जैसाकि आप जानते हैं कि हालीवुड में भेदभाव नामक कार्यक्रम श्रंखला में यह बताने का प्रयास किया जा रहा है कि अमरीकी समाज में काले या अश्वेतों के साथ कितना भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जाता है।

पिछली कुछ कड़ियों में आपने सुना होगा कि अमरीकी समाज में आज भी अश्वेतों को बहुत ही गिरी नज़र से देखा जाता है।  यह सोच जहां नैतिक दृष्टि से अपराध है वहीं पर एक समुदाय के विकास की सबसे बड़ी बाधा भी है।

 

ते हैं कि हालीवुड में भेदभाव नामक कार्यक्रम श्रंखला में यह बताने के प्रयास किया जा रहा है कि अमरीकी समाज में काले या अश्वहालीवुड में बनाई जाने वाली फ़िल्मों में से एक फ़िल्म का नाम है "द ब्लाइंड साइड" यह फिल्म, द ब्लाइंड साइड नामक उपन्यास पर आधारित है जिसे माइकल लुइस ने लिखा था।  यह फ़िल्म, सच्ची कहानी पर आधारित है।  The Blind Side नामक फ़िल्म का निर्देशन John Lee Hancock "जान ली हेंकाक" ने किया है।  द ब्लाइंड साइड दो घण्टे की फ़िल्म है।  यह फ़िल्म एक अमरीकी अश्वेत रग्बी खिलाड़ी, Michal Oher के जीवन पर आधारित है।  रग्बी, अमरीका के प्रचलित खेलों में से एक है जिसे बहुत पसंद किया जाता है।  रग्बी या Rugby Football के लिए खिलाड़ी के अधिक बलवान होने की ज़रूरत होती है।  माइकल ओहर लंबा-चौड़ा और बहुत शक्तिशाली खिलाड़ी था।  हालांकि माइकल ओहर शक्तिशाली था किंतु रग्बी में सफलता के लिए उसे प्रशिक्षण की आवश्यकता थी।

अपनी पारिवारिक स्थिति और अमरीकी समाज में अश्वेतों के विरुद्ध अपनाए जाने वाले व्यवहार के कारण माइकल ओवर का बचपन बहुत कठिनाइयों में बीता।  इसी बीच वह Tuohy टूहाई के परिवार से परिचित हुआ।  टूहाई का परिवार आर्थिक दृष्टि से संपन्न था।  टूहाई परिवार के आर्थिक समर्थन के कारण माइकल ओवर की शारीरिक क्षमताएं निखरती हैं और वह एक बहुत ही मश्हूर रग्बी खिलाड़ी के रूप में उभरता है।  बाद में सन 2008 को वह अमरीका के सबसे अच्छे फुटबाल खिलाड़ी के रूप में चुना जाता है।  इसके बाद माइकल ओवर के पास पैसे की कोई कमी नहीं रहती।

 

द ब्लाइंड साइड नामक फ़िल्म, एक सामाजिक फ़िल्म है जिसमें खेल की भी भूमिका है।  इसमें जहां पर अमरीका की सामाजिक परिस्थितियों को प्रदर्शित किया गया है वहीं पर रग्बी के बारे में भी बहुत कुछ दिखाया गया है।  फिल्म के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया गया है कि अश्वेत या काले लोग ख़राब नहीं होते बल्कि उन्हें समर्थन की ज़रूरत है।  यदि उनको अमरीकी समाज के बहुसंख्यकों अर्थात गोरों का समर्थन मिल जाए तो वे भी बहुत कुछ कर सकते हैं जैसाकि माइकल ओवर के साथ हुआ।

