मानव समाज में सुरक्षित आहार एक अत्यन्त महत्वपूर्ण मुद्दा है।

सुरक्षित आहार के लिए स्वच्छ खाद्य पदार्थ के साथ ही स्वच्छ बर्तन भी आवश्यक होते हैं। इस संदर्भ में चीनी मिट्टी के बर्तनों का खास महत्व है क्योंकि इन बर्तनों को स्वास्थ्य के लिए निर्धारित मानकों के आधार पर बनाया जाता है यही वजह है कि पूरे विश्व में चीनी मिट्टी से बने बर्तनों का चलन है। चीनी मिट्टी के बर्तनों का चलन हज़ारों साल ईसापूर्व से है। ईरान में 330 - 550 ईसापूर्व के दौरान हख़ामनी सत्ता काल से भी पहले चीनी मिट्टी के बर्तनों के प्रयोग का सुबूत मिलता है। बर्तन बनाने की कला  , बर्तनों को विभिन्न रंगों और डिज़ाइनों से सजाने की कला के साथ ही ईरान से चीन गयी और चीनियों को बेहद पसन्द आयी जिसकी वजह से कुछ ही समय में चीनी कलाकार, इस कला में सभी को पीछे छोड़ने में सफल हो गये। चीनी कलाकारों ने बर्तनों के लिए अच्छी मिट्टी खोज ली और उस से अत्यन्त कलात्मक तरीक़े से सफेद रंग के अत्यन्त मज़बूत बर्तन बनाने में सफलता प्राप्त कर ली। यह बर्तन, भट्टी में पकाए जाने के बाद अत्याधिक तापमान से भी खराब नहीं होते थे। इस प्रकार से इस मिट्टी से बने बर्तनों को चीनी मिट्टी से बने बर्तन का नाम मिला । उसके बाद चीनी कलाकारों ने इस देश के राजाओं के लिए बने चीनी मिट्टी के बर्तनों पर रंग बिरंगे डिज़ाइन बनाने आरंभ कर दिये जिससे इन बर्तनों की सुदंरता में चार चांद लग गये। इन बर्तनों पर प्रायः शाही दावतों, दरबारों और शिकार या फिर शाही खानदान के सदस्यों के चित्र होते थे। 

 

ईरानी चीनी मिट्टी के बर्तन

 

ईरान और चीन के बीच आवाजाही और दोनों देशों के मध्य उत्पादों के लेन - देन की वजह से बर्तन बनाने की कला भी प्रभावित हुए और दोनों देशों के कलाकारों ने एक दूसरे से बहुत कुछ सीखा। ईरान में सफवी शासन काल सहित कई कालों में बर्तन बनाने की कला में काफी विकास हुआ। सफवी काल में बर्तन बनाने की कला में विकास के बारे में फ्रेंच पर्यटक " शार्डन" लिखते हैंः 

" अधिकांश अवसरों पर ईरान में मिट्टी के बने बर्तनों पर चीनी उत्पाद होने का संदेह होता है और वह इतना एक दूसरे से मिलते जुलते हैं कि उनमें अंतर खोजना मुश्किल है बल्कि कभी कभी तो ईरान में बने चीनी मिट्टी के बर्तन, सुनदरता , चमक और क़लई की दृष्टि से चीन में बने चीनी मिट्टी के बर्तनों से अधिक अच्छे होते हैं। " 

 

