Feb २२, २०१७ १२:१७ Asia/Kolkata

1707 मुगल शासक औरंगज़ेब का निधन हुआ।

औरंगज़ेब ने वर्ष 1658 से वर्ष 1707 तक भारत पर राज किया। औरंगज़ेब का नाम अबुल मुज़फ़्फ़र मुहयुद्दीन मुहम्मद था। वह मुग़ल बादशाह शाह जहां और मुमताज़ महल का तीसरा बेटा था। औरंगज़ेब अरबी, फ़ारसी, हिन्दी और तुर्की भाषाओं में निपुण था। सन 1658 में औरंगज़ेब ने अपने बड़े भाई दारा शिकोह को पराजित किया और पिता को नज़रबंद करके सिंहासन पर बैठ गया। औरंगज़ेब ने अपने लंबे शासन काल के दौरान अधिकतर समय युद्ध संबंधी गतिविधियों में ही बिताया।  

 

3 मार्च सन 1878 ईसवी को रुस के साथ युद्ध में उसमानी शासन की पराजय के बाद दोनों देशों ने सैन इस्टफ़ेनो नामक स्थान पर इसी नाम से एक समझौता किया।

रूस ने बालकान में उसमानी शासन के अधीन क्षेत्रों में अपने हित देख कर उसमानी शासन पर आक्रमण किया था।

उसने इसी उददेश्य के अंतर्गत सन 1877 ईसवी में सर्बिया बुलगारिया और रोमानिया से समझौता कर लिया जो उसमानी शासन के अधिकार में थे रुस ने इन तीनों देशों को वचन दिया था कि वो उन्हें स्वतंत्र करवा देगा। उसमानी शासन की कमज़ोरी का लाभ उठाते हुए रुसी सेना तेज़ी से आगे बढ़ती गयी और उसमानी शासन ने हार मानकर शांति की अपील की  जिसके परिणाम स्वरुप सर्बिया और रोमानिया स्वतंत्र हो गये और बुलगारिया को भी आंतरिक स्वायत्तता मिल गयी।

 

3 मार्च सन 1900 ईसवी को गोटलिब डाइमलर नामक जर्मन वैज्ञानिक का 64 वर्ष की आयु में निधन हुआ पहले वे बंदूक़ बनाने का काम करते थे किंतु बाद में उन्हें औद्योगिक कामों से लगाव हो गया और उन्होंने इस विषय का गहन अध्ययन किया। यहॉ तक कि वे मोटर साइकिल बनाने में सफल हो गये। इसी प्रकार उन्होंने कार और बस बनाने के उद्योग को भी बहुत विकसित किया।

 

 3 मार्च सन 1992 ईसवी को बोस्निया हेर्ज़ेगोविना एक जनमत संग्रह के बाद योगोस्लाविया से अलग हो गया। इस जनमत संग्रह में 99 दशमलव 7 प्रतिशत लोगों ने इसे योगोस्लाविया से अलग करने के पक्ष में वोट डाले थे। इस देश का क्षेत्रफल लगभग 51 हज़ार 129 वर्ग किलोमीटर है। इसके उत्तर और पश्चिम में क्रोएशिया पूरब में सर्बिया और दक्षिण पूर्व में मोन्टे नेगरो देश स्थित हैं। वर्ष 1991 में जारी किये जाने वाले आंकड़ो के अनुसार उस समय इस देश की 44 प्रतिशत जनसंख्या मुसलमानों पर आधारित और बालकान के इस गणराज्य में यह सबसे बड़ा जातीय समूह है। बोस्निया हेर्ज़ेगोविना द्वारा अपनी स्वतंत्रता की घोषणा योरोप के इतिहास की एक बड़ी त्रास्दी का आरंभ थी। बोस्निया में रहने वाले सर्बों ने, जिन्होंने जनमत संग्रह का बहिष्कार किया था सर्बिया की सेना के समर्थन से बोसनिया में मुसलमानों के विरुद्ध बड़े ही भयानक और बर्बर आक्रमण आरंभ कर दिए। सर्बों ने मुसलमानों का बड़ी निर्ममता के साथ सामूहिक जनसंहार किया । यह अमानवीय अपराध 43 महीनों तक जारी रहा। जिसमें ढाई लाख मुसलमानों के ख़ून की होली खेली गयी और लगभग 15 लाख मुसलमान शरणार्थी हो गये। रिपोर्टों के अनुसार सर्बों ने मुसलमान महिलाओं यहॉ तक कि गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों की गरदने रेत दीं और पेट फाड़ दिए। और इस बीच मानवाधिकारों के संरक्षक होने के बड़े बड़े दावे करने वाले देश मूक दर्शक बल्कि कुछ तो इन अपराधों के समर्थक भी थे। अंतत: 1995 के अंत में अंतराष्ट्रीय समुदाय के हस्तक्षेप से शांति संधि हुई जिससे बोस्निया में युद्ध विराम हुआ।