यदि अमरीकी अश्वेतों के लिए परिस्थितियां अनुकूल बना दी जाएं तो वे भी समाज में उल्लेखनीय काम कर सकते हैं।  द ब्लाइंड साइड नामक फ़िल्म में गोरे और काले अमरीकियों के बीच मित्रता और सौहार्द को दर्शाया गया है।  कला की दृष्टि से भी यह फ़िल्म परिपूर्ण है।  यही कारण है कि यह फ़िल्म अमरीका के भीतर और बाहर बहुत प्रसिद्ध हुई। माइकल ओवर की मां की भूमिका के कारण सैन्ड्रा बुलक Sandra Bullock को सन 2009 में बेहतरीन अभिनेत्री का पुरस्कार दिया गया।

कार्यक्रम के इस भाग में हम आपको द ब्लाइंड साइड के कुछ दृश्यों के बारे में बताने जा रहे हैं।  माइकल ओएर अमरीका के मेमफ़िस नगर का रहने वाला था।  वह एक निर्धन परिवार का शर्मीले स्वभाव का इंसान था।  अमरीका के मेमफ़िस नगर में जातीय भेदभाव बहुत अधिक पाया जाता है।  माइकल ओएर, एक अश्वेत अमरीकी परिवार का सदस्य है जिसमें 12 लोग हैं।  उसकी मां शराबी और पिता अवैध धंधों में लिप्त था।  माइकल ओएर शक्तिशाली और बलवान था किंतु पढ़ाई में बहुत कमज़ोर था।  वह क्लास में बहुत सी बातों को समझ ही नहीं पाता था।

 

एक बार माइकल ओएर, एक धनवान परिवार के एक लड़के एस.जी. से परिचित होता है।  उसकी मां लीएने टूई, इंटीरियर फैशन डिज़ाइनर होती है और उसके पिता एस.जी.शैन टूई, एक बड़े व्यापारी हैं।  उनकी एक बेटी है जो पढ़ रही है।  एस.जी. परिवार माइकल ओएर को मुंह बोले बेटे के रूप में स्वीकार कर लेता है।  इस प्रकार से माइकल ओएर के एक नए जीवन का आरंभ होता है।  Leigh Anne Tuohy और उनकी धर्मपत्नी, विभिन्न कामों में माइकल ओएर की मदद करते हैं।  बाद में टूई परिवार के जानने वाले इस बात को स्वीकार करने लगते हैं कि माइकल ओएर भी उन्ही के घर का एक सदस्य है।  उसको समाज में टूहाई परिवार के एक नए सदस्य के रूप में पहचान मिलती है।  आरंभ में तो माइकल ओएर को एक मंद बुद्धिवाले मोटे लड़के के रूप में पहचान मिली किंतु बाद में वह अमरीका के एक बेहतरीन रग्बी खिलाड़ी के रूप में पहचाना गया।

द ब्लाइंड साइड फ़िल्म यह बताती है कि अमरीकी समाज में अश्वेतों की प्रगति न करपाने का कारण यह नहीं है कि वे लोग योग्य नहीं हैं या उनके भीतर योग्ताएं नहीं पाई जातीं बल्कि प्रगति के मार्ग में उनके लिए खड़ी की जाने वाली बाधाए हैं जो उनकी प्रगति को रोके हुए है।  अमरीकी समाज में कालों की प्रगति के लिए संभावनाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।  यही बातें, अश्वेतों की प्रगति में बाधा बनती हैं।  ऐसे में यदि अमरीका में रहने वाले कालों को अवसर उपलब्ध कराया जाएं तो वे भी वैसे ही सफलताएं प्राप्त कर सकते हैं जैसे माइकल ओएर ने हासिल कीं।  इससे पता चलता है कि काले या अश्वेत भी आम गोरे लोगों की तरह हर क्षेत्र में तरक़्क़ी कर सकते हैं।

हालीवुड में बनी द ब्लाइंड साइड फ़िल्म के एक दृश्य में दिखाया जाता है कि Leigh Anne Tuohy टूई अपने तीन मित्रों के साथ एक रेस्टोरेंट में बैठे हैं।  क्रिस्मस की गिफ़्ट के लिए टुहाई ने माइकल का नाम भी बढ़ा दिया है। जब उनके मित्रों ने देखा कि माइकल ओएर का नाम टूई के परिवार के सदस्यों में बढ़ गया है तो इसपर उन गोरे लोगों ने टूई का मज़ाक़ उड़ाया।  यहां पर टूई कहते हैं कि माइकल अच्छा लड़का है।  उनकी यह बात सुनकर उनके सामने बैठे हुए तीनों दोस्त कहते हैं कि अब अच्छा यह होगा कि तुम यह काम क़ानूनी ढंग से कर लो और उसे क़ानूनी हिसाब से अपना बेटा घोषित कर दो।

