14 मार्च वर्ष 1879 ईस्वी को जर्मनी के विख्यात गणितज्ञ और भौतिक शास्त्री अलबर्ट आइन्स्टाइन का जन्म हुआ।

  • 14 मार्च सन 1931 को भारत की पहली बोलती फ़िल्म आलम आरा का प्रदर्शन हुआ।
  • 14 मार्च सन 1932 को महान भौतिक शास्त्री एलबर्ट आइंस्टाइन का जन्म हुआ।
  • 14 मार्च सन 1833 को पहली महिला डेंटिस्ट हॉब्स टेलर का जन्म हुआ।
  • 14 मार्च सन 1960 को ब्रिटेन के चेशायर से पृथ्वी से 407000 मील दूर अन्तरिक्ष में मौजूद एक अमरीकी उपग्रह से समपर्क बना कर विश्व रिकॉर्ड बनाया गया।
  • 14 मार्च सन 1972 को मणिपुर की मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला का जन्‍म हुआ।

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14 मार्च वर्ष 1879 ईस्वी को जर्मनी के विख्यात गणितज्ञ और भौतिक शास्त्री अलबर्ट आइन्स्टाइन का जन्म हुआ। वे सन 1905 ईसवी में स्वीटज़रलैंड के नागरिक बन गये और इसी वर्ष उन्होंने तीन लेख प्रकाशित किये जिसमें हरे एक लेख भौतिक शास्त्र में नये भाग का आधार बना। उन्हें सन 1921 में कठिन परिश्रम और शोधकार्यों के कारण नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आइन्स्टाइन के विचारों और अध्ययनों से परमाणु अध्ययन में भी बहुत विकास हुआ और अंतत: परमाणु बम भी बना लिया गया। आइन्स्टाइन को अपने अध्ययन का यह परिणाम देखकर बहुत दुख हुआ। सन 1955 में उनका निधन गया।

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14 मार्च सन 1954 ईसवी को डीन बीन फ़ू नामक युद्ध आरंभ हुआ जिसने भारत और चीन में फ़्रांस के अतिक्रमणकारी सैनिकों के भविष्य का निर्धारण किया। इस युद्ध में वियतनाम के वेटमैन की सेनाएं जो वियतनाम की स्वतंत्रता के लिए लड़ रही थीं डीन बीन फ़ू के एक दुर्ग में मोर्चे बनाए बैठी फ़्रांस की सेना से भिड़ीं। जिस से वियतनाम की सेना को सफलता मिली।

14 मार्च सन 1978 ईसवी को ज़ायोनी सेना ने तेल अवीव के निकट फ़िलिस्तीनी संघर्षकर्ताओं की कार्रवाई का बहाना बनाकर लेबनान की सीमा पर अतिक्रमण आरंभ किया जिसमें भारी संख्या में लेबनानी और फ़िलिस्तीनी असैनिकों का जनसंहार किया गया। ज़ायोनी सेना ने लीतानी नदी तक दक्षिणी लेबनान के क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया। इस्राईल अपने पानी के अभाव को पूरा करने के लिए हमेशा से ही इस नदी का पानी चुराता रहा है। दक्षिणी लेबनान पर ज़ायोनी सेना के आक्रमण के बाद सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव 425 पारित करके ज़ायोनी सैनिकों के लेबनान से तुरंत निकलने की मांग की और इस क्षेत्र में शांति की रक्षा के लिए ४हज़ार सैनिकों की एक सेना भेजी जिसके बाद ज़ायोनी सेनाए इस क्षेत्र से निकलीं किंतु उन्होंने इस क्षेत्र में साद हददात नामक व्यक्ति के नेतृत्व में अपने छापामार पिटठुओं को तैनात कर दिया।

