अमरीका के प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक ली डैनियल के निर्देशन में वर्ष 2013 में दा बटलर फ़िल्म रिलीज़ हुई।

यह फ़िल्म दो घंटे 12 मिनट की थी। इस फ़िल्म को वाइट हाऊस के कर्मचारी यूजीन एलन के जीवन पर बनाया गया है। एलन ने अपने जीवन में अमरीका के आठ राष्ट्रपतियों की सेवाएं की हैं। दा बटलर फ़िल्म में कहीं कहीं पर बुद्धिमत्ता पूर्ण क़दम, डरावने दृश्य, जातीवाद के दहला देने वाले दृश्य और अश्वेतों की बराबरी की मांग से संघर्ष के दृश्य देखे जा सकते हैं। इस फ़िल्म में नागरिक अधिकारों की प्राप्ति के लिए अश्वेत समाज के संघर्ष का व्यापक चित्रण किया गया है जबकि संयुक्त राज्य अमरीका में जातीवादी असमानता की आलोचना भी की गयी है।

 

द बटलर फ़िल्म की मज़बूती के बिन्दुओं की समीक्षा तीन तरह से की जा सकती है।

पहलाः फ़िल्म इतिहास पर नज़र डालकर यह बताने की कोशिश करती है कि किस प्रकार अश्वेतों के संघर्ष और प्रतिरोध, उनके जीवन को किसी प्रकार बेहतर कर सकता है।

दूसराः यह फ़िल्म नागरिक अधिकार आंदोलन और इस विषय को दो अश्वेत पीढ़ियां कैसे देखती हैं, इस विषय का चित्रण पेश करती हैं। यह फ़िल्म इस विषय पर भी नज़र डालती है कि किस प्रकार जातीय भेदभाव को समाप्त करने विशेषकर वर्ष 1960,1970, और 1980 के उपद्रव के दशकों में किसी प्रकार माता पिता की सेवा की जा सकती है।

तीसराः दा बटलर फ़िल्म दर्शकों को यह अवसर प्रदान करती है कि बीसवीं शताब्दी के दूसरे अर्ध में अमरीका में राष्ट्रपति काल के परिवर्तन तथा अश्वेतों के नागरिक अधिकारों को दिलवाने में इन परिवर्तनों के प्रभावों को किसी सीमा देखा जा सकता है।

 

दा बटलर फ़िल्म की शुरुआत में हम सिसियल गेन्ज़ नामक एक बच्चे को देखते हैं जो वर्ष 1926 में अमरीका के दक्षिणी राज्य में एक रूई के खेत में काम करता है। वह खेत के मालिक के हाथों अपनी माता को परेशान किए जाने और पिता की हत्या के दृश्य को अपनी आंखो से देखता है, उसके भीतर ग़ुस्सा कूट कूट के भरा होता है। सिसियल को खेत के मालिक परिवार के प्रमुख अनाबिथ वेस्ट फ़ाल ने घर के कामों के लिए रख लिया था। कुछ वर्ष बाद वह एक बड़े से होटल जाता है ताकि वह नौकरी की ज़िम्मेदारी स्वीकार कर सके। वह इस होटल में श्वेत लोगों के सामने चुप रहना और ग्राहकों की इच्छाओं पर चुप रहना सीखता है। इस विषय के कारण उसे वाइट हाऊस में काम करने का सुझाव मिलता है और उस जगह उसने डीवाइट डेविड आईज़नहावर से लेकर रोनाल्ड रीगन तक समस्त अमरीकी राष्ट्रपतियों की सेवाएं की थीं।

घर में सिसियल का जीवन उथल पुथल का शिकार था। उसकी पत्नी ग्लोरिया जिसे वह चाहता था, बहुत बड़ी शराबी थी। वह नहीं चाहती थी कि वह अधिकतर समय काम में व्यस्त रहे। सिसियल के दो बेटे होते हैं, चार्ली और लुईस। चार्ली वियतनाम युद्ध में मारा जाता है जबकि लुईस सिसियल का बड़ा बेटा होता है। वह विश्वविद्यालय में अश्वेतों की स्वतंत्रताप्रेमी गतिविधियों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेता है। अकसर यह होता था कि लुई शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में भाग लेता था जिसके बाद उसके चेहरे पर पुलिस या नस्लभेदी गुट को कलकस कलोन की मारपीट या घाव के निशान देखे जा सकते थे, कई बार उसे जेल भी जाना पड़ा। उसके बाद लुईस को यह समझ में आया कि अश्वेतों को अधिकार दिलवाने में किंग मार्टिन लूटर की शैली का कोई फ़ायदा नहीं है और इसके परिणाम स्वरूप वह कट्टरपंथी हो जाता है और ब्लैक टाइगर्स गुट का सदस्य बन जाता है और अश्वेत शक्ति आंदोलन में शामिल हो जाता है। वह अपने उदारवादी पिता से कहता है कि अश्वेतों की मांगों और उनके अधिकारों पर ध्यान दें और उसके पिता जब उसकी बात पर ध्यान नहीं देते तो वह उनसे दूर हो जाता है।

