आपको याद होगा कि पिछले कार्यक्रम में हमने ईरान में साइंस पाके या विज्ञान पार्कों के विकास के बारे में चर्चा की थी। 

सन 2000 के आरंभ में ईरान में जहां सांइस पार्कों की संख्या बहुत कम थी वहीं सन 2011 तक इनकी संख्या 131 हो गई।  इसी के साथ इस अवधि में साइंस पार्क या विज्ञान पार्क में मौजूद नालेज बेस्ट कंपनियों की संख्या 600 से बढ़कर लगभग 3000 हो गई। 

 

नैनो तकनीक एक अत्याधुनिक तकनीक है।  इस नई तकनीक के अन्तर्गत वास्तव में बहुत ही सूक्ष्म कणों के बारे में बात की जाती है।  नैनो तकनीक के प्रयोग से दैनिक जीवन को अधिक सरल किया जा सकता है।  नैनो के कण बहुत ही सूक्ष्म और छोटे होते हैं जिनको हम अपनी आंखों से नहीं देख सकते।  नैनो वास्तव में एक माप इकाई है जिससे हम किसी कण की मोटाई नापते हैं।  नैनो तकनीक वास्तव में व्यवहारिक विज्ञान के क्षेत्र में 1 से 100 नैनो मीटर में अध्ययन की जाने वाली सभी तकनीकों और संबन्धित विज्ञान का समूह है।

वर्तमान समय में यह आधुनिक विज्ञान के रूप में बदल चुका है।  मनुष्य की आंख छोटे-छोटे कणों को देखने में सक्षम नहीं है लेकिन स्केनिंग इलेक्ट्रान के आविष्कार के बाद अब बहुत छोटे-छोटे कणों को देखना संभव हो गया है।  इसके माध्यम से हम उनका गहन अध्ययन कर सकते हैं।  यही कारण है कि स्केनिंग इलेक्ट्रान के आविष्कार के बाद नैनो तकनीक के विकास में बहुत तेज़ी से बदलाव हुआ है।  वैज्ञानिक इस बात में सक्षम हो गए हैं कि नैनो तकनीक का प्रयोग करके किसी भी पदार्थ की मूल विशेषता को बदले बिना ही उसको विभिन्न उत्पादों में प्रयोग कर सकें।

नैनो तकनीक की ओर दुनिया की सरकारों ने पहली बार ध्यान, सन 1989 में दिया था।  इससे पहले तक नैनो तकनीक के बारे में केवल विश्वविद्यालयों और शोध केन्द्रों में ही बात की जाती थी।  जब इस तकनीक के महत्व के बारे में विस्तार से पता चला तो फिर बड़े देशों ने इस तकनीक से लाभ उठाते हुए संसार को एक नई तकनीक की प्रतिस्पर्धा में शामिल कर दिया।  अब इस समय वस्तुओं को आकार में छोटा करने की होड़ सी लग गई है।  कहा जा रहा है कि 21वीं शताब्दी, नैनो शताब्दी बनने जा रही है।  नैनो तकनीक को अधिक विकसित करने के लिए पूरी दुनिया में इस समय व्यापक स्तर पर शोध किये जा रहे हैं।  वर्तमान समय में नैनो तकनीक को चौथी औद्योगिक क्रांति की किरण के रूप में देखा जा रहा है।  यह एसी तकनीक है जो बहुत तेज़ी से पूरी दुनिया में फैलती जा रही है।  ईरान में नैनो तकनीक की प्राप्ति के बारे में सन 2000 से प्रयास आरंभ कर दिये गए थे।  इस बारे में देश के राष्ट्रपति की देखरेख में एक समिति का गठन किया गया जो इस क्षेत्र मे किये जाने वाले कार्यों की समीक्षा करेगी।  इस समिति ने सबसे पहले दस वर्षीय योजना बनाई थी जिसके अन्तर्गत सन 2014 तक ईरान को नैनो तकनीक के क्षेत्र में विश्व में 15वें स्थान पर पहुंचने की कोशिश पर बल दिया गया था।  इसी के बाद एक अन्य दस वर्षीय योजना बनाई गई जिसके अन्तर्गत सन 2023 तक ईरान को नैनो क्षेत्र में तकनीक और आर्थिक क्षेत्र में पहले स्थान पर पहुंचाया जाए गा।

