हमने वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई की नज़र से इस्लामी संस्कृति व सभ्यता में विज्ञान के स्थान और पश्चमी संस्कृति व सभ्यता के साथ उसकी समानता व अंतर पर चर्चा की।

आपको यह भी बताया कि वरिष्ठ नेता की नज़र में विज्ञान के क्षेत्र में प्रभुत्व हासिल करने के लिए जो राजनैतिक, सैन्य, औद्योगिक व आर्थिक शक्ति का आधार है, साफ़्टवेयर आंदोलन ज़रूरी है। इसी प्रकार हमने यह उल्लेख किया कि वरिष्ठ नेता का यह मानना है कि इस्लामी क्रान्ति की सफलता के बाद के वर्षों में ईरान ने विज्ञान के क्षेत्र में व्यापक प्रगति की और इन वर्षों में ईरानी वैज्ञानिकों व बुद्धिजीवियों ने जो साहस दिखाया है उससे भविष्य में इस्लामी ईरानी सभ्यता फिर से खिलेगी। जैसा कि पिछले कार्यक्रम में हमने आपसे यह कहा था कि अगले कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय मंच पर ईरानी वैज्ञानिकों की वैज्ञानिक प्रगति के कुछ नमूने पेश करेंगे और कुछ बराबर के देशों के साथ ईरान की स्थिति की समीक्षा करेंगे।

 

जैसा कि पिछले कुछ कार्यक्रमों में हमने इस बात का उल्लेख किया कि वैज्ञानिक प्रगति की रेटिंग करने वेबसाइटें दुनिया में देशों की वैज्ञानिक स्थिति को निर्धित करने वाले अहम स्रोतों में गिनी जाती हैं। इस वक़्त दुनिया में विभिन्न देशों में वैज्ञानिक विकास का सर्वे करने वाली कई महत्वपूर्ण संस्थायें हैं जो इस दृष्टि से देशों में होने वाले विकास के बारे में रिपोर्ट प्रकाशित व प्रसारित करती हैं। इसके अलावा वैज्ञानिक सर्वे करने वाले बहुत से विशेषज्ञ भी हैं जो इन वैज्ञानिक संस्थाओं के डेटा के आधार पर दुनिया में हर एक देश में विज्ञान के क्षेत्र में होने वाले विकास की समीक्षा करते हैं। वैज्ञानिक सर्वे करने वाली संस्थाओं के आंकड़ों के अनुसार, इस समय इस्लामी गणतंत्र ईरान, क्षेत्र सहित दुनिया में विज्ञान के क्षेत्र में सबसे प्रभावशाली देशों में से एक है। इसी तरह वैज्ञानिक सर्वे करने वाले माहिरों की समीक्षा दर्शाती हैं कि पिछले दो दशक में दुनिया में विज्ञान के विकास में ईरान का योगदान बढ़ने के साथ ही दुनिया में वैज्ञानिक विकास की रेटिंग में भी ईरान का स्थान बहुत से देशों और ख़ास तौर पर मध्यपूर्व के देशों से बहुत ऊपर पहुंच गया है। इसी प्रकार दुनिया में विज्ञान के क्षेत्र में योगदान देने वालों में जो देश सबसे आगे हैं उनके और ईरान के बीच दूरी भी कम हुयी है और अविकसित व विकासशील देशों की तुलना में ईरान आगे निकल गया है।                              

