हमने बताया कि ईरान में हस्तकला उद्योग कई हज़ार साल पुराना है और ईरानियों ने कला रूचि के ज़रिए प्रकृति में मौजूद सभी पदार्थों से ऐसी चीज़े बनायीं कि सबकी सबको हस्तकला उद्योग की श्रेणी में रखा जा सकता है।

ईरान में हस्तकला उद्योग की सैकड़ों शाखाएं हैं जिनमें मिट्टी, पत्थर, लकड़ी, धातु, कपड़ा, चमड़ा और शीशे से चीज़ें बनायी गयी हैं। अलबत्ता विगत में हस्तकला उद्योग लोगों के दैनिक जीवन में बहुत रचा बसा था लेकिन आज इन चीज़ों की जीवन में उपयोगिता उतनी नहीं रह गयी बल्कि इन्हें सजावट के लिए इस्तेमाल किया जाता है। चूंकि विभिन्न कलाओं में काम करने वालों की संख्या ज़्यादा होती है हस्तकला उद्योग को विशेष अहमियत हासिल है, इसमें लाभ भी ज़्यादा होता है और विदेशी मुद्रा भी इसके ज़रिए आती है, इसलिए आर्थिक दृष्टि से ईरान में हस्तकला उद्योग की रक्षा व विस्तार के ये महत्वपूर्ण कारण हैं।

हस्तकला उद्योग को विकासशील देशों के विकास में बहुत प्रभावी तत्व माना गया है। कुछ देशों में हस्तकला उद्योग को रौनक़ देने के लिए किए गए उपाय के अलावा यूनेस्को, अंतर्राष्ट्रीय लेबर संगठन, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और इस्लामी कॉन्फ़्रेंस संगठन से जुड़े इतिहास, कला और संस्कृति अध्ययन केन्द्र जैसी संस्थाओं ने भी इस पर ध्यान दिया है जिससे हस्तकला उद्योग की अहमियत का पता चलता है।

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यह बिन्दु भी अहम है कि पूर्वी देशों में हस्तकला उद्योग शुरु से ही सामाजिक तत्वों के प्रभाव में रहा। इन देशों में हस्तकला का उद्देश्य समाज में रोज़गार बढ़ाना और समाज के वर्गों के लिए आय पैदा करना था। लेकिन धीरे-धीरे इस भावना ने स्थानीय संस्कृति की परंपराओं और राष्ट्रीय पहचान को जीवित करने का स्थान ले लिया। राष्ट्रीय पहचान को बचाने में रूचि रखने वाले इसे बचाने के लिए हस्तकला उद्योग की क्षमता पर ध्यान देना शुरु किया। चूंकि हस्तकला पर ध्यान दिया जाना साम्राज्य के चंगुल में फंसे देशों में उस समय शुरु हुआ जब ये देश दूसरे विश्व युद्ध के बाद साम्राज्य के चंगुल से स्वाधीन हुए, इसलिए हस्तकला उद्योग दुनिया भर में ख़ास तौर पर विकासशील देशों में फैलता गया।

                    

शोध और पुरातात्विक खुदाई में मिली चीज़ों के आधार पर एशिया महाद्वीप को हस्तकला उद्योग का पालना कहा जा सकता है। ये उद्योग ईरान, भारत और चीन में प्राचीन समय से जारी हैं और अनुभव की दृष्टि से बहुत समृद्ध हैं। इन देशों में हस्तकला उद्योग शताब्दियों व सहस्त्राब्दियों से सांस्कृतिक दृष्टि से योगदान देने के साथ साथ आर्थिक व सामाजिक दृष्टि से एक प्रकार का संतुलन बनाने में भी प्रभावी रहा क्योंकि इस तरह के उद्योग नगर व गांव के बहुत संख्या में कलाकार वर्गों के लिए काम व आय का स्रोत बने और इन्हें गांव की अर्थव्यवस्था को रौनक़ देने में महत्वपूर्ण तत्व कहा गया है।

हालांकि तकनीकी स्थिरता और कलाकारों की शारीरिक क्षमता पर निर्भरता हस्तकला व गावं से विशेष उद्योगों की सबसे अहम विशेषता है लेकिन इन उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और शैली लंबे समय तक एक जैसे नहीं रहते बल्कि बड़ी हद तक प्रौद्योगिकी व उद्योग जगत में होने वाले परिवर्तन का अनुसरण करते हैं। अलबत्ता उत्पादन की शैली और उसमें इस्तेमाल होने वाले उपकरण में आए बदलाव से बहुत से उत्पाद धीरे-धीरे हस्तकला उद्योग के दायरे से इस तरह बाहर निकल गए कि अब उनका उत्पादन और उपयोग सिर्फ़ और सिर्फ़ औद्योगिक उत्पाद के रूप में ही संभव है। साथ ही इस वास्तविकता का भी इंकार नहीं किया जा सकता कि नए उपकरण और अच्छे पदार्थ के इस्तेमाल से हस्तकला उद्योग में प्रचलित शाखाओं के फलने-फूलने में बहुत मदद मिली बल्कि कुछ मामलों में उसके बाक़ी रहने में भी प्रभावी हुए हैं।

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दुनिया के सभी क्षेत्रों के हस्तकला उद्योगों में संयुक्त बिन्दु होने के साथ साथ इसकी हर शाखा एक क्षेत्र विशेष की परंपरा और संस्कृति का संदेश देती है। आज विस्तृत संपर्क, सामूहिक संचार माध्यम के उपकरण और दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के एक दूसरे से परिचय के कारण दुनिया के हर क्षेत्र में सुंदर व उपयोगी हस्तकला की पहुंच मुमकिन हो गयी है। घर को हस्तकला और पारंपरिक उत्पादों से सजा कर जीवन में रस भरा जा सकता है। इसी प्रकार कार्यस्थल को भी इन उत्पादों से सजा कर आकर्षक बनाया जा सकता है। यही कारण है कि बहुत से अच्छे डेकोरेटर या सज्जाकार सजाने में हस्तकला उत्पाद का उपयोग करते हैं। इसी प्रकार वे मशीनों के बने हुए आम उपकरणों की जगह पर मूल्यवान कला उत्पाद को इस्तेमाल करते हैं। इस तरह उन्होंने सज्जाकारी की आकर्षक शैली को जन्म दिया।

