1989, पैग़म्बर इस्लाम (स) के अपमानजनक किताब लिखने वाले लेखक सलमान रश्दी के खिलाफ़ ईरान की इस्लामी क्रांति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी के फ़तवे के बाद ब्रिटेन और ईरान के बीच राजनयिक सम्पर्क टूट गया।

321, रोमन सम्राट कॉन्स्टेंटाइन प्रथम ने रविवार को राजकीय विश्राम का दिन घोषित किया जो ईसाई मान्यताओं के अनुरूप था।

1876, एलेक्ज़ेंडर ग्राहम बेल को अपने आविष्कार का पेटेंट मिला जिसे उन्होंने टेलीफ़ोन का नाम दिया।

1971, शेख़ मुजिबुर्रहमान ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता का आह्वान किया।

1989, पैग़म्बर इस्लाम (स) के अपमानजनक किताब लिखने वाले लेखक सलमान रश्दी के खिलाफ़ ईरान की इस्लामी क्रांति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी के फ़तवे के बाद ब्रिटेन और ईरान के बीच राजनयिक सम्पर्क टूट गया।

2003, फ़िदेल कास्त्रो को क्यूबा की संसद ने छठे कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति निर्वाचित किया, वे दुनिया के सबसे लम्बे समय तक शासन करने वाले शासनाध्यक्ष हैं।

2006, ईरान के राष्ट्रपति ने देश की परमाणु गतिविधियों पर रोक के लिए संयुक्त राष्ट्र परमाणु एजेंसी से क्षतिपूर्ति की मांग की।

2007, भारत और पाकिस्तान आतंकवाद पर जांच में मदद के लिए तैयार।

2008, त्रिपुरा विधान सभा चुनाव में सत्तारूढ़ लेफ़्ट फ़्रंट ने लगातार चौथी बार जीत दर्ज की।

2009, अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने पृथ्वी जैसे ग्रहों को खोजने के लिए अंतरिक्ष में केप्लर दूरबीन को लॉंन्च किया।

2009, प्रमुख धातु कम्पनी स्टरलाइट इंडस्ट्रीज़ ने अमरीका की तीसरी सबसे बड़ी कॉपर उत्पादक कम्पनी एसार्को के अधिग्रहण की घोषणा की।

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7 मार्च सन 1936 ईसवी को प्रथम विश्व युद्ध के बाद जर्मनी की नाज़ी सेना ने पहला अतिक्रमण किया और एडॉल्फ़ हिटलर के नेतृत्व में नाज़ी सेना ने वारसा और लोकार्नो समझौतों को रौंदते हुए पहले ही निरस्त्र हो चुके रेनानी नगर में प्रवेश किया। उक्त दोनों समझौतों के बाद रेनानी का क्षेत्र जो फ़्रांस और जर्मनी के बीच मतभेद का कारण था निष्पक्ष घोषित कर दिया गया था परंतु जर्मन सेना ने आज के दिन इस क्षेत्र पर अधिकार कर लिया।

7 मार्च सन 1957 ईसवी को अफ़्रीक़ा महाद्वीप के पूर्वोत्तर में स्थित अत्यंत महत्वपूर्ण जलसंपर्क मार्ग स्वेज़ नहर का मिस्र की जनता के निरंतर संघर्ष के बाद पुन: उदघाटन हुआ। सन 1956 में मिस्र के तत्कालीन राष्ट्रपति जमाल अब्दुन्नासिर द्वारा स्वेज़ नहर को राष्ट्रीय सम्पत्ति घोषित किये जाने के बाद ब्रिटेन फ़्रांस और इस्राईल की सेनाओं ने सीना प्रायद्वीप तथा स्वेज़ के क्षेत्रों पर आक्रमण किये ताकि स्वेज़ नहर पर अधिकार करके ज़ायोनी शासन के समुद्री जहाज़ों के लिए अक़बा खाड़ी तक पहुंचने का मार्ग खोल दें। इस युद्ध में मिस्र का सीना प्रायद्वीप और स्वेज़ के आस पास के कुछ क्षेत्र आक्रमणकारियों के अधिकार में चले गये किंतु बाद में अतर्राष्ट्रीय दबाव के कारण अतिग्रहणकारी सेनाए सीना प्रायद्वीप तथा स्वेज़ नहर के निकटवर्ती क्षेत्रों से बाहर निकलीं और कुछ समय बाद स्वेज़ नहर से विभिन्न देशों के जहाज़ों की आवाजाही पुन: आरंभ हो गयी। स्वेज़ नहर इस दिन से दोबारा मिस्र की प्रभुसत्ता के अधीन हो गयी।