असेन्शल साइंस इन्डीकेटर की वेबसाइट में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, इस्लामी गणतंत्र ईरान ने 1997 से 2007 के बीच इंस्टीट्यूट फ़ॉर साइंटिफ़िक इन्फ़ार्मेशन को 34000 वैज्ञानिक रचनाओं की तालिका पेश की। इस वैज्ञानिक छलांग के ज़रिए ईरानी वैज्ञानिक, विज्ञान की दृष्टि से मिस्र जैसे प्रभावी देश को पछाड़ कर देश को एक पावदान ऊपर पहुंचाने में सफल हुए। इस इंस्टीट्यूट की वेबसाइट के इंडेक्स में 145 देशों में ईरान का स्थान चालीसवां हो गया है। इंस्टीट्यूट फ़ॉर साइंटिफ़िक इन्फ़ार्मेशन और वेब ऑफ़ साइंस के अनुसार, ईरान तुर्की के बाद इस्लामी जगत में विज्ञान के क्षेत्र में विकास करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है। वेब ऑफ़ साइंस की वेबसाइट के अनुसार, 2007 में ईरान ने 9000 वैज्ञानिक रचनाएं पेश कीं जो 2006 में इस वेबसाइट में पेश की गयीं रचनाओं की तादाद अर्थात 6750 की तुलना में 34 फ़ीसद वृद्धि को दर्शाती हैं। रोचक बिन्दु यह है कि इस वेबसाइट के डेटा की समीक्षा दर्शाती है कि 1998 से ईरान में वैज्ञानिक विकास की प्रक्रिया निरंतर प्रगतिशील रही है।

 

इस वेबसाइट के डेटा की समीक्षा के संबंध में रोचक बिन्दु यह है कि वैज्ञानिक सर्वे करने वाले माहिरों ने ईरानी वैज्ञानिकों व विद्वानों की ज़बान पर ध्यान दिया है। वेब ऑफ़ साइंस की वेबसाइट के अनुसार, 2007 के बाद इस वेबसाइट में ईरान की वैज्ञानिक रचनाएं अंग्रेज़ी के साथ चीनी, स्पेनयाई, इतालवी, तुर्की और रूसी ज़बान में भी हैं। इसी तरह 2006 की तुलना में 2007 में फ़्रांसीसी भाषा में ईरान की वैज्ञानिक रचनाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गयी। इसका अर्थ यह है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक संपर्क रखने वाले ईरानी शोधकर्ताओं की कोशिशों का दायरा बढ़ गया है। ईएसआई अर्थात असेन्शल साइंस इन्डीकेटर के आंकड़े दर्शाते हैं कि 2007 में विज्ञान के विभिन्न विषयों के गुट में दुनिया के विभिन्न देशों में ईरान का दर्जा 14 से 58 के बीच बदलता रहा। इस रिपोर्ट में एक रोचक बिन्दु यह है कि इन्टर्डिसप्लनेरी जैसी विज्ञान की नई शाखा में ईरान का स्थान दूसरे विषयों की तुलना में बेहतर था और इन्टर्डिसप्लनेरी के क्षेत्र में ईरानी वैज्ञानिकों ने देश को 14वां स्थान दिलाया और इस तरह देशों को मिस्र, सऊदी अरब और पाकिस्तान जैसे देशों से बहुत आगे निकाल ले गए।

वेब ऑफ़ साइंस द्वारा पेश की गयी समीक्षा दर्शाती है कि 1933 से 2007 तक बहुत से देशों का वैज्ञानिक इंडेक्स प्रगतिशील रहा है और ईरान इससे अपवाद नहीं था लेकिन इन समीक्षाओं में एक और रोचक बिन्दु सामने आता है वह यह कि इस प्रगतिशील प्रक्रिया में देशों की रफ़्तार एक जैसी नहीं थी लेकिन ईरान उन देशों में है जिसने इस दौरान दूसरे देशों की तुलना में अधिक वैज्ञानिक प्रगति की और तीसरी सहस्त्राब्दी के आरंभिक वर्षों में अपने चरम के निकट पहुंच गया है। इस वेबसाइट के आंकड़ों के अनुसार, 2003 से 2007 के बीच ईरान ने बहुत से देशों की तुलना में अधिक वैज्ञानिक विकास किया है। इस प्रतिस्पर्धा में ईरान चीन, तुर्की और पाकिसतान जैसे शक्तिशाली देशों से मानो आगे निकलने में सफल रहा जबकि सऊदी अरब जैसे देश ने कम विकास किया। इस पांच साल के दौरान ईरान ने 276 फ़ीसद वैज्ञानिक विकास किया जबकि सऊदी अरब का वैज्ञानिक विकास 5 फ़ीसद से ज़्यादा नहीं रहा। इन वर्षों में ईरान ने रसायन शास्त्र और इससे जुड़े विज्ञान, इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, फ़िज़िक्स, गणित और इन्टर्डिसप्लनेरी विषयों पर ध्यान केन्द्रित किया।                      

