हमने यह बताया था कि माइकल ओएर नामक का अश्वेत लड़का है जिसका जन्म एक निर्धन अश्वेत घराने में हुआ है।

उसका घर एक बहुत ही निर्धन क्षेत्र में है।  काले रंग का होने के कारण माइकल ओएर को अमरीकी समाज में व्याप्त जातिवाद का सामना करना पड़ता है।  पैसे की कमी के कारण उसे तरह-तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।  हालांकि शारीरिक दृष्टि से माइकल ओएर बहुत मज़बूत है जिसके कारण खेल जगत में वह नाम कमा सकता है किंतु काले और गोरे रंग के अमरीकी लोगों के बीच जो भेदभाव पाया जाता है उसके कारण वह हर प्रकार की तरक़्की से वंचित है।  माइकल ओएर के जीवन में एक सुखद घटना यह घटती  है कि उसकी मुलाक़ात Tuohy टूई नामक एक श्वेत परिवार से होती है।  वे लोग माइकल को अपने बेटे की तरह पालते हैं।  यह परिवार जहां पर धनवान है वहीं पर वह मानवप्रेमी भी है।  टूहाई परिवार, माइकल ओएर का समर्थन करता है और उसे गोद ले लेता है।  यह परिवार ही माइकल की शिक्षा का प्रबंध करता है।  बाद में माइकल ओएर के कठिन परिश्रम और टूहाई परिवार के आर्थिक समर्थन से माइकल, अमरीकी फुटबाल का मश्हूर सितारा बनकर उभरता है। 

 

 

लियाने टूई और शैन टूई, माइकल ओएर के लिए एक कार ख़रीदते हैं।  दि ब्लाइंउ साइड फ़िल्म के 66वें मिनट में दिखाया जाता है कि माइकल और एस.जी.टूहाई कार पर सवार होते हैं।  लापरवाही से ड्राइविंग के कारण उनका एक्सीडेंट हो जाता है।  ट्रैफ़िक पुलिस इस दुर्घटना की सूचना, लियाने टूहाई को देती है।  उनको जैसे ही माइकल के एक्सीडेंट की सूचना मिलती है वे स्वयं को बहुत तेज़ी से दुर्घटना स्थल पर पहुंचाती हैं।

जब वे घटनास्थल पर पहुंचती हैं तो पुलिस उनसे कहती है कि हमने पूरी घटना की जांच कर ली है।  लियाने कहती हैं कि वे मेरे बच्चे हैं।  इतना कहने के बाद वे बहुत तेज़ी से दुर्घटनाग्रस्त कार की ओर बढ़ती हैं।  वहां पहुंचकर वे सबसे पहले माइकल को आवाज़ देते हुए पूछती हैं कि ओएर तुम कैसे हो? माइकल कहता है कि मैं ठीक हूं आप पहले एस.जी. टूई की मदद कीजिए।  यह सुनकर लियाने अपने बेटे एस.जी. की ओर जाती हैं।  उनको देखकर एस.जी. कहता है कि क्या आप यह समझ रही हैं कि यह ख़ून मेरे कपड़ों से निकला है? लियाने मज़ाक़ में कहती हैं कि मैं तो यही समझ रही थी कि तुम्हारे कपड़ों से निकला है।

पुलिस कहती है कि श्रीमती, एयर बैग, 200 किमी प्रतिघंटा की गति में ही खुलता है।  आगे की सीट पर बैठने के हिसाब से आपके बेटे की आयु बहुत कम है।

लियाने कहती हैं कि यह बताओ कि वे लोग ठीक हैं।

लियाने, माइकल के पास जाती हैं।  माइकल का सिर झुका हुआ है और वह शर्मिंदा दिखाई दे रहा है।  लियाने कहती हैं कि एस.जी. ठीक है।  वे माइकल को संबोधित करते हुए कहती हैं कि एसा तो किसी के साथ भी हो सकता था।  तुम्हारी कोई ग़लती नहीं है।  चलो कोई बात नहीं है।  इतने में लियाने, माइकल के ज़ख़्मी हाथ को देखती हैं।  वे कहती हैं कि माइकल, तुम्हारे बाज़ू में क्या हुआ? वह कहता है कि मैने एअर बैग को रोके रखा।