7 मार्च सन 1932 ईसवी को फ़्रांस के प्रधान मंत्री एरिस्टाइड ब्रायंड का निधन हुआ। उन्होंने सन 1926 ईसवी में नोबेल पुरस्कार जीता। उन्होंने योरोपीय देशों के संयुक्त गठन का विचार पेश किया।

7 मार्च सन 1994 ईसवी को दक्षिणी अफ़्रीक़ा के नेता नेल्सन मंडेला ने दक्षिण पंथी श्वेतों की दक्षिणी अफ़्रीक़ा में अपने लिए अलग क्षेत्र विशेष किये जाने की मांग को ठुकरा दिया।

नेल्सन मंडेला ने कहा कि उनके जीते जो यह कभी भी नहीं हो सकता।

 

7 मार्च वर्ष 1765 को फ़्रांसीसी आविष्कारक जोज़ेफ़ नाईसफ़ोर नेपेन्से का जन्य हुआ। वे संसार में पहला चित्र उतारने के कारनामे के कारण प्रसिद्ध हुए। जोज़ेफ़ ने वर्ष 1811 में प्रकाश से प्रभावित होने वाले रासायनिक पदार्थों पर परीक्षण आरंभ किया। यद्यपि वे वांछित परिणाम तक पहुंच न सके किन्तु उन्होंने दो ऐसे ऐतिहासिक कार्य किए जो इतिहास में उनका नाम जीवित रखने के लिए काफ़ी हैं। उन्होंने फ़ोटोग्राफ़ी की शब्दावली को प्रचलित किया और चित्रों का प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए कैमरे का ब्लैक बाक्स भी तैयार किया। वर्ष 1822 में उन्होंने पता लगाया कि अस्फाल्ट की तह यदि किसी चीज़ पर लगा दी जाए तो उसका चित्र सुरक्षित रखा जा सकता है। वर्ष 1826 में उन्होंने ओबेस्क्यूरा की सहायता से संसार का पहला चित्र खींचा। जोज़ेफ़ अभी फ़ोटोग्राफ़ी पर और अधिक कार्य करना चाहते थे किंतु 3 जुलाई वर्ष 1833 ईसवी को उनका निधन हो गया।

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16 इसफ़ंद सन 1329 हिजरी शमसी को ईरान के एक क्रांतिकारी संघर्षकर्ता ख़लील तहमासबी ने शाह के तत्कालीन प्रधानमंत्री व ब्रिटेन के पिट्टू अली रज़्मआरा की हत्या कर दी।  रज़्मआरा शाही सेना का कमाण्डर था और उसी वर्ष ग्रीष्मकाल में उसे प्रधानमंत्री बनाया गया था किंतु सेना की बागडोर भी उसी के हाथों में रही।  देश के संचालन में रज़्मआरा की अनुचित नीतियों और भ्रष्टाचार के कारण लोग और धर्मगुरू उससे अप्रसन्न हो गए।  यही कारण है कि रज़्मआरा का विरोध बढ़ता गया।  रज़्मआरा की हत्या की कार्यवाही, अंग्रेज़ों के पिट्टुओं और कुछ सांसदों के लिए चुनौती थी जो ईरानी तेल के राष्ट्रीयकरण के मार्ग में बाधा बने हुए थे।  अतः ख़लील तहमासबी की क्रांतिकारी कार्यवाही के परिणाम स्वरूप रज़्मआरा की हत्या के पश्चात बहुत कम समय में ईरान की संसद में तेल के राष्ट्रीयकरण का बिल पेश किया गया जिसे पेट्रोलियम आयोग ने अपनी सहमति दे दी।

 

Feb २५, २०१७ ११:५० Asia/Kolkata
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