 

जब 2005 में नैनो तकनीक के बारे में ईरान में दस वर्षीय योजना तैयार की गई उस समय इस तकनीक के बारे में ईरान की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी।  इस दौरान ईरानी वैज्ञानिकों ने नैनो तकनीक के बारे में केवल 9 लेख ही लिखे थे।  उस समय ईरान, नैनो तकनीक के हिसाब से संसार में 60वें नंबर पर था।  एसे में क्षेत्र में भी नैनो तकनीक की दृष्टि से ईरान की स्थिति उल्लेखनीय नहीं थी।  इसका कारण यह है कि ईरान, क्षेत्र के पांच देशों तुर्की, मिस्र, आर्मीनिया, सऊदी अरब और उज़्बेकिस्तान से भी पीछे था।  दस वर्षीय योजना में यह निर्धारित किया गया था कि ईरान, नैनो तकनीक के क्षेत्र में अपनी पूरी क्षमता के साथ प्रयास करते हुए विश्व में अपने 60वें स्थान को घटाकर 15वें स्थान पर लाएगा।  उसी साल से ईरान के विश्व विद्यालयों में नैनो तकनीक पर काम करने के लिए छात्रों को प्रेरित किया जाने लगा।  इसका परिणाम यह निकला के तीन वर्षों के भीतर नैनो तकनीक के क्षेत्र में ईरानी वैज्ञानिकों के लेखों की संख्या में बहुत तेज़ी से वृद्धि हुई।  तीन वर्षों के बाद ईरान में इस बारे में 813 लेख प्रकाशित किये गए और वह संसार में 19वें स्थान पर पहुंच गया।  इसी प्रकार से ईरानी वैज्ञानिकों ने सन 2007 में नैनो के बारे में यूरोप के पंजीकृत कार्यालय में अपने 4 पेटेंट पंजीकृत कराए।  ईरान के 4 पेटेंटों के कारण यूरोप के पंजीकरण कार्यालय में ईरान का स्थान 19 वें पायदान पर पहुंच गया।  इन सब बातों से यह समझ में आता है कि ईरान ने नैनो तकनीक के क्षेत्र में अथक प्रयास करते हुए उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं।

ईरान की पहली दस वर्षीय योजना में निर्धारित किया गया था कि देश सन 2014 तक नैनो तकनीक के क्षेत्र में दुनिया में 15वां स्थान प्राप्त कर लेगा लेकिन ईरानी वैज्ञानिकों और विद्धानों ने निर्धारित समय सीमा से 6 साल पहले ही लक्ष्य प्राप्त कर लिया।  सन 2015 में ईरान में दूसरी दस वर्षीय योजना तैयार की गई। दस वर्षीय इस योजना में यह प्रयास किया गया कि निर्धारित लक्ष्यों को इस प्रकार से हासिल किया जाए कि नैनो तकनीक के क्षेत्र में ईरान की प्रगति पहले की तुलना में अधिक रहे।  इस दस वर्षीय योजना में तीन मुख्य लक्ष्यों को दृष्टिगत रखा गया था।  लोगों के दैनिक जीवन में नैनो तकनीक को पहुंचाना, संसार के देशों में नैनो तकनीक के क्षेत्र में ईरान को उचित स्थान तक ले जाना और इस तकनीक के माध्यम से वैज्ञानिक क्षेत्र में विकास के साथ ही इसे अर्थव्यवस्था से जोड़ दिया जाए।  ईरानी वैज्ञानिकों ने नैनों तकनीक के क्षेत्र में सन 2015 में WOS अर्थात Web of Science में 6690 लेख पंजीकृत कराए।

