हालीवुड में जातिवाद के बारे में कई फ़िल्में बनी हैं जिनमे से एक का नाम "ट्वेल्व ईयर्स अ स्लेव" या ग़ुलामी के बारह वर्ष है।

इसके निदेशक "स्टीव मैक्कवीन" हैं।  सन 2012 में "ट्वेल्व ईयर्स अ स्लेव" रिलीज़ हुई।  "ट्वेल्व ईयर्स अ स्लेव" नामक फ़िल्म वास्तव में एक एतिहासिक ड्रामा है।  यह फ़िल्म 134 मिनट की है।  "ट्वेल्व ईयर्स अ स्लेव" फिल्म, "सोलोमन नार्थअप" के जीवन पर आधारित है।  सोलोमन नार्थअप एक अश्वेत व्यक्ति है जो न्यूयार्क की साराटोगा काउंटी में अपने परिवार के साथ रहता है।  वह वायलन बजाकर अपना जीवन गुज़रता है अर्थात उसकी रोज़ी-रोटी का माध्यम वायलन बजाना बन चुका है।

 

एक रात सोलोमन नार्थअप सड़क पर वायलन बजा रहा होता है।  इसी बीच दो गोरे व्यक्ति उसके पास आते हैं और उससे एक कंसर्ट में गाने का वादा करके उसका अपहरण कर लेते हैं।  वे लोग नार्थअप को वाशिग्टन ले जाते हैं।  बाद में उसे शराब पिलाकर बेहोश करने के बाद उसे ग़ुलाम या दास के रूप में बेच देते हैं।  जब नार्थअप होश में आता है तो वह ख़ुद को ज़ंजीरों से जकड़ा हुआ पाता है।  सोलोमन नार्थअप ख़ुद को आज़ाद कराकर अपने घरवालों के पास जाना चाहता है किंतु आरंभ में सफल नहीं हो पाता।  अंततः वह एक ग़ुलाम बन जाता है।  वह अमरीका के दक्षिणी राज्य न्यू ओरलियेंस राज्य में रुई के फार्म पर काम करता है।  सोलोमन नार्थअप को आरंभ में ग़ुलामों का व्यापार करने वाले एक व्यापारी विलयम फोर्ड ख़रीदता है।  बाद में उसे एडविन एप्स को बेच दिया जाता है।  सोलोमन 12 वर्षों तक एक ग़ुलाम के रूप में जीवन व्यतीत करता है।  बारह वर्षों तक ग़ुलामी का जीवन व्यतीत करने के बाद Samuel Bass सैमुएल बास, नार्थअप को स्वतंत्र कराता है जो कैनेडियन व्यापारी होता है।  सैमुएल, ग़ुलाम प्रथा का कड़ा विरोधी था।

"ट्वेल्व ईयर्स अ स्लेव" या ग़ुलामी के बारह वर्ष नामक फ़िल्म के बारे में कहा जा सकता है कि यह एक ऐतिहासिक ड्रामा है जो सोलेमन नार्थअप के जीवन पर आधारित है।  नार्थअप एक अश्वेत व्यक्ति है जिसने अपनी आयु का लंबा समय स्वंतत्र रूप में गुज़ारा जबकि जीवन के 12 वर्ष ग़ुलामों की तरह बिताए।  इस फ़िल्म में अमरीका में दासों के साथ किये जाने वाले अत्याचारपूर्ण व्यवहार को दिखाया गया है।  ग़ुलामी के बारह वर्ष नामक फ़िल्म में श्वेत या अश्वेत किसी का भी पक्ष न लेकर वास्वतविकता को दिखाने का प्रयास किया गया है।

फ़िल्म में अमरीका में दास प्रथा के काल में ग़ुलामों के साथ किये जाने वाले व्यवहार और जातीवाद की न्यायपूर्ण ढंग से समीक्षा की गई है।  "ट्वेल्व ईयर्स अ स्लेव" या ग़ुलामी के बारह वर्ष नामक फ़िल्म में सारे गोरे लोगों को बुरा नहीं दिखाया गया है बल्कि एसे श्वेत लोग जो बुरा व्यवहार करते हैं उनको भी दिखाया गया है साथ ही अच्छा व्यवहार करने वाले गोरे लोगों को अनदेखा नहीं किया गया है।  इसके मुक़ाबले में एसे अश्वेत लोगों को भी दिखाया गया है जो अत्याचारपूर्ण व्यवहार करते हैं  जिनमें से एक "एडवि एप्स" भी है। वैसे इस फ़िल्म का मेन फोक्स सोलेमन नार्थअप पर ही है।  वह अन्य दासों की तुलना में होशियार, पढ़ा लिखा और जानकार है जिसमें बहुत सी योग्यताएं निहित हैं।  इस फ़िल्म में जातिवाद के विषय पर बनने वाली फ़िल्मों की तुलना में काले दासों की बुरी छवि को कम ही दिखाया गया है।  इसकी एक विशेष बात यह है कि बहुत सी फ़िल्मों में दिखाया जात है कि ग़ुलाम, अपने श्वेत मालिकों के अत्याचारों के सामने घुटने टेक देते हैं जबकि इसमें ऐसे अश्वेत ग़ुलाम को दिखाया गया है जो गोरे मालिकों के अत्याचारों के मुक़ाबले में प्रतिरोध करता है।  फ़िल्म में दिखाया गया है कि सोलोमन, एक स्वतंत्र जीवन व्यतीत करना चाहता है।

 

