हमने बताया था कि “मेट ड्रेटेन” का परिवार सेन फ़्रांसिसको का एक जानामाना परिवार है।

वे श्वेत मूल के हैं।  मेट ड्रेटेन की एक बेटी है जिसका नाम “जूई” है।  जूई 23 साल ही है।  पढ़ने के लिए वह हवाना गई हुई है।  जूई, हवाना से वापस सेन फ्रांसिसको आती है।  उसके साथ 37 वर्षीय डाक्टर जान प्रेंटेस हैं जिनका संबन्ध श्यामवर्ण के लोगों से है अर्थात वे जूई की भांति गोरे नहीं बल्कि काले हैं।  जूई और जान अभी हाल ही में एक-दूसरे से परिचित हुए हैं।  वे एक-दूसरे से इतना अधिक प्रभावित हैं कि मात्र 10 दिनों की मुलाक़ात में ही शादी करने का इरादा कर लेते हैं।  इसके लिए दोनो तैयार हैं।  उन दोनों की एक समस्या यह है कि दोनो अलग-अलग रंग की जातियों से संबन्ध रखते हैं।  जूई श्वेत है जबकि जान प्रेटेस अश्वेत हैं। वे दोनो सेन फ़्रांसिसको आए हैं ताकि अपनी शादी के विषय से जूई के माता-पिता को अवगत करवाएं।

जूई के माता और पिता को जब इस शादी की बात का पता चलता है तो वे दोनों अचंभित रह जाते हैं।  जूई के पिता इसका विरोध करते हैं हालांकि वे एक प्रकाशक हैं और अपने समाचारपत्र में जातीय समानता के बारे में लिखते रहते हैं किंतु व्यवहारिक रूप में इसे नहीं मानते अर्थात जूई के पिता भी नस्लभेद के समर्थक हैं। 

फ़िल्म आरंभ होने के 51 मिनट के बाद जो सीन शुरू होता है उसमें दिखाया जाता है कि मेट ड्रेटेन के एक दोस्त माइक रायन, मेट के घर आते हैं।  वे अपने मित्र मेट से जूई और जान की शादी के बारे में बात करते हैं।  इसी बीच जूई की मां क्रिस्टीना भी वहां आ जाती हैं।  माइक कहते हैं कि जूई और जान को पूरी स्थिति का पता तो है ही।  वे दोनों ही समझदार, पढेलिखे और बुद्धिमान हैं।  इन दोनों को अपनी शादी के बाद की स्थिति के बारे में भी भलिभांति पता है कि दो अलग-अलग जातियों के लोगों के बीच विवाह के क्या परिणाम सामने आते हैं।  अब अगर इतना जानते हुए भी दोनों शादी करना चाहते हैं तो फिर इससे यह पता चलता है कि वे एक-दूसरे को कितना चाहते हैं।  माइक रायन अपने मित्र मेट से कहते हैं कि जब वे अपनी शादी के लिए इतने आतुर हैं तो फिर तुमको भी इसकी अनुमति दे देनी चाहिए।

 

मेट कहते हैं कि समझ में नही आ रहा है कि क्या करूं? मैं ख़ुद भी नहीं चाहता हूं कि जान और जूई अपनी शादी से परेशान रहें किंतु तुम जानते हो कि गोरों और कालों के बीच शादी लगभग असंभव है।  मुझको तो यह बहुत ही कठिन काम लगता है।  इसपर मेट ड्रेटेन कहते हैं कि अच्छा तो तुम्हारी सोच यह है।  तुम इस विषय को क्यों इतना जटिल बना रहे हो? वे कहते हैं कि तुम वैसे तो लोगों विशेषकर कालों और गोरों के बीच समानता की बात करते हो और यही दिखाते हो कि इसके पक्षधर हो किंतु वास्तव में तुम एसा नहीं चाहते।  तुमने इस बारे में क्यों दोहरा मानदंड अपनाया है? यह सुनकर मेट के पास कहने को कुछ नहीं बचा इसलिए वह खामोश हो जाता है।

यहा पर आपको बताते चलें कि मेट ड्रेटेन, गार्डियन समाचारपत्र के प्रकाशक हैं और इस समाचारपत्र में वे समानता की बातें करते हैं।  समाचारपत्र के अनुसार वे नस्लभेदी विचारधारा के धुर विरोधी हैं किंतु वास्तव में वे अपनी बेटी की शादी किसी काले व्यक्ति से करने के पक्ष में नहीं हैं।  यह विषय उनके व्यक्तित्व के दो रूपों को प्रदर्शित करता है।  इससे पता चलता है कि भेदभाव के विरुद्ध उनके नारे केवल दिखावे के हैं जबकि वे स्वयं व्यहारिक रूप में इसके समर्थक हैं।  काले मूल के व्यक्ति के साथ अपनी बेटी की शादी के विरोध का कारण यह है कि ड्रेटेन के समाज में नस्लभेद की जड़ें बहुत ही गहरी हैं।  फ़िल्म का यह सीन बताता है कि 1960 के दशक में अमरीकी समाज में यह बात स्वीकार योग्य नहीं थी कि गोरे और काले आपस में शादी करें।  इसका विरोध मुख्य रूप से गोरे लोग ही किया करते थे।  फिल्म बताती है कि अमरीकी समाज के भीतर नस्लभेद का विरोध करने वाले भी इस बात को केवल मौखिक रूप से ही मानते थे व्यवहारिक रूप में वे इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करते थे। 