दोस्तों की इस बात पर टुहाई ने कहा कि माइकल अभी 18 साल का नहीं हुआ है।  वैसे यह भी है कि एसा लगता है कि उसने भी अभी तक क़ानूनी रूप में बेटा बनने की बात के बारे में सोचा नहीं है।  उनकी इस बात पर उनके एक दोस्त का कहना है कि क्या तुम गोरे होने के बावजूद इस हीन भावना का शिकार हो कि एक काले को अपना क़ानूनी बेटा बनाओ? एसे में टुहाई कहते हैं कि मुझको इस बात की कोई परवाह नहीं है कि तुम मेरी पसंद की पुष्टि करो तभी मैं उसको मानूं।  मैं तुमसे कहता हूं कि तुम उसका सम्मान करो।  क्या तुमने कभी सोचा है कि यह लड़का किन परिस्थितियों में था।  अगर तुम लोग इसी प्रकार से आलोचना करते रहोगे तो फिर मैं ऐसे लोगों के साथ उठना-बैठना बंद कर दूंगा।  इसका कारण यह है कि उसके दोस्त पूरी तरह से भेदभाव पूर्ण बातें कर रहे हैं।  टुहाई की यह बात सुनकर उसके साथी अपनी शर्मिंदगी मिटाने के लिए दूसरी बात शुरू कर देते हैं।  उनका एक दोस्त कहता है कि मुझको माफ करना वास्तव में मेरा इरादा तुम्हे दुख पहुंचाना नहीं था।  उनका दूसरा दोस्त जो उनके ठीक सामने बैठा था वह कहता है कि वास्तव में तुम्हारा काम प्रशंसनीय है।

अगर आपने यह फ़िल्म देखी होगी तो आपको समझ में आएगा कि रेस्टोरेंट में बैठे हुए टुहाई के दोस्त, इस विषय पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते हैं कि माइकल ओएर का पढ़ाई में पिछड़ा होना और उसकी निर्धन्ता का मुख्य कारण अमरीका का समाजी तानाबाना है न कि उसका रंगरूप।  इस प्रकार से वे ओएर को पूरी तरह से अनेदखी करना चाहते हैं।  वे लोग माइकल ओएर को टुहाई के शत्रु के रूप में देखते हैं क्योंकि वह काले रंग का होता है जबकि टुहाई, काले-सफेद के भेदभाव को समाप्त करना चाहता है।  अपने दोस्तों की भेदभावपूर्ण आलोचना के जवाब में टुहाई कहते हैं कि माइकल, मुझको बदल रहा है।  द ब्लाइंड साइड का यह दृश्य बताता है कि अमरीकी समाज में अब यह बात मानी जाने लगी है कि लोगों के बारे में फैसले उनके रंग के हिसाब से न किये जाएं।  हालांकि अमरीका में अब भी रंग के आधार पर समाज बंटा हुआ है जिसमें वरीयता गोरे लोगों को ही है।  वहां पर आज भी अश्वेतों को बहुत से लोग दूसरे दर्जे का ही नागरिक समझते हैं।  वास्तव में हमें यह बात समझनी चाहिए कि गोरे और कालों के बीच रंग का तो अंतर हो सकता है लेकिन इंसान होने के नाते वे दोनो समान हैं।  यदि इनका उचित समर्थन किया जाए तो वे भी श्वेतों की ही भांति हर क्षेत्र में प्रगति एवं विकास कर सकते हैं।

 

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Jan १७, २०१८ ११:३१ Asia/Kolkata
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