इंसान के शरीर के लिए ज़रूरी पोषक तत्वों में एक प्रोटीन भी है।

इंसान के शरीर में पानी के बाद सबसे ज़्यादा प्रोटीन होती है। इंसान का स्वास्थ्य और जीवन इसी तत्व पर निर्भर है। इंसान के शरीर के ऊतकों के विकास के लिए प्रोटीन ज़रूरी है। ख़ून, मांसपेशी, दिल, दिमाग़, त्वचा, बाल और नाख़ून के ऊतकों का बड़ा भाग प्रोटीन से बनता है। प्रोटीन वनस्पति और पशु दोनों प्रकार के भोजन में पाया जाती है इसलिए इंसान इन दोनों स्रोतों से प्रोटीन हासिल करता है। पशुओं में जिनके प्रोटीन को इंसान अहमियत देता है पक्षियों का मांस है। विभिन्न देशों में पक्षियों के पालन में मुर्ग़ी पालन उद्योग में बहुत ज़्यादा पूंजिनिवेश होता है। इस उद्योग में अन्य पक्षियों की तुलना में मुर्ग़ीपालन का चलन ज़्यादा है जिसका कारण इन पक्षियों में उच्च स्तरीय प्रोटीन और कम मात्रा में कोलेस्ट्रॉल का पाया जाना है।

 

पोल्ट्री के क्षेत्र में बटेर पालन का उद्योग भी है। आहार विशेषज्ञ इंसान के शरीर के लिए प्रोटीन की आपूर्ति के लिए बटेर के गोश्त के उपभोग की भी सिफ़ारिश करते हैं। बटेर के गोश्त में अन्य पक्षियों की तुलना में 5 से 10 फ़ीसद अधिक प्रोटीन पाया जाता है। बटेर में अमिनो एसिड पाया जाता है जो अन्य पक्षियों के गोश्त में नहीं होता। यही वजह है कि आहार विशेषज्ञ बच्चों, वृद्ध और अक्षम लोगों के लिए इस पक्षी के गोश्त खाने की सिफ़ारिश करते हैं क्योंकि इन लोगों को कोशिकाओं की मरम्मत के लिए बहुत अधिक प्रोटीन की ज़रूरत होती है। बटेर के गोश्त में कैल्शियम, लौह और ज़िन्क जैसे खनिज पदार्थ होते हैं इसलिए लोगों के खाद्य पदार्थ की बास्केट में इसका भी स्थान है और इसकी बाज़ार में भी ख़ूब मांग है। बटेर पालन उद्योग में पूंजि निवेश का फ़ायदा यह है कि यह पक्षी तेज़ी से बढ़ता है, शारीरिक व प्रजनन क्षमता की दृष्टि से जल्दी विकसित होता है, अंडे ज़्यादा देता है, इसके गोश्त व अंडे में पाए जाने वाले पोषक तत्व बहुत अहम होते हैं।

