ईरान में देखने योग्य सुन्दर प्राकृतिक स्थलों में से यहां के तालाब या झीले भी हैं।

यह ऐसे प्राकृतिक सुन्दर दृश्य पेश करते हैं जिससे देखने वाला ख़ुशी और आनंद से झूम उठता है। ईरान भर में 2800 तालाब हैं, जिनमें से 24 अंतरराष्ट्रीय रामसर कन्वेंशन में पंजीकृत हैं। इन 24 तालाबों में से कुछ कई तालाबों का एक समूह हैं, लेकिन इन्हें एक ही तालाब माना जाता है। सुरक्षित क्षेत्र अरज़न और परीशान उन इलाक़ों में से हैं, जहां दो अंतरराष्ट्रीय तालाब स्थित हैं। यह क्षेत्र ईरान के दक्षिण में फ़ार्स प्रांत में स्थित हैं।

अरज़न व परीशान सुरक्षित इलाक़ों का क्षेत्रफल 50 हज़ार हेक्टेयर है। इसमें अरज़न जंगल, अरज़न और परीशान झील स्थित है। अरज़न झील फ़ार्स प्रांत के केन्द्र शीराज़ से 60 किलोमीटर के फ़ासले पर और शीराज़-काज़रून हाईवे पर स्थित है। यह झील ईरान में मीठे पानी की झीलों के क़रीब 2 हज़ार हेक्टेयर के क्षेत्रफल पर आधारित है। इस झील के बीच में अरज़न तालाब स्थित है।

अरज़न और परीशान सुरक्षित क्षेत्र, ज़ारोस पर्वतीय श्रृंखला के दक्षिणी भाग में स्थित है। इलाक़े की सबसे ऊंची चोटी चाह बर्फ़ी है। समुद्री सतह से इसकी ऊंचाई 2900 मीटर है। इस इलाक़े में बलूत के काफ़ी घने जंगल हैं। इस इलाक़े में पायी जाने वाली वनस्पतियों में सेज, बांस, बलूत और बादाम का नाम लिया जा सकता है। परीशान तालाब के आसपास सबसे कम ऊंचाई वाले इलाक़े की ऊंचाई समुद्र की सतह से 800 मीटर है। अरज़न और परीशान तालाब के बीच क़रीब 6 हज़ार हेक्टेयर के इलाक़े का अरज़न और परीशान सुरक्षित क्षेत्र के रूप में चयन किया गया है। इस इलाक़े में किसी भी प्रकार की कृषि और पशुपालन जैसी गतिविधियों पर पाबंदी है। 1993 में क़रीब 100 हेक्टेयर के इलाक़े को विलुप्त होते हुए ईरानी पीले बारहसिंगे की रक्षा के लिए विशेष किया गया है।

अरज़न झील स्थानीय और प्रवासी परिंदों और जलीय जीव-जंतुओं के रहने के लिए एक महत्वपूर्ण ठिकाना है। जैसे कि फ़्लेमिंगो, ग्रेब, स्टॉर्क, बगुला, कटार, हंस, बतख़, भूरी जल मुर्ग़ाबी, सफ़ेद बतख और कई अन्य प्रकार के परिंदे पड़ाव डालते हैं या यहां रहते हैं। कहा जाता है कि एक समय इस इलाक़े में ईरानी शेर रहा करते थे। स्तनधारी जानवर, जैसे कि जंगली बिल्ली, भेड़िया, लोमड़ी, गीदड़ और सूअर इस सुरक्षित इलाक़े में पाए जाते हैं।

अरज़न और परीशान सुरक्षित इलाक़े के अन्य भागों में अंतरराष्ट्रीय तालाब परीशान स्थित है। यह मीठे पानी का स्थायी तालाब है। यह तालाब काज़रून शहर के दक्षिण पूरब में ज़गरोस हाईट्स के किनारे 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। तालाब की औसत गहराई डेढ़ मीटर और सबसे अधिक गहराई 5 मीटर है।

