अगर वातावरण अनुकूल हो, फ़ार्स खाड़ी का नीला पानी तूफ़ानी न हो, बारिश नहीं हो रही हो और लहरों में हलचल न हो तो तेज़ स्पीड की बोट से सिर्फ़ आधे घंटे में क़िश्म द्वीप से होरमुज़ द्वीप तक पहुंचा जा सकता है।

इन दोनों द्वीपों के बीच दूरी इतनी कम है कि क़िश्म के तट से होरमुज़ को देख सकते हैं। बंदर अब्बास से होरमुज़ द्वीप तक जाने में थोड़ा समय लगता है। यह यात्रा आधे घंटे से अधिक समय में तय की जाती है। बंदर अब्बास और इस द्वीप के बीच हमेशा नावों का आवागमन जारी रहता है।

होरमुज़ द्वीप होरमुज़ प्रांत में होरमुज़ स्ट्रेट के मुहाने पर स्थित है। वास्तव में होरमुज़ द्वीप नमक का एक टीला है, जिसमें नमक, चूना और पत्थर हैं। होरमुज़ का क्षेत्रफल 42 किलोमीटर है और यह बंदर अब्बास से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस द्वीप में खनिज, सुन्दर पत्थर, मूंगे की चट्टानें, चट्टानों वाले तट और वनस्पतियां एवं जानवरों के अलावा ग़ुफ़ाएं भी मौजूद हैं। ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरें भी देखने योग्य हैं।

क़िश्म से होरमुज़ द्वीप तक के समुद्री मार्ग में पीले, सफ़ेद और लाल रंग के पहाड़ पड़ते हैं। लाल पहाड़ को स्थानीय लोग गिलक कहते हैं। इस पहाड़ की उंचाई क़रीब 200 मीटर है और यह होरमुज़ द्वीप के दक्षिण में स्थित है। होरमुज़ द्वीप की सतह तलछटीय एवं ज्वालामुखीय है। टीलों के रूप में नमक की लेयर्स ने द्वीप के बड़े भाग को ढांप रखा है, इसमें अधिकांश नमक, खाने में प्रयोग होने वाला है। उसका सबसे ऊंचा टीला समुद्र की सतह से 186 मीटर ऊंचा है और सबसे अधिक व्यास आठ किलोमीटर है। होरमुज़ द्वीप विविध प्रकार की मिट्टियों के कारण भूवैज्ञानिकों के निकट भूविज्ञान की स्वर्ग के रूप में प्रसिद्ध है।

होरमुज़ वास्तव में होरमूज़ है, यह फ़ार्स खाड़ी की मीनाब नदी के डेल्टा में एक विश्वसनीय बंदरगाही नाम है। वर्तमान मीनाब शहर इस बंदरगाह के खंडहरों पर बनाया गया है। प्राचीन होरमुज़ मुग़ल काल के आरम्भ में व्यापार के लिए मशहूर था, लेकिन 1320 में मुग़लों के हमले के बाद, यहां के लोग पहले क़िश्म और उसके बाद होरमुज़ द्वीप पलायन कर गए और उन्होंने वहां एक शहर आबाद किया। उन्होंने अपने पुराने शहर की याद में इसका नाम भी होरमुज़ रखा। समय बीतने के साथ साथ पूरे द्वीप का नाम इस शहर के नाम पर पड़ गया। धीरे धीरे इस शहर और द्वीप की भव्यता इतनी बढ़ गई कि वह पुर्तगालियों द्वारा क़ब्ज़ा किये जाने तक फ़ार्स खाड़ी का केन्द्र बना रहा। 1622 में शाह अब्बास ने होरमुज़ और ईरान के दक्षिणी तटों को पुर्तगालियों के क़ब्ज़े से आज़ाद करवा लिया और होरमुज़ एवं गम्बरून शहर को ध्वस्त कर दिया और वर्तमान बंदरे अब्बास शहर को गम्बरून शहर के खंडहरों पर तामीर करवाया।

होरमुज़ स्ट्रेट विश्व के महत्वपूर्ण जल मार्गों में से एक है। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक़, सऊदी अरब का 88 प्रतिशत, ईरान का 90 प्रतिशत, इराक़ का 98 प्रतिशद, संयुक्त अरब इमारात का 99 प्रतिशत और कुवैत एवं क़तर का 100 प्रतिशत तेल होरमुज़ स्ट्रेट के ज़रिए निर्यात होता है। इस आंकड़े के आधार पर फ़ार्स खाड़ी के तेल ले जाने वाले 90 प्रतिशत टैंकर इसी मार्ग से होकर गुज़रते हैं।