कहानी में कई उतार चढ़ाव हैं, विभिन्न घटनाओं का उल्लेख है, बाप बेटे की आस्था एक दूसरे से निकट होती है और पिता भी अश्वेतों के विरुद्ध छायी वर्तमान नस्लभेदी और भेदवावी व्यवस्था के विरुद्ध उठ खड़ा होता है। लुईस अमरीकी कांग्रेस का सांसद हो जाता है। यह फ़िल्म अमरीका में बराक ओबामा के राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने पर जिससे सिसियल को बहुत हैरानी होती है, समाप्त हो जाती है।

 

लुईस को समान अधिकार वाले संघर्ष में भाग लेने के कारण जेल में डाल दिया जाता है । दा बटलर फ़िल्म के साठवें मिनट पर एक नया दृश्य पेश किया गया। फ़िल्म में अमरीका के 35वें राष्ट्रपति केनेडी के कमरे की छत पर लगे कैमरे से दिखाया गया है कि वह ज़मीन पर चार हाथ पैर फैलाए लेटे हुए थे। सिसियल कमरे में आता है, वह पानी और दवा की गोली केनेडी के लिए लाया था। कनेडी कहते हैं कि सिसियल, तुम क्या समझते हो कि मैं दिनभर में कितनी गोलिया खा जाता होऊंगा। सिसियल मुस्कुरा कर कहता है कि सर लगभग 130 गोलियां। केनेडी कहते है कि मुझे खड़ा होने में मदद करो। सिसियल केनेडी का हाथ पकड़ता है ताकि वह ज़मीन से उठ खड़ा हो। केनेडी खड़ा होता है, सीधा खड़ा होता है, सिसियल को कुछ छेड़ता है ताकि उसका भय दूर हो जाए। केनेडी कहते हैं कि मैं जानता हूं कि तुम्हारा बेटा प्रोफ़ेशनल जाकी है, वह इस समय मार्टिन लूथर किंग के साथ बर्मिघम जेल में है।  सिसियल थोड़ा सा रुककर कहता है, सर आप जानते वह किस हालत में है?, कनेडी कहते हैं मैं समझता हूं कि उसे बहुत मारा पीटा गया है, किन्तु उसे तो मार खाने की पुरानी आदत है, सिसियल पिछले साल उसे 16 बार जेल में डाला गया था, सिसियल कहता है, जी सर, सिसियल कुछ दुखी हो जाता है, ट्रे उठाता है और कमरे से बाहर जाना चाहता है, सिसियल कहता है, सर कुछ और काम तो नहीं है सर, केनेडी कहते हैं , नहीं बस यही था, सिसियल वह जल्दी से कमरे से निकल जाना चाहता था, इसी बीच कनेडी ने उसे पुकार कर कहा क्या तुम्हें पता है, मैं कभी यह नहीं समझ सका कि तुमने कितना दुख उठाया होगा, जब तक मैं तुम्हारे बेटे को जेल में देखूं, सिसियल खड़ा हो गया, केनेडी कहते हैं, मेरे भाई का कहना है कि बच्चों ने उसकी ब्रेन वाशिंग कर दी,  सिसियल कनेडी की ओर से पलटता है, कनेडी कहते हैं मेरा भी दिल बदल दिया।

इस दृश्य के बाद केनेडी सार्वजनिक स्थल पर अपने भाषण में श्वेत वर्ण और सवर्ण वर्ग के समस्त लोगों के सामान्य अधिकार पर बल देते हैं और अमरीकी कांग्रेस से मांग की कि इस बारे में कोई क़ानून बनाए किन्तु उसके कुछ ही दिन बाद वह नस्लवादी और कट्टरपंथी गुट के हाथों मार दिए गये।

