साइबेरिया जैसे ठंडे क्षेत्रों के पक्षी अपना पलायन शुरू करते समय जिन जल क्षेत्रों का चयन करते हैं उनमें म्यानकाले प्रायद्वीप महत्वपूर्ण है।

पलायनकर्ता पक्षी जाड़े का मौसम इसी क्षेत्र मे गुज़ारते हैं। यह सुंदर संरक्षित क्षेत्र कैस्पियन सागर के दक्षिण पूर्वी भाग में स्थित है। इसमें म्यानकाले तालाब तथा गुरगान खाड़ी भी शामिल हैं।

म्यानकाले प्रायद्वीप रेतीले तट, दलदल ज़मीन, जंगलों, वनस्पतियों, रेत के टीलों, चरागाहों, और हरे भरे मैदानों पर आधारित है। इस भूखंड में कहीं तो वृक्ष बहुत घने हैं और कहीं विरल हैं। यह प्रायद्वीप 68 हज़ार हेक्टेयर के भूभाग पर फैला हुआ है इस क्षेत्र और कैस्पियन सागर के बीच में 6 कोमीटर से अधिक लंबी रेतीली पट्टी है। म्यानकाले प्रायद्वीप में विचित्र प्राकृतिक आकर्षण और मनमोहक पर्यावरण है। यहां की सबसे बड़ी ख़ूबसूरती यहां की हरियाली और वन्य जीव हैं। यह भूखंड जलीय व शुष्क दो प्रकार के इको सिस्टम पर आधारित है। म्यानकाले तालाब इसी भूभाग का एक हिस्सा है जिसे रामसर कन्वेन्शन में अंतर्राष्ट्रीय तालाबों की सूचि में शामिल किया गया।

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म्यानकाले तालाब पक्षियों को देखने और आनंदित होने का बहुत अच्छा स्थान है। दूर दूर से सैलानी इस क्षेत्र में आते हैं और बर्ड वाचिंग के लिए घंटों का समय बिताते हैं। पूरे साल यह तालाब विभिन्न प्रकार के पक्षियों से भरा रहता है अनेक स्थानों से पक्षी पलायन करके इस क्षेत्र में आते हैं और यहां की संतुलित जलवायु में शरण लेते हैं। इस तालाब में अनेक प्रजातियों के बगुले, हंस, मुर्ग़ाबियां और शिकरे दिखाई देते हैं। इसी क्षेत्र में उत्तरी ईरान में शिकरे की दो संरक्षित प्रजातियां भी हैं। म्यानकाले प्रायद्वीप में जंगली सूअर, सियार, साही, ख़रगोश, लोमड़ी, भेड़िया, जंगली बिल्ली तथा अन्य कुछ प्रकार के पशु मिलते हैं। इस क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की मछलियां भी मिलती हैं। इस क्षेत्र में तुर्कमन व कैस्पियन प्रजातियों के घोड़े भी पाए जाते हैं इनमें कुछ तो जंगली और कुछ पालतू हैं।

म्यानकाले प्रायद्वीप का मैदानी भाग चरागाह के रूप में प्रयोग होता है। इस भाग में विभिन्न प्रकार के पशु दिखाई देते हैं। इस भाग की वनस्पतियां वही हैं जो चरागाहों में मिलती हैं। इस क्षेत्र में दोनों ही प्रकार की वनस्तियां हैं। वह वनस्पतियां हैं जो पानी वाले क्षेत्रों में पायी जाती हैं और वह वनस्पतियां भी हैं जो मैदानी क्षेत्रों में मिलती हैं। म्यानकाले के जंगलों की मिट्टी लवणयुक्त है अतः वहां खट्टे अनार जैसे पेड़ अधिक संख्या में हैं जिनकी लंबाई पांच मीटर तक होती है। यहां ब्लैक बेरी के पौधे जगह  जगह दिखाई पड़ते हैं। इसके अलाव लोक्वाट, पोपलर, सैलसोला, सेजेस और नाटवीड जैसे पेक्ष और पौधे भी इस क्षेत्र में हैं जिनका औषधीय उपयोग है।

