभिन्न सेक्शन में जाने वाले रास्ते का फ़र्श पक्का बना हुआ जिसके दोनों ओर पेड़ और फुलवारियां लगी हुयी हैं। पार्क में जगह जगह पर लकड़ी, नर्कुल और पयाल का सायबान बना हुआ है। इसी तरह जगह जगह पर विभिन्न डिज़ाइनों की लकड़ी की बेंच रखी हुयी हैं। इसी प्रकार सिर्फ़ लकड़ी का सायबान भी है। छोटे छोटे सुंदर झरनों, लकड़ी के पुल और तालाब इस बाग़ की अन्य विशेषताएं हैं। इसी प्रकार विभिन्न मौसम में नाना प्रकार के फूलों की फुलवारियां लगायी जाती हैं। कुल मिलाकर इस पार्क में वे वनस्पतियां और पेड़ हैं जो लवीज़ान के जंगल में पाए जाते हैं।

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बाग़े परंदगान अर्थात पक्षियों के पार्क के मुख्य रूप से दो हिस्से हैं। एक हिस्से में पानी में रहने वाले पक्षी और दूसरे में थल में रहने वाले पक्षी। पहले हिस्से में उन पक्षियों को पिंजड़े में रखा जाता है जो उड़ नहीं सकते। दूसरे हिस्से में जिसका क्षेत्रफल पहले वाले हिस्से से कम है, पार्क के उत्तरी भाग में स्थित है। यह हिस्सा पानी में रहने वाले पक्षियों से विशेष है। इस हिस्से में वे पक्षी रहते हैं जो उड़ सकते हैं। पार्क के रूप में बने इस बाग़ के शुरु के हिस्से में तोते और कबूतर रहते हैं। कुछ पक्षी बोलते हैं और पर्यटकों से अतिथि सत्कार वाले शब्द बोलकर उनका ध्यान अपनी ओर खींचते हैं। जैसे जैसे आगे बढ़ेंगे वैसे वैसे शिकार करने वाले, पहाड़ी क्षेत्र, मरुस्थल और पानी में रहने वाले पक्षी दिखाई देंगे जिनके लिए प्राकृतिक वातावरण को मुहैया किया गया है। इन पक्षियों को आप बहुत निकट से देख सकते हैं। सिर्फ़ तोतों की प्रजातियों और शिकारी पक्षियों को पिंजड़े में रखा गया है। इनके पिंजड़ों को इस तरह बनाया गया है कि वे काफ़ी ऊंचाई तक उड़ सकते हैं। पक्षियों के पार्क के आख़िरी हिस्से में अफ़्रीक़ी शुतुरमुर्ग़ और ईरान में पाले गए शुतुरमुर्ग़ रखे गए हैं। हर पिंजड़े के बग़ल में एक बोर्ड  लगा है जिस पर उस पक्षी का आम और वैज्ञानिक दोनों नाम अंग्रेज़ी लिखे हुए हैं। पार्क के सबसे उत्तरी छोर पर शिकारी पक्षियों के पिंजड़े में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचते हैं। इस हिस्से में कई प्रकार के बाज़ रखे गए हैं। ये बाज़ बिना हाल के बड़े बड़े पेड़ के तने पर रहते हैं। इस हिस्से में भांस खाने वाले पक्षी भी मौजूद हैं। इसी हिस्से में छोटे छोटे पिंजड़ों में उल्लू और बाज़ की कुछ प्रजातियां भी रहती हैं।

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बाग़ के बीच वाले हिस्से में ट्रॉलिकल इलाक़ों में रहने वाले पक्षी जैसे मोर, पेलिकन, फ़्लैमिन्गो और मनाल रखे गए हैं। इस हिस्से में झरनों और तालाबों ने बहुत ही मनमोहक दृष्य उत्पन्न किया है। इन झरनों और तालाबों में बाग़ के ऊपरी भाग से पानी पहुंचता है। पार्क के दक्षिणी भाग में पानी में रहने वाले पक्षी जैसे बत्तख़, काले व सफ़ेद हंस, और कलहंस रहते हैं।             

तेहरान स्थित बाग़े परंदगान या पक्षियों का पार्क के पहले हिस्से का उद्घाटन 2013 में हुआ। इस पार्क में रेस्टोरेन्ट, सायबान, बिजली से चलने वाली गाड़ी, बग्घी और बच्चों के लिए खेलने का मैदान भी है। इस प्रकार इस बाग़ में पक्षियों की देखभाल के लिए संगरोधन या क्वारन्टीन की भी सुविधा बनायी गयी है। अगर कोई पक्षी उपहार करना चाहे तो पहले उस पक्षी को संगरोधन या क्वारन्टीन की प्रक्रिया ने गुज़रना होता है उसके बाद पक्षी को बाग़ में दूसरे पक्षियों के साथ छोड़ा जाता है।

