हमने बताया गया कि ऑस्कर अपनी मां के जन्मदिन की पार्टी के लिए अपनी पत्नी और छोटी बेटी के साथ मां के घर पहुंचता है।

पार्टी के बाद ऑस्कर अपनी पत्नी और कुछ दोस्तों के साथ नए साल की रात का जश्न मनाने के लिए निकल पड़ता है। ऑस्कर और उसके दोस्त इच्छा के विपरीत फ़्रुटवेल स्टेशन पर कुछ श्वेत ग़ुंडों से भिड़ जाते हैं और फिर उसी स्टेशन पर रेलगाड़ी से उतर पड़ते हैं। पुलिस वाले, जो सबके सब गोरे हैं, पूरी बात समझ जाते हैं और सिर्फ़ ऑस्कर के दोस्तों को गिरफ़्तार कर लेते हैं और उन्हें हिंसा और ज़ोर ज़बरदस्ती करके रेलवे स्टेशन के पास बिठा देते हैं। ऑस्कर की पत्नी प्लेटफ़ार्म से निकल जाती है और ऑस्कर मेट्रो की बोगी में लौट आता है। एक गोरा पुलिसकर्मी मेट्रो की बोगी में आता है और ऑस्कर यात्रियों के बीच अपने आपको छिपाने की कोशिश करता है लेकिन पुलिस वाला उसे देख लेता है और बड़ी निर्दयता से उसे गाड़ी से उतार कर उसके तीन मित्रों के पास फेंक देता है।

ऑस्कर पूछता है कि तुम हमें क्यों गिरफ़्तार कर रहे हो, हमने तो कुछ भी नहीं किया है, यह क्या हो रहा है? क्या तुम हमें रोके रखना चाहते हो? ऑस्कर का दोस्त कहता है कि मैं भी यही कह रहा हूं लेकिन यह लेडी पुलिस सुन ही नहीं रही है। एक पुलिसकर्मी ऑस्कर के दोस्त को लात मारता है और कहता है, चुप हो जा। बताओ तुम्हारे दोस्त कहां हैं? ऑस्कर और उसके मित्र कहते हैं कि हमारा कोई दोस्त नहीं है। वह पुलिस वाला इधर उधर देखता है और कहता है कि मैं एक ग़ुंडे को देख रहा हूं। महिला पुलिसकर्मी अपने मोबाइल फ़ोन पर कहती है कि हम मेट्रो के प्लेटफ़ार्म पर हैं और हमें मदद की ज़रूरत है। हमने चार संदिग्ध लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है।

एक पुलिसकर्मी बड़ी क्रूरता से एक अश्वेत को ज़मीन पर पटक देता है और उसे खींचता हुआ ले जाता है। इस पर ऑस्कर और उसके दोस्त आपत्ति करते हैं। महिला पुलिसकर्मी उन्हें बंदूक़ से धमकाती है और कहती है कि अपनी जगह पर बैठे रहें। एक पुलिसकर्मी ऑस्कर पर हमला करता है और उसे एक ज़ोर का मुक्का मारता है। इसके बाद वह अपनी कमर से हथियार निकालता है और उन्हें धमकी देता है। कुछ और पुलिसकर्मी आ जाते हैं। ऑस्कर, मेट्रो स्टेशन पर मौजूद कई यात्रियों की तरह अपने मोबाइल फ़ोन से पुलिसकर्मियों की हिंसा की फ़िल्म बनाने लगता है।

ऑस्कर एक पुलिसकर्मी से कहता है कि मैंने तुम्हारा नंबर और निशानी ले ली है। पुलिस वाला कहता है कि मोबाइल उधर रखो और मुंह बंद करो। पुलिस वाले ऑस्कर और कई अन्य लोगों को उनके मोबाइल बंद करने के लिए विवश कर देते हैं। एक पुलिस वाला दूसरे से कहता है कि तुम लोग इन बदमाशों का ध्यान रखो, मैं मेट्रो में जा कर गवाहों को देखता हूं।

