हमने पिछले 50 वर्षों के दौरान ईरान में शिक्षा की स्थिति की समीक्षा की थी। 

आपको बताया था कि इस्लामी क्रांति के पश्चात शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ा प्रयास यह किया गया कि देश से निरक्षरता को पूर्ण रूप से समाप्त किया जाए।   हमने इस बात की भी चर्चा की थी कि ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद जहां निरक्षरता को समाप्त करने के प्रयास किये गए वहीं पर उच्च शिक्षा के विकास के लिए भी सरकारी और ग़ैर सरकारी स्तर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों में विश्वविद्यालय बनाए गए ताकि अधिक से अधिक संख्या में युवा उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें। 

 

बीसवीं शताब्दी के दूसरे पचास वर्षों में ज्ञान के क्षेत्र में जो उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की गईं वे विश्व के देशों में उनके विकास का मानदंड बनीं।  यही कारण है कि “आईएसआई” और “स्कोप्स” जैसी अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने विश्व के देशों की वैज्ञानिक प्रगति को आंकते हुए इस बारे में रिपोर्टें प्रस्तुत कीं।  इन अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं की ओर से पेश की जाने वाली रिपोर्टों से विश्व के किसी भी देश में वैज्ञानिक स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है।  विशेष बात यह है कि यह अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाएं लंबे समय से मौजूद हैं किंतु ईरान के बारे में पिछले चार दशकों से पहले उन्होंने कोई विशेष रिपोर्ट पेश नहीं की।  इसका एक कारण यह है कि ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता से पहले इस देश में शिक्षा की ओर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता था।  जब ईरान में इस्लामी क्रांति आई और क्रांति की सफतला के पश्चात शिक्षा के क्षेत्र में प्रयास किये गए और उसके अच्छे परिणाम सामने आने लगे तो इन अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान इस ओर आकृष्ट हुआ।

“आईएसआई” की रिपोर्ट के अनुसार सन 1979 में ईरान में आने वाली इस्लामी क्रांति से पहले अर्थात पहलवी के शासनकाल में ईरान के विद्धानों की ओर से अन्तर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओ में 2026 शोधयत छापे गए।  हालांकि उसी काल में विश्व में 80 लाख से अधिक लेख और शोधपत्र सामने आए जिनमे ईरान की भागीदारी बहुत कम रही।  वहीं ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद के लगभग 37 वर्षों में ईरान में दो लाख पैंतालिस हज़ार शोधपत्र और लेख सामने आए।  इस प्रकार से शिक्षा के क्षेत्र में ईरान में बहुत तेज़ी से विकास हुआ और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ईरान की भागीदारी काफ़ी बढ़ी। विशेष बात यह है कि यह विकास और प्रगति एसी स्थिति में हुई है कि जब ईरान ने आठ वर्ष युद्ध में बिताए।  ईरान पर थोपे गए युद्ध के काल में पढ़ने-पढ़ाने और शिक्षा के क्षेत्र में विकास के अवसर बहुत कम थे।  मगर इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद के पहले दशक में आठ वर्षीय युद्ध के बावजूद ईरान में शिक्षा का क्षेत्र बंद नहीं रहा बल्कि उसमें उल्लेखनीय ढंग से प्रगति हुई।  इस दौरान जब शिक्षा के लिए प्रयास करना बहुत कठिन ही नहीं बल्कि असंभव नज़र आ रहा था, ईरान के वैज्ञानिकों ने 2881 शोधपत्र पेश करके अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रकार का रिकार्ड बनाया।

 

यदि हम ईरान में सफल होने वाली इस्लामी क्रांति के बाद के चार दशकों की तुलना इस्लामी क्रांति की सफलता से पूर्व के चार दशकों से करते हैं तो पता चलता है कि बाद के चार दशकों में लगभग 120 प्रतिशत वैज्ञानिक प्रगति हुई।  इसका पता इससे चलता है कि जहां इस्लामी क्रांति से पहले दो हज़ार से कुछ अधिक लेख ही मिलते हैं वहीं इस्लामी क्रांति के बाद इनकी संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।