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म्यानकाले प्रायद्वीप का एक भाग गुरगान खाड़ी है जो प्रायद्वीप के दक्षिणी भाग में स्थित है। गुरगान खाड़ वास्तव में कैस्पियन सागर की सबसे बड़ी खाड़ी है जो म्यानकाले प्रायद्वीप के मध्यम से कैस्पियन सागर से अलग हुई है। इस खाड़ी का क्षेत्रफल लगभग 400 वर्ग किलोमीटर है। इस खाड़ी की गहराई कम है। जब पानी बहुत अधिक भर जाता है तब इसकी गहराई अधिकतम 4 मीटर होती है। चूंकि गुरगान खाड़ी की गहराई कम है और यहां वाष्पीकरण तेज़ होता है अतः इस भाग का पानी कैस्पियन सागर की तुलना में अधिक खारा है लेकिन खाड़ी की मुहाने के निकट पानी का खारापन कम हो जाता है क्योंकि उस भाग में क्षैत्र की क़रेसू और गुहरबारान नामक नदियां गिरती हैं। अलबुर्ज़ पर्वत के उत्तरी आंचल से निकलने वाली लगभग 25 छोटी नदियां गुरगान खाड़ी में गिरती हैं। लेकिन पूरे साल इस खाड़ी में आने वाला पानी इससे बाहर निकलने वाले पानी से कम होता है और पानी की यह कमी कैस्पियन सागर से पूरी होती है। एक दीर्घकालीन और तेज़ जलप्रवाह कैस्पियन सागर से इस खाड़ी की ओर होता है जबकि एक हल्का और लघुकालानी जलप्रवाह इस खाड़ी से कैस्पियन सागर की ओर होता है।

गुरगान खाड़ी का इको सिस्टम कैस्पियन सागर, पड़ोस की नदियों और म्यानकाले प्रायद्वीप की परिस्थितियों से प्रभावित है। इसी प्रभाव के कारण इस खाड़ी में जल प्राणियों की संख्या भी बहुत अधिक है और उनकी क़िस्में भी ज़्यादा हैं। इस खाड़ी में अनेक प्रकार की मछलियां पायी जाती हैं जबकि जाड़े के मौसम में ठंडे क्षैत्रों के पलायनकर्ता पक्षी भी इस खाड़ी में बसेरा करते हैं। म्यानकाले प्रायद्वीप और गुरगान खाड़ी पर्यावरण के प्रभावों की दृष्टि से एसे दो क्षेत्र हैं जो एक दूसरे से अलग नहीं हो सकते और इन्हें एक ही क्षेत्र के रूप में संरक्षित किया गया है। गुरगान खाड़ी ईरान में केवियर की पैदावार का महत्वपूर्ण केन्द्र है। देश तथा क्षेत्र की ज़रूरत की केवियर के उत्पादन में इस खाड़ी का महत्वपूर्ण योगदान है।

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म्यानकाले द्वीप आज़ाद घूमते घोड़ों पलायनकर्ता पक्षियों, तालाबों और खाड़ी का क्षेत्र है जहां हर रोज़ सुबह दसियों हज़ार पक्षी आसमान में चकराने लगते हैं। सुबह के धुंधलके में इस क्षेत्र में बड़े ही सुंदर दृष्य उत्पन्न होते हैं जो बड़े विचित्र होते हैं। इस प्रकार के दृष्य किसी अन्य स्थान पर बहुत मुश्किल से पैदा होते हैं। इस सुंदरता और इन सुंदर दृष्यों का आनंद लेने के लिए सारी नगर से गुज़रना होता है जो माज़न्दरान प्रांत का केन्द्रीय शहर है। सारी से गुज़रने के बाद बेहशहर पहुंचना होता है और वहां से इंडस्ट्रियल पार्क वाली सड़क के माध्यम से आगे बढ़ते हुए अमीराबाद पहुंचना होता है। अमीराबाद और ज़ाग़मर्ज़ लपवी तालाब से गुज़रते हुए तटीय सड़क पर पांच किलोमीटर आगे जाने के बाद म्यांकाले पहुंचा जा सकता है। वनस्पतियों और पक्षियों के इस जमघट अर्थात म्यानकाले को देखने के लिए जिस रास्ते से गुज़रना पड़ता है वह भी बहुत सुंदर और आकर्षक है।

 

Jul ११, २०१७ १५:५४ Asia/Kolkata
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