ऑस्कर की पत्नी सोफ़ीना कॉल करती है और ऑस्कर उससे पूछता है कि क्या हो रहा है? वह कहती है कि तुम कहां हो? अभी ट्रेन में ही हो? ऑस्कर कहता हैः नहीं ! मैं अब भी फ़्रुटवैल में ही हूं। हमें रोक लिया है और बिना वजह हमारी पिटाई कर रहे हैं। सोफ़ीना कहती है कि कौन कमीना तुम्हें मार रहा है? वह कहता है कि पुलिस वाले। इसी बीच एक पुलिस वाला ऑस्कर से कहता है कि फ़ोन बंद करो। ऑस्कर अपनी जगह से उठना चाहता है लेकिन पुलिस वाला डांट कर कहता है कि चुप चाप बैठे रहो। ऑस्कर कहता है कि मुझे बात करने दो लेकिन पुलिस वाले पिटाई करके ऑस्कर और उसके दोस्तों को उनकी जगह पर बिठा देते हैं। कुछ दर्शक अपने मोबाइल फ़ोनों से इस दृश्य की फ़िल्म बनाने लगते हैं।

ऑस्कर अपने दोस्तों को शांत कराता है और कहता है कि कोई बात नहीं भाई, वह जब तक चाहें हमें यहां रोक सकते हैं लेकिन ये कमीने हमें गिरफ़्तार नहीं कर सकते क्योंकि हमने कुछ किया ही नहीं है। इस पर एक पुलिस वाला कहता हैः क्या कहा तुमने? ऑस्कर कहता है कि मैंने यह कहा कि हमने कुछ नहीं किया है इस लिए तुम लोग अकारण हमें गिरफ़्तार नहीं कर सकते। वह पुलिस वाला अपने एक साथी से कहता है कि इन दोनों बदमाशों को हथकड़ी लगाओ, ये जेल जाएंगे। वह पुलिस वाला ज़बरदस्ती उन्हें हथकड़ी पहनाने की कोशिश करता है। इस पर ऑस्कर पहले पुलिस वाले से कहता है कि हम सिर्फ़ घर जाना चाहते हैं, समझ रहे हो क्या कह रहा हूं, सिर्फ़ घर जाना चाहते हैं। वह पुलिस वाला कहता है कि एक ग़ुंडे मवाली जैसी हरकतें करने से पहले तुम्हें इस बारे में सोचना चाहिए था। ऑस्कर पहले पुलिस वाले की तरफ़ इशारा करते हुए अपने साथी से कहता है कि ये सच में कमीना है। वह पुलिस वाला कहता हैः ऐ कलूटे तुम मुझे कमीना कह रहे हो? ऑस्कर कहता है, मुझसे बकवास न करो। पुलिस वाला फिर उसे कलूटा कहता है।

इसके बाद दूसरा पुलिस वाला ऑस्कर को ज़मीन पर गिरा कर उसे हथकड़ी लगा देता है और पहला पुलिस वाला अपने पैर से उसका सिर कुचलने लगता है। ऑस्कर के दोस्त और स्टेशन पर मौजूद लोग इस पर कड़ी आपत्ति करते हैं। अचानक ही दुसरा पुलिसकर्मी अपनी बंदूक़ ऑस्कर पर तानता है और फ़ायर कर देता है। सभी लोग घबरा कर ऑस्कर को देखने लगते हैं। उस समय फ़िल्म के दर्शक सोफ़ीना का चित्र देखते हैं जो मेटो की लॉबी में है और फ़ायर की आवाज़ सुन कर आतंकित हो गई है।

ऑस्कर के मुंह में ख़ून भरा हुआ है और वह पुलिस वाले से कहता है कि तुमने मुझ पर फ़ायर कर दिया? उसे अपने आस-पास की चीज़ें धुंधली दिखाई देने लगती हैं जबकि पुलिस वाले भी हतप्रभ और आतंकित नज़र आते हैं। ऑस्कर कहता है कि तुमने मुझ पर फ़ायर कर दिया, मेरी एक बच्ची है। ऑस्कर का दोस्त उससे उठने के लिए कहता है। उसके दोस्त उसकी ओर बढ़ते हैं लेकिन पुलिस वाले उन्हें और अन्य लोगों को ताक़त और हिंसा के बल पर तितर बितर कर देते हैं। मेट्रो भी चल पड़ती है। दूसरा पुलिस कर्मी ऑस्कर के शरीर पर गोली की जगह खोजने लगता है जबकि पहला पुलिसकर्मी एम्बुलेंस बुलाता है।

