हमने हुरमुज़ द्वीप के बारे में बात की थी जो वास्तव में फार्स की खाड़ी का एक अत्यन्त सुन्दर द्वीप है।

हुरमुज़ रंग बिरंगे और आश्चर्य चकित करने वाले द्वीप और भूशास्त्र से रूचि रखने वालों के स्वर्ग के नाम से प्रसिद्ध है।

 

हुरमुज़ की तटवर्ती सड़क वहीं से शुरु होती है जहां आप स्टीमर से उतरते हैं और लगभग तीन घंटे पैदल चलने के बाद आप ठीक उसी जगह पर पहुंच सकते हैं जहां से आप ने चलना शुरु किया था। यानी यह सड़क द्वीप के चारों ओर फैली हुई है। हुरमुज़ द्वीप की यात्रा करने वाले पर्यटक इस तरह से भी अपनी यात्रा का आनंद उठाते हैं और बहुत से लोग पैदल तो कुछ दूसरे साइकिल से इस सड़क पर चल कर द्वीप का चक्कर लगाते हैं।

 

हुरमुज़ द्वीप तरह- तरह के तटों के कारण भी ध्यान योग्य है। कुछ तटों पर रंग बिरंगी व नर्म रेत फैली हुई है जो इन तटों पर तैराकी का आनंद लेने वालों के लिए बेहद आरामदेह है। इसके साथ ही हुरमुज़ द्वीप में पथरीले तट भी हैं जबकि दक्षिण में कम गहरायी वाले तट हैं जहां ज्वार भाटा के कारण गीली मिट्टी फैली रहती है और चूंकि यह तट समुद्र की तेज़ लहरों से सुरक्षित रहता है इस लिए अधिकांश क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के लवण और पोषक पदार्थ पाए जाते हैं जिसकी वजह से इन तटों पर काफी हरियाली होने के साथ ही साथ जीव जन्तु भी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं जो न केवल यह कि समुद्री आहार की कड़ी हैं बल्कि उन की वजह से इन तटों पर तरह तरह के पंछी भी जमा रहते हैं। हुरमुज़ द्वीप के इस प्रकार के तटों का क्षेत्रफल 200 हेक्टर है।

 

हुरमुज़ द्वीप के अधिकांश रेतीले तट बीस से तीस मीटर की ही चौड़ाई रखते हैं और यह द्वीप के पूर्वी भाग से दक्षिणी भाग की ओर फैले नज़र आते है। द्वीप का यह हिस्सा वास्तव में कछुओं के लिए आकर्षण का केन्द्र है। वह इन तटों पर अंडे देते हैं और यह हिस्सा अत्यन्त संवेदनशील समझा जाता है। द्वीप के रेतीले तटों पर पूरे साल भांति- भांति के समुद्री पंछी नज़र आते हैं। यह तट पर्यटकों के लिए विशेष रूप से आकर्षण का केन्द्र हैं क्योंकि यह तट तैराकी का आनंद लेने के लिए अत्याधिक उचित हैं।

 

तटों की विविधता के अलावा हुरमुज़ द्वीप इन तटों पर पाए जाने वाले पंछियों और समुद्री जीव जन्तुओं की विविधता के लिए भी प्रसिद्ध है। तरह तरह के पंछी, डाल्फिन, और कछुए, हुरमुज़ द्वीप के तटों के आकर्षणों का एक हिस्सा हैं जो इस प्रकार की प्रकृति में रूचि रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण है। फार्स की खाड़ी में पाए जाने वाले पांच प्रकार के कछुओं में से दो प्रकार के कछुए हुरमुज़ द्वीप के तटों पर पाए जाते हैं। इन में हरे रंग का समुद्री कछुआ और बाज़ की भांति चोंच रखने वाला विशेष प्रकार का कछुआ शामिल है। यह दोनों प्रकार के कछुए, नर्म रेतीले तटों  की ढलान पर अंडे देते हैं और मूंगे की चट्टानों वाले तटों पर उगने वाली घास-फूस  और ग्रे मैंग्रोव के जंगलों से अपना पेट भरते हैं।  हुरमुज़ द्वीप  के रेतीले तट 2500 मीटर लंबे हैं जहां सर्दियों के आखिर से लेकर बसन्त ऋतु के आरंभ तक यह कछुए अंडे देने जाते हैं और लगभग पचास दिनों के बाद इन अंडों में से बच्चे निकलना शुरु हो जाते हैं और जब यह बच्चे सामूहिक रूप से समुद्र की ओर बढ़ते हैं तो बड़ा दर्शनीय दृश्य पैदा होता है जो बहुत से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। हुरमुज़ द्वीप दक्षिणी ईरान में हिरनों का स्थल भी है और बहुत से पर्यटक इन हिरनों को देखने के लिए " दश्ते आहू" या " हिरनों के  जंगल" जानना नहीं भूलते। यह भी इस द्वीप के आकर्षणों में शामिल है।

 