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ईरान मूल्यवान ऐतिहासिक व पुरातात्विक अवशेषों से समृद्ध देश है। इनमें से कुछ अवशेष विश्व धरोहर की सूंचि में पंजीकृत हैं जिसे लगभग सभी लोग जानते हैं। मिनिअचर कला म्यूज़ियम में ईरान के ऐतिहासिक व पर्यटन आकर्षण मिनिअचर माकेट में प्रदर्शित किए गए हैं। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि मिनिअचर म्यूज़ियम ईरान की प्राचीन संस्कृति व सभ्यता को पहचनवाने वाला कॉम्पलेक्स है। इस म्यूज़ियम को देखने वाले ईरान के उन प्राचीन धरोहरों के मिनिअचर रूप को देख सकते हैं जो यूनेस्को की विश्व धरोहर की सूचि में पंजीकृत हैं। मिनिअचर म्यूज़ियम में 12 मिनिअचर ऐसे हैं जिन्हें ईरानी कलाकारों ने बनाए हैं। जैसे तख़्त जमशीद, चुग़ाज़न्बील, नक़्शे जहान मैदान, पासारगाद, तख़्ते सुलैमान, गुंबद सुल्तानिये, बम का क़िला, बीसुतून के शिलालेख, शैख़ सफ़ीयुद्दीन अर्दबीली का मक़बरा इनमें शामिल हैं। इसके अलावा इस कॉम्पलेक्स में गैलरी और लाइब्रेरी सहित विभिन्न विभाग हैं। गैलरी में पुरातन अवशेष के चित्र और इससे संबंधित किताबें हैं जो इस काम्पलेक्स को संपूर्ण बनाती है।    

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तेहरान का सुंदर झरना आबशारे तेहरान के नाम से मशहूर है। यह तेहरान के सबसे बड़े मनोरंजन कॉम्पलेक्स में से एक है जिसे अलबुर्ज़ पर्वतांचल को पहचान देने और इंसान व प्रकृति के बीच संपर्क बनाने के लिए प्राकृतिक मसालों से बनाया गया है। इस झरने तक पहुंचने के लिए आपको तेहरान के हिम्मत राजमार्ग से पश्चिमी ओर जाना होगा। जब आप हिम्मत राजमार्ग पर आप चलते चलते शहीद बाक़ेरी के लिए निकलने वाले मार्ग पर मुड़ेंगे तो वहां से थोड़ी-थोड़ी दूर पर बोर्ड लगे हैं जो आपको आब्शारे तेहरान या तेहरान झरने का पता बताते हैं। इन बोर्डों की मदद से आप इस झरने तक आसानी से पहुंच जाएंगे। इस झरने के निचले भाग में खड़े होकर आस-पास देखेंगे तो आपको लगेगा कि आप एक अछूती व शांति प्रदान करने वाले प्राकृतिक स्थल में मौजूद हैं। पार्क के शुरु में बनी सीढ़ियों से झरने के आरंभिक भाग तक पहुंचते हैं। झरने की ओर जाते समय सबसे पहले एक सुंदर तालाब पड़ता है जो आपको इस बात की शुभसूचना देता है कि आपके इस एक दिवसीय भ्रमण में आगे ख़ुबसूरत स्थल पड़ेंगे। यह तालाब आपको ज़्यादा से ज़्यादा सुदंर चीज़ो को देखने के लिए आपको ऊपर जाने के लिए प्रेरित करता है यहां तक कि आप ज़मीन से लगभग 200 मीटर की ऊंचाई पर पहंज जाते हैं। इस 200 मीटर की ऊंचाई पर सबसे पहला झरना है। इस ऊंचाई पर पास में बने सायबान में सुस्ता सकते हैं और शांतिपूर्ण माहौल का आनंद ले सकते हैं। सामने नीचे की ओर आपको तेहरान नज़र आएगा। यहां से जिस ओर आप नज़र उठाएंगे आपको प्राकृतिक सौंदर्य किसी तस्वीर के फ़्रेम के समान नज़र आएगा। यहीं से कृत्रिम झील चितगर भी दिखाई देती है। इन आकर्षक दृष्यों को देखने के बाद यह कल्पना करना बहुत कठिन लगता है कि इस आकर्षक स्थल को इंसान ने बनाया है।

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तेहरान झरने के सबसे ऊपरी भाग में एक कैनपी है जिसे पानी को बांटने वाली मीनार कहते हैं। यह मीनार लकड़ी की बड़ी कैनपी की तरह दिखती है और इसके ठीक बीच में एक छोटा का हौज़ है। इस कैनपी के चारों ओर बिछी बेन्चें बैठ कर नीचे के दृष्य देखने के लिए बहुत उचित स्थान है। जब आब्शारे तेहरान झरने के सबसे ऊपरी हिस्से पर पहुंचते हैं तो वहां से इस स्थल पर बने 8 छोटे और बड़े हौज़ दिखाई देते हैं। शुरु के तीन हौज़ छोटे हैं जबकि बाद के हौज़ थोड़े बड़े हैं। यह सब हौज़ स्वीमिंग पूल की तरह बनाए गए हैं। हर हौज़ के चारों ओर विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों ने इस सौंदर्य में चार चांद लगा दिए हैं।

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आब्शारे तेहरान झरने स्थल के पास नाना प्रकार के शहतूत और मेडलर के पेड़ लगे हुए हैं। इस पहाड़ से ऊपर जाने और हौज़ तक पहुंचने के लिए दो रास्ते हैं। एक पत्थरीला रास्ता है जो पहाड़ के बायीं ओर है और दूसरा मार्ग घुमावदार लंबी सीढ़ी वाला है। यह मार्ग झरने के सीधे हाथ पर स्थित है। तेहरान के इस झरने के ऊपर 6 हौज़ छोटी-बड़ी नालियों से एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसी प्रकार इन हौज़ों के बीच में मौजूद ऊंचाई से झरना बहता है। सबसे ज़्यादा ऊंचाई 10 मीटर है।

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तेहरान के इस झरने के दूसरे आकर्षणों में कैनपी भी है। ये कैनपी पत्थर की लाट पर बनी हैं। ये कैनपी वास्तव में आराम के लिए बहुत अच्छी सायबान हैं।

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Nov २९, २०१६ १३:३५ Asia/Kolkata
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