हमने ईरान में नैनो टेक्नोलॉजी के विकास का उल्लेख करते हुए कहा था कि ईरानी वैज्ञानिकों ने पिछले एक दशक के दौरान सही योजना बनाकर देश को दुनिया में 60वें नम्बर से छठे नम्बर पर और इलाक़े में चौथे नम्बर से पहले नम्बर पर पहुंचा दिया।

इसके अलावा ईरान ने इस टेक्नोलॉजी का प्रयोग करके अपने उत्पादों को दुनिया भर में निर्यात किया। आज हम आपको ईरान के एक ऐसे शोध केन्द्र से परिचित करवाने जा रहे हैं, जिसने लोगों की बहुत सेवा की है। इस शोध केन्द्र का नाम रोयान है यह नाम बांझपन और जीवकोष विज्ञान या सेल्स के विशेषज्ञों के लिए जाना पहचाना है।

 

रोयान शोध केन्द्र की स्थापना 1991 में बांझ जोड़ों के उपचार और इस क्षेत्र में शोध के लिए की गई थी। इसके संस्थापक डॉक्टर सईद काज़मी और ईरान की मेडिकल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा की गई थी। इस शोध केन्द्र को स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 2008 और 2009 में सेल्स साइंस के अनुसंधान केन्द्र और प्रजनन चिकित्सा शोध केन्द्र का लाइसेंस प्रदान किया गया। इसके अलावा 2010 में इसकी उन्नति की गई। यह अनुसंधान तीन शोध केन्द्रों एवं दो क्लिनिकों द्वारा अपनी सेवाएं लोगों तक पहुंचा रहा है। यह अनुसंधान केन्द्र ईरान का एक महत्वपूर्ण शोध केन्द्र है। यह केन्द्र जीवविज्ञान, स्टेम सेल, शोध के परिणामों की मार्केटिंग एवं बांझपन के रोगियों के उपचार जैसे क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहा है।

रोयान अनुसंधान केन्द्र की गतिविधियों के नमूने के तौर पर स्टेम सेल्स का अध्ययन और हार्ट एवं कॉर्नियल इन्जरी के रोगियों के उपचार में उससे लाभ उठाना है। बायोटेक्नोलॉजी एवं प्रजनन के क्षेत्र में बकरियों की क्लोनिंग, लैब में मवेशियों के अंडाणुओं को परिपक्व बनाना, फ़र्टिलाइज़ेशन या उर्वरीकरण, भ्रूण को सैरोगेट मदर के गर्भाशय में स्थानांतरित करना, स्वस्थ जानवरों का प्रजनन और बांझपन के उपचार का उल्लेख किया जा सकता है।

रोयान अनुसंधान केन्द्र ने बांझपन के उपचार, स्टेम सेल्स और जैविक तकनीक के क्षेत्रों में विश्व में काफ़ी सफलता प्राप्त की है। माइक्रोइंजेक्शन द्वारा पहले बच्चे का जन्म, भ्रूण बनने से पहले जेनेटिक निर्धारण द्वारा पहले बच्चे का जन्म, स्टेम सेल्स द्वारा दिल की बीमारियों का इलाज, कॉर्नियल इन्जरी का स्टेम सेल्स द्वारा उपचार, शिशु की नाभी के ख़ून को सुरक्षित रखने वाली पहली बैंक की स्थापना, मध्यपूर्व में पहले क्लोनिंग जानवर का जन्म, मानव के शक्तिशाली स्टेम सेल्स का उत्पाद और पहली ट्रांसजेनिक बकरी का जन्म इस केन्द्र की महत्वपूर्ण गतिविधियों में शामिल है।

पिछले 26 वर्षों के दौरान रोयान अनुसंधान केन्द्र ने घातक रोगों के उपचार के अलावा, साइटोथ्रेपी अर्थात उपचार के सुरक्षित सेल्स की शैलियों को प्रस्तुत किया है। इस संदर्भ में उसने जैविक बैंकों की स्थापना की और कीमोथेरेपी का उपचार कराने वालों के लिए गर्भाधारण की संभावना उपलब्ध कराना है। जो महिलाएं कैंसर से पीड़ित हैं, या कीमिओथ्रेपी का उपचार करवाती हैं, उपचार के कारण उनके गर्भवती होने की संभावना कम होती है। हालांकि रोयान अनुसंधान केन्द्र में अंडाशय को फ़्रीज़ करने का बैंक और भ्रूण एवं सेल्स को फ़्रीज़ करने का बैंक है, ताकि इन मलिहाओं को भविष्य में गर्भ धारण हो सके। पिछले कुछ वर्षों से दुनिया में अंडाशय को फ़्रीज़ करने का टेस्ट हो चुका है और ईरान में 15 से अधिक महिलाएं रोयान में अंडाशय के जोड़ने से गर्भ धारण कर चुकी हैं। रूयान में स्थित भ्रूण के फ़्रीज़ करने के बैंक में अब तक हज़ारों भ्रूण फ़ीज़ किए जा चुके हैं।