जैविक विविधता के दृष्टिगत, यह एक समृद्ध इलाक़ा है। यह तालाब, गर्मियों के मौसम में स्थानीय और प्रवासी परिंदों के जीवन और प्रजनन का स्थल है। साइबेरिया, काकेशस और आज़रबाइजान में ठंड बढ़ने के साथ, इन इलाक़ों से परिंदे परीशान झील की ओर पलायन कर जाते हैं और लगभग चार महीनों तक यहां रहते हैं। इस झील में स्थानीय एवं प्रवासी परिंदों की क़रीब 200 प्रजातियां रहती हैं, उनमें से कुछ ऐसे परिंदें हैं जो दुनिया में कम पाए जाते हैं, जैसे कि मरमरी बतख़, बैंगनी बगुला, मुकुट वाला एक पक्षी और साही या बगुले जैसा एक पक्ष‍ी।

परीशान झील में आसपास के पहाड़ों का पानी गिरता है। इस झील के पानी की आपूर्ति वसंत और सर्दियों के मौसम में होने वाली बारिशों और उसके आसपास के सोतों से होती है। पुले आबगीने, क़लए नारंजी, गराब, जमशीदी, हलक, ख्वाजू, गप, आब मूरदक और आब सीरू वे सोते हैं, जिनसे परीशान झील के पानी की आपूर्ति होती है। परीशान झील के इकोलौजिकल प्रभावों में से इलाक़े के भूमिगत पानी की मात्रा की ओर संकेत किया जा सकता है। झील में पानी की घटती और बढ़ती सतह का असर भूमिगत पानी की मात्रा और गुणवत्ता पर होता है और इससे वहां खोदे गए कुओं के पानी के खारे पन की मात्रा प्रभावित होती है।

इकोलौजिकल महत्व के अलावा, अरज़न और परीशान सुरक्षित क्षेत्र को पर्यटन के कारण भी महत्वपूर्ण माना जाता है। अरज़न और परीशान के एक भाग में जंगल और सैर की जगह है, जिसका अरज़न और परीशान झील पर सीधा प्रभाव पड़ता है। यह ईरान का सबसे बड़ा बलूत के पेड़ों का जंगल है। जब यह पेड़ उगते हैं तो बहुत ही सुन्दर दृश्य पेश करते हैं और देखने वाले सुन्दर प्रकृति का आनंद लेते हैं।

झील के दक्षिण पूरब में फ़ामूर फूलों का बग़ीचा, सर्दियों के मौसम में नरगिस के फूलों से भरा हुआ होता है। अरज़न जंगल के पूर्वी इलाक़े और कोहे बील के आंचल में 50 मीटर से अधिक ऊंचे झरने एक सुन्दर दृश्य प्रस्तुत करते हैं। यह झरने काफ़ी दूरी से दिखाई पड़ जाते हैं। इस इलाक़े में सर्दियों मे काफ़ी ठंड पड़ती है और बर्फ़बारी होती है, जबकि गर्मियों के मौसम में भी सर्दी होती है।

सर्दियों और बहार के मौसम में नरगिस और रत्नज्योति के फूल, पहाड़ियों से फूटने वाले झनरे, झील के ऊपर उड़ते हुए प्रवासी परिंदे अद्भुत सुन्दर दृश्य पेश करते हैं। इस इलाक़े में इतिहास के चिन्ह भी देखे जा सकते हैं। उदाहरण स्वरूप, शापूर की मूर्ति जो सासानी शासनकाल से संबंधित है। यह मूर्ति शापूर ग़ुफ़ा के दहाने पर 7 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह प्राचीन ईरान के बाक़ी रहने वाली एकमात्र मूर्ति है। इस इलाक़े की अन्य ऐतिहासिक धरोहरों में सफ़वी शासनकाल की एक धर्मशाला है, यह हरे भरे जंगल बरम की एक चोटी पर बनी हुई है। कुतेल सड़क एक पुरानी और ऐतिहासिक सड़क है, रोमांच में दिलचस्पी रखने वाले पर्यटकों के लिए यह एक पसंदीदा सड़क हो सकती है।                       

 

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मई १०, २०१७ १६:२९ Asia/Kolkata
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