कहा जाता है कि विश्व की जनसंख्या में प्रतिवर्ष 100 मिलयन लोगों की बढोत्तरी हो रही है। 

जनसंख्या वृद्धि की यह दर अगर जारी रहती है तो सन 2040 तक संसार की आबादी बढकर 9 अरब हो जाएगी।  वर्तमान समय में लोगों के लिए खाद्ध सुरक्षा को सुनिश्चित बनाना एक बहुत बड़ी चुनौती है।  जैसे-जैसे विश्व की जनसंख्या में वृद्धि हो रही है उसी अनुपात में खाद्य पदार्थों की मांग भी बढ़ती जा रही है।  इस विषय का महत्व ऐसी स्थिति में अधिक बढ़ जाता है कि जब धरती के बढ़ते तापमान के कारण सूखा पड़ने से फसलों के उत्पाद और उपभोग के बीच नकारात्मक संतुलन पैदा हो रहा है।

 

वर्तमान समय में पूरे विश्व में लोग जो चीज़ें खाने के रूप में प्रयोग करते हैं उनमें से एक गोश्त भी है।  प्रतिदिन अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार में लोगों की दैनिक आवश्यकता के लिए जिस खाद्य पदार्थ की आपूर्ति की जाती है उसमें गोश्त भी होता है।  गोश्त के उत्पाद में मुर्गे का गोश्त भी शामिल है जिसके लिए मुर्ग़ी पालन उद्योग बहुत ज़रूरी है।  मुर्ग़ी पालन के लिए सबसे अधिक आवश्यक चीज़ है मुर्ग़ियों का चारा।  यह चारा कई चीज़ों से मिलकर बनता है जैसे जौ, भूसी, चुक़ंदर की खली, रूई के बीज और कुछ विटमिन आदि।  पशुओं के चारे की समीक्षा करने वाली अन्तर्राष्ट्रीय फैड्रेशन के अनुसार पिछले 20 वर्षों के दौरान पशुओं के चारे के उत्पादन में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।  सन 2015 में लगभग एक अरब टन पशुओं के चारे का उत्पाद किया गया था जिसमें जलचर भी शामिल हैं।

पशुओं के चारे की बढ़ती मांग का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि सन 2016 में संसार में 30000 से अधिक औद्योगिक इकाइयां, चारे का उत्पादन कर रही थीं।  इन औद्योगिक इकाइयों के कारण समाज में खाद्य सुरक्षा बढ़ रही है।  इन इकाइयों को भी पशुओं का चारा तैयार करने के लिए अनाज की ज़रूरत होती है।  एसे में खेतीबाड़ी की ज़रूरत होगी।  वर्तमान समय में संसार में प्रतिवर्ष एक अरब टन पशु चारा पैदा किया जाता है।

 

ईरान में पिछले सात दशकों से पशु चारे का उत्पादन किया जा रहा है।  ईरान के भीतर जब से मुर्ग़ी पालन का चलन आरंभ हुआ उस समय से पशुओं का चारा पैदा करने के उद्योग ने जन्म लिया।  वर्तमान समय में स्थिति यह है कि ईरान के भीतर 19 मिलयन टन पशुओं का चारा पैदा किया जाता है।  पशुओं के चारे के उद्योग में ईरान में प्रतिवर्ष का टर्नओवर 11 अरब डालर हो चुका है।  इसको देश की आवश्यकता की पूर्ति के बाद बहुत से देशों को निर्यात किया जाता है।  इस समय 20 हज़ार से अधिक लोग ईरान में पशुओं का चारा बनाने वाले कारख़ानों में सक्रिय हैं।

इस क्षेत्र में बहुत सी नॉलेज बेस्ड कंपनियां भी सक्रिय हो चुकी हैं।  यह कंपनियां पशुओं के चारे की गुणवत्ता को अधिक प्रभावशील और लाभदायक बनाने के प्रयास में लगी हुई हैं।  ईरानी विशेषज्ञ अबतक पशुओं के प्रयोग के लिए 6 प्रकार के पूरक प्रोबायोटिक फूड तैयार कर चुके हैं जिनमें केवल पशु और पक्षी नहीं बल्कि जलचर या पानी में रहने वाले जीव-जंतु भी शामिल हैं।  ज्ञात रहे कि प्रोबायोटिक फूड ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं जिनमें अच्छे बैक्टीरिया पर्याप्त मात्रा में होते हैं। यह अच्छे बैक्टीरिया न केवल शरीर में होने वाली कई बीमारियों की संभावना को रोकते हैं बल्कि शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं। प्रोबायोटिक प्रोडक्ट्स में मौजूद बैक्टिरिया रक्त से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में भी सहायक हैं और शरीर की इम्यूनिटी भी बढ़ाते हैं।  एक समय तक तो बहुत से लोगों ने प्रोबायोटिक फूड का नाम भी नहीं सुना था। लेकिन आज प्रोबायोटिक, सेहत से जुड़े सबसे चर्चित शब्दों में से एक है।  फाओ या डब्लू टी ओ के अनुसार प्रोबायोटिक, एसे पूरक हैं जो शरीर पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ते हैं और इन्हें मनुष्य के अतिरिक्त पशु चारे में भी प्रयोग किया जाता है।