तीन दिन के भ्रूम को माइनस 135 सेंटिग्रेट तापमान में सुरक्षित रखा जाता है। इस तापमान में जीवन की प्रक्रिया फ़्रीज़ हो जाती है और उसके सेल्स को किसी तरह की कोई क्षति नहीं पहुंचती है। इस भ्रूण को एक दशक से अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। जब भी भ्रूण के माता पिता बच्चे को जन्म देना चाहें वह अनुसंधान केन्द्र से संपर्क करके फ़्रीज़ हुए भ्रूण से बच्चा जन्म दे सकते हैं। फ़्रीज़ हुए भ्रूण को जब भी गर्भाशय में डाला जाता है, वह ताज़ा भ्रूण की तरह होता है और स्वास्थ्य की दृष्टि से उसके साथ कोई समस्या नहीं होती है। यह उपचार शैली ईरान में पिछले 20 वर्षों के दौरान प्रचलित हुई है। इस शैली द्वारा अंतिम वह बच्चा जिसने जन्म लिया है, उसका भ्रूण 10 साल तक इस्फ़हान के रोयान केन्द्र में फ़्रीज़ था और 10 साल के बाद उसने दुनिया में जन्म लिया।

 

शिशु की नाफ़ या नाभि का ख़ून, स्टेम सेल्स का एक समृद्ध स्रोत है, जिसे सुरक्षित रखकर भविष्य में उस शिशु या उसके परिजनों के ख़तरनाक रोगों का भी इलाज किया जा सकता है। आज कल अधिकांश विकासशील देशों में नाभि के ख़ून को सुरक्षित रखने वाली बैंकें मौजूद हैं। यह बैंक शिशु की नाभि से निकलने वाले ख़ून को दूर फेंकने के बजाए उसे भविष्य के लिए सुरक्षित रख लेती हैं। शिशु के मां-बाप बच्चे के जन्म से पहले इस बैंक में खाता खुलवाते है। जन्म के तुरंत बाद शिशु की नाभी धागे को जब दूर फेंका जाता है तो एक सुई द्वारा नाभि से ख़ून लेकर ख़ून के पैकेट में डाल दिया जाता है। उसके बाद स्टेम सेल्स से समृद्ध इस ख़ुन को फ़्रीज़ कर दिया जाता है, ताकि अगर बड़े होकर इस शिशु को कैंसर जैसी कोई बीमारी हो जाए तो उसके उपचार में इस ख़ून का प्रयोग किया जा सके।

इस ख़ून में दूसरे सेल्स बनाने की क्षमता होती है और ऑप्रेशन के समय वह सेल्स में बदलाव व सुधार कर सकता है। पहली बार 1988 में फ़्रांस में डा. गेलूकमैन ने ख़ून की कमी की बीमारी से ग्रस्त एक शिशु का इस शैली से सफल उपचार किया। उस शिशु का उसकी जुड़वा बहन की नाभि से लिए गए ख़ून के स्टेम सेल्स के आधार पर उपचार किया गया। उसके बाद यह शैली प्रचलित हो गई और विश्व के विभिन्न देशों में इन सेल्स को सुरक्षित रखने के लिए केन्द्रों की स्थापना की गई। रोयान शोध केन्द्र की भी इसी उद्देश्य से 2008 में स्थापना की गई। इस शोध केन्द्र के बैंक में 5 हज़ार से भी अधिक ख़ून के नमूने सुरक्षित रखे गए हैं। 2012 में पहली बार तीव्र ल्यूकेमिया से ग्रस्त एक 13 वर्षीय बच्चे का इस शैली द्वारा सफल उपचार किया गया।

ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने रोयान अनुसंधान केन्द्र देश की वैज्ञानिक प्रगति का प्रतीक क़रार दिया है और हमेशा उसकी सराहना की है। क़रीब 10 वर्ष पूर्व वरिष्ठ नेता ने इस अनुसंधान केन्द्र के विभिन्न विभागों का दौरा करके वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की उपलब्धियों को निकट से देखा था। इस अनुसंधान केन्द्र का दौरा करते हुए वरिष्ठ नेता ने देश में वैज्ञानिक प्रगति एवं विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा था कि रोयान का भ्रमण, ईरान में जारी वैज्ञानिक प्रगति एवं विस्तार की प्रक्रिया की प्रशंसा और समस्त विद्वानों एवं वैज्ञानिकों विशेषकर रोयान के शोधकर्ताओं के लिए एक प्रतीकात्मक क़दम है।

वरिष्ठ नेता ने रोयान को एक सफल केन्द्र बताया और कहा कि यह ज्ञान एवं ईमान के मिश्रण का एक उज्जवल परिणाम है। उन्होंने डा. सईद काज़मी आश्तियानी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, स्वर्गीय काज़मी आश्तियानी ने ईमान की शक्ति, भरसक प्रयत्न और सफल प्रबंधन द्वारा इस अनुंसधान केन्द्र की स्थपाना की, जिसमें ईमान के साथ वास्तविक वैज्ञानिक शोध किए जाते हैं।

वरिष्ठ नेता का कहना था कि प्रगति के लिए रोयान के पास काफ़ी क्षमता है और यह केन्द्र वास्तव में देश में वैज्ञानिक प्रगति का स्टेम सेल है, जिस तरह से ईमान और ज्ञान रखने वाला हर वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता यह क्षमता रखता है। जिस प्रकार एक दशक पूर्व वरिष्ठ नेता ने भविष्यवाणी की थी, रोयान केन्द्र ने ईरान में विज्ञान के क्षेत्र में स्टेम सेल की भूमिका निभाई है।                         

 

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Apr २२, २०१८ १२:२३ Asia/Kolkata
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