1508 बाबर के बेटे हुमायुं का काबुल में जन्म हुआ

  • 1899 एस्प्रीन का ब्रांड के रूप में रजिस्ट्रेशन हुआ।
  •  1912 इटली व तुर्की के बीच युद्ध के दौरान विश्व में पहली बार इटली ने युद्ध में " एयरशिप्स" का प्रयोग करते हुए तुर्की के सैनिकों पर 6000 फुट की उंचाई से  बम गिराए।
  • 1915 महात्मा गांधी और रवीद्रनाथ टैगोर की शांति निकेतन में पहली भेंट हुई।
  • 1961 भारत का पहला आर्थिक समाचार पत्र " द इकोनामिक टाइम्ज़" का मुंबई में प्रकाशन आरंभ हुआ।
  • 1964 अमरीका में " नेशन आफ इस्लाम" संगठन के प्रमुख " अलीजाह मुहम्मद " ने बाक्सिंग चैम्पियन " कैसियस किले " को औपचारिक रूप से " मुहम्मद अली " का नाम दिया।
  • 1975 ईरान व इराक़  ने सीमा संबंधी विवाद का निपटारा करते हुए " अलजीरिया समझौते " पर हस्ताक्षर किये।

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6 मार्च सन 1714ईसवी को फ़्रांस, स्पेन, ब्रिटेन और जर्मनी के मध्य एक समझौता हुआ जिसके पश्चात 13 वर्षीय युद्ध समाप्त हो गया।  इस समझौते पर जर्मनी, आस्ट्रिया और फ़्रांस के राजाओं ने हस्ताक्षर किये थे।

  ज्ञात रहे कि 13 वर्षीय इस युद्ध का आरंभ ब्रिटेन की ओर से किया गया था जिसमें बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे।

6 मार्च सन 1945 को रोमानिया में कम्यूनिस्ट सरकार का गठन हुआ।  सन 1941 में रोमानिया ने जर्मनी के घटक के रूप में द्वितीय विश्वयुद्ध में भाग लिया था।  जर्मन सेना की पराजय के आरंभ के साथ और सन 1942 में जर्मनी के नियंत्रण वाले पूर्वी योरोप के देशों पर रूस के आक्रमणों के पश्चात रूमानिया को भी लाल सेना ने जर्मनी से छीनकर अपने नियंत्रण में ले लिया और फिर पूर्व सोवियत संघ की सहायता से यहां पर कम्यूनिस्ट सरकार अस्तित्व में आई।  पूरे संसार से कम्यूनिज़्म की समाप्ति के काल में रोमानिया के शासक को फ़ांसी की सज़ा सुनाई गई जिसके पश्चात वहां से कम्यूनिस्ट सरकार समाप्त हो गई और इस देश में आम चुनाव करवाए गए।

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6 मार्च सन 1552 ईसवी को जर्मनी के प्रोटिस्टेंट और कैथोलिक ईसाइयों के बीच दूसरी बड़ी लड़ाई प्रोटिस्टेंट इसाइयों की पुन:पराजय के साथ समाप्त हुई। ऑस्ट्रिया में होने वाली इस लड़ाई में स्पेन, फ़्रांस और ऑस्ट्रिया की सरकारों के हाथ में कैथेलिक ईसाइयों का नेतृत्व था जबकि प्रोटिस्टेंट ईसाइयों की कमान ऑस्ट्रिया और फ्रांस के प्रोटिस्टेंट आबादी वाले शहरों के राजकुमारों की सेना के हाथों में थी जिन्हें फ़्रांस का समर्थन प्राप्त था। दोनों पक्षों के बीच सन 1546 ईसवी में होने वाले पहले युद्ध में स्पेन के हाथों प्रोटिस्टेंट ईसाइयों को करारी हार का सामना हुआ । धार्मिक मतभेदों के कारण यह लड़ाइयां हुई और यह उस समय आरंभ हुई जब मार्टिन लूथर ने 16वीं शताब्दी के आरंभ में ईसाई धर्म में प्रोटिस्टेंट मत की नींव डाली।