 

फिल्म के इस सीन से पता चलता है कि एअर बैग, क्यों एस.जी. से नहीं टकराता।  इसका कारण यह है कि माइकल ओएर ने उसे अपने बाज़ुओं से रोक रखा था।  यहां पर पता चलता है कि अश्वेत माइकल ने एक फरिश्ते की तरह श्वेत एस.जी. की जान बचाई।  लियाने, इस एक्सीडेंट में माइकल को ज़िम्मेदार नहीं मानतीं बल्कि उनका कहना है कि एसा किसी के भी साथ हो सकता है।  “दी ब्लाइन्ड साइड” नामक फ़िल्म के इस दृश्य में गोरे और काले दोनों को एक-दूसरे के लिए सहायक दिखाया गया  है।

“दी ब्लाइन्ड साइड” नामक फ़िल्म के एक अन्य सीन में जो 120 मिनट गुज़रने के बाद शुरू होता है, माइकल ओएर, लियाने और एस.जी.शैन की सहायता से एक यूनिवर्सिटी में दाख़िला लेता है।  यूनिवर्सिटी में एडमिशन कराने के बाद टूहाई परिवार वापस अपने घर चला जाता है।  रास्ते में लियाने बताती हैं कि कुछ दिन पहले उन्होंने एक समाचारपत्र में एक अश्वेत युवक की कहानी पढ़ी थी।  उस अश्वेत लड़के के बाप नहीं थे और वह एक अनाथालय में रहता था।  एक बार गुंडों के साथ झगड़े में वह युवक मारा गया।  लियाने कहती हैं कि अंत में यह लिखा था कि मरने वाला अश्वेत युवक बहुत अच्छा खिलाड़ी था।  अगर वह अपनी पढ़ाई न छोड़ता तो संभव था कि उसका जीवन ही बदल जाता।  वह केवल 20 वर्ष का था।  जिस दिन उस अश्वेत युवक की हत्या हुई उसी दिन उसका जन्म दिन था।  इतना कहने के बाद वे कहती हैं कि मैं ईश्वर का आभार व्यक्त करती हूं कि वह मारा जाने वाला लड़का मेरा माइकल ओएर नहीं था।  इस कहानी के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया गया है कि अगर माइकल ओएर को टूई परिवार का समर्थन प्राप्त न होता तो संभवतः उसका भविष्य भी उसी काले लड़के की तरह होता जो गुडों के साथ लड़ाई में मारा गया।

“दी ब्लाइन्ड साइड” फ़िल्म के दृश्य और इसके कलाकारों का व्यवहार इस बात को स्पष्ट करना चाहता है कि अश्वेत या काले मूल के लोग ज़ाती तौर पर मंदबुद्धि वाले या कम योग्यता वाले नहीं होते।  वे भी आम लोगों की ही भांति होते हैं किंतु सामाजिक परिस्थतियां, अश्वेतों की योग्यताओं और क्षमताओं के निखरने का अवसर नहीं देतीं।  फ़िल्म यह संदेश दे रही है कि वास्तव में अमरीकी समाज में रहने वाले काले लोगों की योग्यताओं के न निखरने का मुख्य कारण उनकी ओर सरकार का ध्यान न दिया जाना और उनकी अनदेखी है अन्यथा अश्वेतों में भी योग्यताएं पाई जाती हैं जिनको निखारा जा सकता है जैसाकि माइकल ओएर के जीवन से दिखाई देता है।  गोरे लोगों की तुलना में काले लोगों का तरक़्क़ी न करना इसलिए नहीं है कि वे अयोग्य हैं या उनके पास बुद्धि नहीं है या वे परिश्रमी नहीं हैं बल्कि सामाजिक असमानता के कारण वे बहुत सी बातों से वंचित रह जाते हैं।  जानकारों के अनुसार अमरीकी सरकार उन अश्वेत लोगों के लिए यदि कोई अर्थपूर्ण कार्यक्रम बनाए जो निर्धन और वंचित क्षेत्रों में रहते हैं तो वहां के रहने वाले भी जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में आगे आ सकते हैं।  वे तरक़्क़ी कर सकते हैं।  उन काले लोगों में भी बातों को समझने और चीज़ों को जानने की क्षमता पाई जाती है और वे हर क्षेत्र में विकास करने मे सक्षम हैं।