मिसाल के तौर पर आर्ट नूवो अभियान और उसकी सज्जाकारी की शैली उन्नीसवीं शताब्दी के अंत और बीसवीं शताब्दी के आरंभ में यूरोप वास्तुकला की विभिन्न शाखाओं, सज्जाकारी, इंटीरिअर डेकोरेशन, ग्राफ़िक और चित्रकारी में प्रकट हुयी। यह आंदोलन शुरु में चित्रों, लहरों की तरह वनस्पति के चित्रों, इस्लीमी अर्थात एरबस्क और घुमावदार चित्रों के रूप में प्रकट हुआ और इस कला ने इंटीरियर डेकोरेशन व अपलाइड आर्ट्स में पूर्वी देशों में ख़ास तौर पर इस्लामी-ईरानी कला से बहुत मदद ली।

नूवो आर्ट के कलाकार इमारतों की सतह और चीज़ों को सजाने के लिए इस्लामी सजावट के सौंदर्शशास्त्र के आधार और ऐब्सट्रैक्ट या काल्पनिक डिज़ाइन की पहचान के क्षेत्र में शोध के लिए आकर्षित हुए और इसका उनकी रचनाओं पर भारी असर पड़ा। यह आंदोलन पेशेवरों, कलाकारों, डीज़ाइनरों और वास्तुकारों की कोशिश का नतीजा था। इन सबने संयुक्त हितों के लिए एक दूसरे का साथ दिया। उनका लक्ष्य हस्तकला उद्योग की ओर वापस लौटना और अपलाइड आर्ट्स के अर्थ को फ़ाइन आर्ट्स के स्तर तक ले जाना, डीज़ाइन में सुधार लाना और अंत में सामाजिक स्थिति में सुधार लाना था। चूंकि ये कलाकार एक अलग व नई ज़बान की खोज में थे इसलिए उन्होंने इस्लामी युग में इस्लामी कलाओं और ख़ास तौर पर ईरानी कलाओं और सुंदर सजावटों का अध्ययन किया। ऐसी कला जो उनके नैतिक व आध्यात्मिक विचारों को मशीन के दिन ब दिन बढ़ते प्रभाव के मुक़ाबले में बेहतरीन ढंग से व्यक्त कर सके।

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कला व उद्योग आंदोलन में आगे-आगे रहने वालों में एक विलियम मोरिस भी थे। उन्होंने 13 अप्रैल 1877 में अपने एक दोस्त को ख़त में लिखा, “कल मैंने ईरान के अब्बासी शासन काल के एक क़ालीन को देखा जिसे देख कर मुझे बड़ी हैरत हुयी। मैंने इतनी सुंदर डिज़ाइन नहीं देखी जितनी सुंदर डीज़ाइन इन क़ालीनों पर बने हुए हैं।” इतने सुंदर डिज़ाइन ने मोरिस को वर्षों क़ालीन की डिज़ाइन बनाने के लिए प्रेरित किया। हालांकि वह इस बात पर बल देते थे कि उनकी क़ालीन की डिज़ाइन पश्चिमी व आधुनिक विचारों को पेश करने वाली हो लेकिन उनकी डिज़ाइन पूर्वी डिज़ाइनों से बहुत मिलती जुलती थी। उन्होंने सफ़ियुद्दीन अर्दबीली के मक़बरे में बिछे क़ालीन के विक्टोरिया व एलबर्ट म्यूज़ियम में मौजूद होने की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह क़ालीन अद्वितीय है। यह क़ालीन अपनी तार्किक व सुव्यवस्थित डिज़ाइन से ईरानी क़ालीन की डिज़ाइन के नियम को पेश करता है।

इस प्रकार आज हस्त कला उद्योगों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त मानव धरोहर के रूप में देशों को एक दूसरे के निकट लाने व उनके बीच आपसी सहयोग में प्रभावी तत्व माना जा सकता है और हस्तकला की विशेष शाखा में हर देश के अपने अपने अनुभव के दृष्टिगत यह कला इस सहयोग व पारस्परिक समझ का आधार बन जाएगी।

हर देश के सांस्कृतिक, सामाजिक व आर्थिक ताने-बाने के मद्देनज़र हस्तकला उद्योग के स्थान को ऊपर उठाने के लिए देशों की नीतियों व उपायों की समझ, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हस्तकला उद्योग से जुड़े शोध के क्रम में लाभदायक विषय बन सकता है। तीसरी दुनिया के देशों के साथ साथ अन्य देशों में हस्तकला उद्योग पर ध्यान दिया गया और इस कला-उद्योग को हस्तकला उद्योग के लिए मशहूर कुछ देशों में विकास का साधन माना जाता है।       

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आज विकासशील और विकसित व औद्योगिक देशों सहित दुनिया के हर देश में विशेष प्रकार की हस्तकलाओं को देखा जा सकता है। दुनिया के 230 देशों के बीच लगभग 100 देश अंतर्राष्ट्रीय हस्तकला उद्योग परिषद के सदस्य हैं। इनमें से हर देश में इस उद्योग के स्थान पर हर देश की आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक स्थिति का प्रभाव है।

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Dec १८, २०१६ १६:३२ Asia/Kolkata
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