अब चीनी मिट्टी के बर्तन बनाने की कला में बुनियादी परिवर्तन आ चुका है । अतीत में चीनी मिट्टी के बर्तन दक्ष कलाकारों के हाथों विशेष ग्राहकों के लिए और सीमित मात्रा में बनाए जाते थे लेकिन अब आधुनिक तकनीक की वजह से चीनी मिट्टी के बर्तन, विभिन्न रूपों , आकार और भारी मात्रा में बनाए जाते हैं जिसकी वजह से यह बर्तन आम लोगों की भी पहुंच में हैं। चीनी मिट्टी के बर्तनों को भट्टी के तापमान, पानी सोखने की क्षमता, पारदर्शिता जैसे उत्पादन के मापकों के आधार पर विभिन्न क़िस्मों में बांटा जाता है।चीनी मिट्टी का अच्छा बर्तन , वज़्न, मज़बूती, अधिक तापमान सहन करने की क्षमता, पारदर्शिता, बार बार धोने के बावजूद डिज़ाइन व रंग को नुकसान न पहुचने , माइक्रोवेव में प्रयोग करने और बर्तन धोने वाले मशीन से धोने योग्य जैसी विशेषताओं पर ध्यान देखा पहचाना जाता है। चीनी मिट्टी के बर्तन प्रायः 1400 के तापमान में पकाए जाते हैं और वह अत्याधिक चिकने और धोने योग्य होते हैं इसी लिए उसमें रखी जाने वाली खाद्य सामाग्री पर बर्तन पर कोई असर नहीं पड़ता और यही वजह है कि उसे गर्म और ठंडी खाद्य सामग्री के लिए प्रयोग किया जाता है। 

 

आर्मीनिया में बर्तन के थोक विक्रेता , सैमोएल ग्रेगोरियान पांच वर्षों से ईरान से चीनी मिट्टी  और शीशे से बने बर्तन  आयात करते हैं और फिर उसे ईरवान के एक शोरूम में रख कर बेचते हैं। उनका कहना हैः ईरान न केवल एक अच्छा पड़ोसी बल्कि आर्मिनीयाई राष्ट्र का एक अच्छा मित्र भी है और इसी वजह से ईरानी कंपनियों के साथ सहयोग बहुत आसान हो जाता है। 

वह कहते हैं कि वह कई बरसों से केवल ईरान से ही चीनी मिट्टी के बर्तन आयात करते हैं क्योंकि ईरान में बने बर्तन की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है और क़ीमत भी उचित होती है ईरानी व्यापारियों से काम करना बहुत सरल है क्योंकि हम एक दूसरे की भाषा भी आसानी से समझ लेते हैं। 

 इसी तरह आर्मीनिया के " इस्तेपानावान" नगर के व्यापारी, " आर्मन हारातियान" का शोरूम " जार्जिया " की सीमा पर स्थित है वह  140 किलोमीटर की यात्रा करते हैं ताकि सैमोएल ग्रेगोरियान के शो रूम से ईरानी बर्तन अपनी दुकान में ले जाकर बेच सकें वह कहते हैं कि अधिकांश ग्राहक ईरानी बर्तनों को पसन्द करते हैं। 

 

ईरानी चीनी मिट्टी के बर्तन

 

अध्ययनों से पता चलता है कि  पूरी दुनिया में दस से पंद्रह लाख टन चीनी मिट्टी के बर्तन बनाए जाते हैं और ईरान विश्व में चीन के बाद दूसरा बड़ा उत्पादक देश है। ईरान में चीनी मिट्टी के बर्तनों के उद्योग ने अपने इतिहास में दो अलग अलग ढांचों का अनुभव प्राप्त किया है। कुछ दशक पहले तक ईरान में बनाए जाने वाले चीनी मिट्टी के बर्तन, पारंपरिक कारखानों में तैयार किये जाते थे जो हालांकि मात्रा में कम होते थे लेकिन कला की दृष्टि से उन्हें मूल्यवान समझा जा सकता है। ईरान में उत्खनन के दौरान विभिन्न युगों से संबंध रखने वाले चीनी मिट्टी के बर्तन आज विश्व के बहुत से संग्रहालयों की शोभा बढ़ा रहे हैं। ईरान में चीनी मिट्टी के बर्तनों के उत्पादन की आधुनिक तकनीक का इतिहास लगभग चार दशक पुराना है। ईरान में इस्लामी क्रांति से पहले, देश में चीनी मिट्टी के बर्तन बनाने वाले बहुत कम कारखाने थे। क्रांति की सफलता के बाद, अधिकारियों की नीतियों की वजह से इस उद्योग में हर लिहाज़ से तरक़्क़ी हुई।  मात्रा की दृष्टि से इस उद्योग में 1500 प्रतिशत वृद्धि हुई और उसके साथ ही डिज़ाइन और सजावट में भी बेहतरी लायी गयी। 

 