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6 मार्च सन 1957 ईसवी को घाना देश डॉक्टर क़ेवाम नकरुमे के नेतृत्व में स्वतंत्र हुआ। इसलिए आज के दिन को इस देश में राष्ट्रीय दिवस का नाम दिया गया। 15वीं शताब्दी में घाना में पुर्तगालियों के प्रवेश के बाद से अफ़्रीक़ा महाद्वीप के इस देश में साम्राज्यवाद आरंभ हुआ। प्रचुर मात्रा में सोने की खानें होने के कारण साम्राज्यवादी शक्तियों के बीच स्वर्ण तट के नाम से प्रसिद्ध यह देश पुर्तगाल के बाद ब्रिटेन के अधिकार में चला गया। किंतु 19वीं शताब्दी के मध्य में इस देश की जनता के विद्रोहों और आंदोलनों ने स्वतंत्रता की भूमिका प्रशस्त की। इन्हीं प्रयासों के बाद घाना में पहली बार आम चुनाव हुए और केवाम नकरुमों प्रधान मंत्री चुने गये। उन्होंने सन 1957 ईसवी में घाना को स्वतंत्र घोषित किया। तीन वर्षों के बाद इस देश में पूरी तरह प्रजांतत्र की स्थापना हो गयी। सन 1966 ईसवी में नकरुमे की सरकार एक विद्रोह के कारण गिर गयी जिसके बाद से घाना में कई बार सैनिक विद्रोह हो चुके हैं।

घाना का क्षेत्रफल दो लाख 38 हज़ार वर्ग किलोमीटर है। यह देश अफ़्रीका महाद्वीप के पश्चिमी भाग में एटलांटिक महासागर के तट पर स्थित है।

 

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17 जमादिउस्सानी वर्ष 36 हिजरी क़मरी को जमल नामक युद्ध हुआ। यह युद्ध पैग़म्बरे इस्लाम के निष्ठावान उत्तराधीकारी हज़रत अली अलैहिस्सलाम की सरकार के विरुद्ध उठ खड़े होने वालों ने आरंभ किया था जो हज़रत अली का  न्याय सहन नहीं कर पा रहे थे। इस लिए इस गुट ने हज़रत अली के आज्ञा पालन के वचन को तोड़ कर विद्रोह कर दिया। इस गुट को वचन तोड़ने वाला गुट भी कहा जाता है। इस गुट का नेतृत्व तलहा और ज़ुबैर कर रहे थे। इन लोगों ने अपने अवैध उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए साधारण लोगों और संसार के लोभी पूंजीपतियों को उकसाकर हज़रत अली अलैहिस्सलाम के विरुद्ध खड़ा कर दिया। तलहा और ज़ुबैर ने हज़रत अली अलैहिस्सलाम की आज्ञा पालन का वचन दिया था किन्तु उन्हें जब इस बात का आभास हुआ कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम उनकी अवैध मांगों को पूरा करने को तैयार नहीं हैं तो उन्होंने मुसलमानों के तीसरे ख़लीफ़ा के ख़ून का प्रतिशोध लेने के बहाने हज़रत अली अलैहिस्सलाम के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया। तलहा और ज़ुबैर पहले मक्के गये और वहां कुछ प्रसिद्ध लोगों को उकसाकर अपने साथ कर लिया और एक विशाल सेना के साथ इराक़ के नगर बसरे की ओर रवाना हुए। हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने भी विद्रोहियों को कुचलने के लिए उनका पीछा किया और अंततः इस्लामी सेना और विद्रोहियों का सामना बसरा में हुआ। हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने युद्ध रोकने का हरसंभव प्रयास किया क्योंकि आप शांतिपूर्ण ढंग से समस्या के समाधान के इच्छुक थे। इसी आधार पर आपने विद्रोहियों से कई दिनों तक बात चीत की किन्तु विद्रोही गुट ने जो सत्ता के लोभ में अंधा हो चुका था, हज़रत अली के उपदेशों को नहीं सुना। यह विद्रोही गुट समझ रहा था कि वह हज़रत अली की सेना को पराजित कर देगा किन्तु उसे नहीं मालूम था कि उनका सामना विश्व के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति से है, अंततः इस युद्ध में भी हज़रत अली को विजय हुई।

17 जमादिउस्सानी वर्ष 524 हिजरी क़मरी को प्रसिद्ध अरब साहित्यकार और शायर बारेअ बग़दादी का 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका पालन पोषण वैज्ञानिक और राजनीतिज्ञ परिवार में हुआ। बारेअ बग़दादी की गिनती अपने काल के अरबी व्याकरण और भाषा विशेषज्ञों में होती थी। उनकी रचनाओं में उनका काव्य संकलन बहुत प्रसिद्ध है जो अभी भी बाक़ी है।

 

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Feb २५, २०१७ ११:३५ Asia/Kolkata
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