सबसे पहले बटेर पालन जापान में शुरु हुआ। उसके बाद चीन और फिर कोरिया में यह उद्योग फैला। बीसवीं शताब्दी के आरंभ में योरोप में बटेर पालन औद्योगिक स्तर पर होता था। थोड़े समय बाद इस पक्षी का पालन उत्तरी अमरीका, पश्चिम एशिया और नियर ईस्ट में शुरु हुआ। ईरान में बटेर के औद्योगिक स्तर पर पालन को 20 साल से ज़्यादा का समय हो रहा है। बटेर के स्वादिष्ट व फ़ायदेमंद गोश्त के मद्देनज़र दिन प्रतिदिन इस उद्योग में पूंजिनिवेश बढ़ता गया और हालिया वर्षों में इस पक्षी के पालन में काफ़ी वृद्धि हुयी है। ईरान में बटेर की कई प्रजातियों का पालन होता है। ईरान में लगभग 300 कंपनियां बटेर पालन में सक्रिय हैं। बटेर के फ़ार्म्ज़ से अवसतन 6 से 8 हज़ार टन गोश्त का उत्पादन होता है और इससे सरपलस अर्थात आधिक्य को क्षेत्रीय देशों को निर्यात किया जाता है। ईरान के केन्द्रीय भाग में बटेर पालन के ज़्यादा फ़ार्म्ज़ हैं। मैबुद, किरमान, यज़्द और लुरिस्तान शहरों में बटेर पालन अधिक होता है। किरमानशाह, तेहरान, पश्चिमी आज़रबाइजान और ज़न्जान प्रांत भी बटेर पालन के केन्द्र हैं। बटेर के अंडे में उच्चस्तरीय पोषक तत्व होते हैं और मुर्ग़ी के अंडे की तुलना में इसमें खनिज पदार्थ अधिक और चर्बी कम होती है। बटेर के अंडे का वज़्न 8 से 15 ग्राम का होता है। इसके अंडे का रंग सफ़ेद और उस पर काले या भूरे रंग की चित्ती पड़ी होती है। कुछ आहार विशेषज्ञों का मानना है कि बटेर का गोश्त व अंडा खाने से इंसान अपने भीतर जवानी का एहसास करता है। आपके लिए यह जानना भी रोचक होगा कि ईरान में बटेर पालन का लक्ष्य इसके अंडे का उत्पादन था। यूं तो बटेर के अंडे का वज़्न आम मुर्ग़ी के अंडे के वज़न की तुलना में एक बटा पांच होता है लेकिन मुर्ग़ी के अंडे की तुलना में इसमे फ़ास्फ़ोरस, लौह, विटामिन बी-वन और बी-टू अधिक होता है। बटेर का अंडा विटामिन सी को छोड़ विटामिनों का अच्छा स्रोत है। यही वजह है कि इसे विटामिन भंडार कहा जाता है।

ईरान में मुर्ग़ी पालन में सक्रिय कंपनियां बटेर, तीतर और फ़ेज़न्ट का 1200 टन से ज़्यादा गोश्त का निर्यात करने की क्षमता रखती हैं। तीतर भी उन पक्षियों में है जिनका गोश्त बहुत मज़ेदार होता है। तीतर के अंडे कुछ दूसरे पक्षियों की तुलना में महंगे होते हैं। तीतर की अनेक प्रजातियां होती हैं। ईरान में तीतर की जिस प्रजाती का पालन होता है वह चकोर कहलाती है। चकोर ईरान का स्थानीय पक्षी है। चकोर तीतर 3 से 4 महीने में 400 से 550 ग्राम तक बढ़ता है।                     

ईरान में मुर्ग़ी पालन में एक और पक्षी जिसका पालन होता है, शुतुरमुर्ग़ है। ईरान में शुतुरमुर्ग़ पालन को 20 साल से ज़्यादा का समय हो रहा है। आरंभिक वर्षों में शुतुरमुर्ग़ के बच्चे या अंडे आयात होते और फिर अंडों से बच्चे निकलने के बाद उन्हें बाज़ार में बेचा जाता था। लेकिन अब ईरान में ही शुतुरमुर्ग़ के अंडे सेने का काम होता है। तेहरान, इस्फ़हान, मर्कज़ी और गुलिस्तान प्रांतों में शुतुरमुर्ग़ का पालन अधिक होता है। ईरान दुनिया में शुतुरमुर्ग़ पालन में तीसरे स्थान पर है। ईरान में लगभग 1 लाख शुतुरमुर्ग़ हैं जिनमें लगभग 9000 अंडे देने वाले हैं। शुतुरमुर्ग़ पालन एक लाभदायक व्यापार है। इसका न सिर्फ़ गोश्त बल्कि खाल, बच्चे, चर्बी, खाद, अंडे और पर भी बिकते हैं। शुतुरमुर्ग़ की खाल से बने चमड़े को इस पक्षी से हासिल होने वाले सबसे ज़्यादा क़ीमती उत्पादों में गिना जाता है। दुनिया में इस्तेमाल होने वाले चमड़ा में शुतुरमुर्ग़ की खाल का चमड़ा सबसे ज़्यादा कोमल व मज़बूत चमड़ों में होता है। शुतुरमुर्ग़ का चमड़ा गाय के चमड़े की तुलना में छह गुना मज़बूत होता है। इसी वजह से शुतुरमुर्ग़ के चमड़े की अधिक अहमियत है। शुतुरमुर्ग़ का चमड़ा दुनिया में अपनी कोमलता और शुष्कता के मुक़ाबले में टिकाउ होने के कारण क़ीमती चमड़ों में गिना जाता है। ईरान में शुतुरमुर्ग़ के चमड़े से वॉलेट, बैग, जूते, ओवरकोट, और बूट जैसे उत्पाद बनते हैं। इस समय ईरान के शुतुरमुर्ग़ का चमड़ा कोरिया, तुर्कमनिस्तान, तुर्की, चीन और रूस को निर्यात होता है। ईरान से जिन मंडियों को शुतुरमुर्ग़ के चमड़े का निर्यात होता है उनमें सबसे ज़्यादा यह चमड़ा योरोप में इस्तेमाल होता है।

