इस श्रंखला में हमने आपको ईरान के विभिन्न नगरों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, आर्थिक एव कला संबन्धी आकर्षणों से अवगत करवाया। 

जैसाकि आप जानते हैं कि इससे पहले वाली कड़ी को हमने राजधानी तेहरान से विशेष किया था। 

तेहरान की इस मश्हूर सड़क की विशेषता यह है कि इसपर जहां पुराने घर मौजूद हैं वहीं पर ईरान में प्रचलित धर्मों से संबन्धित म्यूज़ियम भी यहीं पर पाए जाते हैं।  इस सड़क को देखने से पता चलता है कि ईरान में अति प्राचीनकाल से विभिन्न धर्मों के लोग सौहार्दपूर्ण ढंग से रहते आए हैं।

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पुराने तेहरान में विभिन्न मुहल्ले हैं जो बहुत घनी आबादी वाले हैं।  इन्हीं पुराने मुहल्लों के बीच एक ऐसी सड़क है जिसपर लगभग सभी धर्मों के मानने वाले रहते हैं।  इस सड़क की इसी विशेषता ने इसे अन्य सड़कों से अलग कर दिया है।  यहां पर मुसलमान, ईसाई, यहूदी, ज़रतुश्ती और अन्य धर्मों के मानने वाले जीवन गुज़ारते हैं।  एक विशेषता यह भी है कि हर धर्मावलांबी के अपने उपासनास्थल भी मौजूद हैं जहां वे शांतिपूर्ण ढंग से उपासना करते हैं।  इस सड़क का वर्तमान नाम है, “ख़याबाने सी तीर” है जो पहले “क़ेवामुस्सलतना” के नाम से जानी जाती थी।  क्योंकि इस सड़क पर विभिन्न धर्मों के मानने वाले और उनके उपासना स्थल मौजूद हैं इसलिए यह ख़ियाबाने अदयान या धर्मों की सड़क के नाम से भी जानी जाती है।

जब हम तेहरान की ख़याबाने-सी तीर के दक्षिण से उत्तर की ओर जाते हैं तो इसके पहले चौराहे पर ईरान का सबसे प्राचीन और प्रथम संग्रहालय मौजूद है।  इस प्राचीन संग्रहालय से गुज़रने के बाद एक बिल्डिंग दिखाई देती है जो एक हिसाब से ईरन के प्राचीन संग्रहालय का भाग है क्योंकि बनावट के हिसाब से यह उसी जैसी लगती है।  वास्तव में यह ईरान का पहला राष्ट्रीय पुस्तकालय है।  शायद आपको याद होगा कि पिछले कार्यक्रम में हमने आपको ईरान के प्राचीन संग्रहालय और राष्ट्रीय पुस्तकाल के बारे में बताया था।  ख़याबाने-सीतीर के दाहिनी ओर एक ऊंची सी इमारत दिखाई देती है जो वास्तव में तेहरान का सबसे पहला अस्पताल है।  इसका नाम है “सीना अस्पताल”।

इससे कुछ ही दूरी पर सेंट पीटर नामक Evangelical Church स्थित है।  यह गिरजाघर कम से कम 150 साल पुराना है।  इस गिरजाघर की वास्तुकला, क़ाजारिया काल की वास्तुकला जैसी है।  यह गिरजाघर बहुत बड़े क्षेत्र में बना है। सन 2000 में तेहरान के सेंट पीटर नामक चर्च को ईरान की राष्ट्रीय धरोहरों की सूचि में पंजीकृत किया गया।

इसी सड़क पर “क़ेवामुस्सलतना” से संबन्धित घर में एक अति महत्वपूर्ण संग्रहालय भी स्थित है जिसका उल्लेख हम पिछले कार्यक्रम में कर चुके हैं।  इस सड़क के अन्तिम छोर पर सीधे हाथ पर गली में एक मस्जिद स्थित है।  इसका नाम मस्जिदे इब्राहीम ख़लील है।  इस मस्जिद को पहलवी द्वितीय के काल में बनाया गया था।  इस पुरानी मस्जिद में आज भी नमाज़ अदा की जाती है।