हुरमुज़ द्वीप में तट की ओर कुछ सौ मीटर पैदल चलने पर पर्यटक का ध्यान चांदी के रंग की रेत से ढंके रास्ते की ओर जाता है जहां तरह तरह के पत्थर भी नज़र आते हें जिन्हें देख कर पर्यटक को मन में अलग अलग तरह से पशुओं की आकृति उभरती है। कोई पत्थर भेड़ के सिर की तरह दिखायी देता है तो कोई दूसरा पत्थर मुर्गी और मुर्गे की शक्ल का नज़र आता है और कहीं-कहीं यह पत्थर अजगर का विभिन्न रूप प्रकट करते हैं। दरअस्ल यह द्वीप कई हज़ार वर्षों के दौरान धीरे धीरे करके पानी के भीतर से उभरा है और इस प्रक्रिया में पत्थर, घिस कर विभिन्न प्रकार के रूप में आ गये। इस संदर्भ में किये जाने वाले अध्ययनों से पता चलता है कि हुरमुज़ द्वीप की आयु साठ करोड़ साल की है और यह द्वीप लगभग पचास हज़ार साल पहले पानी से उभरा है।

 

बड़े और खूबसूरत पत्थरों के बीच से गुज़रने वाले रास्ते के अंतिम छोर पर ज़रा सी मेहनत करने पर एक मुहाने पर पहुंचा जा सकता है जहां से अत्यन्त शांत वातावरण में तट के अत्यन्त सुन्दर रूप को देखा जा सकता है। द्वीप के इस हिस्से में भीड़ भाड़ नहीं होती है और इसी लिए इस इलाक़े का अछुता इलाक़ा भी कहा जा सकता है।

 

हुरमुज़ द्वीप का एक अन्य आकर्षण  " डाक्टर नादे अलियान  म्यूज़ियम" भी है जो इस क्षेत्र का पर्यटन व सांस्कृतिक केन्द्र समझा जाता है और हर साल पूरे देश से हज़ारों कलाकार इस जगह जमा होते हैं ताकि  वह एक दूसरे की कला के विभिन्न पहलुओं से अवगत हो सकें।

 

हुरमुज़ द्वीप का " नादे अलियान" म्यूज़ियम और कला केन्द्र वास्तव में इन कलाकरों की कलाकृतियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेश किये जाने का उचित स्थल है । यह  संग्रहालय नगर के पुराने हिस्से में और पुर्तगालियों के क़िले के निकट स्थित है। डाक्टर नादे अलियान को वास्तव में टीलों और पत्थरों पर कलाकृतियां उकेरने में ख्याति प्राप्त थी। वर्षों पहले उन्हें महसूस हुआ कि इस द्वीप के लोगों की जीवन शैली का स्तर , इस द्वीप की असीम सुन्दरता से मेल नहीं खाता इस लिए उन्होंने फैसला किया कि इस द्वीप में एक क्रांति ले आएं और इसी लिए उन्होंने द्वीप के पुराने मोहल्ले में एक पुराना घर  खरीदा और उसे कलाकेन्द्र तथा कलाकारों के परिचय का केन्द्र बना दिया। यह संग्रहालय वास्तव में वही जगह है जहां डाक्टर नादे अलियान दवीप की महिलाओं को यह सिखाते थे कि रंग बिरंगी मिट्टी से कैसे पेंटिंग्स बनायी जाती है। यह महिलाएं ट्रेनिंग के बाद, पेंटिंग्स बनाती और पर्यटकों के हाथों उन्हें बेच देतीं हैं या फिर तेहरान लाकर बड़ी बड़ी प्रदर्शनियों में अपनी कलाकृतियां पेश करती हैं। इस केन्द्र का उद्धाटन सन 2009 में हुआ और सन 2013 से इसे ट्रेनिंग सेंटर और कला केन्द्र के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

 

हुरमुज़ द्वीप के बारे में आप लोगों को यह भी बता दें कि इस दवीप में प्रकृति की विविधता के दृष्टिगत पर्यटन के क्षेत्र में भी विभिन्न प्रकार की गतिविधियां होती हैं और उनके लिए वातावरण तैयार किया गया है। इसी तरह इस द्वीप का इतिहास और संस्कृति भी इस द्वीप का आकर्षण है। पुर्तागालियों का क़िला, नाकूस टावर, सूरत महल, बीबीगुल महल, प्राचीन दारुल इल्म का खंडहर, केसरी घर, तीर मारने का टावर, प्राचीन नगर का खंडहर और हज़रत ख़िज़्र का दर्शन स्थल हुरमुज़ द्वीप के वह इतिहासिक स्थल हैं जो इतिहास और संस्कृति में रूचि रखने वालों को अपनी ओर खींचते हैं और यह वही चीज़ें हैं जो किसी भी पर्यटक के लिए हुरमुज़ द्वीप की यात्रा को यादगार बना सकती हैं। (Q.A.)

 

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मई २१, २०१८ ११:३४ Asia/Kolkata
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