इस वर्ष पूरी दुनिया में नैनो तकनीक के बारे में जो लेख लिखे गए थे उनमे 5 प्रतिशत लेख ईरानी विद्वानों से संबन्धित थे।  इस प्रकार से ईरान विश्व में छठे स्थान पर पहुंच गया।  विशेष बात यह है कि सन 2000 में ईरान संसार में 57वें और क्षेत्र में छठे स्थान पर था।  ईरानी विद्धानों ने अपने प्रयासों से 15 वर्षों के भीतर देश में नैनो तकनीक के बारे में लिखे जाने वाले लेखों की संख्या को बढ़ाकर बहुत आगे पहुंचा दिया।  इसका मुख्य कारण यह था कि ईरान में एक दशक के भीतर इन लेखों का अनुपात लगभग 51 प्रतिशत हो गया।  रोचक बात यह है कि सन 2015 में ईरान में नैनो के बारे में लिखे गए लेख जनसंख्या की दृष्टि से 24वें स्थान पर थे जबकि जीडीपी के हिसाब से चौथे नंबर पर।  इस प्रकार ईरान ने विश्व स्तर पर वैज्ञानिक लेखों की दृष्टि से हालिया वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है।  Index-h के हिसाब से ईरान ने सन 2011 में अपने 19वें स्थान को सन 2015 में ग्यारहवें स्थान पर पहुंचा दिया।

आंकड़े दर्शाते हैं कि हालिया कुछ वर्षों के दौरान ईरान ने नैनो तकनीक के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है जो प्रशंसनीय है।  इस प्रगति को इस हिसाब से समझा जा सकता है कि ईरान में प्रगति का स्तर शत प्रतिशत हो गया है जिसके कारण उसने जापान को पछाड़ दिया है।  यहां पर यह बात उल्लेखनीय है कि नैनो तकनीक के क्षेत्र में ईरान की प्रगति केवल विज्ञान तक सीमित नहीं है बल्कि आर्थिक क्षेत्र में भी इसके प्रभाव दिखाई दे रहे हैं।  सन 2012 में ईरान के नैनो प्रोडक्शन का बाज़ार 16 अरब रियाल का था जो बढ़कर अब 3200 अरब रियाल हो चुका है।  इससे पता चलता है कि ईरान में नैनो तकनीक से संबन्धित अर्थव्यवस्था में 20 वृद्धि हुई है।  वर्तमान समय में नैनो के क्षेत्र में आधुनिक उपकरण आंतरिक क्षमता पर बनाए जाते हैं जिनका प्रयोग अधिकतर ईरान के विश्वविद्यालयों और शोध केन्द्रों में किया जाता है।  ईरान, अपने नैनो उत्पादों को दक्षिणी कोरिया, आस्ट्रेलिया और चीन को निर्यात करता है।  नैनो तकनीक के बारे में ईरानी वैज्ञानिकों के प्रयास इतने अधिक हैं कि इस क्षेत्र में सन 2015 में लिखे जाने वाले लेखों में से 25 प्रतिशत लेख ईरान के थे।  लेखों की यह संख्या वास्तव में अद्वितीय है।

नैनो तकनीक के बारे में ईरान की प्रगति के कारण अब वह नैनो तकनीक के ध्रुव में बदलता जा रहा है।  वर्तमान समय में केवल जर्मनी ही एसा देश है जो यूरोपीय देशों में ईरान से आगे है।  जर्मनी के अतिरिक्त सभी यूरोपीय देश ईरान से पीछे हैं।  टेक्सटाइल, होम एप्लीएंसेज़, दवाओं, चिकित्सा उपकरणों, स्वास्थ्य, यातायात और अन्य क्षेत्रों में ईरान नैनो तकनीक का प्रयोग करता है।  दवाइयों के क्षेत्र में ईरान ने नैनो तकनीक का प्रयोग करके दवाएं तैयार की हैं जिन्हें विश्व की मंडियों में भेजने के लिए केवल संसार के विश्वसनीय केन्द्रों की पुष्टि की आवश्यकता है।  ईरान में 150 से अधिक नौलेज बेस्ड कंपनियां सक्रिय हैं जो नैनो तकनीक के आधार पर 300 से अधिक प्रकार के उत्पादों को तैयार करने में सक्षम हैं।  नैनो से संबन्धित अर्थव्यवस्था में ईरान की गिनती विश्व के दस गिने चुने देशों में होती है।

 

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Apr १८, २०१८ १६:२० Asia/Kolkata
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