इस बात के पुष्ट प्रमाण पाए जाते हैं कि विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं के स्वामी देशों में से एक ईरान, पर्यावरण के संबन्ध में अति प्राचीन क़ानून का स्वामी है।

ईरान में प्रचानीकाल से ही पर्यावरण को स्वच्छ रखने के साथ ही साथ मिट्टी, हवा और पानी की सुरक्षा पर विशेष बल दिया गया है।  वृक्ष और वन, ईरानियों के निकट सुन्दरता का प्रतीक रहे हैं।  उनकी धार्मिक शिक्षाओं में भी इनकी सुरक्षा पर बल दिया गया है।  इतिहास के अध्ययन से पता चलता है कि ईरान में प्राचीन काल में ऐसे त्योहार मनाए जाते थे जिनमें वृक्षारोपण की परंपरा थी।  प्राचीनकाल से ही ईरान में कृषि को सम्मान की दृष्टि से देखा गया है।  तख़्ते जमशेद में हख़ामनशी काल के शिलालेखों पर भी इस विषय के महत्व को दर्शाया गया है।  प्राचीनकाल में ईरानियों के बीच यह धारणा पाई जाती थी कि वह राष्ट्र जो पेड़ लगाए और बंजर भूमि को कृषि योग्य भूमि बनाए वही वास्तव में सुखी राष्ट्र है।

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ईरानियों द्वारा इस्लाम स्वीकार किये जाने के बाद इस धर्म की शिक्षाओं ने भी ईरानियों की पर्यावरण के बारे में पाई जाने वाली धारणा को मज़बूत किया।  इसके बाद से पर्यावरण की सुरक्षा को अधिक गंभीरता से लिया गया।  ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद से पर्यावरण की सुरक्षा के विषय को एक सामाजिक चुनौती के रूप में लिया गया।  ईरान के संविधान में पर्यावरण की सुरक्षा को एक सार्वजनिक दायित्व के रूप में दर्शाया गया है।  संविधान के 50वें अनुच्छेद में इस बारे में विस्तार से बताया गया है कि पर्यावरण की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सार्वजनिक होने के साथ ही आने वाली पीढ़ियों की भी है।  इसी बात के दृष्टिगत हर वह आर्थिक गतिविधि जो पर्यावरण को क्षति पहुंचाने का कारण बने, प्रतिबंधित है।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई भी पर्यावरण की सुरक्षा के महत्व पर बल देते हैं।  उनका मानना है कि पर्यावरण की सुरक्षा का संबन्ध पूरी मानवता से है और यह बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है।  वे कहते हैं कि यही कारण है कि समाज के हर व्यक्ति का दायित्व बनता है कि वह पर्यावरण की रक्षा करे।  वरिष्ठ नेता कहते हैं कि एक मुसलमान होने के नाते यह हमारा धार्मिक कर्तव्य भी है।  उनका कहना है कि यह आम लोगों से संबन्धित विषय है जिसमें सब शामिल हैं।  वरिष्ठ नेता के अनुसार पर्यावरण की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सरकारों पर भी आती है।   उनका मानना है कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए देश के भीतर और देश के बाहर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय संस्थाओं और संगठनों के साथ सहयोग करना, सरकारों का दायित्व है।

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इन बातों के दृष्टिगत इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने पर्यावरण की सुरक्षा से संनब्धित मूल नियमों को सन 2015 में ईरान की तीनों पालिकाओं के प्रमुखों के सामने पेश किया था।  इसमें कहा गया था कि ईरान के अल्पकालीन और दीर्घकालीन विकास कार्यक्रमों में पर्यावरण की सुरक्षा से संबन्धित मानदंडों को पूरी तरह से दृष्टिगत रखा जाए।  पर्यावरण की सुरक्षा से संबन्धित वरिष्ठ नेता की ओर से पेश किये गए मूल सिद्धातों की समीक्षा से यह बात स्पष्ट होती है कि इसका दायित्व व्यक्ति, समाज और सरकारों, सब पर है।