विश्व में वैज्ञानिक प्रगति पर नज़र रखने वाली एक संस्था है “स्कोपस”।  यह भी विश्व के देशों की वैज्ञानिक प्रगति की रिपोर्टें पेश करती है।  इसने भी ईरान में क्रांति से पहले और बाद की वैज्ञानिक स्थिति के बारे में रिपोर्टें पेश की हैं।  इसकी रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता से लगभग 160 वर्ष पहले से इस्लामी क्रांति की सफलता तक मात्र 3071 लेख या शोधपत्र ही इस संस्था में पंजीकृत हुए जबकि इस्लामी क्रांति की सफलता के लगभग चार दशकों के भीतर चार लाख शोधपत्र सामने आए।  इससे यह पता चलता है कि क्रांति के बाद वैज्ञानिक प्रगति लगभग 130 गुना बढ़ी है।  ईरान के जिन विश्वविद्यालयों ने विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है उनमे तेहरान विश्वविद्यालय सर्वोपरि है।  दूसरे विश्वविद्यालयों का नंबर बाद में आता है।  इसका मुख्य कारण यह है कि तेहरान विश्वविद्यालय, ईरान का बहुत पुराना विश्वविद्यालय है।  इसके बाद दानिशगाहे सनअती, दानिशगाहे अमीर-कबीर और दानिशगाहे इस्फ़हान आदि का नंबर आता है।

 

मशहूर यह है कि ज्ञान को मूलरूप से पांच भागों में बांटा गया है।  इन पांच क्षेत्रों में वैज्ञानिक प्रगति का स्तर अलग-अलग है।  इन पांचों क्षेत्रों में विश्व में प्रगति का अनुपात बहुत अलग रहा है।  उदाहरण स्वरूप विज्ञान के क्षेत्र में ह्यूमन साइंस और सोशल साइंस में 99 प्रतिशत, चिकित्सा के क्षेत्र में 98 प्रतिशत और तकनीक के क्षेत्र में शत प्रतिशत ईरान में क्रांति के बाद के वर्षों में विकास हुआ है।

ईरान में इस्लामी क्रांति की सफतला के देश के युवाओं ने जिस क्षेत्र में अधिक प्रदर्शन किया वह ओलंपियाड का क्षेत्र है।  ईरानी छात्रों ने  फ़िज़िक्स, कैमेस्ट्री, मैथ और कम्प्यूटर जैसे विषयों में ओलंपियाड में भाग लेकर सफलताएं अर्जित की हैं।  इन छात्रों ने विकसित देशों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा मे अपनी योग्यता का लोहा मनवा लिया।  प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली इस वैज्ञानिक प्रतिस्पर्धा में हर वर्ष ईरानी छात्र भाग लेकर उच्च स्थान प्राप्त कर रहे हैं।  ईरानी छात्रों ने 1995, 1996 और 1998 में तीन बार प्रथम स्थान ग्रहण किया।  सन 1999 तथा 2001 में दो बार दूसरा स्थान प्राप्त किया।  सन 1986 से 2001 के बीच आयोजित होने वाले वैज्ञानिक ओलंपियाड में ईरान के छात्रों ने गणित, फ़िज़िक्स, कैमेस्ट्री, कम्प्यूटर और अन्य विषयों में 57 स्वर्ण पदक, 92 रजत पदक और 58 कांस्य पदक हासिल किये।

 

हालिया दिनों में ईरान में विज्ञान के क्षेत्र में की जाने वाली प्रगति, पश्चिम के संचार माध्यमों की दृष्टि से नहीं बच सकी।  पश्चिम के विश्वस्त प्रकाशन केन्द्रों ने इनकी बहुत सराहना की है।  अमरीकी पत्रिका न्यूज़वीक ने अपने हालिया संस्करण में एक लेख प्रकाशित किया है।  इस लेख का शीर्षक है, “ईरान के चमकते हुए छात्र”।  इस पत्रिका में अमरीका के विद्वानों और वैज्ञानिकों ने विज्ञान के क्षेत्र में ईरानी युवाओं की प्रगति की प्रशंसा की है।  इस लेख का आरंभ इस वाक्य से होता है कि अब हारवर्ड को भूल जाओ, ईरान में विश्व के बेहतरीन शिक्षा संस्थान हैं।  इसमें ईरान की शरीफ़ यूनिवर्सिटी के छात्रों की सफलताओं का उल्लेख किय गया है।  सन 2003 में स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के तकनीकी विभाग के शिक्षकों ने जब यह देखा कि विदेश के कुछ छात्रों ने, एलेक्ट्रानिक इन्जीनियरिंग की परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त किये हैं तो उन्हें देखकर बहुत आश्चर्य हुआ।  इन लोगों को यह जानकर बहुत ही तअज्जुब हुआ कि यह छात्र अमरीका या किसी पश्चिमी देश के नहीं बल्कि ईरान के हैं।

 

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Feb २८, २०१८ १३:४१ Asia/Kolkata
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