ईरान में मुर्ग़ीपालन उद्योग में एक और पक्षी जिसका औद्योगिक स्तर पर पालन होता है, कलहंस है। ईरान में कलहंस का पालन आधुनिक उपकरणों के ज़रिए होता है। कलहंस के पालन की एक ख़ास बात यह है कि इस पक्षी का व्यवहार बहुत सादा होता है इसलिए इसका संचालन आसान होता है। कलहंस बहुत तेज़ी से बढ़ता है। यह पक्षी बीमारियों के मुक़ाबले में मज़बूत प्रतिरोधक क्षमता रखता है। इस पक्षी की देखरेख पर ख़र्च भी कम आता है। कलहंस के पालन की एक और विशेषता यह है कि इसका उत्पादन ऑर्गेनिक तरीक़े से होता है। इसके पालन में दवा और टीके का इस्तेमाल नहीं होता। गोश्त व अंडे के अलावा, इस दक्षी का पर भी बिकता है।   

ईरान में मुर्ग़ीपालन में एक और पक्षी जिसे पाला जाता है, टर्की अर्थात पेरूपक्षी है। ईरान में इस पक्षी का पालन पारंपरिक व औद्योगिक दोनों तरीक़े से होता है। ईरान में टर्की के गोश्त का इतिहास लगभग 500 साल पुराना है। ईरान में ख़ुरासान, गीलान, माज़न्दरान, पश्चिमी व पूर्वी आज़रबाइजान, केन्द्रीय, फ़ार्स, इस्फ़हान और किरमान प्रांतों में टर्की का पालन पारंपरिक तरीक़े से पालन होता है। औद्योगिक स्तर पर टर्की की अनेक प्रजातियों का पालन होता है। इनमें से कुछ प्रजातियों के गोश्त में प्रोटीन की मात्रा ज़्यादा और वसा व कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है। इस्फ़हान, तेहरान और क़ज़वीन प्रांतों में टर्की का औद्योगिक स्तर पर पालन होता है। आपके लिए यह जानना भी रोचक होगा कि इस पक्षी के गोश्त का 65 फ़ीसद भाग सफ़ेद और 35 फ़ीसद भाग लाल होता है। पोषक तत्व की दृष्टि से टर्की में मौजूद प्रोटीन और फ़ासफ़ोरस मछली और झींगे से ज़्यादा होता है। इस समय ईरान में 300 कंपनियां टर्की के पालन में सक्रिय हैं और वे वार्षिक 20 लाख टर्की तथा 20 हज़ार टन से ज़्यादा इसके गोश्त की बाज़ार में आपूर्ती करती हैं।

 

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Mar १३, २०१८ १२:४५ Asia/Kolkata
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