ईरान की राजधानी तेहरान में प्रतिवर्ष पवित्र रमज़ान के दौरान क़ुरआन की अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी लगती है। 

इसबार क़ुरआन की 26वीं अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी लगाई गई है।  यह अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी तेहरान के "मुस्ल्ला इमाम ख़ुमैनी" या इमाम ख़ुमैनी ईदगाह में लगाई गई है।  19 मई से आरंभ होने वाली इस प्रदर्शनी में बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।  प्रतिवर्ष क़ुरआन की इस प्रदर्शनी में न केवल तेहरान से बल्कि ईरान के दूसरे नगरों से भी लोग भाग लेने आते हैं।  यह प्रदर्शनी, मुसल्ला इमाम ख़ुमैनी में पचास हज़ार वर्गमीटर क्षेत्र में लगाई गई है।

जब कोई भी व्यक्ति तेहरान में आयोजित क़ुरआन की अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी को देखने पहुंचता है तो सबसे पहले उसकी दृष्टि ऐसे कलाकारों पर पड़ती है जो वहां पर बैठे हुए अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं।  यह लोग विभिन्न शैलियों में पवित्र क़ुरआन की आयतें लिखते हुए दिखाई देंगे।  इस प्रदर्शनी में पवित्र क़ुरआन के 20 अन्तर्राष्ट्रीय संस्थान, विश्वविद्यालयों के 16 और धार्मिक शिक्षा केंद्रों के 15 संस्थानों के अतिरिक्त 32 जन संगठन भी भाग ले रहे हैं।   7 देशों के प्रतिनिधि तथा पवित्र क़ुरआन के क्षेत्र में काम करने वाले कई देशों के दसियों लोग, तेहरान की अन्तर्राष्ट्रीय क़ुरआन प्रदर्शनी में भाग ले रहे हैं।  तेहरान में आयोजित “फ़ानूसे हिदायत” नाम से अंतर्राष्ट्रीय क़ुरआन प्रदर्शनी में इराक़, मलेशिया, तुर्की, रूस और आज़रबाइजान सहित दुनिया के विभिन्न देशों से आई क़ुरआन की दुर्लभ और प्राचीन प्रतियां मौजूद हैं, साथ ही कई देशों के प्रसिद्ध विद्वान भी इस प्रदर्शनी में शामिल हुए हैं। 

अन्तिम आसमानी किताब क़ुरआन, ऐसी ईश्वरीय पुस्तक है जो मानवता के मार्गदर्शन के लिए है।  इससे संसार के सब लोग लाभ उठा सकते हैं।  इस बारे में सूरे असरा की आयत संख्या 9 में ईश्वर कहता है कि निश्चित रूप से यह क़ुरआन सीधे रास्ते की ओर मार्गदर्शन करता है।  वर्तमान समय में क़ुरआन ही ऐसी किताब है जिसमें शुरू से लेकर अंत तक कोई मतभेद नहीं है।  आज दुनिया भर में पवित्र क़ुरआन की जितनी प्रतियां पाई जाती हैं उनमें से किसी एक में भी एक बिंदु का अंतर नहीं है।  उदाहरण स्वरूप विश्व के किसी भी दूरस्थ गाँव की किसी मस्जिद से क़ुरआन लेकर संसार के किसी एक अन्य दूरस्थ गाँव मे मौजूद क़ुरआन से अगर मिलान किया जाए तो उनमे एक बिंदु का भी अंतर नहीं मिलेगा।  नवीनतम छपे हुए कुरान तथा संग्रहालयों मे रखे हुए प्राचीन से प्राचीन कुरआन में एक शब्द का अंतर भी नहीं मिलेगा। यह विशेषता संसार के किसी अन्य धर्मग्रंथ में नहीं है। दुनिया भर में लाखों लोगों को पूरा कुरआन हिफ़्ज़ या कंठस्थ है।  ऐतिहासिक रूप से यह सिद्ध हो चुका है कि इस धरती पर उपस्थित हर क़ुरआन की प्रति वही मूल प्रति का प्रतिरूप है जो हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) ‎पर नाज़िल हुआ था।