 

3 मार्च सन 1847 को टेलीफ़ोन के आविष्कारक ग्राहम बेल एडंमबरा का जन्म हुआ। उनके पिता बहरों और गूंगों की शिक्षा के विशेषज्ञ थे इसीलिए उन्होंने भी इसी क्षेत्र में रूचि दिखाई और वे अपने पिता का हाथ बटाने लगे ग्राहम बेल वर्ष 1871 में बोस्टन विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर बन गए। इसी दौरान उन्होंने ऐसे उपकरण का आविष्कार किया जिसके द्वारा वे उन लहरों को समझ सकते थे जो हमारे कानों पर प्रभाव डालकर आवाज़ पैदा करती हैं। उनका यही उपकरण आगे चलकर टेलीफ़ोन के रूप में सामने आया।

 

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12 इस्फ़ंद वर्ष 1291 हिजरी शम्सी को ईरान के प्रसिद्ध धर्म गुरू आयतुल्लाह शैख़ मुहम्मद रज़ा मोहक़्क़ि तेहरान में जन्मे। पवित्र नगर क़ुम में आरंभिक धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे पवित्र नगर मशहद चले गए और वहां उन्होंने आयतुल्लाह मिर्ज़ा हाशिम क़ज़वीनी और आयतुल्लाह हुसैनी तबातबाई जैसे धर्म गुरूओं से ज्ञान प्राप्त किया। उसके बाद तेहरान में मुहम्मद अली शाहआबादी जैसे महान गुरूओं से अंतर्ज्ञान और इस्लामी शिष्टाचार का ज्ञान प्राप्त किया। सन 1323 हिजरी शम्सी में आयतुल्लाह बुरूजर्दी जब क़ुम नगर आए तो वे उनसे लाभ उठाने के लिए क़ुम चले गए और नौ वर्षों तक आयतुल्लाह बुरूजर्दी की फ़िक़्ह और उसूले फ़िक़्ह की क्लासों में उपस्थित होते रहे। उन्होंने विभिन्न पुस्तकें भी लिखी हैं। 12 इस्फ़ंद सन 1373 हिजरी शम्सी को 82 वर्ष की आयु में उनका स्वर्गवास हो गया।

 

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25 जमादिस्सानी सन 1306 हिजरी क़मरी को प्रतिष्ठित धर्मगुरू आयतुल्लाह मिर्ज़ा हसन शीराज़ी ने तंबाकू और उसके उत्पादों के हराम होने का एतिहासिक फ़तवा देकर ईरान में अंग्रेज़ों की घिनौनी योजनाओं पर पानी फेर दिया। नासिरुद्दीन शाह क़ाजार ने 50 वर्ष की अवधि के लिए ईरान में तंबाकू की खेती, सिगरेट आदि जैसे तंबाकू के उत्पादों की पैदावार और उसके व्यापार का लाइसेंस एक ब्रिटिश कंपनी को दे दिया जिसके बाद ईरानियों को तंबाकू की खेती और कारोबार से वंचित कर दिया गया। यह समझौता ईरान पर अंग्रेज़ों के आर्थिक नियंत्रण के समान था। इसी लिए ईरानी जनता ने धर्मगुरुओं के नेतृत्व में इस के विरुद्ध आवाज़ उठायी। तंबाकू आंदोलन के दौरान विभिन्न नगरों में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए जिन्हें कुचलने के लिए सुरक्षा बलों ने गोलियां चलायीं। अंततः उस काल के सबसे बड़े धार्मिक नेता आयतुल्लाह मिर्ज़ा हसन शीराज़ी ने एक पंक्ति का फ़तवा जारी किया जिसमें तंबाकू और उससे बनने वाले उत्पादों को हराम घोषित कर दिया गया था। यह फ़तवा इतना प्रभावी सिद्ध हुआ कि ईरान में ब्रिटिश कंपनी का काम ठप हो गया और नासेरुद्दीन शाह को विवश होकर यह समझौता रद्द करना पड़ा। 

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