पर्यावरण की सुरक्षा का विषय राष्ट्रीय न होकर अन्तर्राष्ट्रीय है इसीलिए इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई, पर्यावरण कूटनीति की ओर विशेष ध्यान देते हैं।  वे कहते हैं कि इस माध्यम से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग करते हुए पर्यावरण से संबन्धित बहुत सी समस्याओं का समाधान बड़ी सरलता से किया जा सकता है।  उदाहरण स्वरूप वातावरण में धूल का आ जाना और फिर उसका हर ओर फैलना, कभी-कभी उस क्षेत्र के लोगों के लिए जटिल समस्या का रूप धारण कर लेता है।  ईरान के बहुत से क्षेत्रों में यह समस्या आम हो चुकी है।  इस संबन्ध में खोजबीन करने से पता चला कि इस समस्या का मुख्य कारण ईरान के पड़ोसी देशों इराक़ तथा कुवैत में पर्यावरण को पहुंचने वाली क्षति है।  इस समस्या ने पश्चिमी ईरान में परोक्ष और अपरोक्ष रूप से मानव जीवन, वनस्पतियों, जंगलों और पानी सबको प्रभावित कर रखा है।  यह एसी समस्या है जिसका समाधान केवल स्थानीय स्तर पर नहीं किया जा सकता बल्कि इसके लिए अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।  ऐसे में पर्यावरण कूटनीति को विशेष स्थान प्राप्त है।

इस्लामी गणतंत्र ईरान, पर्यावरण की सुरक्षा के संबन्ध में अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ संपर्क में है और उनके साथ पूरी सहकारिता कर रहा है।  पर्यावरण की सुरक्षा से संबंधित अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की लगभग सभी संस्थाओं का ईरान सदस्य है।  यह विषय दर्शाता है कि पर्यावरण की सुरक्षा जैसे विषय को ईरान कितनी गंभीरता से लेता है।

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अबतक जो बातें कही गईं उनसे यह निष्कर्श निकाला जा सकता है कि पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वाले और दूषित करने वाले तत्वों के मुक़ाबले में इस्लामी गणतंत्र ईरान, सदैव संघर्षरत है।  यह ऐसा विषय है जिसमें थोड़ी सी भी ढिलाई, दूसरों के लिए गंभीर संकट का कारण बन सकती है।  वास्तव में पर्यावरण की सुरक्षा मानव जीवन से संबन्धित सबसे ज्वलंत विषय है क्योंकि यदि पर्यावरण को क्षति पहुंचती है तो निश्चित रूप से इससे पूरा मानवजीवन प्रभावित होगा।  यह समस्या बाद में न केवल मानव जीवन को ही नहीं बल्कि धरती पर रहने वाले हर प्राणी को बुरी तरह से प्रभावित करेगी।  पर्यावरण का मामला किसी एक देश या किसी एक महाद्वीप से संबन्धित नहीं है बल्कि पूरे विश्व से संबन्धित है।  इस आधार पर कहा जा सकता है कि पर्यावरण की सुरक्षा के सबंन्ध में अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग एक प्रतिरोधक शक्ति के रूप में काम कर सकता है जो राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण को होने वाली क्षति को रोकने में बहुत सहायक सिद्ध होगा।  पर्यावरण की सुरक्षा का विषय इतना अधिक संवेदनशील है कि इसके महत्व के बारे में अधिक से अधिक जानकारी उपलब्ध करवाए जाने की आवश्यकता है।  इस्लामी गणतंत्र ईरान इस मामले में आरंभ से ही सजग रहा है और वर्तमान समय में भी राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इसके मुक़ाबले के लिए कार्यरत है।

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यह विषय इस बात परिचायक है कि ईरान में पर्यावरण की सुरक्षा को अधिक महत्व दिया जा रहा है।  यह ऐसा विषय है जिसके प्रति इस्लामी गणतंत्र ईरान, प्रतिबद्ध रहा है और आगे भी रहेगा।

 

 

 

 

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Oct १७, २०१७ १७:३५ Asia/Kolkata
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