आज ईरान में चीनी मिट्टी के बर्तन बनाने वाले बीस से अधिक कारखाने हैं और उनके उत्पादन का 90 प्रतिशत भाग देश के भीतर खप जाता है जबकि दस प्रतिशत या उससे अधिक दूसरे देशों में निर्यात किया जाता है। ईरान में बने चीनी मिट्टी के बर्तनों को इराक़, तुर्की, जार्जिया, तुर्कमानिस्तान, आज़रबाइजान गणराज्य, अफगानिस्तान, रूस, यूएई, क़ाजे़किस्तान और आर्मिनीया जैसे विभिन्न देशों को निर्यात किया जाता है।

 

ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद बनने वाले पहले कारखाने ने " ज़र्रीन चीनी" के नाम से काम आरंभ किया । ईरान में चीनी मिट्टी से बर्तन बनाने वाली " ज़र्रीन चीनी " कंपनी के पास चीनी मिट्टी के बर्तन बनाने का 130 साल का अनुभव है और यह मध्य पूर्व की सब से बड़ी कंपनी है और इसी तरह इस कंपनी को दुनिया की गिनी चुनी कपंनियों में शामिल किया जात है। इसी लिए यह कंपनी, जर्मनी, स्पेन, इटली, फ्रांस, ब्रिटेन, स्वीडन, हालैंड, तुर्की, रूस, कनाडा, सऊदी अरब, यूएई और भारत जैसे विभिन्न देशों को अपने उत्पादन निर्यात करती है। इस कंपनी के उत्पादन गुणवत्ता लिहाज़ से बेहद भरोसे मंद होते हैं और डिज़ाइन की दृष्टि से भी अत्यन्त सुन्दर  और विविधतापूर्ण होते हैं जिसमें क्लासिक और आधुनिक डिज़ाइनों को प्रयोग किया जाता है। 

ईरानी चीनी मिट्टी के बर्तन

 

बोन चाइना बर्तन, उच्च कोटी के चीनी मिट्टी के बर्तन होते हैं जिन्हें विशेष तकनीक से बनाया जाता है और वह अत्याधिक सुन्दर और पारदर्शी होते हैं। ईरान की " सारगुल शर्क़" कंपनी जो वास्तव में " मक़सूद" उद्योगसमूह से संबंधित है इस पूरे क्षेत्र में पहली बार उच्च कोटि के बोन चाइना बर्तन बनाने में सफल हुई है। यह कंपनी हर साल दो हज़ार टन बोन चाइना बर्तन बनाती है। " मक़सूद" इंडस्ट्रियल ग्रुप एक साल में चालीस हज़ार टन से अधिक बर्तन बनाते हैंं जिसकी वजह से इसे दुनिया में इस प्रकार के बर्तन बनाने वाला सब से बड़ा कारखाना समझा जाता है। ओपेल शीशे से बने बर्तन, चीनी मिट्टी के बर्तनों की तुलना में अधिक हल्के, ज़्यादा मज़बूत और अधिक सुन्दर होते हैं। 

 

 

आज के दौर में अनुसंधान व शोध हर कारखाने के लिए एक अहम ज़रूरत बन चुका है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मंडियों में उपस्थिति दर्ज कराना इस के बिना संभव नहीं होता और यह गुणवत्ता व सफलता  की शर्त भी है।    ईरान की " चीनी तक़दीस" कंपनी ने इस दिशा में पुंजीनिवेश किया और तीन वर्षों तक शोध, अध्ययन, प्रयोगशाला के अथम मेहनत और देशी व  विदेशी लाइसेंस लेकर नेनो कोटिंग के साथ चीनी मिट्टी के बर्तन  देशी व विदेशी बाज़ार में उतारने में सफल हुई है। इस उत्पादन की विशेषता यह है कि उसे धोने वाले पदार्थों की ज़रूरत नहीं होती, उसका रंग खराब नहीं होता और चाय व काफी का उस पर दाग नहीं पड़ता, इसके साथ ही उसे धोने के बाद सुखाने की भी ज़रूरत नहीं होती । इस तरह से नेनो कोटेट चीनी मिट्टी के बर्तन कई लिहाज़ से बेहतरीन होते हैं। (Q.A.)

 

 

 

मई ०६, २०१८ १५:२३ Asia/Kolkata
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