4 मार्च सन 1848 ईसवी से ऑस्ट्रिया के अधीन अधिकांश देशों में क्रान्तियां और विद्रोह आरंभ हो गये। ऐसे देशों में हंग्री भी शामिल था।

  • 1665 इंगलैंड के राजा चार्ल्स द्वतीय ने नीदरलैंड के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी।
  • 1790 फ्रांस 83 डिपार्टमेंट्स में बंट गया।
  • 1814 लांगवूड्स युद्ध में अमरीकियों ने ब्रिटिश सेना को पराजित कर दिया।
  • 1865 अमरीका का तीसरा और अंतिम राष्ट्रीय ध्वज को कांग्रेस ने मंज़ूरी दी।
  • 1882 ब्रिटेन का पहला बिजली से चलने वाला ट्राम सड़क पर दौड़ा ।
  • 1906 हकीम अब्दुल माजिद ने दिल्ली  में " हमदर्द दवाखाना" नाम से अपना क्लिनिक खोला।
  • 1951 नयी दिल्ली में आयोजित पहला एशियन गेम्स 11 देशों और 489 पुरुष व महिला एथलीट्स के साथ आरंभ हुआ।

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ऑस्ट्रिया के लोगों के अत्याचारों से अब चुकी हंग्री की जनता का संघर्ष देखते ही देखते पूरे देश में फैल गया। चार अप्रैल सन 1849 ईसवी में यह संघर्ष इतना तेज़ हो गया कि केंद्रीय सरकार की धमकियों और धौंस के बावजूद क्रान्तिकारियों ने हंग्री में लोकतंत्रिक शासन की घोषणा कर दी। इस घोषणा के बावजूद रुस के ज़ार शासक की सहायता से ऑस्ट्रिया ने इस क्रांत्रि को कुचल दिया और इसके नेताओं को गिरफ़तार करके मौत की सज़ा दे दी।

4 मार्च सन् 1823 को उस्मानी शासन और यूनान के बीच युद्ध में यूनानी सेना ने त्रिपोलिज़ा शहर में 12 हज़ार मुसलानों का नरसंहार किया।

यूनान के सशस्त्र गुट, जिन्हें अनेक यूरोपीय देशों की सहायता प्राप्त थी, अपने देश पर उस्मानियों के नियंत्रण के ख़िलाफ़ लड़ रहे थे। वर्ष 1822 में अपने संघर्ष में तेज़ी लाने के लिए वे एकजुट हो गए। किन्तु इस प्रकार के नरसंहार से, जो बदले की भावना से किए जाते थे, लड़ाई और हिंसात्मक हो जाती थी। उदाहरण स्वरूप वर्ष 1824 में उस्मानी शासन के सैनिकों ने यूनानियों के कुछ सशस्त्र गुटों की हत्या कर दी। अंततः यूनान को 1832 में स्वतंत्रता प्राप्त हुई । 

 

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13 इस्फ़ंद वर्ष 1254 हिजरी शम्सी को प्रसिद्ध धर्मगुरू मिर्ज़ा मुहम्मद, फ़ैज़ क़ुम के एक पढ़े लिखे परिवार में पैदा हुए। क़ुम और तेहरान में आरंभिक धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उच्चस्तरीय शिक्षा प्राप्त करने के लिए वे इराक़ के पवित्र नगर नजफ़ गए जहां उन्होंने अल्लामा सैयद मुहम्मद काज़िम यज़्दी तबातबाई , आख़ुन्द मुल्ला काज़िम ख़ुरासानी और शैख़ इस्फ़हानी जैसे महान धर्म गुरूओं से ज्ञान प्राप्त किया। इस प्रकार वे मुजतहिद बने। उसके बाद वे क़ुम लौट आए। उन्होंने विभिन्न पुस्तकें लिखी हैं जिनमें किताबुल फ़ैज़, मनासिके हज, वसीलतुन्नजात नामक पुस्तक पर फ़ुट नोट और ज़ख़ीरतुल एबाद का नाम विशेष रूप से उल्लेनीय हैं। 13 इस्फ़ंद वर्ष 1329 हिजरी शम्सी को नमाज़ पढ़ते समय उन का देहान्त हो गया।

 

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15 जमादिस्सानी सन 771 हिजरी क़मरी को मुसलमान विद्वान और धर्मगूरु मोहम्मद बिन हसन हिल्ली फख़्रुल मोहक़क़ीन का निधन हुआ। उनका जन्म सन 682 हिजरी कमरी को हिल्ला में हुआ था। उन्होंने अपने पिता से, जो प्रतिष्ठित धर्मगुरूओ में गिने जाते हैं, शिक्षा ली और अध्यात्म के उच्च स्थान तक पहुंचे। उनकी बहुत सी रचनाओं से आज भी लोग लाभन्वित हो रहे हैं।

 

Feb २२, २०१७ १२:५३ Asia/Kolkata
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