जिस सच्ची कहानी के आधार पर "ट्वेल्व ईयर्स अ स्लेव" या ग़ुलामी के बारह वर्ष नामक फ़िल्म बनाई गई उस घटना का संबन्ध 1850 से है किंतु यहां पर विशेष बात यह है कि इस बारे में फ़िल्म बनाने का साहस सन 2012 में एसे में किया गया जब अश्वेत मूल का एक व्यक्ति अमरीका की राजनीति में सबसे उच्च स्थान पर पहुंचा है।  इस बात से अमरीका के भीतर जातीवादी सोच की गहराई और उसके प्रभाव का अंदाज़ा होता है।  "ट्वेल्व ईयर्स अ स्लेव" या ग़ुलामी के बारह वर्ष नामक फ़िल्म को एक अच्छी फ़िल्म बताया गया और सन 2013 में इसने आस्कर पुरस्कार जीता था।

दो मक्कार अश्वेतों के माध्यम से सोलेमन का अपहरण कर लिया जाता है और बाद में उसे ग़ुलामों को बेचने वाले व्यापारियों के हाथों बेच दिया जाता है।  दासों के व्यापारी अन्य दासों के साथ सोलोमन को पानी के जहाज़ से दक्षिणी अमरीका भेज देते हैं।  ग़ुलामी के बारह वर्ष फ़िल्म के 19 वें मिनट में दिखाया जाता है कि सोलोमन एक अन्य ग़ुलाम के साथ पानी के जहाज़ के गोदाम में है।  एक ग़ुलाम सोलोमन से कहता है कि अगर तुम ज़िंदा रहना चाहते हो तो कम बोलो और कम काम करो।  किसी को भी यह न बताओ कि तुम क्या हो।  तुम किसी से यह न कहो कि पढ़ना-लिखना जानते हो।  अगर यह पता चल गया कि तुम पढेलिखे हो तो तुम्हारे लिए अधिक समस्याएं पैदा होंगी।

इसी बीच पानी के जहाज़ के गोदाम का दरवाज़ा खुलता है।  गोरे रंग का एक व्यक्ति सीढ़ियों से उतरता हुआ नीचे आया।  वह व्यक्ति सोलोमन और उसके पास वाले ग़ुलाम के निकट के एक दास के बंधे मुंह को खोलता है।  उस ग़ुलाम के मुंह में ख़ून भरा हुआ है।  सिनेमा के दृश्य में इस ग़ुलाम को दूसरे नंबर का ग़ुलाम दर्शाया गया है।  थोड़ी देर के बाद गोरे रंग वाला इंसान गोदाम से बाहर चला जाता है।  दो नंबर वाला ग़ुलाम कहता है कि हमें प्रतिरोध करना चाहिए।  इसपर सोलोमन कहता है कि हमारी संख्या बहुत कम है।  मुझको लगता है कि उनके पास भारी संख्या में हथियार हैं।  बाद में एक नंबर वाला ग़ुलाम कहता है कि हम तीन लोग तो एक गुट का सामना नहीं कर सकते।  यहां पर तो सब ही ग़ुलाम हैं।  जो इंसान ग़ुलाम के रूप मे पैदा हो, ग़ुलाम के रूप में पले-बढ़े तो उसमें प्रतिरोध की हिम्मत नहीं आ पाती।  फिर दो नंबर वाला व्यक्ति कहता है कि अब हम को एसी जगह ले जाया जा रहा है जहां पर जाने से अच्छा होता कि हम प्रतिरोध करते हुए मार दिये जाते।  सालोमन बहुत ही दुखी ढंग से कहता है कि कुछ समय पहले मैं अपने घरवालों के साथ आज़ाद ढंग से ज़िंदगी गुज़ारता था।  मैं अपने घर में था लेकिन अब मेरे पास कुछ भी नहीं है।  अब जबतक मैं ज़िंदा रहूंगा किसी को यह नहीं बताऊंगा कि मैं कौन हूं और क्या हूं?

सोलेमन को पानी के जहाज़ से ले जाते समय के दृश्य की समीक्षा में यह दर्शाने का प्रयास किया गया है कि वह एक अंधकारमय भविष्य की ओर क़दम बढ़ा रहा है।  अब एक काला दास जीवित रहने के लिए अपनी योग्यताओं और शिक्षा आदि सभी को छिपा रहा है।  यह विषय ग़ुलामों का व्यापार करने वाले श्वेतों के अत्याचारों और उनके निर्दयी होने को बताता है।  इससे पता चलता है कि गोरे मालिक काले ग़ुलामों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार करते थे।

"ट्वेल्व ईयर्स अ स्लेव" या ग़ुलामी के बारह वर्ष नामक फ़िल्म के इस दृश्य में यदि आप ध्यान देंगे तो आपको पता चलेगा कि तीन काले गुलाम, तीन प्रकार के ग़ुलामों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।  एक ग़ुलाम वह है जिसका मुंह बंधा हुआ है और मुंह में ख़ून भरा हुआ है जो गोरों से संघर्ष का प्रतिनिधित्व करता है।  दूसरा ग़ुलाम वह है जो अत्याचारों के सामने आत्मसमर्पण कर देता है।  तीसरे प्रकार का गुलाम सोलोमन है जो स्वतंत्र रहना चाहता है।  अमरीका की तत्कालीन दास प्रथा के काल में ग़ुलामों के गोरे मालिक दासों के साथ ऐसा अमानवीय और अत्याचारी व्यवहार करते हैं।  वे प्रतिरोध करने वाले हर दास का काम तमाम कर देते हैं और सोलोमन जैसे ग़ुलाम की योग्यताओं को अनेदखा करते हुए उसके साथ पशु जैसा व्यवहार करते हैं।

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Jan १७, २०१८ १५:०४ Asia/Kolkata
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