सी-तीर नामक मार्ग पर स्थित दर्शनीय स्थलों में से एक, यहूदी पूजा स्थल या Synagogue है।  यह यहूदी पूजा स्थल सन 1913 में बनाया गया था।  यहां पर उल्लेखनीय बात यह है कि इस यहूदी पूजास्थल का निर्माण प्रथम विश्वयुद्ध से पहले किया गया।  वह काल ईरान में काज़ार काल का अन्तिम दौर था।  उस समय यहूदियों की आर्थिक स्थिति वैसी नहीं थी जैसी वर्तमान समय में है।  उसके बावजूद उनके द्वारा बनाया गया यह उपासना स्थल विश्व में मौजूद महत्वपूर्ण यहूदी उपासना स्थलों में से एक है।  उल्लेखनीय है कि एक शताब्दी से भी अधिक पहले से ईरान में सारे धर्म स्वतंत्र ढंग से अपनी धार्मिक गतिविधियां अंजाम देते आ रहे हैं।

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सी-तीर नामक सड़क पर आगे बढ़ने पर Zoroastrian या पारसियों का उपासनागृह स्थित है जिसका नाम है फ़ीरूज़ बहराम।  इसी के निकट इस समुदाय का एक स्कूल भी है।  पारसियों के उपासनागृह की इमारत के पीछे ईरज ख़ुसरो नामक हाल है जहां पर इस धर्म के मानने वाले अपने सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं।  यह अग्निकुंड तुलनात्मक रूप में कुछ छोटा है।  ज़रतुश्तियों के निकट उपासना के लिए कोई विशेष समय निर्धारित नहीं है अतः जिस समय भी उनका मन चाहे वे उपासना कर सकते हैं।  अग्निकुंड में जो आग जल रही है वह सदैव जलती रहती है।  ज़रतुश्तियों का यह मानना है कि उनके उपासना स्थल में जलने वाली अग्नि को कभी भी बुझना नहीं चाहिए क्योंकि अभी तक यह बुझी नहीं है।  यह उपासना स्थल सन 1917 में अपने काल के जानेमाने पारसी केख़ुसरू के आदेश पर बनाया गया था।

पारसियों के अग्निकुंड के ठीम सामने एक चर्च स्थित है।  इसका नाम है मैरी चर्च।  इस गिरजाघर का निर्माण सन 1945 में किया गया था।  इसे “रूमान ईसायान” नामक व्यक्ति ने बनवाया था।  इस चर्च की वास्तुकला आरमीनिया, आज़रबाइजान तथा क़फ़क़ाज़ के चर्चों जैसी है।  यह ईरान में मौजूद अरमनी समुदाय का सबसे महत्वपूर्ण गिरजाघर है।  इसकी मेहराबों पर किया गया चांदी का काम पूरे विश्व में अद्वितीय है।  इस चर्च के निकट एक संग्रहालय भी है जिसमें ईरान में मौजूद अरमनी समुदाय के इसाइयों से संबन्धित ललित कला को प्रदर्शित किया गया है।  इस संग्रहालय के एक अन्य भाग में कुछ छोटे-छोटे स्टेचू रखे हुए हैं जिनपर आरमीनिया वासियों की पोशाकों को प्रदर्शित किया गया है।  इसको देखकर पता चलता है कि ईरान में रहने वाले अर्मनी इसाई समुदाय की पोशक में समय के साथ कितना परिवर्तन हुआ है।  इसी म्यूज़ियम के एक अन्य भाग में हस्तलिखित इंजीलें रखी हुई हैं।

संग्रहालय में रखी हुई आकर्षक वस्तुओं में प्राचीनकाल की मोमबत्ती बनाने वाली एक मशीन भी है।  पुराने ज़माने में इससे जो मोमबत्तियां बनाई जाती थी उनका प्रयोग ईरान में मौजूद गिरजाघरों में ही किया जाता था।  इस संग्रहालय से ईरान में मौजूद ऐतिहासिक गिरजाघरों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है।  उल्लेखनीय है कि एतिहासिक गिरजाघरों का स्वामी होने के नाते ईरान, विश्व में पहले नंबर पर है।  ईरान में मौजूद प्राचीन गिरजाघरों की संख्या 400 से अधिक है।  यह संख्या इटली के प्राचीन गिरजाघरों से अधिक है।  मेरी चर्च को ईरान की सांस्कृतिक धरोहरों की सूचि में पंजीकृत किया जा चुका है।

 

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Dec २८, २०१६ १६:४१ Asia/Kolkata
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