क़ुरआन ईश्वरीय चमत्कार-681

 

وَمَا تَنَزَّلَتْ بِهِ الشَّيَاطِينُ (210) وَمَا يَنْبَغِي لَهُمْ وَمَا يَسْتَطِيعُونَ (211) إِنَّهُمْ عَنِ السَّمْعِ لَمَعْزُولُونَ (212)

 

और इस (क़ुरआन) को शैतानों ने नहीं उतारा है। (26:210) और न यह उनके योग्य है और न ही यह उनके बस का है। (26:211) निश्चय ही वे तो (आकाशों की सूचनाएं) सुनने से भी दूर रखे गए हैं। (26:212)

 

فَلَا تَدْعُ مَعَ اللَّهِ إِلَهًا آَخَرَ فَتَكُونَ مِنَ الْمُعَذَّبِينَ (213) وَأَنْذِرْ عَشِيرَتَكَ الْأَقْرَبِينَ (214) وَاخْفِضْ جَنَاحَكَ لِمَنِ اتَّبَعَكَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ (215) فَإِنْ عَصَوْكَ فَقُلْ إِنِّي بَرِيءٌ مِمَّا تَعْمَلُونَ (216)

 

तो ईश्वर के साथ दूसरे को न पुकारो को तुम भी दंडित लोगों में शामिल हो जाओगे। (26:213) और (हे पैग़म्बर!) अपने निकट परिजनों को सचेत कीजिए (26:214) और जो ईमान वाले आपका अनुसरण करते हैं, उनके लिए अपने कंधे झुकाए रहिए अर्थात अत्यंत विनम्र रहिए। (26:215) और अगर वे आपकी अवज्ञा करें तो कह दीजिए कि जो कुछ तुम करते हो, मैं उससे विरक्त हूँ। (26:216)

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मई १६, २०१८ १५:३८ Asia/Kolkata
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