पहला पुलिसकर्मी ऑस्कर की ओर इशारा करते हुए दूसरे पुलिसकर्मी से कहता है, इसे क्या हुआ है? फिर वह ऑस्कर का हाथ पकड़ता है और ऑस्कर उससे कहता है कि तुमने मुझ पर फ़ायर किया। वह अत्यंत भयभीत स्वर में ऑस्कर से कहता है कि ईश्वर के लिए मरना मत। ऑस्कर कहता है कि मेरी एक लड़की है। वह पुलिस वाला कहता है कि अपनी आंखें खुली रखो। कैमरा, ऑस्कर का मोबाइल दिखाता है जिस पर कॉल आ रही है।

 

फ़िल्म के इस दृश्य में पुलिस की हिंसा और दुर्व्यवहार को स्वाभाविक दिखाने की कोशिश की गई है। कैमरा जिन चित्रों को फ़िल्माता है वे पुलिस वालों की बेलगाम हिंसा को स्पष्ट करते हैं। इस सीन में पुलिस पूर्वाग्रह के आधार पर गोरों को नहीं बल्कि अश्वेतों को अपराधी मानती है। पुलिस, जो क़ानून लागू करने और सुरक्षा स्थापित करने वाली है अपने जातिवादी विचारों व दृष्टिकोणों के आधारपर अश्वेतों के साथ अन्यायपूर्ण, हिंसक और पाश्विक व्यवहार करती है। इससे पता चलता है कि वर्ष 2013 के अमरीकी समाज में भी जातिवाद, भेदभाव और गोरों को उच्च समझने के विचार मौजूद हैं।

बहुत अधिक ख़ून बह जाने के कारण ऑस्कर को अस्पताल पहुंचाया जाता है। उसकी मां, पत्नी और अन्य परिजन अत्यंत चिंतित स्थिति में प्रार्थना करते हुए अश्वेत डॉक्टर के कमरे के बाहर उसके अंतिम उत्तर की प्रतीक्षा कर रहे हैं। वह कमरे से बाहर निकलता है और कहता है कि वह बच नहीं सका। ऑस्कर की मां कहती है कि मैं उसे देखना चाहती हूं। डाक्टर कहता है कि ठीक है आप उसे देख सकती हैं लेकिन आप कमरे के अंदर जा कर उसे बेड से नहीं हटा सकती क्योंकि यह एक क्रिमनल केस है। ऑस्कर की मां आग्रह करते हुए कहती है कि मुझे हर हाल में उसे देखना है। अश्वेत नर्स कहती है कि मैं इन्हें अंदर ले जाती हूं। वे दोनों शव की ओर जाती हैं और ऑस्कर की मां कमरे की सलाख़ों के पीछे से उसे देखती है। वह रोते हुए कहती है कि मैंने उससे कहा था कि मैट्रो से जाए लेकिन मुझे नहीं पता था कि वे लोग उसे नुक़सान पहुंचा देंगे। मुझे उसे कार से जाने देना चाहिए था लेकिन मैं चाहती थी कि वह पूरी सुरक्षा में रहे।

 

अस्पताल के दृश्य में कैमरे के माध्यम से ऑस्कर से उसके परिवार की कटु विदाई को दिखाया गया है जिससे उसकी मज़लूमियत और उभर आती है। ऑस्कर की मां की बातों का सांकेतिक तात्पर्य यह है कि अश्वेतों के लिए शहर के भीतर आवाजाही के लिए मैट्रो की तुलना में निजी वाहन अधिक सुरक्षित है। मैट्रो सार्वजनिक परिवहन है और उसमें सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए लेकिन फ़्रुटवेल स्टेशन फ़िल्म दिखाती है कि मैट्रो जैसे सार्वजनिक स्थान और परिवहन भी अश्वेतों के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। फ़िल्म में अपराधी पुलिसकर्मी को उसके किए का दंड नहीं मिलता और फ़िल्म फ़्रुटवेल स्टेशन पर लोगों के एकत्रित होने के वास्तविक चित्रों के साथ समाप्त हो जाती है।

 

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Apr २२, २०१८ १३:१२ Asia/Kolkata
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