वैज्ञानिक सर्वे करने वालों का मानना है कि "वैज्ञानिक रचनाओं की तुलना में ख़र्च" या "शोधकर्ताओं की संख्या में वैज्ञानिक रचनाओं की तुलना" जैसे इंडेक्स को देशों की न्यायपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग में मद्देनज़र रखना चाहिए। दूसरे शब्दों में हर देश की वैज्ञानिक रचनाओं की संख्या का विज्ञान व प्रौद्योगिकी के अन्य इंडेक्स से तुलना के ज़रिए जैसे ख़र्च और शोधकर्ताओं की संख्या से तुलना के ज़रिए एक देश की वैज्ञानिक क्रियाकलापों की वांछनीयता को आंका जा सकता है। अगर इन सूचकांकों को भी मद्देनज़र रखें तब भी इस्लामी गणतंत्र ईरान ने अंतर्राष्ट्रीय हल्क़ों में अच्छी छाप छोड़ी है। ईरान इस्लामी क्रान्ति के बाद के वर्षों में ख़ास तौर पर पिछले दो दशकों में ऐसी हालत में अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक हल्क़ों में अपनी छाप छोड़ने में सफल हुआ कि इन वर्षों में उसे पश्चिमी देशों की ओर से कठोर व अन्यायपूर्ण आर्थिक दबाव और बहुआयामी पाबंदियों का सामना रहा और इस दौरान उसके पास विज्ञान व शोध के क्षेत्र में पूंजिनिवेश के लिए उचित अवसर नहीं था।

 

देशों के वैज्ञानिक विकास के संबंध में एक महत्वपूर्ण बिन्दु यह है कि जिस देश की वैज्ञानिक रचनाओं की पैदावार उसके सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में अधिक होगी इसका अर्थ यह है कि विज्ञान के विकास में उसका प्रदर्शन बेहतर रहा है और जिस देश की वैज्ञानिक रचनाओं की पैदावार उसके सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में कम होगी उस देश ने विज्ञान के विकास में कमज़ोर प्रदर्शन किया और अपनी संपत्ति का उसने विज्ञान के विकास में अच्छी तरह उपयोग नहीं किया। 2002 से 2005 के बीच आंकड़े दर्शाते हैं कि ईरान ने अपने सकल घरेलू उत्पाद में हर एक करोड़ डॉलर के बदले में एक वैज्ञानिक रचना वेब ऑफ़ साइंस में सूचिबद्ध करायी। जबकि इसके मुक़ाबले में सऊदी अरब ने लगभग साढ़े तीन करोड़ डॉलर के बदले में और पाकिस्तान ने लगभग दो करोड़ 20 लाख डॉलर के बदले में यह उपलब्धि हासिल की।                 

अब तक जो बातें आपको बतायी गयीं वे ईरान की ग़ैर फ़ारसी ज़बान की वैज्ञानिक उपलब्धियां थीं। अगर इस आंकड़े में ईरानी विद्वानों व वैज्ञानिकों की फ़ारसी भाषी वैज्ञानिक रचनाओं व उपलब्धियों को शामिल कर दें तो ईरान में वैज्ञानिक विकास का आंकड़ा बहुत बढ़ जाएगा क्योंकि ईरान की फ़ारसी भाषी वैज्ञानिक उपलब्धियां दुनिया की वैज्ञानिक डेटाबेस में शामिल नहीं हैं। यही वजह है कि फ़ारसी भाषा में ईरानी विद्वानों व शोधकर्ताओं की वैज्ञानिक क्रियाकलापों का हिसाब रखने के लिए इस्लामी गणतंत्र ईरान ने ईरानी वर्ष 1383 अर्थात 2004 से इस्लामी जगत के दस्तावेज़ों का डेटाबेस बनाने की पहल की है ताकि फ़ारसी भाषी और इस्लामी देशों में दुनिया में प्रचलित अन्य ज़बानों में वैज्ञानिक रचनाओं को सूचिबद्ध करे।

 

 

 

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Mar १२, २०१८ १४:०६ Asia/Kolkata
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