क़ुरआन की 26वीं अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का शुभारंभ आयतुल्लाह सुब्हानी के संदेश से हुआ।  उन्होंने अपने संदेश में लिखा है कि पवित्र क़ुरआन, ईश्वर का ऐसा चमत्कार है जो पूरी मानवता के लिए है।  आयतुल्लाह सुब्हानी कहते हैं कि पवित्र क़ुरआन प्रकृति की भांति है।  जिस प्रकार से प्रकृति में अनंत रहस्य पाए जाते हैं और वैज्ञानिक इस बारे में आए दिन शोध करते रहते हैं और उसपर शोध का सिलसिला अब भी जारी है ठीक उसी प्रकार से क़ुरआन भी है।  पवित्र क़ुरआन, ईश्वर की ओर से भेजी जाने वाली किताब है जिसमें अनंत रहस्य छिपे हुए हैं।  यह एसी अद्वितीय किताब है जिसके जैसी किताब पूरे संसार में हो ही नहीं सकती।  क़ुरआन में एक स्थान पर ईश्वर कहता है कि अगर संसार के सारे लोग और जिन्नात एक साथ मिलकर क़ुरआन जैसी किताब लाने का प्रयास करें तो भी वे कभी ऐसा नहीं कर सकते।

ईरान के संस्कृति और मार्गदर्शन मंत्री सैयद अब्बास सालेही ने इस प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में कहा हैं कि यह पवित्र किताब, इस्लामी सभ्यता का आरंभ बिंदु और आस्था का आधार है।  वे कहते हैं कि वे लोग जिन्होंने इस्लामी क्रांति को प्रभावित किया वे वही थे जो क़ुरआन के अनुसरणकर्ता थे।

इस्लामी इतिहास पर शोध करने से संबन्धित आंरभिक काल के स्रोत अधिकतर संग्रहालयों और पुस्तकालयों में अब भी सुरक्षित हैं।  इन स्रोतों पर शोध करने से क़ुरआन के इतिहास, उसकी लीपि और उसके पढ़ने की शैली को उचित ढंग से समझा जा सकता है।  स्वाभाविक सी बात है कि आरंभिक काल के स्रोतों में जो भी इस्लाम के उदयकाल से जितना निकट होगा वह उतना ही विश्वसनीय होगा।  क़ुरआन की अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी में हज़रत अली अलैहिस्सलाम से संबन्धित क़ुरआन की एक प्रति का उद्धाटन किया गया।  इस बारे में पवित्र क़ुरआन की पुरानी प्रतियों के विख्यात जानकार "तैयार क़ूलाच" कहते हैं कि इस समय हम क़ुरआन की एक ऐसी प्रति के समक्ष हैं जो सहाबा के समय से संबन्धित है।  इसको पढ़ना हमारे लिए विशेष महत्व रखता है।  निश्चित रूप से क़ुरआन की यह प्रति हस्तलिखित है।  शोध से यह पता चला है कि इसे दसवीं शताब्दी हिजरी के मध्य में कूफ़े, मदीने और शाम में लिखा गया है।

ईरान के संस्कृति और मार्गदर्शन मंत्री सैयद अब्बास सालेही इस प्रदर्शनी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं कि तेहरान में आयोजित होने वाली यह अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी, क़ुरआन के बारे में इस्लामी जगत की बहुत महत्वपूर्ण प्रदर्शनी है जो पूरे संसार में क़ुरआन के क्षेत्र में की जाने वाली गतिविधियों को प्रदर्शित करती है।  पिछली प्रदर्शनियों में जो कुछ महत्वपूर्ण होता है उसे बाद वाली प्रदर्शनी में अवश्य प्रदर्शित किया जाता है।  जनता की ओर से इसका व्यापक स्तर पर स्वागत इस प्रदर्शनी की उपयोगिता को सिद्ध करता है।  उन्होंने कहा कि तेहरान में प्रतिवर्ष रमज़ान के महीने में लगने वाली क़ुरआन की प्रदर्शनी से लोग क़ुरआन के बारे में बहुत कुछ सीखते हैं।

तेहरान में क़ुरआन की 26वीं अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी में भाग लेने वाले एक शिक्षक ने कहा कि क़ुरआन की संस्कृति को फैलाने और युवाओं का मार्गदर्शन करने में इस प्रदर्शनी का बहुत महत्व है।  उन्होंने कहा कि यह एक वास्तविकता है कि क़ुरआन का प्रभाव उसी पर हो सकता है जो स्वयं को बुराइयों से दूर करे और ईश्वरीय प्रकाश को प्राप्त करने के लिए तैयार हो।  मनुष्य का अन्तरमन जितना अधिक स्वच्छ होगा और उसके भीतर क़ुरआन की बातों को जानने की जिज्ञासा जितनी अधिक होगी, वह क़ुरआन से उतना ही अधिक संपर्क प्राप्त कर सकता है।  यह स्पष्ट सी बात है कि यदि किसी गंदे बरतन में स्वच्छ पानी भी दिया जाए तो उस बर्तन में पहुंचने के बाद वह स्वच्छ पानी भी ख़राब हो जाता है।  इसी प्रकार से अच्छी बातों को समझने के लिए मनुष्य को अपने अन्तरमन को स्वच्छ करना चाहिए। 

 

 

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मई २८, २०१८ १४:४६ Asia/Kolkata
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