“दी ब्लाइन्ड साइड” में एक सकारात्मक बात यह दिखाई गई है कि अमरीकी समाज में कुछ एसे भी गोरे या श्वेत परिवार हैं जो जातिवाद की सोच से बहुत ऊपर हैं।  एसे लोग, कालों और गोरों के बीच मित्रता और सहयोग के पक्षधर हैं।  टूही परिवार उसका ज्वलंत उदाहरण हैं।  इस परिवार का पूरा प्रयास यह रहता है कि माइकल को एक योग्य नागरिक बनाया जाए।  वे उसको गोद लेते हैं और बहुत ही अच्छे ढंग से उसका पालन-पोषण करते हैं।  यह फ़िल्म उन फ़िल्मों से बिल्कुल ही अलग है जिनमें श्वेतों और अश्वेतों के बीच केवल भेदभाव को ही दर्शाया जाता है।  “दी ब्लाइन्ड साइड” नामक फ़िल्म क़दम-क़दम पर श्वेतों और अश्वेतों के बीच पाई जाने वाली दीवार को गिराती जाती है।  इस फ़िल्म में दिखाया गया है कि एक काले रंग वाले लड़के को एक गोरे रंग वाला समृद्ध परिवार किस प्रकार से अपना लेता है और उसको अपनी ही संतान की तरह पाल-पोसकर बड़ा करता है और उसे अमरीका के जानेमाने राष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में पेश करता है।  माइकल ओएर वास्तव में टूही परिवार का ही एक सदस्य बन जाता है जो वास्तव में अश्वेत है।

फ़िल्म में दिखाया गया है कि माइकल ओएर का संबन्ध एक निर्धन परिवार से है और थोड़ी मंदबुद्धि का है।  पढ़ाई में उसको कोई विशेष रूचि नहीं है और वह पढ़ने में कमज़ोर है किंतु उसके भीतर फुटबाल की योग्यता पाई जाती है।  माइकल में वफादारी जैसी अच्छी विशेषता पाई जाती है जिसके कारण टूही परिवार में उसको भरपूर सम्मान मिलता है।

हालीवुड में बनी “दी ब्लाइन्ड साइड” नामक फ़िल्म में यह दिखाया गया है कि एक अश्वेत युवक माइकल ओएर, जो बाद में अमरीकी फुटबाल का सितारा बन जाता है, पढ़ाई में कमज़ोर है और शरीरिक दृष्टि से बहुत बलवान है।  अपनी इसी योग्यता और क्षमता के कारण वह विश्व ख्याति अर्जित करता है।  इससे दर्शकों को यह निश्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि काले रंग के लोग शारीरिक क्षमता की दृष्टि से बहुत सशक्त होते हैं किंतु बुद्धिमान नहीं होते।  वास्तव में एसा नहीं है।  वे भी आम लोगों की ही तरह बुद्धि रखते हैं और यदि अवसर मिले तो उनकी यह विशेषता निखरती है लेकिन क्योंकि वे अधिकांश निर्धन्ता में ज़िंदगी गुज़ारते हैं इसलिए निर्धन्ता के कारण उनकी बहुत सी क्षमताएं निखरने ही नहीं पातीं।

 

 

Jan १७, २०१८ १२:३१ Asia/Kolkata
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