होरमुज़ एक रहस्यमयी द्वीप है और उसके जैसा द्वीप दुनिया में कम ही मिलेगा, हां जापानी लोग इस प्रकार के दृश्य हुकायदो द्वीप में देख सकते हैं। होरमुज़ की मिट्टी देखने योग्य है, उसकी मिट्टी के ज़र्रे, क्षितिज का संयोजन, रंगीन तट और फ़ार्स खाड़ी के रंगीन दृश्य इस द्वीप की प्राकृतिक सुन्दरता में चार चांद लगाते हैं। अध्ययन के मुताबिक़, होरमुज़ में 85 रंगोलियों को देखा जा सकता है, जैसे कि लाल, पीला, नीला, हरा, ब्राउन, सफ़ेद, ग्रे, सिलवर, नारंगी, गुलाबी और सुनहरी इत्यादि को लौह ऑक्साइड, नमक और ज्वालामुखीय यौगिकों में पाए जाते हैं।

 

हालांकि स्थानीय लोग लाल मिट्टी को एक प्रकार की मछली के पकाने में प्रयोग करते हैं, लेकिन होरमुज़ द्वीप की लाल मिट्टी का आर्थिक महत्व बहुत है, क्योंकि उसे रंग बनाने, शीशे और सिरेमिक का उत्पादन करने, कंक्रीट और सीमेंट तथा मेकअप की वस्तुओं के उत्पादन में इस्तेमाल किया जाता है। होरमुज़ द्वीप के निवासियों का यह एकमात्र प्राकृतिक मूल्यवान पदार्थ है।

इस द्वीप के समस्त रंग, एक रासायनिक मिश्रण का नतीजा हैं। ऐसा मिश्रण जो पत्थर बनने के लिए विभिन्न खनिजों से मिश्रित होता है। हालांकि होरमुज़ द्वीप में धातु के पत्थर भी हैं। मैग्नेटाइट, हिमेटाइट और ऑलिगिस्ट तीन धातु के पत्थर हैं जो लौह ऑक्साइड में पाये जाते हैं और इस द्वीप पर भी मौजूद हैं। होरमुज़ की लाल मिट्टी का हमेशा से ही आर्थिक महत्व रहा है। पिछले दो दशकों के दौरान हज़ारों टन यह मूल्यवान मिट्टी सिरेमिक, मेक-अप मटेरियल्स और शीशे के उत्पादन के लिए निर्यात की गई है। प्राप्त आंकडों के मुताबिक़, होरमुज़ द्वीप की 70 प्रतिशत लाल मिट्टी में लौह ऑक्साइड है, इसी कारण यह द्वीप विश्व की बड़ी खानों में से एक है।

होरमुज़ को लाल मिट्टी के रूप में पहचाना जाता है, लेकिन इस सुन्दर मिट्टी के अलावा जो रंग हर ओर दिखाई पड़ता है वह सफ़ेद रंग है। नमक की सफ़ेदी। द्वीप में कहीं भी अगर आप अपना हाथ पानी में डुबोयेंगे तो उस पर नमक की एक परत जम जाएगी, इससे पानी में नमक की मात्रा का पता चलता है। वास्तव में फ़ार्स खाड़ी का यह भाग, नमक के एक टीले पर स्थित है, और इस इलाक़े में नमक व्याप्त मात्रा में पाया जाता है। द्वीप के दक्षिण भाग में क्रिस्टल नमक काफ़ी मात्रा में पाया जाता है।

 

इस द्वीप के देखने योग्य दृश्यों में कटाव की वजह से बनने वाले ऊंचे नीचे टीले हैं, जो विभिन्न साइज़ों में देखने योग्य दृश्य पैदा करते हैं। इलाहे नमक ऐसे ही दृश्यों में से एक है, यह रंगारंग नमक की एक पहाड़ी है, जिसका बहुत ही सुन्दर ढंग से कटाव हुआ है। नमक की इस पहाड़ी के नीचे से नारंगी रंग का पानी बहता है और ख़ामोशी में इस पानी की आवाज़ बहुत मनमोहक लगती है। कई वर्षों से पर्यटक इलाहे नमक को देखने जाते हैं। इस द्वीप पर पहुंचकर रंग बिरंगे टीलों से होते हुए नमक की इस पहाड़ी तक पहुंचते हैं।    

 

     

 

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मई १९, २०१८ १६:२७ Asia/Kolkata
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