हम आपको बता चुके हैं कि जूई अपने मित्र जान से कहती है कि वह अपने मां-बाप को सेन फ्रांसिसको बुलाए ताकि कम से कम वह उनसे मिलकर कोई समाधान ढूंढे।  हालीवुड में बनने वाली फिल्म, “Who’s Coming to Dinner” हूज़ कमिंग टू डिनर के एक सीन में दिखाया गया है कि जान के माता-पिता सैन फ़्रांसिसको आए हैं।  जान और जूई उनको लेने के लिए हवाई अड्डे जाते हैं।  इस फ़िल्म के 68वें मिनट में दिखाया जाता है कि जान और जूई तथा जान के माता-पिता कार में सवार हैं और कार चल रही है।  कार में एक विशेष प्रकार की खामोशी है।  सब एक-दूसरे को देख रहे हैं किंतु कोई भी कुछ बोल नहीं रहा है।

इसी बीच जान की मां कहती हैं कि इस शादी के बारे में जूई के मां-बाप की क्या प्रतिक्रिया है?   जान के पिता कहते हैं कि मैं भी यही जानना चाहता था।  इसपर जूई कहती है कि शादी की बात सुनकर मेरे मां और बाप दोनों ही अचरज में पड़ गए।  इससे पहले उन्होंने एसा सुना नहीं नहीं था।  जान के पिता कहते हैं कि यदि हमारी प्रतिक्रिया भी तुम्हारे माता-पिता की ही तरह हो तो क्या तुम हमे अच्छा कहोगी? जूई कहती है कि जिस प्रकार से मेरे माता पिता ने अपनी प्रतिक्रया दी वह तो मूर्खतापूर्ण थी अब आप जैसी भी प्रतिक्रया दें यह आपकी मर्ज़ी। यह बात सुनकर जान कहता है कि पिताजी हमारे साथ जो कुछ हुआ वह बहुत ही तेज़ी से घटने वाला घटनाक्रम था हालांकि हम नहीं चाहते थे कि एसा हो लेकिन क्या करे एसा ही हुआ।  मैं समझता हूं कि आपके लिए यह कुछ कठिन होगा।

अब जान, जूई और जान के मातापिता, जूई के घर पहुंचते हैं।  घर में जूई के पिता मेट ड्रेटेन उपस्थित हैं।  शादी के बारे में विरोध के बावजूद आख़िर में जान और जूई के माता-पिता राज़ी हो जाते हैं।

“Who’s Coming to Dinner” हूज़ कमिंग टू डिनर नामक फ़िल्म में अमरीका में शासन करने वाले सफेद मूल के लोगों की शासन व्यवस्था से आम लोगों में पाई जाने वाली घृणा को दिखाया गया है।  1960 के दशक तक अमरीकी समाज में यह सोच पाई जाती थी कि गोरों और कालों के बीच विवाह हो ही नहीं सकता क्योंकि वे दो अलग-अलग जातियों के लोगे हैं और गोरे लोगों को कालों पर वरीयता हासिल है।

 

इससे पहले भी हमने हालीवुड में बनने वाली कुछ एसी फिल्मों की समीक्षा पेश की थी जिन्हें नस्लवाद के विषय पर बनाया गया था।  पिछली फ़िल्मों की तुलना में “Who’s Coming to Dinner” हूज़ कमिंग टू डिनर में यह स्पष्ट रूप में दिखाई देता है कि अमरीकी समाज में नस्लवाद का ज़ोर धीरे-धीरे टूट रहा है।  बाद वाली फ़िल्मों में यह दिखाया गया कि मानवीय विशेषताओं की दृष्टि से गोरे और काले लोगों में कोई अंतर नहीं है बल्कि वे समान हैं जबकि इससे पहले वाली फ़िल्मों में यह बात नहीं होती थी।  वहां पर हर स्थिति में वर्चस्व, गोरों का ही था।  इससे पता चलता है कि पहले की तुलना में अमरीका में रहने वाले काले लोगों की स्थिति में थोड़ा बहुत सुधार हुआ है।  इतना होने के बावजूद अभी भी अमरीका में गोरे और काले समान नहीं हैं।  आज भी काले लोगों को अमरीका में रोज़गार, नौकरी, सामाजिक समानता, आर्थिक और राजनैतिक दृष्टि से समानता प्राप्त नहीं है।  वहां पर अब भी गोरों का ही वर्चस्व है और काले लोगों को गिरी नज़र से देखा जाता है।  अमरीकी समाज में आज भी काले लोग अपने भविष्य के लिए कठिन परिश्रम करते हैं किंतु आख़री फैसला गोरे लोगों के ही हाथों में होता है।  जैसाकि “Who’s Coming to Dinner” हूज़ कमिंग टू डिनर नामक फ़िल्म में दिखाया जाता है कि अगर जूई के माता और पिता शादी की अनुमति नहीं देते तो फिर जान और जुई की शादी लगभग असंभव थी।  इससे पता चलता है कि अमरीकी समाज में अन्तिम फैसला आज भी गोरों के ही हाथों में है।  इस बात से अमरीकी समाज में काले लोगों के विरुद्ध फैले अन्याय को स्पष्ट रूप में देखा जा सकता है।

हालांकि फिल्म बनाने वाला ने 1960 के दशक में अमरीकी समाज में काले लोगों के बारे में पाए जाने वाले भेदभाव को दर्शाने का प्रयास किया है किंतु वास्तविकता यह है कि इतना समय व्यतीत हो जाने के बावजूद आज भी अमरीकी समाज में काले लोगों के विरुद्ध नफ़रत पाई जाती है और इस बारे में नस्लभेद पूरे अमरीकी समाज में व्याप्त है। 

 

Dec ११, २०१७ १३:३५ Asia/Kolkata
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