14 मार्च वर्ष 1932 ईसवी को अमरीकी वैज्ञानिक जार्ज ईस्टमैंन ने आतमहत्या कर ली। वह 12 जुलाई वर्ष 1854 को जन्मे। उन्होंने अपना पूरा बचपन निर्धनता में बिताया । बड़े हुए तो फ़ोटोग्राफ़ी में रूचि पैदा हुई। उस समय फ़ोटोग्राफ़ी की फ़िल्म भी खोजी नहीं गई थी और गीली प्लेटों पर चित्र उतारे जाते थे इस लिए यह एक मंहगा और जटिल व्यवसाय था। ईस्टमैंन ने चित्र उतारने के लिए शीशे की सूखी प्लेट की खोज करके उसे लंदन और अमरीका से पेंट करवाया किन्तु वे अपनी इस खोज से अधिक संतुष्ट नहीं थे। इस लिए वर्ष 1885 में उन्होंने एक फ़िल्म रोल तैयार किया जिसे लपेटा भी जा सकता था। उसी के साथ उन्होंने कोडक कैमरे का आविष्कार किया। अपने इस आविष्कार से उन्हें बहुत लाभ हुआ और वह बहुत शीघ्र ही करोड़पति बन गए। मरने से पूर्व उन्होंने अपनी समस्त संपत्ति स्कूलों और कालेजों को दान कर दी और करोड़ों डालर की राशि कल्याणकारी संस्थाओं को दे दी। ईस्टमैन ने लंबे समय से चली आ रही अपनी बीमारी से तंग आकर आत्महत्या कर ली।

23 इसफ़ंद सन 1340 हिजरी शम्सी को ईरान के संघर्षकर्ता धर्मगुरु आयतुल्ला सैयद अबुल कासिम काशानी का निधन हुआ। उन्होंने युवावस्था तक इराक़ के नजफ़ नगर में इस्लामी विषयों की पूर्ण जानकारी प्राप्त कर ली और मुजतहिद बन गये। साथ ही उन्होंने इराक़ पर ब्रिटेन के साम्राज्य के विरुद्ध भी कड़ा संघर्ष किया जिसके कारण उन्हें इस देश से निकलना पड़ा। ईरान लौट कर उन्होंने इस देश में ब्रिटिश साम्रज्य के विरुद्ध लड़ाई छेड़ दी जिसके कारण उन्हें कई वर्ष जेल में गुज़ारने पड़े। आयतुल्लाह काशानी के जेल से छूटने के बाद तेहरान की जनता ने उन्हें संसद में अपना प्रतिनिधि चुना।

आयतुल्ला काशानी द्वारा डॉक्टर मुसदिदक के निरंतर समर्थन और जनता के लगातार संघर्ष के बाद ईरान में तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण हुआ और डॉक्टर मुस्दिदक़ प्रधान मंत्री बने।

25 जमादिस्सानी सन 1309 हिजरी क़मरी को प्रतिष्ठित धर्मगुरू आयतुल्लाह मिर्ज़ा हसन शीराज़ी ने तंबाकू और उसके उत्पादों के हराम होने का एतिहासिक फ़तवा देकर ईरान में अंग्रेज़ों की घिनौनी योजनाओं पर पानी फेर दिया। नासिरुद्दीन शाह क़ाजार ने 50 वर्ष की अवधि के लिए ईरान में तंबाकू की खेती, सिगरेट आदि जैसे तंबाकू के उत्पादों की पैदावार और उसके व्यापार का लाइसेंस एक ब्रिटिश कंपनी को दे दिया जिसके बाद ईरानियों को तंबाकू की खेती और कारोबार से वंचित कर दिया गया। यह समझौता ईरान पर अंग्रेज़ों के आर्थिक नियंत्रण के समान था। इसी लिए ईरानी जनता ने धर्मगुरुओं के नेतृत्व में इस के विरुद्ध आवाज़ उठायी। तंबाकू आंदोलन के दौरान विभिन्न नगरों में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए जिन्हें कुचलने के लिए सुरक्षा बलों ने गोलियां चलायीं। अंततः उस काल के सबसे बड़े धार्मिक नेता आयतुल्लाह मिर्ज़ा हसन शीराज़ी ने एक पंक्ति का फ़तवा जारी किया जिसमें तंबाकू और उससे बनने वाले उत्पादों को हराम घोषित कर दिया गया था। यह फ़तवा इतना प्रभावी सिद्ध हुआ कि ईरान में ब्रिटिश कंपनी का काम ठप हो गया और नासेरुद्दीन शाह को विवश होकर यह समझौता रद्द करना पड़ा। 

 

Mar ०४, २०१७ १२:०१ Asia/Kolkata
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