ईरान में पशु चारे के रूप में जो उत्पादन तैयार किये जाते हैं वे टर्की, मुर्ग़ाबी, हंस, बटेर, तीतर, शुतुरमुर्ग़ और घरेलू पक्षी के अतिरिक्त जलचर जीवजंतुओं के लिए प्रयोग किये जाते हैं।  यहां पर पोल्ट्री के व्यापार या काम में बहुत बड़ी संख्या में लोग कार्यरत हैं।  पोल्ट्री पक्षी उन पक्षियों को कहा जाता है जिनको अंडे या गोश्त के लिए पाला जाता है।  इस प्रकार के पक्षी आर्थिक महत्व के स्वामी होते हैं।  पोल्ट्री व्यवसाय को मुर्ग़ी पालन उद्योग भी कहा जाता है।  पोल्ट्री फार्म के व्यवसाय में अधिक्तर मुर्ग़ी और बत्तख का पालन होता है।  इस काम में अधिक अंडा देने वाली नस्ल की मुर्ग़ियों को पाला जाता है।

पोल्ट्री फार्म में मुर्ग़ियों का पालन करके उसके अंडों और गोश्त दोनों से पैसा कमाया जाता है।  खाद्य पदार्थ की दृष्टि से वर्तमान समय में प्रचलित खाद्य पदार्थ में मुर्ग़े का गोश्त और अंडे दोनो ही शामिल हैं।  कहा जाता है कि अन्य खाद्य पदार्थों की तुलना में यह सस्ता खाना है।  न्यूट्रीशनल वैल्यू के दृष्टिगत संसार में करोड़ों लोग मुर्गे और अंडों का प्रयोग करते हैं।  अंडे में प्रचुर मात्रा में उच्च स्तरीय प्रोटीन पाया जाता है।  अंड के भीतर लौह, फोस्फोरस, दुर्लभ खनिज पदार्थ विटमिन ए, ई, के अतिरिक्त विटमिन-बी ग्रुप के सारे विटमिन पाए जाते हैं।  डाक्टरों का कहना है कि विटमिन-डी की दृष्टि से मछली के तेल के बाद अंडे का नंबर है।  उनका कहना है कि एक अंडा लगभग 77 कैलोरी की ऊर्जा पैदा करता है।  प्रतिवर्ष विश्व में 70 मिलयन टन अंडों का उत्पादन किया जाता है।  अंडों के उत्पादन की दृष्टि से ईरान, विश्व में ग्यारहवें स्थान पर आता है।  ईरान से कई देशों के लिए अंडे निर्यात किये जाते हैं।

ईरान से किये जाने वाले पोल्ट्री फार्म प्रोडक्ट के निर्यात में मुर्ग़ी के चूज़े भी शामिल हैं।  वर्तमान समय में ईरान में 300 बड़ी कंपनियों के निरीक्षण में 500 से अधिक बड़े-बड़े पोल्ट्री फार्म अपनी सक्रियता अंजाम दे रहे हैं।  ईरान में हर महीने में 100 मिलयन चूज़ें पैदा किये जाते हैं जिनमें बड़ी संख्या में निर्यात किये जाते हैं।  पिछले छह महीने के दौरान अलबुर्ज़ प्रांत से 38 मिलयन चूज़े, फार्स की खाड़ी के देशों में निर्यात किये गए।

पोल्ट्री फार्म की दृष्टि से ईरान, मध्यपूर्व का सबसे बड़ा देश है।  पिछले चार दशकों के दौरान सरकार की ओर से निजी क्षेत्र के समर्थन के कारण देश में मुर्गी पालन उद्योग बहुत तेज़ी से फैला है।

उल्लेखनीय है कि मुर्गे का गोश्त पैदा करने की दृष्टि से ईरान, विश्व में चौथे नंबर पर है।  ईरान के जिन प्रांतों में मुर्गी पालन का पोल्ट्री फार्म का काम व्यापक स्तर पर किया जाता है वे इस प्रकार हैं माज़ंदरान, ख़ुरासान, फार्स, इस्फ़हान, पूर्वी आज़रबाइजान और तेहरान।  इन प्रांतों में ईरान में पैदा किये जाने वाले मुर्ग़े के गोश्त का 50 प्रतिशत पैदा किया जाता है।  ईरान में कई नस्ल के मुर्ग़ी और मुर्ग़ें पैदा किये जाते हैं।  ईरान के एक उत्तरी नगर बाबुल में विशेष नस्ल की मुर्ग़ियों का एक पोल्ट्री फार्म है जो हज़ार हेक्टेयर से अधिक भूभाग पर बना है।  यह पिछले 25 वर्षों से अपना काम कर रहा है।  बाबुल का विस्तृत पोल्ट्री फार्म प्रतिवर्ष 2 मिलयन टन से अधिक गोश्त पैदा करता है।

आजकल पोल्ट्री फार्म के व्सयवसाय में वेस्टेज से बचने और अधिक से अधिक लाभ उठाने के उद्देश्य से पोल्ट्री प्रोडक्ट के भागों को अलग-अलग करके बेचा जाता है।  मुर्ग़ी के जिन हिस्सों को अधिक कमाई के लिए बेचा जाता है उसमे से एक उसके पैर भी हैं।  इसके बहुत से लाभ हैं।  मुर्ग़ी के पंजे और उसके पैरों में प्रोटी बहुत अधिक होता है।  कई प्रकार की शारीरिक बीमारियों का इससे उपचार किया जाता है।  पैरों और घुटनों के दर्द में लाभदायक होता है।  पुराने ज़माने से हकीम और वैध इसको बहुत सी बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल करते आए हैं।  कुछ देशों में इसे सौनदर्य प्रसाधन के पदार्थों में भी प्रयोग किया जाता है।  ईरान से मुर्ग़े पंजों का निर्यात वियतनाम, हांगकांग, थाईलैण्ड और लाओस सहित कई देशों में किया जाता है। 

 

 

 

 

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Mar ०६, २०१८ १५:१८ Asia/Kolkata
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