दा बटलर फ़िल्म में अमरीकी राष्ट्रपति केनेडी और सिसियल पर एक ही अंदाज़ से कैमरा और लाइट डाली जाती है जबकि केनेडी देश के राष्ट्रपति हैं उन पर ज़्यादा लाइट डालनी चाहिए और उन पर कैमरा फ़ोकस होना चाहिए और सिसियल एक नौकर है उसको कम महत्व देना चाहिए था। इसके कारण में अश्वेतों पर आपत्ति जताने वालों से राष्ट्रपति के बीच उचित संपर्क न होना और उनके दुख दर्द देखने के बाद अश्वेतों के दुख दर्द को समझने की ओर संकेत किया जा सकता है। यह विषय दर्शाता है कि यद्यपि सत्ता श्वेतों के हाथ में है किन्तु उनके बीच ऐसे लोग या ऐसे राष्ट्रपति भी हैं जो सहायता करने में रुचि रखते हैं ताकि अश्वेतों को उनके नागरिक अधिकार प्राप्त हो सकें।

अमरीका में वर्ष 2013 में बनी दा बटलर फ़िल्म में दिखाया गया है कि बीसवीं शताब्दही के मध्य या आरंभिक दशकों की तुलना में अमरीकी समाज के राजनैतिक व सामाजिक परिवर्तनों के आधार पर श्वेतों के मुक़ाबले में अश्वेत लोगों के प्रतिरोध या बर्ताव की शैली बदल गयी थी। इस संघर्ष में अश्वेत लोगों की विभिन्न पीढ़ियों ने भाग लिया। फ़िल्म अमरीकी समाज में अश्वेत या कालों की भूमिका के बारे में बाप बेटे के विभिन्न और विरोधभासी दृष्टिकोणों को पेश करती है और यहां से एक नया बिन्दु सामने आता है। सिसियल के अनुसार जिसने सेवक का जीवन बिताया था, ज़िंदगी में आगे बढ़ने के लिए कठिन परिश्रम करना और नर्म मांग पेश करना है। ये ऐसी स्थिति में हैं कि जब लुईस का मानना था कि संघर्ष और पार्टी बना कर अपनी मांगों को पूरा कराया जा सकता है। फ़िल्म कहती है कि अश्वेतों की समानता की मांग को परिणाम तक पहुंचाने के लिए दोनों ही प्रकार के बर्ताव ज़रूरी थे।

फ़िल्म में दिखाया गया है कि अधिकतर सिगरेट पीने वाले, नशेड़ी और कम पैसे वाले अश्वेत हैं किन्तु फ़िल्म ने अश्वेत विद्रोह या अश्वेत नौकर के बारे में किसी सीमा तक अपना दामन बचाने का प्रयास किया। फ़िल्म में यह नहीं दिखाया गया है कि अमरीकी सामाज में अशांति, अश्वेत विद्रोहियों की वजह से नहीं है, अश्वेतों की अशांति और उनकी जंग समाज की व्यवस्था को ख़राब करने के लिए नहीं है ब्लकि लुईस ने अमरीका की अत्याचार राजनैतिक व्यवस्था के विरुद्ध संघर्ष किया और अमरीकी समाज में फैली अमानवीय व्यवस्था को समाप्त करने और अपने नागरिक अधिकारों की प्राप्ति के लिए थी, चूंकि लुईस का भाई चार्ली अपनी आस्था के अनुसार देश की ओर से वियतनाम युद्ध में लड़ता है और मारा जाता है।

इस फ़िल्म में यह भी दिखाने का प्रयास किया गया है कि दा बटलर फ़िल्म एक नौकर के इर्द गिर्द घूमती है जिसमें नौकर जो श्वेत के अश्वेत पर वरीयता प्राप्त करने या उनसे बेहतर होने का चिन्ह होता है, इस सोच को दूर करने का प्रयास करती है क्योंकि अधिकतर अमरीकी फ़िल्मों में देखा गया है कि गोरों के यहां नौकर काले ही होते हैं। इस फ़िल्म के विपरीत दूसरी फ़िल्मों में काले नौकरों की समीक्षा करने पर पता चलता है कि यह फ़िल्म बहुत ही समझदारी से और सोच समझकर बनाई गयी है। श्वेत मालिकों के घर पर काम करने वाले अश्वेत नौकरों के बारे में यही कहा जाता है कि अश्वेत नौकर, अश्वेतों पर अत्याचार और अश्वेतों से उनको दूर करने का कारण बनते हैं किन्तु फ़िल्म में हम देखते हैं कि फ़िल्म में मार्टिन लूथर किंग का किरदार अदा करने वाला बताता है कि अश्वेत घर का मालिक,जातीवाद से संघर्ष की मांग करता है, विश्वासयोग्य होने के साथ अधिक मेहनत करने वाला है, वह शांति के साथ जातिवाद की दुश्मनी को कम करता है या नैतिकता या कठिन परिश्रम करने के क्षेत्र में उदाहरणीय होता है। अब हम महिलाओं और पुरुष नौकरों के लाभदायक होने को समझ गये हैं।

 

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Jan ३०, २०१८ १३:३० Asia/Kolkata
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